पुरुषसूक्त की वर्णव्यवस्था
ऋग्वेद संहिता के दशम मण्डल, सूक्त ९०, ऋचा १२ तथा यजुर्वेद के ३१वें अध्याय के ११वें मन्त्र में कहा गया है कि – ब्रा॒ह्म॒णो॑ऽस्य॒ मुख॑मासीद्बा॒हू रा॑ज॒न्य॑: कृ॒तः । ऊ॒रू तद॑स्य॒ यद्वैश्य॑: प॒द्भ्यां शू॒द्रो अ॑जायत ॥ -ऋग्वेद संहिता १०-९०-१२ उस परम्ब्रह्म का मुख ब्राह्मण था, बाहु के कारण क्षत्रिय बने, उसकी जंघाएं वैश्य हुए तथा पैरों […]
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