शिव महापुराण - २ — पृष्ठ 1–10
शिव महापुराण - २ · Gita Press, Gorakhpur · पृष्ठ 1–10
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॥ ॐ श्रीसाम्बशिवाय नमः ॥ 2224 श्रीशिवमहापुराण [ द्वितीय खण्ड- उत्तरार्ध ] ( सचित्र, मूल संस्कृत श्लोक - हिन्दी- व्याख्यासहित ) गीताखपुर गीताप्रेस, गोरखपुर | GITA PRESS, GORAKHPUR [ SINCE 1923 ]
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गीताप्रेस, गोरखपुरसे प्रकाशित पुराण, उपनिषद् आदि 1930 ) श्रीमद्भागवत - सुधासागर — भाषानुवाद, सचित्र 1945 >> 23 " 29 ( विशिष्ट संस्करण ) 25 श्रीशुकसुधासागर - बृहदाकार, बड़े टाइपमें 1951 | श्रीमद्भागवतमहापुराण-1952 99 सटीक पत्राकारकी तरह, बेड़िआ दो खण्डों में सेट 26 32 23 - ( हिन्दी - अनुवादसहित ) 27 27 दो खण्डोंमें सेट ( गुजराती भी ) 564,565 श्रीमद्भागवत महापुराण - अंग्रेजी सेट 29 22 35 मूल मोटा टाइप ( तेलुगु भी ) 124 श्रीमद्भागवत - महापुराण - मूल मझला 1092 भागवतस्तुति - संग्रह 2009 भागवत - नवनीत 30 श्रीप्रेम - सुधासागर 31 श्रीमद्भागवत एकादश स्कन्ध 728 महाभारत– हिन्दी टीका - सहित सचित्र [ छ: खण्डोंमें ] सेट 38 महाभारत - खिलभाग हरिवंशपुराण - सटीक 1589 39 39 >> 77 —केवल भाषा 39 ) संक्षिप्त महाभारत - केवल भाषा, 511 " 27 सचित्र ( दो खण्डोंमें ) सेट 44 संक्षिप्त पद्मपुराण 1468 सं ० शिवपुराण ( विशिष्ट संस्करण ) 789 सं ० शिवपुराण – मोटा टाइप [ गुजराती भी ] 1133 सं ० देवीभागवत - मोटा टाइप [ गुजराती भी ] 48 श्रीविष्णुपुराण- ( हिन्दी - अनुवादसहित ) 1364 श्रीविष्णुपुराण ( केवल हिन्दी ) 1183 सं ० नारदपुराण 279 सं ० स्कन्दपुराण 539 सं ० मार्कण्डेयपुराण 1897 ) श्रीमद्देवीभागवत महापुराण- ( हिन्दी-1898, अनुवादसहित ) दो खण्डोंमें सेट 17931 " ( केवल हिन्दी ) 1842J " " दो खण्डोंमें सेट
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॥ ॐ श्रीसाम्बशिवाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीगणेशायनमः ॥ 2224 महर्षि वेदव्यासप्रणीत श्रीशिवमहापुराण [ द्वितीय खण्ड- उत्तरार्ध ] ( शतरुद्रसंहिता, कोटिरुद्रसंहिता, उमासंहिता, कैलाससंहिता, वायवीयसंहिता ) [ सचित्र, मूल संस्कृत श्लोक - हिन्दी व्याख्यासहित ] त्वमेव माता च पिता त्वमेव त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव । त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव त्वमेव सर्वं मम देवदेव ॥ गीताप्रेस, गोरखपुर 2224 Shivmahapuran_IInd Part_Section_1_1_Front
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ASSS श्रीर [ - ] क ) ] [ सं ० २०७६ प्रथम संस्करण ७,००० मूल्य - I ३०० ( तीन सौ रुपये ) प्रकाशक एवं मुद्रक— गीताप्रेस, गोरखपुर – २७३००५ ( गोबिन्दभवन - कार्यालय, कोलकाता का संस्थान ) फोन: ( ०५५१ ) २३३४७२१, २३३१२५०, २३३१२५१ web: gitapress.org e - mail: booksales@gitapress.org गीताप्रेस प्रकाशन gitapressbookshop.in से online खरीदें । 2224 Shivmahapuran_IInd Part_Section_1_1_Back
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॥ श्रीहरिः ॥ श्रीशिवमहापुराण विषय - सूची अध्याय विषय पृष्ठ संख्या अध्याय विषय पृष्ठ 5- - संख्या स शतरुद्रसंहिता १. सूतजीसे शौनकादि मुनियोंका शिवावतार-विषयक प्रश्न ११ २. भगवान् शिवकी अष्टमूर्तियोंका वर्णन.... १५ ३. भगवान् शिवका अर्धनारीश्वर - अवतार एवं सतीका प्रादुर्भाव १७ ४. वाराहकल्पके प्रथमसे नवम द्वापरतक हुए व्यासों एवं शिवावतारोंका वर्णन. ५. वाराहकल्पके दसवेंसे अट्ठाईसवें द्वापरतक होनेवाले व्यासों एवं शिवावतारोंका वर्णन २३ ६. नन्दीश्वरावतारवर्णन. २८ । ७. नन्दिकेश्वरका गणेश्वराधिपति पदपर अभिषेक एवं विवाह ३३ ८. भैरवावतारवर्णन ३८ ९. भैरवावतारलीलावर्णन ४३ १०. नृसिंहचरित्रवर्णन ४ ९ ११. भगवान् नृसिंह और वीरभद्रका संवाद.... ५३ । १२. भगवान् शिवका शरभावतार - धारण ५८ १३. भगवान् शंकरके गृहपति - अवतारकी कथा ६२ । १४. विश्वानरके पुत्ररूपमें गृहपति नामसे शिवका प्रादुर्भाव ६८ | १५. भगवान् शिवके गृहपति नामक अग्नीश्वर-लिंगका माहात्म्य.. ७२ १६. यक्षेश्वरावतारका वर्णन........ ७८ १७. भगवान् शिवके महाकाल आदि प्रमुख दस अवतारोंका वर्णन. ८२. १८. शिवजीके एकादश रुद्रावतारोंका वर्णन... ८४ १ ९. शिवजीके दुर्वासावतारकी कथा ८७ २०. शिवजीका हनुमान् के रूपमें अवतार तथा उनके चरितका वर्णन ९ ३ २१. शिवजीके महेशावतार - वर्णनक्रममे अम्बिका शापसे भैरवका वेतालरूपमें पृथ्वीपर अवतरित होना. ९ ७ २२. शिवके वृषेश्वरावतार - वर्णनके प्रसंगमें समुद्र-मन्थनकी कथा ९ ८ २३. विष्णुद्वारा भगवान् शिवके वृषभेश्वरावतारका स्तवन. १०३ २४. भगवान् शिवके पिप्पलादावतारका वर्णन. १०६ २५. राजा अनरण्यकी पुत्री पद्माके साथ पिप्पलादका विवाह एवं उनके वैवाहिक जीवनका वर्णन ११२ २६. शिवके वैश्यनाथ नामक अवतारका वर्णन ११४ २७. भगवान् शिवके द्विजेश्वरावतारका वर्णन.. ११ ९ २८. नल एवं दमयन्तीके पूर्वजन्मकी कथा तथा शिवावतार यतीश्वरका हंसरूप धारण करना १२५ २ ९. भगवान् शिवके कृष्णदर्शन नामक अवतारकी कथा १२ ९ ३०. भगवान् शिवके अवधूतेश्वरावतारका वर्णन १३४ ३१. शिवजीके भिक्षुवर्यावतारका वर्णन. १३८ ३२. उपमन्युपर अनुग्रह करनेके लिये शिवके सुरेश्वरावतारका वर्णन. १४४ ३३. पार्वतीके मनोभावकी परीक्षा लेनेवाले ब्रह्मचारीस्वरूप शिवावतारका वर्णन..... १५१ ३४. भगवान् शिवके सुनर्तक नटावतारका वर्णन १५६ ३५. परमात्मा शिवके द्विजावतारका वर्णन:. १६० 2224 Shivmahapuran_IInd Part_Section_1_2_Front
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( ४ ) अध्याय विषय पृष्ठ- ठ - संख्या ३६. अश्वत्थामाके रूपमें शिवके अवतारका वर्णन....... १६३ ३७. व्यासजीका पाण्डवोंको सान्त्वना देकर अर्जुनको इन्द्रकील पर्वतपर तपस्या करने भेजना... १६७ ३८. इन्द्रका अर्जुनको वरदान देकर शिवपूजनका उपदेश देना. १७२ अध्याय विषय पृष्ठ - संख्या ३ ९. मूक नामक दैत्यके वधका वर्णन १७८ | ४०. भीलस्वरूप गणेश्वर एवं तपस्वी अर्जुनका संवाद... १८२ ४१. भगवान् शिवके किरातेश्वरावतारका वर्णन १८६ ४२. भगवान् शिवके द्वादश ज्योतिर्लिंगरूप अवतारोंका वर्णन. १ ९ ३ कोटिरुद्रसंहिता १. द्वादश ज्योतिर्लिंगों एवं उनके उपलिंगोंके माहात्म्यका वर्णन. १ ९ ७ । २. काशीस्थित तथा पूर्व दिशामें प्रकटित विशेष एवं सामान्य लिंगोंका वर्णन २०१ ३. अत्रीश्वरलिंगके प्राकट्यके प्रसंगमें अनसूया तथा अत्रिकी तपस्याका वर्णन २०३ । ४. अनसूयाके पातिव्रतके प्रभावसे गंगाका प्राकट्य तथा अत्रीश्वरमाहात्म्यका वर्णन.. २०८ ५. रेवानदी के तटपर स्थित विविध शिवलिंग-माहात्म्य - वर्णनके क्रममें द्विजदम्पतीका वृत्तान्त २१३ ६. नर्मदा एवं नन्दिकेश्वरके माहात्म्य - कथनके प्रसंगमें ब्राह्मणीकी स्वर्गप्राप्तिका वर्णन.... २१६ ७. नन्दिकेश्वरलिंगका माहात्म्य - वर्णन.... २२२ ८. पश्चिम दिशाके शिवलिंगोंके वर्णन - क्रममें महाबलेश्वरलिंगका माहात्म्य - कथन.. २२५ ९. संयोगवश हुए शिवपूजनसे चाण्डालीकी सद्गतिका वर्णन.. २२७ १०. महाबलेश्वर शिवलिंगके माहात्म्य - वर्णन-प्रसंगमें राजा मित्रसहकी कथा. २३० ११. उत्तरदिशामें विद्यमान शिवलिंगोंके वर्णन-क्रममें चन्द्रभाल एवं पशुपतिनाथलिंगका माहात्म्य - वर्णन. २३५ । १२. हाटकेश्वरलिंगके प्रादुर्भाव एवं माहात्म्यका वर्णन... २३६ | १३. अन्धकेश्वरलिंगकी महिमा एवं बटुककी उत्पत्तिका वर्णन. २४१ १४. सोमनाथ ज्योतिर्लिंगकी उत्पत्तिका वृत्तान्त २४७ १५. मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंगकी उत्पत्ति-कथा २५२ १६. महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंगके प्राकट्यका वर्णन २५४ १७. महाकाल ज्योतिर्लिंगके माहात्म्य - वर्णनके क्रममें राजा चन्द्रसेन तथा श्रीकर गोपका वृत्तान्त. २५८ १८. ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंगके प्रादुर्भाव एवं माहात्म्यका वर्णन. २६४ १ ९. केदारेश्वर ज्योतिर्लिंगके प्राकट्य एवं माहात्म्यका वर्णन. २६६ २०. भीमशंकर ज्योतिर्लिंगके माहात्म्य - वर्णन - प्रसंगमें भीमासुरके उपद्रवका वर्णन. २६ ९ २१. भीमशंकर ज्योतिर्लिंगकी उत्पत्ति तथा उसके माहात्म्यका वर्णन... २७४ २२. परब्रह्म परमात्माका शिव - शक्तिरूपमें प्राकट्य, पंचक्रोशात्मिका काशीका अवतरण, शिवद्वारा अविमुक्त लिंगकी स्थापना, काशीकी महिमा तथा काशीमें रुद्रके आगमनका वर्णन..... २७ ९ २३. काशीविश्वेश्वर ज्योतिर्लिंगके माहात्म्य प्रसंगमें काशीमें मुक्तिक्रमका वर्णन....... २८२ २४. त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंगके माहात्म्य - प्रसंगमें गौतमऋषिकी परोपकारी प्रवृत्तिका वर्णन. २८७ २५. मुनियोंका महर्षि गौतमके प्रति कपटपूर्ण व्यवहार २८ ९ 2224 Shivmahapuran_IInd Part_Section_1_2_Back
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( ५ ) अध्याय विषय पृष्ठ संख्या । २६. त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग तथा गौतमी गंगाके प्रादुर्भावका आख्यान. २ ९ ४ २७. गौतमी गंगा एवं त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंगका माहात्म्यवर्णन. २ ९९ । २८. वैद्यनाथेश्वर ज्योतिर्लिंगके प्रादुर्भाव एवं माहात्म्यका वर्णन. ३०३ २ ९. दारुकावनमें राक्षसोंके उपद्रव एवं सुप्रिय वैश्यकी शिवभक्तिका वर्णन. ३० ९ ३०. नागेश्वर ज्योतिर्लिंगकी उत्पत्ति एवं उसके माहात्म्यका वर्णन. ३१३ ३१. रामेश्वर नामक ज्योतिर्लिंगके प्रादुर्भाव एवं माहात्म्यका वर्णन.. ३१७ ३२. घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंगके माहात्म्यमें सुदेहा ब्राह्मणी एवं सुधर्मा ब्राह्मणका चरित - वर्णन ३२० ३३. घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग एवं शिवालयके नामकरणका आख्यान ३२५ ३४. हरीश्वरलिंगका माहात्म्य और भगवान् अध्याय विषय पृष्ठ संख्या विष्णुके सुदर्शनचक्र प्राप्त करनेकी कथा ३२ ९ ३५. विष्णुप्रोक्त शिवसहस्रनामस्तोत्र. ३३२ ३६. शिवसहस्रनामस्तोत्रकी फल- श्रुति. ३६१ ३७. शिवकी पूजा करनेवाले विविध देवताओं, ऋषियों एवं राजाओंका वर्णन ३६५ ३८. भगवान् शिवके विविध व्रतोंमें शिवरात्रिव्रतका वैशिष्ट्य ३६ ९ ३ ९. शिवरात्रिव्रतकी उद्यापन विधिका वर्णन... ३७६ ४०. शिवरात्रिव्रतमाहात्म्यके प्रसंगमें व्याध एवं मृगपरिवारकी कथा तथा व्याधेश्वरलिंगका माहात्म्य. ३७८ ४१. ब्रह्म एवं मोक्षका निरूपण..... ३८६ ४२. भगवान् शिवके सगुण और निर्गुण स्वरूपका वर्णन.. ३८८ ४३. ज्ञानका निरूपण तथा शिवपुराणकी कोटिरुद्रसंहिताके श्रवणादिका माहात्म्य.... ३ ९ १ उमासंहिता १. पुत्रप्राप्तिके लिये कैलासपर गये हुए श्रीकृष्णका उपमन्युसे संवाद.. ३ ९ ७ २. श्रीकृष्णके प्रति उपमन्युका शिवभक्तिका उपदेश... ४०३ ३. श्रीकृष्णकी तपस्या तथा शिव - पार्वतीसे वरदानकी प्राप्ति, अन्य शिवभक्तोंका वर्णन ४०७ ४. शिवकी मायाका प्रभाव ४१३ ५. महापातकोंका वर्णन. ४१६ ६. पापभेदनिरूपण............ ४१ ९ ७. यमलोकका मार्ग एवं यमदूतोंके स्वरूपका वर्णन.. ४२३ ८. नरक - भेद - निरूपण. ४२८ ९. नरककी यातनाओंका वर्णन ४३१ १०. नरकविशेषमें दुःखवर्णन! ४३५ ११. दानके प्रभावसे यमपुरके दुःखका अभाव तथा अन्नदानका विशेष माहात्म्यवर्णन.... ४३ ९ | १२. जलदान, सत्यभाषण और तपकी महिमा ४४४ १३. पुराणमाहात्म्यनिरूपण ४४८ | १४. दानमाहात्म्य तथा दानके भेदका वर्णन.... ४५१ १५. ब्रह्माण्डदानकी महिमा प्रसंगमें पाताललोकका निरूपण ४५४ | १६. विभिन्न पापकर्मोंसे प्राप्त होनेवाले नरकोंका वर्णन और शिव - नाम - स्मरणकी महिमा... ४५७ | १७. ब्रह्माण्डके वर्णन - प्रसंगमें जम्बूद्वीपका निरूपण. ४६१ | १८. भारतवर्ष तथा प्लक्ष आदि छः द्वीपोंका वर्णन................. ४६४ १ ९. सूर्यादि ग्रहोंकी स्थितिका निरूपण करके जन आदि लोकोंका वर्णन. ४७० २०. तपस्यासे शिवलोककी प्राप्ति, सात्त्विक आदि
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( ६ ) अध्याय विषय पृष्ठ - संख्या तपस्याके भेद, मानवजन्मकी प्रशस्तिका कथन ४७३ २१. कर्मानुसार जन्मका वर्णनकर क्षत्रियके लिये संग्रामके फलका निरूपण. ४७७ २२. देहकी उत्पत्तिका वर्णन.. ४८१ २३. शरीरकी अपवित्रता तथा उसके बालादि अवस्थाओंमें प्राप्त होनेवाले दुःखोंका वर्णन ४८४ २४. नारदके प्रति पंचचूडा अप्सराके द्वारा स्त्रीके स्वभावका वर्णन.. ४ ९ ० २५. मृत्युकाल निकट आनेके लक्षण.......... ४ ९ ३ २६. योगियोंद्वारा कालकी गतिको टालनेका वर्णन.. ४ ९९ | २७. अमरत्व प्राप्त करनेकी चार यौगिक साधनाएँ ५०४ २८. छायापुरुषके दर्शनका वर्णन... ५०८ २ ९. ब्रह्माकी आदिसृष्टिका वर्णन.. ५११ ३०. ब्रह्माद्वारा स्वायम्भुव मनु आदिकी सृष्टिका वर्णन.. ५१३ ३१. दैत्य, गन्धर्व, सर्प एवं राक्षसोंकी सृष्टिका वर्णन तथा दक्षद्वारा नारदके शाप - वृत्तान्तका कथन ५१७ ३२. कश्यपकी पत्नियोंकी सन्तानोंके नामका वर्णन.. ५२० ३३. मरुतोंकी उत्पत्ति, भूतसर्गका कथन तथा उनके राजाओंका निर्धारण. ५२४ ३४. चतुर्दश मन्वन्तरोंका वर्णन. ५२६ ३५. विवस्वान् एवं संज्ञाका वृत्तान्तवर्णनपूर्वक अश्विनीकुमारोंकी उत्पत्तिका वर्णन........ ५३२ । ३६. वैवस्वतमनुके नौ पुत्रोंके वंशका वर्णन... ५३५ ३७. इक्ष्वाकु आदि मनुवंशीय राजाओंका वर्णन. ५४० ३८. सत्यव्रत - त्रिशंकु - सगर आदिके जन्मके निरूपणपूर्वक उनके चरित्रका वर्णन....... ५४५ ३ ९. सगरकी दोनों पत्नियोंके वंशविस्तारवर्णन-अध्याय विषय पृष्ठ संख्या पूर्वक वैवस्वतवंशमें उत्पन्न राजाओंका वर्णन.. ५४ ९ ४०. पितृश्राद्धका प्रभाव - वर्णन. ५५२ ४१. पितरोंकी महिमाके वर्णनक्रममें सप्त व्याधोंके आख्यानका प्रारम्भ ५५७ ४२. ‘ सप्त व्याध ' सम्बन्धी श्लोक सुनकर राजा ब्रह्मदत्त और उनके मन्त्रियोंको पूर्वजन्मका स्मरण होना और योगका आश्रय लेकर उनका मुक्त होना.. ५६१ ४३. आचार्यपूजन एवं पुराणश्रवणके अनन्तर कर्तव्य - कथन. ५६४ ४४. व्यासजीकी उत्पत्तिकी कथा, उनके द्वारा तीर्थाटनके प्रसंगमें काशीमें व्यासेश्वरलिंगकी स्थापना तथा मध्यमेश्वरके अनुग्रहसे पुराणनिर्माण ५६५ ४५. भगवती जगदम्बाके चरितवर्णनक्रममें सुरथराज एवं समाधि वैश्यका वृत्तान्त तथा मधु-कैटभके वधका वर्णन. ५७५ ४६. महिषासुरके अत्याचारसे पीड़ित ब्रह्मादि देवोंकी प्रार्थनासे प्रादुर्भूत महालक्ष्मीद्वारा महिषासुरका वध ५८२ ४७. शुम्भ - निशुम्भसे पीड़ित देवताओं द्वारा देवीकी स्तुति तथा देवीद्वारा धूम्रलोचन, चण्ड - मुण्ड आदि असुरोंका वध. ५८६ ४८. सरस्वतीदेवीके द्वारा सेनासहित शुम्भ-निशुम्भका वध ५ ९ १ ४ ९. भगवती उमाके प्रादुर्भावका वर्णन. ५ ९ ७ ५०. दस महाविद्याओं की उत्पत्ति तथा देवीके दुर्गा, शताक्षी, शाकम्भरी और भ्रामरी आदि नामोंके पड़नेका कारण ६०० ५१. भगवतीके मन्दिरनिर्माण, प्रतिमास्थापन तथा पूजनका माहात्म्य और उमासंहिताके श्रवण एवं पाठकी महिमा ६०५