Upanishad Sanchayan Ishadi Ashtottar Shat Upanishad Part 1 with Hindi Translation by Keshavlal V Shastri Vraj Jivan Prachya Bharati Granth Mala No. 162 - Chaukhamba — पृष्ठ 451–452

उपनिषद सञ्चयन - ईशादि अष्टोत्तरशत उपनिषद १ · पृष्ठ 451–452

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उपनिषदें वैदिक वाङ्मय के विकास के अन्तिम सोपान हैं, अतएव इन्हें ‘ वेदान्त' के नाम से भी कहा जाता है । उपनिषदें भारतीय संस्कृति के प्राण हैं । इनमें वेदों की सर्वोत्कृष्ट ज्ञाननिधि सुरक्षित है । औपनिषदिक ज्ञान- गंगा में अक्षय प्रवाह है, औदार्य है । यहाँ अन्धविश्वास और रूढ़ियों के प्रति विद्रोह है तथा वैज्ञानिक चिन्तन को आमन्त्रण है । प्रश्नकर्ता का, जिज्ञासु का यहाँ सत्कार है, उसके प्रति शंका, घृणा या दुत्कार नहीं । सबको अपनी बात कहने की छूट है; यदि खण्डन है तो सतर्क और सटीक है; किसी दुराग्रह या अहं को या पूर्वाग्रह को थोपने का प्रयास नहीं है । उपनिषदों के समस्त कथन युक्ति- युक्त और वैज्ञानिक प्रस्तुतीकरण पर आधारित हैं । अस्तु । उपनिषदों के मतों में दिखाई देनेवाली असमानताओं के कारण अथवा यों कहें कि उन मतों की सर्वाभिमुखता से उनमें से अलग- अलग अर्थ निकालने का बहुत बड़ा अवकाश है । भाष्यकारों के विविध मतों का भी यही कारण है । इस पर अनेक भाष्य-टीका- वार्तिक आदि होने पर भी अभी और नये अर्थ निकालने की सम्भावना यथावत् बनी हुई ही है । अर्थ- वैविध्य ही इसका वैशिष्ट्य है । इन्द्रधनुष के किस रंग को आप नकार सकते हैं, सभी रंग वास्तविक ही तो हैं । उपनिषदों के इस संग्रह को अपने मूल स्वरूप में प्रकाशित करने का यही हेतु है । अनेक अर्थों की सम्भावना वाले मन्त्रों का कोई यदि नया ही अर्थ प्रकाशित करता है तो इससे भारतीयचिन्तन को लाभ ही होगा, हानि नहीं । इस उद्देश्य को ध्यान में रखकर प्रकृत संस्करण में विद्वान् लेखक ने मूलपाठों का, जहाँ तक बन सका है अन्वय करके शब्दश: अनुवाद करने का प्रयास किया है । प्रासादिकता का जतन हो और अर्थ समझने में सरलता हो, इसको दृष्टि में रखते हुए आवश्यकतानुरूप यत्र- तत्र कतिपय शब्दों को ब्रैकेट ( ) में तथा कुछ को स्वतन्त्र रखकर विषयवस्तु को स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है । साथ ही प्रत्येक उपनिषद् के आरम्भ में उसका परिचय भी प्रस्तुत किया गया है । इसके अतिरिक्त प्रत्येक खण्ड के अन्त में अकारादि क्रम से मन्त्रानुक्रमणिका दी गई है तथा ग्रन्थान्त में पारिभाषिक कोश का समायोजन भी किया गया है । चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान दिल्ली