गर्ग संहिता — पृष्ठ 1–10

गर्ग संहिता · Gita Press, Gorakhpur · पृष्ठ 1–10

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॥ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॥ 517 श्रीमन्महर्षि गर्गाचार्यप्रणीत श्रीगर्ग - संहिता श्रीकृष्ण - कथामृत ( हिन्दी - अनुवाद ) गीताप्रेस गोरखपुर गीताप्रेस गोरखपुर | GITA PRESS, GORAKHPUR [ SINCE 1923 ] ]

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॥ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॥ श्रीगर्ग — संहिता [ दशखण्डात्मिका ] श्रीमन्महर्षि गर्गाचार्यप्रणीता हिंदी - अनुवाद त्वमेव माता च पिता त्वमेव त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव । त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव त्वमेव सर्वं मम देवदेव ॥ अनुवादक-पं ० श्रीरामनारायणदत्तजी शास्त्री पाण्डेय ' राम ' पं ० श्रीगदाधरजी शर्मा एवं पं ० श्रीरामाधारजी शुक्ल

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सं ० २०७६ बाईसवाँ पुनर्मुद्रण ४,००० कुल मुद्रण १,०४,५०० * मूल्य – २१६५ ( एक सौ पैंसठ रुपये ) प्रकाशक एवं मुद्रक— गीताप्रेस, गोरखपुर – २७३००५ ( गोबिन्दभवन - कार्यालय, कोलकाता का संस्थान ) फोन: ( ०५५१ ) २३३४७२१, २३३१२५०, २३३१२५१ web: gitapress.org e - mail: booksales@gitapress.org गीताप्रेस प्रकाशन gitapressbookshop.in से online खरीदें ।

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॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः श्रीगर्ग - संहिता गोलोकखण्डसे विज्ञानखण्डतक नौ खण्डकी अध्यायक्रमसे विषय सूची अध्याय विषय श्रीगोविन्दस्तोत्रम् ( संकलित ) ------. सूचीका श्रीगर्ग संहिताका संक्षिप्त परिचय ( लेख ) 11 गोलोकखण्ड १- नारदजीके द्वारा अवतार - भेदका निरूपण.. २- ब्रह्मादि देवोंद्वारा गोलोकधामका दर्शन ३- भगवान्‌के भूतलपर अवतीर्ण होनेका उद्योग ४- गोपीभावकी प्राप्तिमें कारणभूत पूर्वप्राप्त वरदानोंका विवरण ५- अवतार - व्यवस्थाका वर्णन. ६ - कालनेमिके अंशसे उत्पन्न कंसके वर्णन... ७- कंसकी दिग्विजय........... ८- सुचन्द्र और कलावतीका कीर्तिके रूपमें अवतरण......... ९ वसुदेवजीके विवाहका प्रसङ्ग बलका वृषभानु १०- बलभद्रजीका अवतार, व्यासदेवद्वारा उनका स्तवन.. ११- श्रीकृष्णका प्राकट्य... १२ श्रीकृष्णका जन्मोत्सव: देवताओंका आगमन. १३- पूतनाका उद्धार.. १४ शकटासुर और तृणावर्तका उद्धार, पृष्ठ संख्या ग्यारहवाँ पृष्ठ १४ १५ १७ ............ २१ २४ २७ २ ९ ३२ तथा ३४ ३६ ३८ ४१ ४६ ४८ ५० १५ - यशोदाद्वारा श्रीकृष्णके श्रीकृष्णके मुखमें ब्रह्माण्डका दर्शन तथा श्रीकृष्ण और बलरामका नाम-करण - संस्कार.. ५४ १६- श्रीराधा और श्रीकृष्णके विवाहका वर्णन.......... ५८ १७- श्रीकृष्णकी बाल लीलामें दधि चोरीका वर्णन ६२ १८- मृद्धक्षण - लीला तथा मुखमें ब्रह्माण्डका दर्शन.............. ६४ १ ९- उलूखल - बन्धन तथा यमलार्जुन - उद्धार ६५ २०- दुर्वासद्वारा भगवान्‌की मायाका दर्शन तथा श्रीनन्दनन्दनस्तोत्र. ६७ अध्याय विषय पृष्ठ संख्या श्रीवृन्दावनखण्ड १ महावनसे वृन्दावन चलनेका उद्योग २- गिरिराज गोवर्धनकी उत्पत्तिका वर्णन........ ३- श्रीयमुनाजीका गोलोकसे अवतरण. ४- वत्सासुरका उद्धार ५- वकासुरका उद्धार....... ६- अघासुरका उद्धार.. ७१ ७३ ७६ ७८ ७ ९ ८१ ७- ब्रह्माजीके द्वारा गौओं, गोवत्सों एवं गोप-बालकोंका हरण.. ८२ ८- ब्रह्माजीका श्रीकृष्णके सर्वव्यापी स्वरूपका दर्शन ८४ ९- ब्रह्माजीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति.......... ८६ १० यशोदाकी चिन्ता श्रीबलराम तथा श्रीकृष्णका गोचारण ८ ९ II ११- धेनुकासुर - उद्धार ९ १ १२ - श्रीकृष्णद्वारा कालियदमन तथा दावानल-पान १३- शेषजीका उपाख्यान. १४- गरुडके भयसे कालियका यमुना जलमें निवास,.......... १५ - श्रीराधा - कृष्णका प्रेमप्रसङ्ग. १६- तुलसी माहात्म्य और श्रीराधाद्वारा तुलसी-सेवन........ १७- श्रीकृष्णका गोपदेवी - रूप धारण.......... १८- श्रीकृष्णके द्वारा गोपदेवीरूपसे श्रीराधाके प्रेमकी परीक्षा तथा श्रीराधाको श्रीकृष्णका दर्शन.......... ...... १ ९ - रासलीलाका वर्णन २०- श्रीराधा और श्रीकृष्णका परस्पर शृङ्गार-९ ३ ९ ५ ९ ६ ९ ८ १०० १०३ १०५ १०७ GRY AY DAHIS.................................. १० ९ २१- श्रीकृष्णका अन्तर्धान होना....... .................. १११ २२- श्रीकृष्णका प्रकट होकर गोपियोंको नारायण-स्वरूपके दर्शन कराना तथा यमुना विहार......... ११३ २३- श्रीकृष्णके द्वारा शङ्खचूडका उद्धार..... ११५

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[ ४ ] अध्याय विषय पृष्ठ २४ - रास - विहार तथा आसुरि मुनिका उपाख्यान २५- शिव और आसुरिका गोपीरूपसे रासमण्डलमें श्रीकृष्णका दर्शन तथा स्तवन २६ - विरजा तथा श्रीदामाका प्रसङ्ग.. गिरिराजखण्ड १ - गिरिराजकी पूजा - विधि........ २ - गोपोंद्वारा गिरिराज - पूजनका महोत्सव ३- श्रीकृष्णका गोवर्धन - धारण इन्द्रके द्वारा क्रोध-पूर्वक करायी गयी घोर जलवृष्टिसे व्रजकी रक्षा ४- इन्द्रद्वारा भगवान् श्रीकृष्णका स्तुति तथा श्रीकृष्णका सुरभि और ऐरावतद्वारा अभिषेक....... ५- गोपोंका विवाद तथा श्रीनन्दराज एवं वृषभानुवरके द्वारा समाधान ६- श्रीकृष्णकी भगवत्ताका परीक्षण; खेतमें मोती उपजना और अपना मोतियोंके ढेर वृषभानुके यहाँ भेजना ७- गिरिराजके तीर्थोंका वर्णन........... ८- गिरिराजकी विभिन्न विभूतियोंका वर्णन..... ९- गिरिराज गोवर्धनकी उत्पत्तिका प्रसङ्ग.............. १० दिव्यरूपधारी सिद्धके मुखसे गोवर्धनकी महिमाका वर्णन ११ - सिद्धके पूर्वजन्मका वृत्तान्त तथा उसका गोलोकप्रयाण............ माधुर्यखण्ड १- श्रुतिरूपा गोपियोंका वृत्तान्त.................... २- ऋषिरूपा गोपियोंका तथा मङ्गलगोपकी कन्याओंका उपाख्यान. ३- मैथिली गोपियोंको आख्यान; चीरहरणलीला..... ४- कोसलप्रान्तीय गोपियोंका वृत्तान्त.............. ५- अयोध्यावासिनी गोपियोंका आख्यान..... ६- अयोध्यापुरवासिनी स्त्रियोंकी राजा विमलके यहाँ पुत्रीरूपसे उत्पत्ति... ७- राजा विमलके यहाँ श्रीकृष्णका आगमन; विमलका मोक्ष श्रीकृष्णके द्वारा राजकुमारियों-का ग्रहण -------------- -----------------८- यज्ञसीतास्वरूपा गोपियोंका वृत्तान्त.................... ९- एकादशी व्रतका माहात्म्य; यज्ञसीतास्वरूपा - संख्या अध्याय विषय पृष्ठ संख्या ११७ १०-११ ९ १२२ ११-१२५ १२६ १२-१३-१२८ १४-१३० १५ -१३१ १६-१७ -१८-१३३ १ ९ -१३५ २०-१३७ २१-१३७ २२-१४० १४१ २३-१४३ २४-१४५ गोपिकाओंको श्रीकृष्ण- सांनिध्यकी प्राप्ति............ १५५ पुलिन्दकन्यारूपिणी गोपियोंके सौभाग्यका वर्णन लक्ष्मीजीका सखियोंका वृषभानुओंके कन्यारूपसे उत्पन्न होकर माघमासके श्रीकृष्णको रिझाना और पाना. दिव्य, अदिव्य त्रिगुणवृत्तिमयी गोपियोंका तथा होली खेलनेका वर्णन देवाङ्गनास्वरूपा गोपियाँ,........... रंगोजि गोपकी पुत्रीरूपमें जालंधरी का प्राकट्य ----------१५६ घरोंमें उतसे ......... १५७ भूतल-१५ ९ १६० गोपियों-१६१ बर्हिष्मतीपुरीकी वनिताओंका गोपीरूपमें प्राकट्य १६३ श्रीयमुनाकवच १६४ श्रीयमुनास्तोत्र.. १६५ यमुनाजीके जप, पटल और पद्धतिका वर्णन १६६ यमुनासहस्रनाम. १६७ बलदेवजीके हाथसे प्रलम्बासुरका वध.. १८१ दावानलसे रक्षा; विप्रपनियोंका श्रीकृष्णका दर्शन १८३ श्रीकृष्णका नन्दराजको वरुणलोकसे ले आना और गोप - गोपियोंको वैकुण्ठधामका दर्शन कराना............. १८४ अम्बिका - वनमें अजगरसे नन्दराजकी रक्षा तथा सुदर्शन - नामक विद्याधरका उद्धार......... १८५ अरिष्टासुर और व्योमासुरका वध १८६ श्रीमथुराखण्ड १४६ १- कंसका नारदजीके कथनानुसार बलराम १४७ और श्रीकृष्णको अपना शत्रु समझकर वसुदेव-१४८ देवकीको कैद करना उनको मारनेकी व्यवस्थामें लगना १८ ९ १४ ९ २ - केशीवध..... १ ९ ० ३- अक्रूरका नन्दग्राम - गमन; श्रीकृष्णकी मथुरा-यात्राकी चर्चासे गोपियोंका गोपियोंका उद्विग्न हो १५१ उठना........ १ ९ २ १५३ ४- श्रीकृष्णका गोपियोंको सान्त्वना देकर मधुराकी ओर प्रस्थित होना, १ ९ ३

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[ 4 ] अध्याय विषय पृष्ठ ५- अक्रूरको भगवान् श्रीकृष्णके परब्रह्मस्वरूपका साक्षात्कार तथा उनकी स्तुति; श्रीकृष्णका मथुरापुरी दर्शन रजकका उद्धार.. ६- सुदामा माली और कुब्जापर कृपा धनुर्भङ्ग ७- रङ्गद्वारपर कुवलयापीडका वध ८- चाणूरमुष्टिक आदि मल्लोंका तथा कंस और उसके भाइयोंका वध ९ वसुदेव - देवकीकी बन्धन मुक्तिः श्रीकृष्ण-बलरामका गुरुकुलमें विद्याध्ययन श्री अक्रूरको हस्तिनापुर भेजना तथा कुब्जा -का मनोरथ पूर्ण करना १०- धोवी, दर्जी और मालीके पूर्वजन्मका परिचय ११- कुब्जा और कुवलयापीडके पूर्वजन्मका वृत्तान्त..... १२ - चाणूर आदि मल्ल, कंसके छोटे तथा पञ्चजन दैत्यके पूर्वजन्मगत का वर्णन भाइयों वृत्तान्त-१३ - उद्धवका व्रजगमन और सखाओंकी उनसे श्रीकृष्ण - विरहके दुःखका निवेदन........ १४- उद्धवका श्रीकृष्ण- सखाओं तथा नन्द-यशोदासे मिलना.. १५- कदली - वनमें उद्धवका गोपाङ्गनाओंकी स्तुति करना तथा पत्र अर्पित करना १६- उद्धवद्वारा श्रीराधा तथा गोपीजनोंको आश्वासन १७- श्रीराधा तथा गोपियोंके करुण उद्गार........ १८- गोपियोंसे विदा उद्धवका मथुरा लौटना.. १ ९ श्रीकृष्णका उद्धव साथ व्रजमें प्रत्यागमन..... २०- श्रीकृष्णका कदली - वनमें श्रीराधा और गोपियोंके साथ मिलन रासोत्सव तथा रोहिताचलपर महामुनि ऋभुका मोक्ष. --------------२१- श्रीकृष्णकी द्रवरूपताके प्रसङ्गमें नारदजी-का उपाख्यान २२- नारदका गोलोकमें भगवान् श्रीकृष्णको अपनी कला दिखाना तथा श्रीकृष्णका द्रवरूप होना....... संख्या अध्याय विषय पृष्ठ संख्या २३-२४ -१ ९ ५ १ ९ ८ २५-२०१ १ -२०३ २ -२०६ ३-२०८ ४-२१० ५ -२११ ६-२१२ ७-२१४ ८-२१७ ९ २१ ९ २२१ १० २२३ ११ -२२५ १२-२२७ १३-१४-२३० १५ २३२ श्रीकृष्णका व्रजसे लौटकर मथुरामें आगमन.......... २३४ बलदेवजीके द्वारा कोल दैत्यका वध; उनकी तीर्थयात्रा; माण्डूकदेवको वरदान......... २३६ मथुरापुरीका माहात्म्य.. २४० द्वारकाखण्ड जरासंधका मथुरापर आक्रमण और मगध-राजकी पराजय २४३ मथुरापर जरासंध और कालयवनका आक्रमण; कालयवनको मुचुकुन्दके दृष्टिपातसे दग्ध करना और म्लेच्छ सेनाका संहार करके श्रीकृष्ण-बलरामका द्वारका पहुँचना २४५ बलदेवजीका रेवतीके साथ विवाह......... २४८ श्रीकृष्णको रुक्मिणीका संदेश ब्राह्मणसहित श्रीकृष्णका कुण्डिनपुरमें आगमन........... २४ ९ रुक्मिणीकी श्रीहरिके शुभागमनके समाचारसे प्रसन्नता; रुक्मिणीकी कुलदेवीके पूजनके लिये यात्रा देवीसे प्रार्थना............... २५१ श्रीकृष्णद्वारा रुक्मिणीका हरण तथा यादववीरों-साथ युद्ध विपक्षी राजाओंका पराजय......... . २५३ रुक्मीको पराजयः रुक्मिणी और श्रीकृष्णका विवाह ---------.. २५५ श्रीकृष्णका सोलह हजार एक सौ आठ कन्याओंके साथ विवाह प्रद्युम्रका प्राकट्य तथा उनका विवाह २५७ द्वारकापुरीके पृथ्वीपर आनेका कारण आनर्तकी तपस्या और उनपर श्रीकृष्णकी कृपा.. २५ ९ द्वारकापुरी, गोमती और चक्रतीर्थका माहात्म्य; दुर्वासाद्वारा घण्टानाद और पार्श्वमौलिको शाप... २६१ गज और ग्राह बने हुए मन्त्रियोंका युद्ध -------------- ..... २६३ त्रितके शापसे कशीवानका शङ्खरूप होकर सरोवरमें रहना श्रीकृष्णके द्वारा उसका उद्धार २६४ प्रभास, सरस्वती आदिका माहात्म्य............ २६५ द्वारकाक्षेत्र के समुद्र तथा रैवतक पर्वतका माहात्म्य................... २६७ यज्ञतीर्थ, कपिटतीर्थ, नृगकूप, गोपीभूमि तथा गोपीचन्द्रकी महिमा........... २६ ९

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( ६ ) अध्याय विषय पृष्ठ - संख्या १६- सिद्धाश्रमकी महिमामें श्रीराधा और गोपाङ्गनाओंके साथ सोलह हजार रानियोंसहित श्रीकृष्णका समागम. १७- श्रीराधा और श्रीकृष्णका मिलन; द्वारा श्रीराधाका सत्कार. १८- सिद्धाश्रम में व्रजाङ्गनाओं तथा साथ श्रीराधाका सत्कार... १ ९- लीलासरोवर, हरिमन्दिर आदि वर्णन २०- इन्द्रतीर्थ, ब्रह्मतीर्थ आदिका माहात्म्य. २७१ रानियोंके २७३ रानियों के २७५ तीर्थों का २७७ २७ ९ २१ तृतीय दुर्गके द्वार देवताओंके दर्शन और पूजनकी महिमा तथा पिण्डारक- तीर्थका माहात्म्य २७ ९ २२- सुदामा ब्राह्मणका उपाख्यान............... २८१ विश्वजितखण्ड १- राजा मरुतका उपाख्यान २८५ २- उग्रसेनके राजसूय यज्ञका उपक्रम और दिग्विजयके लिये प्रद्युप्रका विजयाभिषेक...... २८७ ३- प्रद्युम्नके नेतृत्वमें प्रस्थित यादवसेनाका वर्णन २८८ ४- सेनासहित यादववीरोंकी दिग्विजय यात्रा.............. २ ९ ० ५- कच्छ और कलिङ्गदेशपर विजय २ ९ १ ६- राजा गयकी पराजय तथा मालव और माहिष्मतीके राजाओंद्वारा भेंट - प्राप्ति,....... २ ९ ३ ७- ऋष्यपर विजय तथा चेदिदेश - यात्रा. २ ९ ४ ८- शिशुपालके मित्र घुमान् तथा शक्तका वध....... २ ९ ६ ९- रङ्ग - पिङ्गका वध तथा चेदिदेशपर विजय............ २ ९ ८ १०- कोङ्कण, कुटक आदि देशोंपर विजय............ २ ९९ ११- दन्तवक्रकी पराजय; करूष देशपर विजय............ ३०२ १२- उशीनर आदि देशोंपर विजय; मुनिवर अगस्त्यद्वारा तत्त्वज्ञानका उपदेश......... ३०३ १३- शाल्व आदि देशों तथा द्विविद वानरपर विजय; विभीषणके द्वारा भेंट - समर्पण....... ३०६ १४ - दत्तात्रेयके दर्शन; परशुरामजीके द्वारा सत्कार तथा श्रेष्ठ भक्तके स्वरूपका निरूपण............ ३०८ १५ उड्डीश, डामर, बंग तथा असमके नरेशों-पर विजय. ३११ १६- मिथिलानरेशद्वारा प्रद्युम्नका पूजन.................... ३१२ अध्याय विषय पृष्ठ -२ - संख्या १७- मगधदेशपर विजय. ३१५ १८- मथुरा तथा शूरसेन आदिपर विजय. ३१७ १ ९- कौरवोंपर चढ़ाई..... ३१ ९ २०- कौरव - यादव - युद्ध और दुर्योधनकी पराजय.......... ३२१ २१- कौरव - यादव - युद्ध और बलराम तथा श्रीकृष्ण-का प्रकट होकर उनमें मेल कराना.............. ३२३ २२ - चण्डपर विजय......... ३२५ २३- बाणासुरसे भेंट - प्राप्ति यक्षों से युद्ध ३२८ २४- यादव - यक्ष- युद्ध.. ३३० २५ गुह्यकसेनापर विजय कुबेर आदिके भेंट........... ३३३ २६ - किम्पुरुषोंद्वारा हरिचरित्रगान; गन्धर्व उद्धार. ३३६ २७ - गरुडास्त्र के द्वारा गीधोंके आक्रमणसे रक्षा; दशार्णदेशपर विजय ३३८ २८ - उत्तरकुरुवर्षपर विजय; राजा गुणाकरद्वारा प्रद्युम्नका समादर. ३४० २ ९- हिरण्यमयवर्षपर विजय मधुमक्खी तथा वानरोंके आक्रमणसे छुटकारा.... ३४२ ३०- रम्यकवर्षपर विजय मानवगिरिपर श्राद्धदेव मनुद्वारा प्रद्युम्रकी स्तुति ३४३ ३१ - मन्मथशालिनीपुरीके लोगोंद्वारा श्रीकृष्ण - लीला-गान. ३४६ ३२- भद्राश्ववर्षमें प्रद्युम्नका पूजन; चन्द्रावतीपुरीमें वृकके द्वारा हृष्ट दैत्यका वध................... ३४ ९ ३३- संग्रामजित्के द्वारा भूतसंतापन दैत्यका वध....... ३५१ ३४- अनिरुद्ध के हाथसे वृक दैत्यका वध ३५४ ३५- साम्बद्वारा कालनाभ दैत्यका वध.... ३५६ ३६ - दीप्तिमान्‌के द्वारा महानाभ दैत्यका वध..... ३५७ ३७- भानुके हाथसे हरिश्मश्रु दैत्यका वध.............. ३५८ ३८- प्रद्युम्न और शकुनिके घोर युद्धका वर्णन.............. ३५ ९ ३ ९- शकुनिके मायामय अस्त्रोंका निवारण; युद्ध-स्थलमें भगवान् श्रीकृष्णका प्रादुर्भाव.......... ३६१ ४० - शकुनिके जीवस्वरूप शुकका निधन........... ३६४ ४१- भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा युक्तिपूर्वक शकुनिका वध.... ३६७ ४२ - चन्द्रावतीपुरीमें जाकर शकुनिपुत्रको राज्य देना. ३६ ९

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( ७ ) अध्याय विषय पृष्ठ - संख्या ४३- इलामें भेंट - प्राप्ति, ३७० ४४- रागिनियों तथा रागपुत्रोंके नाम ३७२ ४५ - रागिनियों तथा रागपुत्रों द्वारा श्रीकृष्णका स्तवन ४६ - बलभद्रजीके द्वारा गन्धर्वराजकी पराजय ४७- शक्रसखकी पराजय ४८- शक्रसखसे भेंट - प्राप्ति; लीलावतीपुरीके स्वयंवरमें प्रद्युम्नको सुन्दरीकी प्राप्ति. ४ ९ - राजसूय यज्ञमें ऋषियों, देवताओं, सुहृदोंका शुभागमन.. ५० - राजसूय यज्ञके महोत्सवका वर्णन श्रीबलभद्रखण्ड १- श्रीबलभद्रजीके अवतारका कारण....... २- श्रीबलभद्रजीके अवतारकी तैयारी ३- ज्योतिष्मतीका उपाख्यान.. ४- रेवतीका उपाख्यान........... ५ - श्रीबलराम और श्रीकृष्णका प्राकटच. ६- श्रीबलराम - कृष्णकी व्रजलीलाका वर्णन ७- श्रीबलराम - कृष्णकी मथुरालीलाका वर्णन ८- श्रीबलराम - कृष्णकी द्वारकालीलाका वर्णन ३७५ ३७७ ३७८ ......... ३८१ ३८३ ........ ३८४ ........ ३८७ ३८८ ३८ ९ ३ ९ १ ..... ३ ९ ३ ..... ३ ९ ५ ......... ३ ९ ७ ....... ३ ९९ ९- श्रीबलरामजीकी रासलीलाका वर्णन............... ४०० १०- श्रीबलभद्रजीकी पूजा - पद्धति और पटल.............. ४०३ ११ - श्रीबलराम - स्तोत्र........... १२- श्रीबलराम कवच, १३- श्रीबलभद्र - सहस्रनाम. श्रीविज्ञानखण्ड १- द्वारकामें वेदव्यासजीका आगमन और द्वारा उनका स्वागत - पूजन २- व्यासजीके द्वारा गतियोंका निरूपण ३- सकाम - निष्काम भक्तियोगका वर्णन ४- भक्त - संतकी महिमाका वर्णन.. ५- भक्तिकी महिमाका वर्णन ६- मन्दिर निर्माण तथा विग्रह - प्रतिष्ठा -विधि, ७- नित्यकर्म और पूजा - विधिका वर्णन ८- पूजाविधिका वर्णन ९- पूजोपचार तथा पूजन - प्रकारका वर्णन १०- परमात्माका स्वरूप- निरूपण ४०५ ४०६ ४०७ उग्रसेन-४१५ ४१६ ४१८ ४१ ९ ४२० पूजाकी ४२१ ...... ४२३ ......... ४२४ ....... ४२५ ............ ४२ ९ अध्याय विषय अश्वमेधखण्ड १- अश्वमेध कथाका उपक्रम; संवाद... २- श्रीकृष्णावतारकी पूर्वार्द्धगत संक्षेपसे वर्णन ३- जरासंधके आक्रमणसे लेकर तककी श्रीकृष्णलीलाओंका संक्षिप्त ४- पारिजातहरण. पृष्ठ - संख्या गर्ग - वज्रनाभ-४३३ लीलाओंका ४३५ पारिजातहरण-वर्णन......... ४३७ ४३ ९ ५- देवराज और उनकी देवसेनाके साथ श्रीकृष्णका युद्ध तथा विजयलाभ; पारिजात-का द्वारकापुरीमें आरोपण............... ४४१ ६- श्रीकृष्णके अनेक चरित्रोंका संक्षेपसे वर्णन............ ४४३ ७- देवर्षि नारदका ब्रह्मलोकसे आगमन, राजा उग्रसेनद्वारा उनका सत्कार; देवर्षिद्वारा अश्वमेध यज्ञकी महताका वर्णन श्रीकृष्णकी अनुमति एवं नारदजीद्वारा अश्वमेध यज्ञको विधिका वर्णन.. ४४५ ८- यज्ञके योग्य श्यामकर्ण अश्वका अवलोकन............ ४४७ ९- गर्गाचार्यका द्वारकापुरी में आगमन तथा अनिरुद्धका अश्वमेधीय अथकी रक्षाके लिये कृतप्रतिज्ञ होना.............. ४४८ १० उग्रसेनकी सभायें देवताओंका शुभागमन; अनिरुद्ध के शरीरमें चन्द्रमा और ब्रह्माका विलय तथा राजा और रानीकी बातचीत.............. ४५० ११- ऋत्विजोंका वरण- पूजन; श्यामकर्ण अश्वका आनयन और अर्चन ब्राह्मणोंको दक्षिणा दान; अश्वके भालदेशमें बँधे हुए स्वर्णपत्रपर गर्गजीके द्वारा उग्रसेनके बल पराक्रमका उल्लेख तथा अनिरुद्धको अश्वकी रक्षाके लिये आदेश ४५२ १२- अश्वमोचन तथा उसकी रक्षाके लिये सेनापति अनिरुद्धका विजयाभिषेक................. ४५४ १३- अनिरुद्धका अन्तःपुरसे आज्ञा लेकर अश्वकी रक्षाके लिये प्रस्थान उनकी सहायता के लिये साम्बका कृतप्रतिज्ञ होना; लक्ष्मणाका उन्हें सम्मुख युद्धके लिये प्रोत्साहन देना; श्रीकृष्णके भाइयों और पुत्रोंका भी श्रीकृष्णकी आज्ञासे प्रस्थान करना तथा यादवोंकी चतुरङ्गिणी सेनाका विस्तृत वर्णन. ४५५

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( ८ ) अध्याय विषय पृष्ठ संख्या १४- अनिरुद्धका सेनासहित अश्वको रक्षाके लिये प्रयाण; माहिष्मतीपुरीके राजकुमारका अश्वको बाँधना तथा अनिरुद्धका राजा इन्द्रनीलसे युद्धके लिये उद्यत होना. ४५८ १५ - अनिरुद्ध और साम्बका शौर्य; माहिष्मती-नरेशपर इनकी विजय................ ४६० १६- चम्पावतीपुरीके राजाद्वारा अश्वका पकड़ा जाना; यादवोंके साथ हेमाङ्गदके सैनिकोंका घोर युद्ध अनिरुद्ध और श्रीकृष्णपुत्रोंके शीर्यसे पराजित राजाका उनकी शरणमें आना......... ४६१ १७- स्त्री - राज्यपर विजय और वहाँकी कुमारी रानी सुरूपा-का अनिरुद्धकी प्रिया होनेके लिये द्वारकाको जाना. ४६४ १८ - राक्षस भीषणद्वारा यज्ञीय अश्वका अपहरण तथा विमानद्वारा यादव - वीरोंकी उपलङ्कापर चढ़ाई. ४६६ १ ९- यादवों और निशाचरोंका घोर युद्ध अनिरुद्ध और भीषणकी मूर्च्छा तथा चेतना एवं रणभूमिमें बकका आगमन....... ४६७ २०- बक और भीषणकी पराजय तथा यादवोंका घोड़ा लेकर आकाशमार्गसे लौटना....... ४६ ९ २१- भद्रावतीपुरी तथा राजा यौवनाश्वपर अनिरुद्धकी विजय ४७१ २२- यज्ञके घोड़ेका अवन्तीपुरीमें जाना और वहाँ अवन्तीनरेशकी ओरसे सेनासहित यादवोंका पूर्ण सत्कार होना. ४७२ २३- अनिरुद्ध पूछनेपर सान्दीपनिद्वारा श्रीकृष्ण-तत्वका निरूपण श्रीकृष्णका परब्रह्मता एवं भजनीयताका प्रतिपादन करके जगत्से वैराग्य और भगवान्‌के भजनका उपदेश..... I २४- अनुशाल्व और यादव- वीरोंमें घोर युद्ध................. . ४७५ २५- अनुशास्यद्वारा प्रद्युनको उपहारसहित अवका अर्पण तथा बल्वल दैत्यके द्वारा उस अश्वका अपहरण......................................... ४७७ २६ नारदजीके मुखसे बल्वलके निवासस्थानका पता पाकर यादवोंका अनेक तीर्थोंमें स्नान - दान करते हुए कपिलाश्रमतक जाना और वहाँ कपिल मुनिको प्रणाम करके सागरके तटपर सेनाका पड़ाव डालना । ४७ ९ २७- यादवद्वारा समुद्रपर बाणमय सेतुका निर्माण............ ४८० अध्याय विषय पृष्ठ - संख्या २८- यादवोंका पाञ्चजन्य उपद्वीपमें जाना; दैत्योंकी परस्पर मन्त्रणा मयासुरका बल्चलको घोड़ा लौटा देनेके लिये सलाह देना; परंतु बल्वलका युद्धके निश्चयपर ही अडिग रहना........... ४८१ २ ९- यादवों और असुरोंका घोर संग्राम तथा ऊर्ध्वकेश एवं अनिरुद्धका द्वन्द्व युद्ध ४८३ ३०- ऊर्ध्वकेश और अनिरुद्धका तथा नद और गदका घोर युद्ध; ऊर्ध्वकेश और नदका वध ***...... .... ४८५ ३१ - वृकद्वारा सिंहका और साम्बद्वारा कुशाम्बा वध.... ४८७ ३२- मयको बल्वलका समझाना; बल्वलकी युद्धघोषणा; समस्त दैत्योंका युद्धके लिये निर्गमन विलम्बके कारण सैन्यपालके पुत्रका वध तथा दुःखी सैन्य-पालको मन्त्रिपुत्रका विवेकपूर्वक धैर्य बँधाना....... ४८ ९ ३३- श्रीकृष्णकी कृपासे दैत्यराजकुमार कुनन्दनके जीवनकी रक्षा.. ४ ९ १ ३४- दैत्यों और यादवोंका घोर युद्ध; बल्वल, कुनन्दन तथा अनिरुद्धके अद्भुत पराक्रम ****** ...... ४ ९ ३ ३५- बल्वलके चारों मन्त्रिकुमारोंका वध बल्वलद्वारा मायामय युद्ध तथा अनिरुद्धके द्वारा उसकी पराजय ४ ९ ५ ३६- श्रीकृष्णपुत्र सुनन्दनद्वारा दैत्यपुत्र कुनन्दनका वध.............. ४ ९ ८ ३७- भगवान् शिवका अपने गणोंके साथ बल्वलकी ओरसे युद्धस्थलमें आना और शिवगणों तथा यादवोंका घोर युद्ध: दीप्तिमान्‌का शिवगणोंको मार भगाना और अनिरुद्धका भैरवको जृम्भणास्त्रसे मोहित करना ४ ९९ ३८- नन्दिकेश्वरद्वारा सुनन्दनका वध; भगवान् शिवके त्रिशुलसे आहत हुए अनिरुद्धकी मूर्च्छा; साम्बद्वारा शिवकी भर्त्सना साम्ब और शिवका युद्ध तथा रणक्षेत्रमें भगवान् श्रीकृष्णका शुभागमन. ५०२ ३ ९- भगवान् शंकरद्वारा श्रीकृष्णका स्तवन; शिव और श्रीकृष्णकी एकता श्रीकृष्णद्वारा सुनन्दन, अनिरुद्ध एवं अन्य सब यादवको जीवनदान देना तथा बल्वलद्वारा यज्ञ सम्बन्धी अश्वका लौटाया जाना ५०४