श्रीमद्भागवत महापुराण - २ — पृष्ठ 1511–1520

श्रीमद्भागवत महापुराण - २ · Gita Press, Gorakhpur · पृष्ठ 1511–1520

पृष्ठ 1511

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विश्रामस्थल -स्कन्ध अध्याय योग अध्याय ३MY २३ ११ ४x ९ १ ९ ४x २०22 ११ ४x २२ १२ ५5 १ १० ५5 १० ९ I5 २० १० w १५ w १६ I ७9 ७99 १० ८ v ९ १५ १४ ९ १३ 2 १० ६ १० ६ २० १० १७ ११ १० ३० १३ १० ४२ १२ १० ५४ १२ १० ६५ ११ १० ७८ १३ १० ८७ ९ ११ ९ १२ ११ २१ १२ १२ १२ १२ १३ * ११ ( ५७ ) ऋतुपारायण ( दो महीनेका ) - विश्रामस्थल स्कन्ध अध्याय योग अध्याय १ ६ ६ १ ११ ५ १ १५ १ १ ९ * x २MY ६ ६ w २ १० * ४x ३MY ६ ६w ३MY ११ 5 kebook converter DEMO Watermarks *******

पृष्ठ 1512

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पृष्ठ 1513

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विश्रामस्थल -स्कन्ध अध्याय योग अध्याय ३ १६ ५ ३ २० ४ ३ २४ ४x ३ २८ ४x MYMYMYMYMYxxx ३ ३३ * 5 ४ ७ 9 १२ 5 ४ १८ ६w ४ २४ w ४ ३१ * ७9 ६ ६w ५ ११ ५5 ५5 १५ ४x u5 २० ५5 ५5 २६ * ६w ६w ७ 9 w १३ ६ ६w १ ९ * ६w 9 I5 99 १० ५5 १५ * 5 Vvv ४ x ८ ९ 5 ८ १४ 5 ८ १८ x ८ २४ * w ९ ५ 5 I, १२ 9 ९ १७ 5 २४ * 9 १० ६ w १० ११ ५5 १० १७ ६w १० २३ w kebook converter DEMO Watermarks *******

पृष्ठ 1514

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पृष्ठ 1515

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अध्याय योग अध्याय - दिन विश्रामस्थल स्कन्ध ४३ १० २८ ४४ १० ३३ ४५ १० ३८ ५ ४६ १० ४४ ६ ४७ १० ४९ ÷ ५ ४८ १० ५५ ६ ww ४९ १० ६१ ५० १० ६८ 9) ५१ १० ७५ 9 ५२ १० ८१ w ५३ १० ८८ 9 ५४ ११ ५ 9 ५५ ११ ११ w ५६ ११ १८ ७99 ५७ ११ २३ ५5 ५८ ११ २ ९ w9 ५ ९ १२ ५ ६० १२ १३ * ८ ऐसा माना जाता है कि निम्नलिखित स्कन्धोंके निम्नलिखित अध्यायोंपर विश्राम नहीं करना चाहिये । ऐसा करनेवालोंके प्रयोग सिद्ध नहीं होंगे । स्कन्ध अध्याय १ १, ८, १०, ११, १६ २ ३, ८ ३ १, ७, १०, १८, २०, २३ ४ १, ३, १०, १७, १८ I ५, १३ ६ ६, १० ७ १, ४, ६ ८ १, २, ८, १०, २१ ९ १, ४, १०, १५ १० १, ९, १०, २२, २ ९, ३०, ६२, ७६, ७७ ११ १०, २२, ३० १२ ९ ****** ebook converter DEMO Watermarks *******

पृष्ठ 1516

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१-( भागवतांकमें प्रकाशित ' श्रीमद्भागवतकी अनुष्ठान-विधि' शीर्षक दो लेखोंके आधारपर । ) * यह चिह्न स्कन्धकी समाप्ति और: यह चिह्न दशमस्कन्धके पूर्वार्धकी समाप्तिका है । ****** ebook converter DEMO Watermarks *******

पृष्ठ 1517

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॥श्रीहरिः ॥ श्रीगोविन्ददामोदरस्तोत्रम्

कारारविन्देन पदारविन्दं मुखारविन्दे विनिवेशयन्तम् ।

वटस्य पत्रस्य पुटे शयानं बालं मुकुन्दं मनसा स्मरामि ॥१ ॥

श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे, हे नाथ नारायण वासुदेव ।

जिह्वे पिबस्वामृतमेतदेव गोविन्द दामोदर माधवेति ॥२ ॥

विक्रेतुकामाखिलगोपकन्या मुरारिपादार्पितचित्तवृत्तिः ।

दध्यादिकं मोहवशादवोचद् गोविन्द दामोदर माधवेति ॥३ ॥

गृहे गृहे गोपवधू- कदम्बाः सर्वे मिलित्वा समवाप्य योगम् ।

पुण्यानि नामानि पठन्ति नित्यं गोविन्द दामोदर माधवेति ॥४ ॥

सुखं शयाना निलये निजे s पि नामानि विष्णोः प्रवदन्ति मर्त्याः ।

ते निश्चितं तन्मयतां व्रजन्ति गोविन्द दामोदर माधवेति ॥५ ॥

जिह्वे सदैवं भज सुन्दराणि नामानि कृष्णस्य मनोहराणि ।

समस्त - भक्तार्ति- विनाशनानि गोविन्द दामोदर माधवेति ॥ ६ ॥

सुखावसाने इदमेव सारं दुःखावसाने इदमेव ज्ञेयम् ।

देहावसाने इदमेव जाप्यं गोविन्द दामोदर माधवेति ॥७ ॥

जिह्वे रसज्ञे मधुर - प्रिये त्वं सत्यं हितं त्वां परमं वदामि ।

आवर्णयेथा मधुराक्षराणि गोविन्द दामोदर माधवेति ॥८ ॥

त्वामेव याचे मम देहि जिह्वे समागते दण्डधरे कृतान्ते ।

वक्तव्यमेवं मधुरं सुभक्त्या गोविन्द दामोदर माधवेति ॥९ ॥

श्रीकृष्ण राधावर गोकुलेश गोपाल गोवर्धन नाथ विष्णो ।

जिह्वे पिबस्वामृतमेतदेव गोविन्द दामोदर माधवेति ॥१० ॥

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पृष्ठ 1518

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पृष्ठ 1519

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॥ श्रीहरिः ॥ श्रीमद्भागवतकी आरती

आरति अतिपावन पुरानकी ।

धर्म - भक्ति -विज्ञान-खानकी ॥ टेक ॥

भागवत निरमल । महापुरान शुक-मुख -विगलित निगम-कल्प-फल ।

परमानन्द -सुधा -रसमय कल ।

लीला -रति-रस रस-निधानकी ॥ आरति० ॥

कलि-मल-मथनि त्रिताप -निवारिनि ।

जन्म- मृत्युमय भव- भय -हारिनि ।

सेवत सतत सकल सुखकारिनि । सुमहौषधि हरि चरित-गानकी ॥ आरति० ॥

विषय -विलास -विमोह-विनाशिनि विकाशिनि । विमल विराग विवेक भगवत्- तत्त्व- रहस्य -प्रकाशिनि परम ज्योति परमात्म-ज्ञानकी ॥ आरति० ॥ परमहंस - मुनि- मन-उल्लासिनि रसिक-हृदय रस-रास -विलासिनि । भुक्ति, मुक्ति, रतिप्रेम-सुदासिनि कथा अकिंचनप्रिय सुजानकी ॥ आरति० ॥ ****** ebook converter DEMO Watermarks *******

पृष्ठ 1520

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