दर्शपूर्णमास का व्यापक विज्ञान

जब तक यह पृथक् पृथक् रहे, तबतक इनकी विश्वनिर्माण सम्बन्धिनी कामना पूरी न हुई । फलतः इन्होंने विचार किया कि ऐसे काम नहीं चल सकता । अपने को परस्पर में मिलकर सृष्टिनिर्माण करना चाहिए। ऐसा ही हुआ । पाञ्चों मिल गये ! मिलने से कामना पूरी होगई । इन की समष्टि कर्मपूर्ति का हेतु बनी, अतएव यह यज्ञ ‘काम’ नाम से प्रसिद्ध हुआ । यही यज्ञ यज्ञ विज्ञानपरिभाषा के अनुसार आगे जाकर ‘दर्शपूर्णमास’ नाम से व्यवहृत हुआ ।

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