गर्ग संहिता — पृष्ठ 581–582
गर्ग संहिता · Gita Press, Gorakhpur · पृष्ठ 581–582
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गीताप्रेस, गोरखपुरसे प्रकाशित पुराण - साहित्य श्रीमद्भागवतमहापुराण, व्याख्यासहित ( कोड 26, 27 ) ग्रन्थाकार - श्रीमद्भागवत भारतीय वाङ्मयका मुकुटमणि है । भगवान् शुकदेवद्वारा महाराज परीक्षित्को सुनाया गया भक्तिमार्गका तो मानो सोपान ही है । इसके प्रत्येक
श्लोकमें श्रीकृष्ण - प्रेमकी सुगन्धि है । यह सम्पूर्ण ग्रन्थरन मूलके साथ हिन्दी अनुवाद, पूजन विधि, भागवत - माहात्म्य,
आरती, पाठके विभिन्न प्रयोगोंके साथ दो खण्डोंमें उपलब्ध है । विशिष्ट संस्करण ( कोड 1535, 1536 ) सचित्र, सजिल्द, ( कोड 1552, 1553 ) गुजराती, ( कोड 1678, 1735 ) सानुवाद, मराठी, ( कोड 1739, 1740 ), कन्नड़, ( कोड 1577, 1744 ) बँगला, ( कोड 564, 565 ) अंग्रेजी अनुवाद, ( कोड 25 ) केवल हिन्दी बृहदाकार, बड़े टाइपमें, ( कोड 1190, 1191 ) बड़ा टाइप, दो खण्डोंमें, केवल हिन्दी, ( कोड 1490 ) ( वि ० सं ० ) केवल हिन्दी ( कोड 1159, 1160 ) वि ० सं ०, केवल अंग्रेजी अनुवाद ( कोड 28 ) केवल हिन्दी, ( कोड 1608 ) केवल गुजराती, ( कोड 29 ) मूल, मोटा टाइप, संस्कृत, ग्रन्थाकार ( कोड 1573 ) मूल, मोटा टाइप, तेलुगु, ग्रन्थाकार ( कोड 124 ) मूल मझला आकार, ( कोड 1855 ) विशिष्ट सं ० मूल, मझला संस्कृतमें भी । संक्षिप्त शिवपुराण, मोटा टाइप ( कोड 789 ) ग्रन्थाकार - इस पुराणमें परात्पर ब्रह्म शिवके कल्याणकारी स्वरूपका तात्त्विक विवेचन, रहस्य, महिमा और उपासनाका विस्तृत वर्णन है । सचित्र, सजिल्द, विशिष्ट संस्करण ( कोड 1468 ) हिन्दी एवं ( कोड 1286 ) गुजरातीमें भी उपलब्ध । संक्षिप्त पद्मपुराण ( कोड 44 ) ग्रन्थाकार - इस पुराणमें भगवान् विष्णुकी विस्तृत महिमाके साथ, भगवान् श्रीराम तथा श्रीकृष्णके चरित्र, विभिन्न तीर्थोंका माहात्म्य, शालग्रामका स्वरूप, तुलसी - महिमा, गीता माहात्म्य, विष्णुसहस्रनाम, उपासना - विधि तथा विभिन्न व्रतोंका सुन्दर वर्णन है । सचित्र, सजिल्द । संक्षिप्त मार्कण्डेयपुराण ( कोड 539 ) ग्रन्थाकार - भगवतीकी विस्तृत महिमाका परिचय देनेवाले इस पुराणमें दुर्गासप्तशतीकी कथा एवं माहात्म्य, हरिश्चन्द्रकी कथा, मदालसा - चरित्र, अत्रि - अनसूयाकी कथा, दत्तात्रेय-चरित्र आदि अनेक सुन्दर कथाओंका विस्तृत वर्णन है । सचित्र, सजिल्द | श्रीविष्णुपुराण, अनुवादसहित ( कोड 48 ) ग्रन्थाकार - इसके प्रतिपाद्य भगवान् विष्णु हैं, जो सृष्टिके आदिकारण, नित्य, अक्षय, अव्यय तथा एकरस हैं । इसमें आकाश आदि भूतोंका परिमाण, समुद्र, सूर्य आदिका परिमाण, पर्वत, देवतादिकी उत्पत्ति, मन्वन्तर, कल्प - विभाग, सम्पूर्ण धर्म एवं देवर्षि तथा राजर्षियोंके चरित्रका विशद वर्णन है । सचित्र, सजिल्द ( कोड 1364 ) केवल हिन्दी अनुवादमें भी उपलब्ध । संक्षिप्त नारदपुराण ( कोड 1183 ) ग्रन्थाकार - इसमें सदाचार - महिमा, वर्णाश्रम धर्म, भक्ति तथा भक्तके लक्षण, देवपूजन, तीर्थ - माहात्म्य, दान - धर्मके माहात्म्य और भगवान् विष्णुकी महिमाके साथ अनेक भक्तिपरक उपाख्यानोंका विस्तृत वर्णन किया गया है । सचित्र, सजिल्द । संक्षिप्त स्कन्दपुराण ( कोड 279 ) ग्रन्थाकार - यह पुराण कलेवरकी दृष्टिसे सबसे बड़ा है तथा इसमें लौकिक और पारलौकिक ज्ञानके अनन्त उपदेश भरे हैं । इसमें भगवान् शिवकी महिमा, सती- चरित्र, शिव-पार्वती - विवाह, कार्तिकेय - जन्म, तारकासुर वध एवं धर्म, सदाचार, योग, ज्ञान तथा भक्तिके सुन्दर विवेचनके साथ - साथ अनेक साधु - महात्माओंके सुन्दर चरित्र पिरोये गये हैं । सचित्र, सजिल्द । संक्षिप्त ब्रह्मपुराण ( कोड 1111 ) ग्रन्थाकार - इस पुराणमें सृष्टिकी उत्पत्ति, पृथुका पावन चरित्र, सूर्य एवं चन्द्रवंशका वर्णन, श्रीकृष्णचरित्र, कल्पान्तजीवी मार्कण्डेय मुनिका चरित्र, तीर्थोंका माहात्म्य एवं अनेक भक्तिपरक आख्यानोंकी सुन्दर चर्चा की गयी है । सचित्र, सजिल्द । संक्षिप्त गरुडपुराण - ( कोड 1189 ) ग्रन्थाकार - इस पुराणके अधिष्ठातृ देव भगवान् विष्णु हैं । इसमें ज्ञान, भक्ति, वैराग्य, सदाचार, निष्काम कर्मकी महिमाके साथ यज्ञ, दान, तप, तीर्थ आदि शुभ कर्मोंमें सर्व साधारणको प्रवृत्त करनेके लिये अनेक लौकिक एवं पारलौकिक फलोंका वर्णन किया गया है । सचित्र, सजिल्द । संक्षिप्त भविष्यपुराण - ( कोड 584 ) ग्रन्थाकार - यह पुराण विषय - वस्तु एवं वर्णन शैलीकी दृष्टिसे अत्यन्त उच्च कोटिका है । इसमें धर्म, सदाचार, नीति, उपदेश, अनेक आख्यान, व्रत, तीर्थ, दान, ज्योतिष एवं आयुर्वेदशास्त्रके विषयोंका अद्भुत संग्रह है । वेताल - विक्रम - संवादके रूपमें कथा - प्रबन्ध इसमें अत्यन्त रमणीय है । इसके अतिरिक्त इसमें नित्यकर्म, सामुद्रिक शास्त्र, शान्ति तथा पौष्टिक कर्मका भी वर्णन है । सचित्र, सजिल्द ।
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संक्षिप्त श्रीवराहपुराण ( कोड 1361 ) ग्रन्थाकार - इस पुराणमें भगवान् श्रीहरिके वराह अवतारकी मुख्य कथाके साथ - साथ अनेक तीर्थ, व्रत, यज्ञ, दान आदिका विस्तृत वर्णन किया गया है । सचित्र, सजिल्द । संक्षिप्त ब्रह्मवैवर्तपुराण ( कोड 631 ) ग्रन्थाकार - इस पुराणमें चार खण्ड हैं - ब्रह्मखण्ड, प्रकृतिखण्ड, श्रीकृष्णजन्मखण्ड और गणेशखण्ड । इसमें भगवान् श्रीकृष्णकी लीलाओंका विस्तृत वर्णन, अनेक रोचक एवं रहस्यमयी कथाएँ, श्रीराधाकी गोलोक - लीला तथा अवतार - लीलाका सुन्दर विवेचन किया गया है । सचित्र, सजिल्द । वामनपुराण, अनुवादसहित ( कोड 1432 ) ग्रन्थाकार - यह पुराण मुख्यरूपसे त्रिविक्रम भगवान् विष्णुके दिव्य माहात्म्यका व्याख्याता है । इसमें भगवान् वामन, नर - नारायण, भगवती दुर्गाके उत्तम चरित्रके साथ - साथ भक्त प्रह्लाद तथा श्रीदामा आदि भक्तोंके बड़े रम्य आख्यान हैं । सचित्र, सजिल्द । अग्निपुराण, केवल हिन्दी - अनुवाद ( कोड 1362 ) ग्रन्थाकार - इसमें परा - अपरा विद्याओंका वर्णन, महाभारतके सभी पर्वोंकी संक्षिप्त कथा, रामायणकी संक्षिप्त कथा, मत्स्य, कूर्म आदि अवतारोंकी कथाएँ, वास्तु - पूजा, विभिन्न देवताओंके मन्त्र आदि अनेक उपयोगी विषयोंका अत्यन्त सुन्दर प्रतिपादन किया गया है । सचित्र, सजिल्द । मत्स्यमहापुराण, अनुवादसहित ( कोड 557 ) – यह पुराण मत्स्यावतारके रूपमें भगवान् विष्णुकी लीलाओंका सुन्दर परिचायक है । इसमें मत्स्यावतारकी कथा, सृष्टि - वर्णन, मन्वन्तर तथा पितृवंश - वर्णन, ययाति-चरित्र, राजनीति, यात्राकाल, स्वप्नशास्त्र, शकुन - शास्त्र आदि अनेक विषयोंका सरल वर्णन किया गया है । इस पुराणका पठन - पाठन आयुकी वृद्धि करनेवाला, कीर्तिवर्धक तथा पापोंका नाशक है । सचित्र, सजिल्द । कूर्मपुराण, अनुवादसहित ( कोड 1131 ) – इस पुराणमें भगवान्के कूर्मावतारकी कथाके साथ - साथ सृष्टि वर्णन, वर्ण, आश्रम और उनके कर्तव्यका वर्णन, युगधर्म, मोक्षके साधन, तीर्थ- माहात्म्य, २८ व्यासोंकी कथाएँ, ईश्वर - गीता, व्यास - गीता आदि विविध विषयोंका अत्यन्त सुन्दर प्रतिपादन किया गया है । विभिन्न कथाओं एवं रोचक उपाख्यानोंके द्वारा इसमें ज्ञान और भक्तिकी सरस व्याख्या की गयी है । विभिन्न दृष्टियोंसे इस पुराणका पठन - पाठन सबके लिये कल्याणकारी है । सचित्र, सजिल्द । संक्षिप्त श्रीमद्देवीभागवत - मोटा टाइप ( कोड 1133 ) ग्रन्थाकार - यह पुराण परम पवित्र वेदकी प्रसिद्ध श्रुतियोंके अर्थसे अनुमोदित, अखिल शास्त्रोंके रहस्यका स्रोत तथा आगमोंमें अपना प्रसिद्ध स्थान रखता है । यह सर्ग, प्रतिसर्ग, वंश, वंशानुकीर्ति, मन्वन्तर आदि पाँचों लक्षणोंसे पूर्ण है । पराम्बा भगवतीके पवित्र आख्यानोंसे युक्त इस पुराणका पठन - पाठन तथा अनुष्ठान भक्तोंके त्रितापोंका शमन करनेवाला तथा सिद्धियोंका प्रदाता है । सचित्र, सजिल्द ( कोड 1326 ) गुजराती, ( कोड 1897, 1898 ) सटीक । नरसिंहपुराणम् ( कोड 1113 ) ग्रन्थाकार - इस पुराणमें दशावतारकी कथाएँ एवं सात काण्डोंमें भगवान् श्रीरामके पावन चरित्रके साथ - साथ सदाचार, राजनीति, वर्णधर्म, आश्रम - धर्म, योग - साधना आदिका सुन्दर विवेचन किया गया है । इसके अतिरिक्त इसमें भगवान् नरसिंहकी विस्तृत महिमा, अनेक कल्याणप्रद उपाख्यानोंका वर्णन, भौगोलिक वर्णन, सूर्य - चन्द्रादिसे उत्पन्न राजवंशोंका वर्णन तथा अनेक स्तुतियोंका उल्लेख है । सचित्र, सजिल्द । महाभारत - खिलभाग हरिवंशपुराण ( कोड 38 ) ग्रन्थाकार - हरिवंशपुराण वेदार्थ- प्रकाशक महाभारत ग्रन्थका अन्तिम पर्व है । पुत्र प्राप्तिकी कामनासे हरिवंशपुराणके श्रवणकी परम्परा भारतवर्षमें चिरकालसे प्रचलित है । अनन्त भावुक धर्मपरायण लोग इसके श्रवणसे पुत्र - प्राप्तिका लाभ प्राप्त कर चुके हैं । भगवद्भक्ति तथा प्रेरणादायी कथानकोंकी दृष्टिसे भी इसका बड़ा महत्त्व है । भगवान् श्रीकृष्णसे सम्बन्धित अगणित कथाएँ इसमें ऐसी हैं, जो अन्यत्र दुर्लभ हैं । धार्मिक जन - सामान्यके कल्याणार्थ इसके अन्तमें सन्तानगोपाल - मन्त्र, अनुष्ठान -विधि, सन्तान - गोपाल - यन्त्र तथा संतान - गोपालस्तोत्र भी संगृहीत हैं । सचित्र, सजिल्द । ( कोड 1589 ) केवल हिन्दीमें भी । महाभागवत ( देवीपुराण ) ( कोड 1610 ) ग्रन्थाकार - इस पुराणमें मुख्य रूपसे भगवती महाशक्तिके माहात्म्य एवं उनके विभिन्न चरित्रोंका विस्तृत वर्णन है । इसमें मूल प्रकृति भगवतीके गङ्गा, पार्वती, लक्ष्मी, सरस्वती, तुलसी आदि रूपोंमें विवर्तित होनेके मनोरम आख्यान हैं, सचित्र, सजिल्द ।