गोविन्द दामोदर स्तोत्र बिल्वमङ्गलाचार्य — पृष्ठ 1–10

गोविन्द दामोदर स्तोत्र बिल्वमङ्गलाचार्य · Gita Press, Gorakhpur · पृष्ठ 1–10

पृष्ठ 1

गोविन्द दामोदर स्तोत्र बिल्वमङ्गलाचार्य, पृष्ठ 1 का मूल पृष्ठ
पूरे पर्दे पर देखने के लिये चित्र दबाएँ
पाठ पढ़ें पाठ छिपाएँ

IIIII G 923 CC - 0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri

पृष्ठ 2

गोविन्द दामोदर स्तोत्र बिल्वमङ्गलाचार्य, पृष्ठ 2 का मूल पृष्ठ
पूरे पर्दे पर देखने के लिये चित्र दबाएँ
पाठ पढ़ें पाठ छिपाएँ

फ II CC - 0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri

पृष्ठ 3

गोविन्द दामोदर स्तोत्र बिल्वमङ्गलाचार्य, पृष्ठ 3 का मूल पृष्ठ
पूरे पर्दे पर देखने के लिये चित्र दबाएँ
पाठ पढ़ें पाठ छिपाएँ

फ १22 श्रीविल्वमङ्गलविरचित. श्रीगोविन्ददामोदरस्तोत्र ईश्वर पठ भाषा - टीकाकार प्रभुदत्त ब्रह्मचारी मूल्य - ) CC - 0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri

पृष्ठ 4

गोविन्द दामोदर स्तोत्र बिल्वमङ्गलाचार्य, पृष्ठ 4 का मूल पृष्ठ
पूरे पर्दे पर देखने के लिये चित्र दबाएँ
पाठ पढ़ें पाठ छिपाएँ

* श्रीहरिः श्रीबिल्वमङ्गलाचार्यविरचितं गोविन्ददामोदरस्तोत्रम् ( १ ) अग्रे कुरूणामथ पाण्डवानां दुःशासनेनाहृतवस्त्रकेशा कृष्णा तदाक्रोशदनम्यनाथा गोविन्द दामोदर माधवेति ( २ ) श्रीकृष्ण विष्णो मधुकैटभारे भक्तानुकम्पिन् भगवन् मुरारे त्रायस्व मां केशव लोकनाथ गोविन्द दामोदर माधवेति ( ३ ) विक्रेतुकामाखिल गोपकन्या मुरारिपादार्पितचित्तवृत्तिः दध्यादिकं मोहवशादबोच्चद् उलूखले गायन्ति २ ] गोविन्द दामोदर माधवेति ॥ ( ४ ) सम्भृततण्डुलांश्च संघट्टयन्त्यो मुशलैः प्रमुग्धाः । गोप्यो जनितानुरागा गोविन्द दामोदर माधवेति ॥ [ ज 1 दुःशासनने जिसका कोई ॥ गोविन्द | । भक्तोंके ऊ लोकेश्वर ॥ करो, रक्षा जिन । गोपकन्याएँ मुरारिके प दही! ' इ आदि पुकार ओख कूट रही ह दामोदर! CC - 0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri

पृष्ठ 5

गोविन्द दामोदर स्तोत्र बिल्वमङ्गलाचार्य, पृष्ठ 5 का मूल पृष्ठ
पूरे पर्दे पर देखने के लिये चित्र दबाएँ
पाठ पढ़ें पाठ छिपाएँ

फ ८५ * श्रीहरिः ॐ श्री विल्व मङ्गलाचार्यविरचित गोविन्द - दामोदर - स्तोत्र ( १ ) [ जिस समय ] कौरव और पाण्डवों के सामने भरी सभामें दुःशासनने द्रौपदीके वस्त्र और बालोंको पकड़कर खींचा, उस समय जिसका कोई दूसरा नाथ नहीं है ऐसी द्रौपदीने रोकर पुकारा - ' हे गोविन्द! दामोदर! हे माधव! ' ( २ ) ' हे श्रीकृष्ण! हे विष्णो! हे मधुकैटभको मारनेवाले! हे भक्तोंके ऊपर अनुकम्पा करनेवाले! हे भगवन्! हे मुरारे! हे केशव! हे लोकेश्वर! हे गोविन्द! हे दामोदर! हे माधव! मेरी रक्षा करो, रक्षा करो! ' ( ३ ) जिनकी चित्तवृत्ति मुरारिके चरणकमलों में लगी हुई है, वे सभी गोपकन्याएँ दूध - दही बेचनेकी इच्छासे बरसे चलीं । उनका मन तो मुरारिके पास था; अतः प्रेमवश सुध - बुध भूल जाने के कारण ' दही लो दही! ' इसके स्थान में जोर - जोर से ' गोविन्द! दामोदर! माधव! ' आदि पुकारने लगीं । ( ४ ) ओखली में धान भरे हुए हैं, उन्हें मुग्धा गोपरमणियाँ मूसलोंसे कूट रही हैं और कूटते- कूटते कृष्णप्रेममें विभोर होकर ' गोविन्द! दामोदर! माधव! ' इस प्रकार गायन करती जाती हैं । [ ३ CC - 0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri

पृष्ठ 6

गोविन्द दामोदर स्तोत्र बिल्वमङ्गलाचार्य, पृष्ठ 6 का मूल पृष्ठ
पूरे पर्दे पर देखने के लिये चित्र दबाएँ
पाठ पढ़ें पाठ छिपाएँ

गोविन्द - दामोदर - स्तोत्र ( ५ ) काचित्कराम्भोजपुढे क्रीडाशुकं किंशुकरक्ततुण्डम् । अध्यापयामास गोविन्द दामोदर माधवेति ॥ ( ६ ) गृहे गोपवधूसमूहः प्रतिक्षणं पिञ्जरसारिकाणाम् । स्खलगिरं वाचयितुं प्रवृत्तो गोविन्द दामोदर माधवेति ॥ ( ७ ) पर्य्यङ्किका भाजलं कुमारं प्रस्वापयन्त्योऽखिलगोपकन्याः । जगुः प्रबन्धं स्वरतालबन्धं गोविन्द दामोदर माधवेति ॥ ( < ) रामानुजं वीक्षण के लिलोलं गोपी गृहीत्वा नवनीतगोलम् । आवालकं चालकमाजुहाव गोविन्द दामोदर माधवेति ॥ ( ९ ) विचित्रवर्णाभरणाभिरामे-ऽभिधेहि वक्त्राम्बुजराजहंसि । सदा मदीये रसनेऽग्ररङ्गे गोविन्द दामोदर माधवेति ॥ ४ ] कोई करकमलपर पढ़ा रही थी-प्रत्येक अपनी मैना गोविन्द! हे रहती थीं । पालन गोपकन्याएँ ही गाती जा हाथम क्रीडामें व्य पकड़कर पु विचि हे मुखकमल दामोदर! म CC - 0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri

पृष्ठ 7

गोविन्द दामोदर स्तोत्र बिल्वमङ्गलाचार्य, पृष्ठ 7 का मूल पृष्ठ
पूरे पर्दे पर देखने के लिये चित्र दबाएँ
पाठ पढ़ें पाठ छिपाएँ

। गोविन्द दामोदर - - स्तोत्र २० ( ५ ) कोई कमलनयनी बाला मनोविनोदके लिये पाले हुए अपने करकमलपर बैठे किंशुककुसुमके समान रक्तवर्ण चोंचवाले सुग्गेको पढ़ा रही थी— पढ़ो तो तोता! ' गोविन्द! दामोदर! माधव! ' ( ६ ) प्रत्येक घरमें समूह - की समूह गोपाङ्गनाएँ पींजरोंमें पाली हुई अपनी मैनाओंसे उनकी लड़खड़ाती हुई वाणीको क्षण - क्षणमें ' हे गोविन्द! हे दामोदर! हे माधव! ' इत्यादि रूपसे कहलाने में लगी रहती थीं । ( ७ ) पालनेमें पौढ़े हुए अपने नन्हे बच्चेको सुलाती हुई सभी गोपकन्याएँ ताल - स्वरके साथ ' गोविन्द! दामोदर! माधव! इस पदको ही गाती जाती थीं । ( " ) हाथमें माखनका गोला लेकर मैया यशोदाने आँखमिचौनीकी क्रीडामें व्यस्त बलरामके छोटे भाई कृष्णको बालकोंके बीचसे पकड़कर पुकारा – ' अरे गोविन्द! अरे दामोदर! अरे माघव! ' ( ९ ) विचित्र वर्णमय आभरणोंसे अत्यन्त सुन्दर प्रतीत होनेवाली हे मुखकमलकी राजहंसीरूपिणी मेरी रसने! तू सर्वप्रथम ' गोविन्द! दामोदर! माधव! ' इस ध्वनिका ही विस्तार कर । [ ५ CC - 0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri

पृष्ठ 8

गोविन्द दामोदर स्तोत्र बिल्वमङ्गलाचार्य, पृष्ठ 8 का मूल पृष्ठ
पूरे पर्दे पर देखने के लिये चित्र दबाएँ
पाठ पढ़ें पाठ छिपाएँ

गोविन्द - दामोदर - स्तोत्र ( १० ) अङ्काधिरूढं शिशुगोपगूढं स्तनं धयन्तं कमलैककान्तम् । सम्बोधयामास मुदा यशोदा गोविन्द दामोदर माधवेति ॥ ( ११ ) क्रीडन्तमन्तर्ब्रजमात्मजं स्वं समं चयस्यैः पशुपालवालैः । प्रेम्णा यशोदा प्रजुहाव कृष्णं गोविन्द दामोदर माधवेति ॥ ( १२ ) यशोदया गाढमुलूखलेन गोकण्ठपाशेन निवध्यमानः । रुरोद मन्द नवनीतभोजी गोविन्द दामोदर माधवेति ॥ ( १३ ) निजाङ्गने कङ्कणकेलिलोलं गोपी गृहीत्वा नवनीतगो लम् । आमर्दयत्पाणितलेन नेत्रे गोविन्द दामोदर माधवेति ॥ ( १४ ) गृ गृहे गोपवधूकदम्वाः सर्वे मिलित्वा समवाययोगे । पुण्यानि नामानि पठन्ति नित्यं गोविन्द दामोदर माघवेति ॥ ६ ] CC - 0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri अपनी भगवान् लक्ष्म इस प्रकार बु ऐ मेरे माधव अपने प्यारे पुत्र कृष ' अरे ओ गोवि अधिक रस्सीसे खूब माखनभोग ' गोविन्द! द श्रीनन्द खेलने में लगे कमलनयनोंको का गोला लेक [ लो देखो, व्रजके झुंड की झुंड दामोदर, मा

पृष्ठ 9

गोविन्द दामोदर स्तोत्र बिल्वमङ्गलाचार्य, पृष्ठ 9 का मूल पृष्ठ
पूरे पर्दे पर देखने के लिये चित्र दबाएँ
पाठ पढ़ें पाठ छिपाएँ

गोविन्द - दामोदर - स्तोत्र ( १० ) अपनी गोद में बैठकर दूध पीते हुए बालगोपालरूपधारी भगवान् लक्ष्मीकान्तको लक्ष्य करके प्रेमानन्दमें मग्न हुई यशोदा मैया इस प्रकार बुलाया करती थीं- ' ऐ मेरे गोविन्द! ऐ मेरे दामोदर! ऐ मेरे माधव! जरा बोलो तो सही । " ( ११ ) अपने समवयस्क गोपबालकों के साथ गोष्ठ में खेलते हुए अपने प्यारे पुत्र कृष्णको यशोदामैयाने अत्यन्त स्नेहके साथ पुकारा-' अरे ओ गोविन्द! ओ दामोदर! अरे माधव! [ कहाँ चला गया? ], ( १२ ) अधिक चपलता करनेके कारण यशोदामैयाने गौ बाँधने की रस्सीसे खूब कसकर वे माखनभोगी कृष्ण ' गोविन्द! दामोदर! श्रीनन्दनन्दन खेलनेमें लगे हुए हैं, कमलनयनोंको अपनी ओखलीमें उन घनश्यामको बाँध दिया, तब तो धीरे - धीरे [ आँखें मलते हुए ] सिसक - सिसककर माधव! ' कहते हुए रोने लगे । ( १३ ) अपने ही घरके आँगन में अपने हाथके कंकणसे उसी समय मैयाने धीरेसे जाकर उनके दोनों हथेलीसे मूँद लिया तथा दूसरे हाथमें नवनीत-का गोला लेकर प्रेमपूर्वक कहने लगी- ' गोविन्द! दामोदर! माधव! [ लो देखो, यह माखन खा लो ] । ' ( १४ ) व्रजके प्रत्येक घर में गोपाङ्गनाएँ एकत्र होनेका अवसर पाने पर झुंड की झुंड आपस में मिलकर उन मनमोहन माधव के ' गोविन्द, दामोदर, माधव ' इन पवित्र नामको पढ़ा करती हैं । [ ७ CC - 0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri

पृष्ठ 10

गोविन्द दामोदर स्तोत्र बिल्वमङ्गलाचार्य, पृष्ठ 10 का मूल पृष्ठ
पूरे पर्दे पर देखने के लिये चित्र दबाएँ
पाठ पढ़ें पाठ छिपाएँ

गोविन्द - दामोदर - स्तोत्र ( १५ ) मन्दारमूले वदनाभिरामं विम्बाधरे पूरितवेणुनादम् । गोगोपगोपीजनमध्यसंस्थं गोविन्द दामोदर माधवेति ॥ ( १६ उत्थाय गोयो s पररात्रभागे स्मृत्वा यशोदा सुतबालकेलिम् । गायन्ति प्रोच्चैर्दघि मन्थयन्त्यो गोविन्द दामोदर माधवेति ॥ ( १७ ) जग्धोऽथ दत्तो नवनीतपिण्डो गृहे यशोदा विचिकित्सयन्ती । उवाच सत्यं वद हे मुरारे गोविन्द दामोदर ( १८ ) अभ्यर्च्य गेहं युवतिः प्रवृद्ध-प्रेमप्रवाहा दधि गायन्ति गोप्योऽथ सखीसमेता गोविन्द दामोदर ( १ ९ ) क्वचित् प्रभाते दधिपूर्णपात्रे निक्षिप्य मन्थं युवती आलोक्य गानं विविधं करोति गोविन्द दामोदर ८ ] माधवेति ॥

निर्ममन्थ ।

माधवेति ॥

मुकुन्दम् ।

माधवेति ॥

CC - 0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri * जिनक समान अरुण कदम्बके तल भगवान् का हुए सदा स्म व्रजाड़ बालक्रीड़ाओं दामोदर! म [ द माखनभोगी खाया कुछ आपपर सन्दे हे माधव! ठ जिसक घरको लीप सखियाँ मि करने लगीं किसी मथानीको मनमोहन म गयी और कहकर तरह गो ०