मनुस्मृति १ हरगोविन्द शास्त्री — पृष्ठ 61–70
मनुस्मृति १ हरगोविन्द शास्त्री · पृष्ठ 61–70
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विषयानुक्रमणी ५१ विषय पृ ० सं ० | विषय पृ ० सं ० भूमि पर गिरा उच्छिष्टभागी श्राद्ध में दशमी आदि तिथियों दास - समूह ४१६ की श्रेष्ठता ४३४ सपिण्डीकरण तक विश्वेदेववर्जित युग्मऔरअयुग्म तिथ्यादि में ब्राह्मणभोजनादि ४१६ श्राद्ध करने का फल ४३४ सपिण्डीकरण के बाद पार्वणश्राद्ध ४१७ श्राद्ध में कृष्णपक्ष तथा अपराह्न आशीर्वचन ४२३ ४२३ शूद्र को उच्छिष्टान्न देने का निषेध ४२१ श्राद्ध भोजनोपरान्त स्त्री- सम्भोग का निषेध ४२२ तृप्त ब्राह्मणों को विसर्जित करना ब्राह्मणों का ' स्वधा ' कहकर बचे अन्न को ब्राह्मणाज्ञानुसार काम एकोद्दिष्टादि श्राद्ध में तृप्ति - प्रश्न ४२४ | विघस तथा अमृत को भोजन करना ४३ ९ काल की श्रेष्ठता ४३५ श्राद्ध में अपसव्य होना तथा कुशादि लेना ४३५ ४२२ रात्रि आदि में श्राद्ध का निषेध ४३६ प्रतिमास श्राद्ध नहीं कर सकने पर ४३७ लौकिकाग्नि में श्राद्ध - सम्बन्धी हवन का निषेध ४३८ ४२३ | तर्पण का फल ४३ ९ पिता आदि वसु आदि देवताओं के स्वरूप ४३ ९ में लाना की विधि श्राद्ध कर्मों में श्रेष्ठ सम्पत्तियाँ देव कार्य में सम्पत्तियाँ ४२५ | अध्याय का उपसंहार ४४० हविष्य पदार्थ ४२५ चतुर्थ अध्याय ब्राह्मणों को भेजकर पितरों से वर याचना शेष पिण्ड गौ आदि को खिलाना उक्त विषय में अन्याचार्यों का मत ४२६| ब्रह्मचर्य के बाद गृहस्थाश्रम ४२७ में निवास ४४१ ४२७ पुत्रार्थिनी स्त्री को मध्यम पिण्डका ‘ शिलोञ्छ ' आदि वृत्तियों से जीवन ४४१ | उचित धनसंग्रह करना ४४२ भोजन करना उक्त कर्म से आयुष्य आदि गुणों ४२८ | ऋत, अमृत आदि से जीवन ' ऋत ' आदि के लक्षण ४४३ ४४३ सेयुक्त पुत्र की उत्पत्ति ४२८ | अन्नादि सञ्चय की मात्रा ४४६ बचे हुए अन्न से गृह बलि देना ४२ ९ पितरों के तृप्तिकर पदार्थ मघादि नक्षत्र में मधुयुक्त वस्तु बाद में जाति वालों को भोजन कराना ४२८ कुसूलधान्यकादि में उत्तरोत्तर ४३० | उक्त चतुर्विध ब्राह्मणों की जीविका ४४८ | शिलोञ्छजीवी का अग्निहोत्रादि-की श्रेष्ठता ४४७ से श्राद्ध ४३२ श्रद्धायुक्त विधिवत् श्राद्ध मात्र कर्तव्य | जीविका के लिये निन्दित वृत्ति ४५० का अक्षयत्व ४३४ का निषेध ४५१
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५२ विषय सन्तोष की प्रशंसा अन्यतम व्रत का धारण वेदविहित कर्मानुष्ठान मनुस्मृतिः पृ ० सं ० | विषय पृ ० सं ० ४५२ मिट्टी, गौ आदि को ४७० ४५३ | रजस्वला - संभोग का निषेध ४७१ ४५२ दाहिने करके जाना गीतादि से धनोपार्जन का निषेध ४५३ रजस्वला सम्भोग से बुद्ध्यादि हानि ४७१ इन्द्रिय - विषयों में आसक्ति का निषेध ४५४रजस्वला के संसर्गत्याग से वेदार्थ - विरुद्ध कम ४५४ बुद्ध्यादि - वृद्धि ४७१ वय आदि के अनुसार वेषादिधारण स्त्री के साथ भोजनादि निषेध ४५५ आंजन लगाती हुई आदि स्त्री को ४७२ सर्वदा शास्त्रावलोकन ४५५ देखने का निषेध ४७३ शास्त्रावलोकन से ज्ञाननैर्मल्य ४५६ एक वस्त्र पहने भोजननिषेध आदि ४७३ पञ्चयज्ञों का यथाशक्ति पालन ४५६| मल - मूत्र त्याग की विधि ४७५ इन्द्रिय यज्ञ ४५७ मल-न - मूत्र - त्याग मेंसमयानुसार वाक - यज्ञ ४५८ दिग्विचार ४७५ ज्ञानयज्ञ ४५८ | अन्धकारादि में दिग्विचार सन्ध्योपासन, दर्शपौर्णमास श्राद्ध४५ ९ का त्याग ४७६ नवसस्येष्टि के बिना नवान्न अग्नि आदि की ओर मुखकर भोजन निषेध ४६२ नवसस्येष्टि आदि यज्ञ के नहीं मल - मूत्र त्याग का निषेध ४७६ अग्नि को मुख से फूँकने करने पर ४६३ आदि का निषेध ४७७ यथाशक्ति अतिथिपूजन ४६३ अग्नि को खाट आदि के नीचे पाखण्डी आदि के सत्कार रखने आदि का निषेध ४७७ का निषेध ४६३ पानी में पेशाब आदि करने का निषेध ४७८ वेद - स्नातकादि का पूजन ४६४ ब्रह्मचारी आदि के लिये अन्नदान सूने घर में अकेले सोने आदि ४६५ का निषेध ४७८ क्षत्रियादि से धन लेना ४६६ भूख आदि से दुःखी होने अग्निहोत्रादि में दाहिने हाथ का निषेध को बाहर रखना ४७ ९ ४६८ स्वाध्यायादि में तत्परता जलादि पीती हुई गाय आदि ४६८ के मना करने का निषेध ४७ ९ दण्ड तथा कमण्डलु आदि अधार्मिक ग्राम में निवासादि का ग्रहण ४६८ काल विशेष में सूर्यदर्शन का निषेध ४७० वत्स आदि की रस्सी के का निषेध ४८० | शूद्र के राज्यादि में लङ्घनादि का निषेध निवास का निषेध ४८० ४७०
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विषयानुक्रमणी ५३ विषय रस आदि निचोड़कर खाने आदि का निषेध व्यर्थ चेष्टा तथा अंजलि से पृ ० सं ० | विषय पृ ० सं ० | बाल पकड़ने आदि का निषेध ४ ९ ४ ४८१ राजादि से दान लेने का निषेध ४ ९ ५ वधिकादि की उत्तरोत्तर नीचता ४ ९ ५ पानी पीने आदि का निषेध४८१ दान में राजा की अत्यधिक नाचने - गाने आदि का निषेध ४८२ निम्नश्रेणी ४ ९ ६ काँसे के बर्तन में पैर धोने आदि का निषेध दूसरे के पहने हुए जूता आदि पहनने का निषेध गमन के अयोग्य वाहन लोभी राजा के दान लेने से ४८२ प्राप्य नरकों के नाम ४ ९ ६ गमन के योग्य वाहन बालातप तथा शवधूमादि सेवन का निषेध | विद्वान् को भी राजप्रतिग्रह का निषेध ४ ९ ७ ४८४ | सन्ध्योपासन से दीर्घायु की प्राप्ति ४ ९९ ४ ९९ ५०० पक्षिणी रात्रि में वेदाध्ययन निषेध ५०० ४८३ ब्राह्ममुहूर्त में उठना ४८३ नित्यक्रिया सन्ध्यादि कर्म ४ ९ ७ ४ ९ ८ | श्रावणी उपाकर्म ४८४ | वेदोत्सर्ग कर्म मिट्टी का ढेला आदि मसलने का निषेध ४८५ शुक्लपक्ष में वेद तथा कृष्णपक्षमें ढेला मसलने वाले आदि का नाश हठ चर्चा और माला - धारणादि निषेध बिना द्वार के रास्ते से घर में प्रवेश निषेध पाशा खेलने आदि का निषेध रात्रि में तिलयुक्त पदार्थ आदि का भोजननिषेध ४८७ आकालिक अनध्याय ४८७ सर्वकालिक अनध्याय ४८८ सन्ध्याकाल में गरजने आदि ४८८ | ग्राम - नगरादि में नित्य अनध्याय ५०४ वेदाङ्ग अध्ययन ५०१ ४८६ | अस्पष्ट अध्ययनादि का निषेध गायत्र्यादि का नित्य अध्ययन ५०१ ५०१ ४८६ | अनध्याय ५०२ वर्षाकालिक अनध्याय ५०२ ५०२ ५०३ पर अनध्याय ५०३ पैर धोकर भोजन करना आदि दुर्गम स्थान में जाने का निषेध केश या राख आदि की ढेर पर ४८ ९ मृतकयुक्त ग्रामादि में अनध्याय जलादि में अनध्याय ५०५ ५०५ ठहरने का निषेध ४८ ९ पतितादि के साथ बैठने का निषेध ४८ ९ शूद्र को व्रतादि देने का निषेध ४ ९ ० शूद्र को धर्मोपदेश देने से दोष ४ ९ ३ दोनों हाथों से शिर खुजलाने का निषेध ४ ९ ४ एकोद्दिष्ट के निमन्त्रण लेने आदि में अनध्याय ५०६ श्राद्ध के गन्धलेप रहने तक अनध्याय ५०६ | लेटने आदि की अवस्थाओं में अनध्याय ५०७
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५४ विषय मनुस्मृति: पृ ० सं ० | विषय नीहार - पतनादि में अनध्याय पृ ० सं ० अमावास्यादि में अध्ययन करने से दोष धूल्यादि की वृष्टि में अनध्याय ५०७ | दूसरे के कार्य को अच्छा कहना ५१ ९ अज्ञात व्यक्ति के साथ गमन करने का निषेध ५०७ ५२० ५०८ हीनाङ्ग आदि की निन्दा का निषेध ५२० जूठे मुँह गौ आदि के स्पर्श का निषेध ५२० उक्त स्पर्श करने पर प्रायश्चित्त ५२१ इन्द्रियों तथा गुप्त रोगों के स्पर्श का निषेध ५२१ युक्त रहना ५२२ | उक्ताचरण से लाभ ५२२ श्मशानादि के पास में अनध्याय ५०८ श्राद्ध का दान लेने पर अनध्याय ५०८ चौरादि के उपद्रव में अनध्याय ५० ९ उपाकर्मादि में त्रिरात्र अनध्याय ५० ९ घोड़ा आदि पर चढ़े वेदाध्ययन का निषेध ५१० सामवेदध्वनिकाल में वेदान्तर का अनध्याय तीन वेदों की देवतायें गायत्री - उ - जप के बाद वेदपाठ पशु आदि बीच में आने पर अनध्याय दो अनध्याय मुख्यतः त्याज्य अमावस्यादि को स्त्री - सम्भोग सर्वथा त्याग तैल - मर्दन आदि के लिए वर्ज्य काल रागस्नानविषयक निषेध देव - प्रतिमादि की छाया के उल्लंघन का निषेध चौराहे पर ठहरने का निषेध उबटन आदि की मैल पर ठहरने का निषेध शत्रु आदि की संगति का निषेध परस्त्री - निन्दा क्षत्रिय तथा ब्राह्मणादि के अपमान का निषेध आत्मापमान का निषेध सत्य तथा प्रिय भाषण | मङ्गल द्रव्य तथा आचार से ५११ | गायत्री आदि के जप की श्रेष्ठता ५२३ पूर्वजाति स्मरण से वेदाभ्यास ५११ | सतत वेदाभ्यासादि से पूर्व-५१२ जातिस्मरण ५२३ ५१२ द्वारा मोक्षलाभ ५२३ ५१३ | हवन अष्टकाश्राद्धादि कर्तव्य ५२४ अग्निगृह से दूर मूत्रादि का त्याग ५२५ ५१३ | शौच, दतुवन आदि पूर्वाह्न में कर्तव्य ५२५ पर्वों में देवादि दर्शन ५१४ | वृद्धजनों का अभिवादनादि ५१४ | श्रुति - स्मृति - प्रतिपादित स्व - धर्म का पालन ५१५ आचार की प्रशंसा ५१६ | दुराचार की निन्दा | सदाचारी की सौ वर्ष आयु ५२६ ५२६ ५२६ ५२६ ५२७ ५२७ ५१६ | पराधीन कार्य का त्याग तथा ५१७ स्वाधीन कार्य की कर्तव्यता ५२७ ५१७ | उक्त विषय में हेतु कथनपूर्वक सुख दुःख का लक्षण ५१७ | चित्त के सन्तोषप्रद कार्य की ५१८ कर्तव्यता ५२७ ५२८ ५१ ९ | आचार्यादि कि हिंसा का निषेध ५२८
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विषयानुक्रमणी ५५ विषय नास्तिक्यादि का निषेध पृ ० सं ० | विषय पृ ० सं ० ५२ ९ प्रायश्चित्त में वञ्चना का निषेध ५४५ दूसरे को मारने आदि का निषेध५२ ९ कपट से व्रताचरण की निन्दा ५४५ ब्राह्मण पर डण्डा उठाने का निषेध ब्राह्मण के ताड़न से निकृष्ट योनि की प्राप्ति ५३० कपट से व्रति चिह्न धारण करने की निन्दा ५४६ ब्राह्मण के देह से रक्त गिराने पर ५३० | दूसरों के बनवाये हुए जलाशयों में स्नान करने में दोष ५४६ दुःख की प्राप्ति ५३० | दूसरों की सवारी, शय्या आदि अधार्मिक आदि को सुख की अप्राप्ति ५३१ के उपभोग का निषेध ५४७ अधर्म से मन को हटाना ५३२ | नदी आदि में स्नानादि का विधान ५४७ अधर्म से धीरे - धीरे समूल नाश ५३२ यम सेवन की प्रधानता ५४८ अधर्मकर्ता के पुत्रपौत्रादि तक अवश्य फलप्राप्ति नियम के लक्षण ५५० ५३३ | अश्रोत्रियादि के द्वारा कराये गये अधर्मोन्नति के बाद समूल नाश सत्यभाषणादि तथा शिष्य-५३३ यज्ञ में भोजन निषेध ५५० अभक्ष्य अन्न ५५१ शासनादि ५३४ | चारों वर्णों के अन्नों का स्वरूप ५५८ ५३५ अभोज्य अन्न खाने पर प्रायश्चित्त ५५ ९ शूद्र से पक्वान्न लेने का निषेध ५६० चन्द्र - सूर्य ग्रहण में भोजन का निषेध ५६० कृपण श्रोत्रिय तथा सूदखोर के ५३७ अन्न की समानता ५६१ धर्मविरुद्ध अर्थ - कामादि का त्याग हस्तचापलादि का निषेध ५३५ शास्त्रों के विविध विकल्पों में कर्तव्य ५३६ ऋत्विज आदि से बकवाद का निषेध ५३७ उक्त कार्य की प्रशंसा दान लेने से ब्रह्मतेज का क्षय विधि को न जानने वाले ५३ ९ | श्रद्धा से किये गये इष्ट तथा पूर्त का अक्षयफल ५६२ दान लेने का निषेध ५३ ९ | श्रद्धा से दान करने का फल ५६३ मूर्ख को स्वर्णादि - दान लेने | जल आदि के दानं करने का का निषेध ५४० पृथक् - पृथक् फल ५६४ उक्त विषय में दृष्टान्त ५४० भावानुसार दानफल ५६७ बैडालव्रतिक आदि को दान सविधि दान लेने और देने देने का निषेध ५४१ की श्रेष्ठ ५६७ उक्त विषय मेंदृष्टान्त ५४२ | तप: सिद्धि आदि से विस्मयादि बैडालव्रतिका लक्षण ५४३ का निषेध ५६७ बकव्रतिक का लक्षण ५४४ | उक्त कार्य से विपरीताचरण बकव्रतिक तथा बैडालव्रतिक का फल ५६८ को नरकप्राप्ति ५४५ | धीरे - धीरे धर्म का सञ्चय करना ५६८
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मनुस्मृतिः ५६ विषय पृ ० सं ० | विषय पृ ० सं ० धर्म की प्रशंसा ५६ ९ | वन्य पशु तथा स्त्री के दुग्धादि धर्मात्मा को स्वर्गादि की प्राप्ति ५७० के भक्षण का निषेध ५८६ शुक्तों में दधि आदि भक्ष्य ५८७ आममांसभक्षी तथा ग्राम्यपक्षियों के मांसभक्षण का निषेध ५८८ ५७३ गोरैया आदि के भक्षण का निषेध ५८८ ५७४ | बकादि के मांस भक्षण का निषेध ५ ९ ० उत्तम के साथ सम्बन्ध करना ५७० काष्ठ अन्न आदि सबसे ग्राह्य ५७२ पापियों की भिक्षा लेने की मर्यादा ५७२ उक्त भिक्षा न लेने में दोष वैद्य आदि से भिक्षा मिलने पर गुरु आदि के लिए भिक्षाग्रहण ५७४ अपने लिये सज्जनों से भिक्षा ग्रहण ५७५ अन्न भोजन करने योग्य शूद्र ५७५ शूद्रों का आत्मनिवेदन करना ५७५ आत्मसमर्पण में असत्य भाषण से दोष असत्यभाषी सर्वापहारक योग्य पुत्र में गृह - कार्य का समर्पण ब्रह्मचिन्तन अध्याय का उपसंहार उक्त वृत्ति के आचरण से ब्रह्मलोक की प्राप्ति पञ्चम अध्याय मछली के मांस के भक्षण का निषेध ५ ९ १ हव्यकव्य में पाठीनादि भक्ष्य ५ ९ १ भक्ष्य मृग - पक्षी तथा पञ्चनखादि का अपवाद ५ ९ २ ५ ९ ३ | उक्त वचन का प्रतिप्रसव ५७६ | छत्राक आदि के भक्षण का निषेध ५ ९ ३ ५७७ अभक्ष्य भक्षण करने पर प्रायश्चित्त ५ ९ ४ ५७७ वर्ष में एक कृच्छ्र व्रत ५७८ की अवश्यकर्तव्यता ५ ९ ४ ५७८ | यज्ञार्थ विहित पशु - पक्षी का वध ५ ९ ५ | पर्युषित ( बासी ) भोज्य द्रव्य स्थावर - जङ्गमादिकी ब्रह्मकल्पित ५ ९ ३ ५७ ९ प्रोक्षित आदि मांस का भक्षण ५ ९९ महर्षियों का मनुष्य की मृत्यु खाद्यता ६०२ | उक्त विषयका स्पष्टीकरण ६०२ का कारण पूछना ५८१ भृगु का महर्षियों के प्रश्न भक्ष्य को प्रतिदिन खाने पर भी दोषाभाव का उत्तर देना ६०३ ५८१ ब्राह्मणों की मृत्यु में वेदानभ्यास प्रोक्षितादि मांस के भक्षण का विधान ६०३ आदि कारण ५८१ लहसुन आदि के भक्षण का निषेध५८२ विधिरहित मांस भक्षण का निषेध ६०४ श्राद्ध तथा मधुपर्क में नियुक्त होकर गोंद आदि के भक्षण का निषेध ५८३ वृथा कृसर - मांसादि के भक्षण का निषेध ५८३ उष्टी आदि के दूध - भक्षण का माँस भक्षण आवश्यक ६०५ अप्रोक्षित - मांसभक्षण का निषेध ६०६ पशुभक्षण की अधिक आकाङ्क्षा में ६०६ व्यर्थ पशुहिंसा से दोष ६०७ निषेध यज्ञार्थ ५८५ पशुवधमें दोषाभाव ६०७
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विषय यज्ञार्थ मारे गये पशु आदि की जन्मान्तर में जात्युन्नति विषयानुक्रमणी पृ ० सं ० | विषय अशौचावस्था में नियम ६०८ | विदेश में मरने पर अशौच का उपक्रम ५७ पृ ० सं ० ६३२ ६३३ ६३५ पुनः ६१० बालक तथा समानोदक के विदेश में मरने पर पशुवधके योग्य कार्य ६० ९ वेदविरुद्ध हिंसा का सर्वत्र निषेध अपने की इच्छा से सुख पशुवध मेंदु: ख प्राप्ति दोष अहिंसा से सुखप्राप्ति मांस भक्षण का पुनः निषेध अनुमति - दाता आदि भी हिंसक मांस भक्षण का त्याग अश्वमेध के तुल्य ' मांस ' शब्द की निरुक्ति प्रेतशुद्धि तथा द्रव्यशुद्धि के वर्णन का उपक्रम सपिण्डों को दश दिन का अशौच सपिण्ड तथा समानोदक के लक्षण मरण के समान जन्म में भी अशौच जननाशौच तथा मरणाशौच में विभिन्नता वीर्यपात में शुद्धिविचार ६११ | अशौच तथा सूतक के बीच में ६११ अशौच तथा सूतक होने पर ६३५ ६१२ | आचार्यादि के मरने पर अशौचकाल ६३५ ६१३ श्रोत्रिय, मामा आदि के मरने पर अशौच काल ६३६ ६१५ | राजा आदि के मरने पर अशौच काल ६३६ ६१६ | चतुर्वर्ण का शुद्धिकाल ६३७ चाण्डालादिका स्पर्श कर स्नान ६१७ से शुद्धि ६४० ६१८ अपवित्र - दर्शन होने पर शुद्धि ६४१ ६२१ मानव की हड्डी के स्पर्श करने ६२३ पर शुद्धि ६४२ | तिलाञ्जलिदान के अयोग्य स्त्रियाँ ६४५ ६२४ | आचार्यादि को तिलाञ्जलि - दान ६२५ आवश्यक ६४८ वर्णानुसार शव को बाहर ६२६ निकालने के द्वार ६४८ राजा आदि को अशौचा भाव ६४ ९ ६४ ९ शव - स्पर्श करने वालों का शुद्धि - विचार गुरु आदि के शव स्पर्श करने वाले शिष्य का शुद्धिकाल गर्भस्राव में स्त्रीशुद्धि उपनयन से पूर्व बालक के मरने पर अशौच दो वर्ष से कम आयु वाले मृत बालक का ग्राम से बाहर प्रक्षेप उक्त विषय में अन्य विकल्प सहपाठी के मरने तथा समानोदक के यहाँ जन्म होने पर ६२७ राजा की तात्कालिक शुद्धि ६२७ | तत्काल शुद्धि के योग्य अन्य व्यक्ति ६५० उक्त शुद्धि में कार ६५० • ६२८ | युद्ध में हत की तत्काल शुद्धि ६५१ प्रेतकृत्य के बाद वर्णानुसार ६२ ९ स्पृश्य पदार्थ ६३० | असपिण्ड के शव को बाहर निकालने पर शुद्धि ६३१ | उनके अन्न खाने पर दस दिन शुद्धि कन्या के मरने पर अशौच - निर्णय ६३१ । ६५१ ६५२ ६५२
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५८ विषय शव के पीछे चलने पर शुद्धि बान्धवों की उपस्थिति में शूद्र से विप्र शव का अनिर्हरण मनुस्मृतिः पृ ० सं ० | विषय ६५३ द्वादश मल पृ ० सं ० ६७४ शूद्ध्यर्थ मिट्टी आदि लेने की संख्या ६७४ ६५३ ब्रह्मचारी आदि के लिये शुद्धि ६७५ ६५३ | आचमन - विधि ६७६ देहियों की शुद्धि के कारण धन शुद्धि की श्रेष्ठता ६५४ | शूद्रों के लिए प्रतिमास मुण्डन तथा शुद्धि के अन्यान्य साधन ६५५ द्विज का उच्छिष्ट भोजन ६७६ मलिनपात्र आदि की शुद्धि शरीर आदि की शुद्धि ६५५ थूक की छोटी बूँदों आदि से ६५५ उच्छिष्ट नहीं होना ६७७ द्रव्यशुद्धि. मणि, सुवर्णादि की शुद्धि ६५६ अजा, गौ, ब्राह्मणादि को अङ्ग-६५७ भेद से शुद्धता ६७७ घृतादि लेपरहित पात्रादि की शुद्धि सोने - चाँदी को जल मात्र से शुद्धि में कारण ताम्रादि पात्रों की शुद्धि ६६० की शुद्धता ६६१ | दाँतों में अँटके अन्न की शुद्धता ६७८ ६६१ | भोजन लिए हुए के द्वारा उच्छिष्ट व्यक्ति का स्पर्श होने पर शुद्धि ६७८ ६५ ९ गौ आदि की अङ्ग - भेद से पैर पर गिरी कुल्ले की बूँदों ६७७ ६७८ घृत, शय्यादि की शुद्धि बालक आदि के वस्त्रों की शुद्धि६६२ चमसादि यज्ञपात्रों की शुद्धि चरु - स्रुवादि यज्ञपात्रों की शुद्धि चमड़े तथा बांस के पात्र आदि ६६२ | वमनादि करने पर शुद्धि ६७ ९ ६६३ सोने आदि के बाद शुद्धि ६८० स्त्री - धर्म - कथन ६८० की शुद्धि ६६४ स्त्रियों का कर्तव्य ६८१ रेशमी आदि वस्त्रों की शुद्धि ६६४ | स्त्रियों की स्वतंत्रता का अभाव ६८१ शङ्ख आदि की शुद्धि ६६५ स्त्रियों के स्वतन्त्र होने से हानि ६८२ तृण आदि की शुद्धि ६६५ सदा प्रसन्नता आदि रखना ६८२ शुद्ध न होने योग्य मिट्टी के पात्र ६६६ पति सेवा स्त्री का कर्तव्य ६८२ भूमि की शुद्धि ६६६ स्वामित्व में कारण ६८३ पक्षी के खाये फलादि की शुद्धि६६७ पति - प्रशंसा ६८४ गन्धयुक्त द्रव्यादि की शुद्धि तीन पवित्र वस्तु जलशुद्धि ६६८ | स्त्रियों के लिये पृथक् यज्ञादि ६६ ९ का निषेध ६८४ ६७० पति के जीवित रहते व्रतादि नित्य शुद्ध पदार्थ ६७० करने से दोष ६८५ अग्नि आदि की नित्य शुद्धता ६७२ | पति के विरुद्ध आचरण का निषेध ६८५ स्पर्श में नित्य शुद्ध पदार्थ गुदा आदि की शुद्धि ६७२ विधवा के कर्तव्य ६८६ ६७३ | ब्रह्मचर्य से स्वर्ग प्राप्ति के उदाहरण ६८७
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विषयानुक्रमणी ५ ९ विषय परपुरुष - गमन - निन्दा व्यभिचार से हानि पातिव्रत्य का फल स्त्री के मरने पर श्रौताग्नि से दाहक्रिया ६८ ९ फिर विवाह के विषय में निर्णय ६८ ९ पृ ० सं ० | विषय पृ ० सं ० ६८८ | उक्त नियम पालन से ब्रह्म प्राप्ति ७०६ ६८८ | परिब्राजक ( संन्यास ) काल ७०८ ६८ ९ | ब्रह्मचर्यादि के क्रम से ही संन्यास ग्रहण ७० ९ देवर्षि पितृ ऋण से मुक्त होने पर षष्ठ अध्याय ही संन्यास ग्रहण ७० ९ अन्यथा आचरण से दोष ७११ वानप्रस्थाश्रम में प्रवेश ६ ९ १ प्राजापत्य यज्ञानुष्ठान के बाद वानप्रस्थाश्रम काल ६ ९ १ संन्यासग्रहण ७११ सस्त्रीक अथवा अस्त्रीक अभयदानफलम् ७१२ वानप्रस्थाश्रम ग्रहण ६ ९ २नि: स्पृह होकर संन्यास ग्रहण ७१२ अग्निहोत्र के साथ वानप्रस्थाश्रम ग्रहण ६ ९ २ एकाकी रहना ७१३ वन्य - अन्य - फलादि से पञ्च-| संन्यासी के नियम ७१३ महायज्ञ करना ६ ९ ३ मुक्त के लक्षण ७१४ मृगचर्म, चीर तथा जटादि का धारण पञ्चमहायज्ञ तथा अतिथिसत्कार वानप्रस्थ के अन्य सामान्य नियम ६ ९ ३ ६ ९ ३ जीवन - मरण की इच्छा का त्याग ७१४ संन्यासी का आचरण ७१५ ६ ९ ४ सब से बैरभाव का त्याग ७१६ मधु मांसादि का · त्याग ६ ९ ८ क्रोध तथा व्यर्थ वचन का त्याग ७१६ पूर्वसञ्चित अन्नादि का त्याग ६ ९९ भिक्षा ग्रहण में आडम्बर का त्याग ७१७ हल जोतने से उत्पन्न अन्न तथा बहुभिक्षुकादि युक्त गृह में ६ ९९ ग्राम्य मूल - फल का त्याग अग्निपक्व भोजी आदि का विधान७०० भिक्षापात्र - दण्डादि सहित भिक्षाचरण ७१८ भिक्षार्थ गमननिषेध ७१८ अन्नादि के सञ्चय का प्रमाण ७०० संन्यासी का अधातुकीय पात्र ७१८ भोजन का समय ७०० एक बार भिक्षाग्रहण ७१ ९ भूमि पर लेटना आदि ७०२ भिक्षा का समय ७१ ९ ऋतु के अनुसार दिनचया ७०२ भिक्षा के मिलने या न मिलने पर त्रिकाल - देवर्षि - पितृ - तर्पण तथा हर्ष या विषाद का त्याग ७२० स्वदेह - शोषण ७०३ विशिष्ट आदर - सत्कार के साथ अग्निहोत्र की समाप्ति ७०३ भिक्षाग्रहण का निषेध ७२० पेड़ के नीचे भूमि पर शयन ७०४ इन्द्रिय - निग्रह ७२१ भिक्षाचरण ७०४ इन्द्रिय - निग्रह आदि से मोक्षलाभ ७२१ वेद का स्वाध्याय महाप्रस्थान ७०५ | इन्द्रिय - निरोधक विषय वैराग्य के ७०६ लिये संसारचिन्तन ७२१
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६० मनुस्मृतिः विषय अधर्म से दुःख तथा धर्म से सुख की उत्पत्ति ब्रह्म की सूक्ष्मता तथा उत्तमादि शरीर में उत्पत्ति चिह्न - विशेष को धर्मकारणत्व का अभाव उक्त विषय में उदाहरण क्षुद्र जीवों की हत्या का प्रायश्चित्त ७२५ प्राणायाम की प्रशंसा पृ ० सं ० | विषय पृ ० सं ० आत्मध्यान से सर्वसिद्धि ७३४ ७२३ | वेदजप की कर्तव्यता ७३६ | एकमात्र वेद ही सब की गति ७३६ ७२३ | वेदसंन्यासि का कम ७३७ चार आश्रम तथा आश्रमों के ७२४ क्रमश: पालन से मोक्ष प्राप्ति ७३८ ७२४ | गृहस्थ की श्रेष्ठता ७३८ गृहस्थ की श्रेष्ठता में दृष्टान्त ७४० ७२५ दशविध धर्म की सेव्यता ७४१ ध्यान योग से आत्मदर्शन ७२८ दशविध धर्म ७४१ ब्रह्मसाक्षात्कार से मुक्ति तथा दशविध धर्मानुष्ठान से मोक्ष लाभ ७४२ तद्भाव से संसार प्राप्ति ७२ ९ | वेद के अतिरिक्त सब कर्मों मुक्ति के साधक कर्म ७२ ९ का संन्यास ७४३ देह का स्वरूप ७३१ संन्यास का फल ७४३ देह - त्याग में उदाहरण ७३२ | अध्याय का उपसंहार ७४३ प्रियाप्रियों में पुण्यपाप का त्याग ७३२ | श्लोकानुक्रमणिका ७४५ विषयों में निःस्पृहता ७३