मनुस्मृति २ हरगोविन्द शास्त्री — पृष्ठ 1–10

मनुस्मृति २ हरगोविन्द शास्त्री · पृष्ठ 1–10

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कृष्णदास संस्कृत सीरीज २०२ मनुस्मृतिः ' मेधातिथि ' भाष्य, ' सविमर्श ' ' मणिप्रभा ' हिन्दीटीकासहिता हिन्दी टीकाकार पण्डित श्री हरगोविन्द शास्त्री शुभाशंसा लेखक प्रो. श्रीनारायण मिश्र सम्पादक केशव किशोर कश्यप चौखम्बा कृष्णदास अकादमी, वाराणसी

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कृष्णदास संस्कृत सीरीज २०२ ***** मनुस्मृतिः ‘ मेधातिथि ' भाष्य, सविमर्श ' मणिप्रभा ' हिन्दीटीकासहिता द्वितीयो भागः ( अध्यायः ७-१२ ) हिन्दी टीकाकार पण्डित श्री हरगोविन्द शास्त्री सम्पादक केशव किशोर कश्यप संस्कृत - विभाग, कला - सङ्काय काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी शुभाशंसालेखक प्रो ० श्रीनारायण मिश्र पूर्व सङ्काय - प्रमुख कला - सङ्काय काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी चोखण्या कृष्णदास अकादमी वाराणसी चौखम्बा कृष्णदास अकादमी, वाराणसी

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प्रकाशक: चौखम्बा कृष्णदास अकादमी, वाराणसी मुद्रक: चौखम्बा प्रेस, वाराणसी संस्करण: प्रथम, वि ० सं ० २०६३, सन् २००७ ई ० कीए ISBN: 81-218-0220-2 ( द्वितीयो भागः ) 81-218-0221-0 ( सेट ) © चौखम्बा कृष्णदास अकादमी पुस्तक - प्रकाशक एवं वितरक पोस्ट बाक्स नं. १११८ के. ३७/११८, गोपाल मन्दिर लेन निकट गोलघर ( मैदागिन ) वाराणसी - २२१००१ ( भारत ) फोन: ( ०५४२ ) २३३५०२० अपरञ्च प्राप्तिस्थानम् चौखम्बा संस्कृत सीरीज आफिस के. ३७ / ९९, गोपाल मन्दिर लेन गोलघर ( मैदागिन ) के पास ( गोपाल मन्दिर के उत्तरी फाटक पर ) पोस्ट बाक्स नं. १००८, वाराणसी - २२१००१ ( भारत ) फोन: २३३३४५८ ( आफिस ), २३३४०३२ एवं २३३५०२० ( आवास ) Fax: 0542-2333458 e - mail: cssoffice@satyam.net.in Web - site: www.chowkhambaseries.com

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KRISHNADAS SANSKRIT SERIES alldu 202 ***** MANUSMRTI fith ' MedhItithi ' Sanskrit, & ' ManiprabhbI ' Hindi Commentaries Volume. II ( Chapters 7-12 ) Hindi Commentary By Pt. Sri Hargovind Shastri 240 / Edited By Keshav Kishor Kashyap Department of Sanskrit Faculty of Arts Banaras Hindu University, Varanasi Foreworded By Prof. Srinarayan Mishra Ex - Dean Faculty of Arts Banaras Hindu University, Varanasi aturar HO वाराणसी CHOWKHAMBA KRISHNADAS ACADEMY VARANASI moa

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Publisher Chowkhamba Krishnadas Academy, Varanasi Printer: Chowkhamba Press, Varanasi ITAMBUIAM IIII ISBN 81-218-0220-2 ( Vol. II ) 81-218-0221-0 ( Set ) OCHOWKHAMBA KRISHNADAS ACADEMY Oriental Publishers & Distributors Post Box No. 1118 K. 37/118, Gopal Mandir Lane Near Golghar ( Maidagin ) Varanasi - 221001 ( INDIA ) Phone: ( 0542 ) 2335020 Can be had also from CHOWKHAMBA SANSKRIT SERIES OFFICE K. 37/99, Gopal Mandir Lane Near Golghar ( Maidagin ) P. Box 1008, Varanasi - 221001 ( INDIA ) Phone YM A Off. : 2333458, Resi.: 2334032 & 2335020 Fax: 0542-2333458 e - mail: cssoffice@satyam.net.in Web - site: www.chowkhambaseries.com OHO

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विषय विषयानुक्रमणिका ( सप्तम से द्वादश अध्याय पर्यन्त ) पृ ० सं ० | विषय सप्तम अध्याय विनयी होना राजधर्म का कथन कृतसंस्कार राजा का प्रजारक्षण पृ ० सं ० अविनय - निन्दा तथा विनय - प्रशंसा अविनय से नष्ट होने का दृष्टान्त १८ १८ १८ विनय से समृद्धिमान् होने का दृष्टान्त १ ९ इन्द्रादि के अंश से राजा की सृष्टि ३ राजा की प्रशंसा ३ विद्याग्रहण १ ९ राजापमान का निषेध ४ इन्द्रियजय २१ प्रायोजनानुसार राजा की विविधरूपता ४ क्रोधजन्य व्यसनों का त्याग २१ राजद्वेष का कुपरिणाम व्यसनों में आसक्ति से हानि २१ राजकृत नियम का उल्लंघन दण्ड की सृष्टि दण्डभय से स्व - स्वभोगप्राप्ति अन्यायियों को दण्ड देना दण्ड की प्रशंसा कामजन्य दश व्यसनों के नाम २२ क्रोधजन्य आठ व्यसनों के नाम २२ ७ लोभ का त्याग २३ 9 अतिकष्टदायक व्यसन २३ ८ उक्त सात व्यसनों में पूर्व - पूर्व उचित दण्ड से प्रजानुरञ्जन का अतिकष्टदायकत्व दण्ड न देने से अव्यवस्था ९ मृत्यु से भी व्यसन का अधिक दण्ड की पुन: प्रशंसा १० कष्टदायकत्व २५ दण्डप्रयोक्ता स्वरूप १२ मन्त्रियों की नियुक्ति २६ अनुचित दण्ड प्रयोग से हानि १३ मन्त्रियों को नियुक्त करने में कारण २७ दण्डप्रयोग के अयोग्य व्यक्ति १४ सन्धि विग्रहादि - विचार २८ दण्डप्रयोग के योग्य व्यक्ति १४ अपने हितकर कार्य का अनुष्ठान २ ९ दण्डप्रयोग का प्रकार १५ ब्राह्मण मन्त्री २ ९ न्यायी राजा की प्रशंसा १५ अन्य मंत्रियों की नियुक्ति ३० अन्यायी राजा की निन्दा १६ कोश तथा रनिवास के कार्य करनेवाले ३० वृद्ध विद्वान् ब्राह्मणों की सेवा १७ दूत की नियुक्ति ३१

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६ विषय मनुस्मृतिः पृ ० सं ० | विषय पृ ० सं ० श्रेष्ठ राजदूत का लक्षण ३१ सैनिक अभ्यास आदि की सेनापति आदि के कार्य ३३ नित्यकर्तव्यता ५१ दूतप्रशंसा ३३ सर्वदा दण्डयुक्त रहना ५२ दूतके अन्य कार्य ३४ कपट का त्याग ५२ राजा के निवास योग्य देश ३४ | प्रकृति - भेद आदि को गुप्त रखना पूर्णत: विश्वास न करना ५३ ५३ राजा के निवास योग्य दुर्गों के नाम ३५ गिरिदुर्ग की श्रेष्ठता उक्त दुर्गों के निवासी जीव दुर्ग की प्रशंसा ३६ | बगुले आदि के समान अर्थचिन्तनादि ५३ ३६ विजय में बाधक वशीकरण ३६ | सामादि की असफलता में दुर्ग को अस्त्र - शस्त्रयुक्त बनाना ३७ दुर्ग के बीच में राजभवन - निर्माण ३८ दण्डप्रयोग ५४ साम एवं दण्ड की प्रशंसा ५५ सवर्णी के साथ में विवाह ३८ राज्यरक्षा ५५ पुरोहित आदि का वरण यज्ञ करना कर - ग्रहण ३ ९ प्रजापीडन से राज्यभ्रंशादि ५६ ३ ९ राज्यरक्षा से सुख - समृद्धि ५६ ३ ९ ग्रामपति आदि की नियुक्ति ५६ अध्यक्षों की नियुक्ति ४० ग्राम के दोष को बड़े अधिकारी ब्राह्मणों की वृत्तिदान ४० से कहना ५७ ब्राह्मणों को वृत्तिदान की प्रशंसा ४१ ग्रामकार्यों का अन्य राजमन्त्री 4 वेदपारग ब्राह्मण को देने का अनन्त फल सत्पात्र में दान की प्रशंसा युद्ध से विमुख होने का निषेध राजा का श्रेष्ठ धर्म युद्ध में विमुख न होने से स्वर्ग-प्राप्ति कूट शस्त्रादि के प्रहार का निषेध द्वारा निरीक्षण ५८ ४१. प्रतिनगर में उच्चपदाधिकारियों ४३ को नियुक्त करना ५ ९ ४४ उक्त उच्चाधिकारी का कार्य ५ ९ ४४ घूसखोरों से प्रजा की रक्षा ५ ९ ४४ और राज्यबहिष्कार ४६ घूसखोरों की सम्पत्ति का हरण दास - दासियों का वेतन एवं स्थान ६० ६० युद्ध में मारने के अयोग्य शत्रु ४६ उक्त वेतन का प्रमाण ६० युद्ध से विमुख होने की निन्दा ४८ व्यापारियों का कर ६१ युद्धविजयी योद्धा को प्राप्त जीता थोड़ा - थोड़ा कर लेने में दृष्टान्त ६१ गया धन ४ ९ पशु, सुवर्ण तथा धान्य राजा का सामान्यतः कर्तव्य ५० का ग्राह्य कर ६२ अप्राप्त को प्राप्त करने की इच्छा आदि वृक्ष, मांस आदि का ग्राह्यकर ६२ ५१ श्रोत्रियो से ग्रहण का निषेध ६३