भरत नाट्यशास्त्र - नाट्य चन्द्रिका टीका १ — पृष्ठ 21–30

भरत नाट्यशास्त्र - नाट्य चन्द्रिका टीका १ · Chowkambha Sanskrit Series · पृष्ठ 21–30

पृष्ठ 21

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१२ नाट्यशास्त्रम् विषय श्लोक पृष्ठ ब्रह्मा द्वारा विघ्ननिवारण के लिए विश्वकर्मा द्वारा नाट्यशाला का निर्माण करवाना ७९ -८३ २६ नाट्यगृह की रक्षा के लिए देवगणों की नियुक्ति ८३.९९ २७ देवताओं का ब्रह्मा जी से अनुरोध १००-१०१ ३० ब्रह्मा का विघ्नों से प्रश्न १०२ ३० विघ्ननायक विरूपाक्ष का ब्रह्मा जी को उत्तर १०३-१०५ ३१ ब्रह्माजी द्वारा विरूपाक्ष तथा विघ्नों को समझाना १०६ ३१ ब्रह्मा जी द्वारा नाट्य की प्रसंसा १०७-११९ ३२ ब्रह्मा द्वारा देवताओं को नाट्यमण्डप के पूजन का आदेश १२०-१२२ ३७ रंगमंच के पूजन का महत्त्व १२३.१२७ ३७-३८ द्वितीय अध्याय - मुनियों का भरत से प्रश्न १-३ ३९ भरत मुनि द्वारा मुनियों के प्रश्न के उत्तर में नाट्य मण्डप की पूजन विधि का वर्णन ४.६ ३ ९ नाट्य मण्डप के तीन भेद ७ ४० त्रिविध नाट्यमण्डपों के त्रिविध परिमाण ८.९ ४०, ज्येष्ठ मध्यम तथा कनिष्ठ नाट्यमण्डप का परिमाण १० ४०,, देव नृप मानव आदि के लिए त्रिविध नाट्यमण्डप ११ ४१४१ मध्यम नाट्य मण्डप की श्रेष्ठता त्रिविध नाट्य मण्डपों के विविध आकार ४१ ४१ त्रिविध नाट्य मण्डपों का परिमाण प्रेक्षागृहों की माप के प्रमाण ( बाँट ) १२-१६ ४३ नाट्यमण्डप का परिमाण १७ ४४ विशाल नाट्यमण्डप के दोष १८-२० ४४-४५ मध्यम नाट्यमण्डप की श्रेष्ठता २१ ४५ ४५ नाट्यमण्डपों के तीन भेद ४५ नाट्यमण्डपों का श्रेणी निर्धारण मानवोपयोगी नाट्य मण्डप निर्माण की विधि २२-२४ ४५-४६ नाट्यमण्डपोपयोगी भूमि २५ ४६ भूमि का संस्कार २६ ४६

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विषयानुक्रम १३ विषय श्लोक पृष्ठ- नाट्यमण्डप निर्माणोपयोगी नक्षत्र २७ ४६ सूत्र लक्षण २७-२८ ४६- " सूत्रभंगजन्य हानियाँ २ ९ -३१ ४६-४७ नाट्यमण्डप निर्माण के प्रारम्भिक कृत्य ३२-३३ ४८ नाट्यमण्डपपरिमाण, रगशीषं निर्माण ३३-३४ ४८ नेपथ्य गृह निर्माण ३५ ४९- / नाट्य मण्डप शिलान्यास विधि ३६-३८ ४ ९ दिशाओं के देवताओं की बलि का विधान ३९ -४१ ४९. भोज्य पदार्थ ब्राह्मण, राजा तथा कार्यकर्त्ताओं का ४१-४२ ५०- नाट्यमण्डप की स्थापना का मुहूर्त ४२-४३ ५० ५०. भित्तिकर्म. स्तम्भ स्थापन ४४ ५० % स्तम्भ स्थापन के नक्षत्र एवं विधि ४५-४६ ५१ ब्राह्मण स्तम्भ पूजन विधि ४६-४७ ५१ क्षत्रिय स्तम्भ पूजन विधि ४७-४८ ५१० % वैश्य स्तम्भ पूजन विधि ४८-४९ ५१ शुद्र स्तम्भ पूजन विधि ४ ९-५० ५१ ब्राह्मण स्तम्भ के मूल में निक्षेप्य द्रव्य ५०-५१ ५२ क्षत्रिय व वैश्य स्तम्भ के मूल में निक्षेष्य द्रव्य ५१-५२ ५२- शूद्र स्तम्भ के मूल में निक्षेप्य द्रव्य ५२-५३ ५२ स्तम्भ स्थापना विधि ५३-५५ ५२ • स्तम्भोत्थापन विधि ५५-५६ ५३० स्तम्भस्खलनजन्य दोष ५६-५७ ५३ स्तम्भोत्थापन विधि ५८-६१ ५३ स्तम्भ प्रार्थना ६१-६२ ५४ स्तम्भ द्वार, भित्ति तथा नेपथ्यगृह का निर्माण ६२-६३ ५४ मत्तवारिणी निर्माण विधि ६३-६८ ५४. " षदारुक की विधि ६८-६९ ५५ रङ्गपीठभूमि शोधन विधि ६९ -७१ ५८ द रङ्गशीर्ष निर्माण विधि ७१-७२ ८ रङ्गशीर्ष का धरातल ७२-७३ ५८.

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१४ नाट्यशास्त्रम् विषय श्लोक पृष्ठ रंगशीर्ष के धरातल में जड़े जाने वाले रत्न ७३-७४ ५८ C दारु कर्म विधि ७५.७९ ५ ९ रंग मण्डप द्वार विधि ७९.८० ६० रंग मण्डप गवाक्ष विधि ८०-८१ ६० -वायुरहित नाट्यमण्डप के लाभ ८१८२ ६१ भित्तिलेप विधि ८२-८५ ६२ चतुरस्र नाट्य मण्डप विधि ८५-८६ ६२ चतुरस्र नाट्य मण्डप परिमाण ८६-८८ ६३ भित्तिरचना विधि ८८-८९ ६३ -स्तम्भ स्थापना विधि ८९ - ९० ६३ प्रेक्षक पीठ निर्माण विधि ९० - ९ २ ६४ स्तम्भों की स्थापना की विधि ९२ - ९ ३ ६४ रंगपीठ निर्माण विधि ९४ ६४ स्तम्भों की अलङ्करण -विधि ९५ ६५ नेपथ्यगृह एवं द्वार के निर्माण की विधि ९६ ६५ रंगपीठ निर्माण विधि ९८ ६६ यत्तवारणी निर्माण विधि ९९ ६६ रंगशीर्ष निर्माण विधि १०० ६६ त्र्यत्रनाट्य मण्डप निर्माण विधि १०१-१०४ ६६ उपसंहार १०५ ६७ तृतीय अध्याय- नाट्यगृह निर्माण के बाद के कृत्य १-३ ६८ नाट्यमण्डप की रक्षा के लिए विविध देवताओं का ४-१० ६८199 आवाहन देवताओं से प्रार्थना ११ ६ ९ जर्जर-पूजन १२ ६९ जर्जर प्रार्थना १३-१४ ७० पूजन विधि १५ ७० १६ ७० रंगमंच पूजन शुभ नक्षत्र पूजन विधि १७ ७० देवताओं की स्थापना १८ ७१

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विषयानुक्रम १५ विषय श्लोक पृष्ठ पूजनोपयोगी पदार्थ १ ९ -२० ७१ मण्डल रचना २१ ७१ मण्डल परिमाण एवं द्वार की विधि २२ ७१ -मण्डल में विविध देवों की की स्थापना २३ ७२ मण्डल के मध्य भाग के देवता २४ ७२ मण्डल के पूर्व दिशा के देवता २५ ७२ मण्डल के दक्षिण पूर्व दिशा के देवता २६ ७२ मण्डल के दक्षिण पूर्व दिशा के देवता २७ ७२ मण्डल के नैर्ऋत्यकोण व पश्चिम दिशा के देवता २८ ७२ मण्डल के वायव्य कोण के देवता २९ ७३ मण्डल के उत्तर दिशा के देवता ३० ७४ -मण्डल के पूर्व दिशा के देवता ३१ ७४ मण्डल के चारों दिशाओं के स्तम्भों के देवता ३२ ७४ उपसंहार ३३ ७४ -देवपूजन का उपक्रम ३४ ७४ देवमालाओं के वर्ण ३५ ७५ देवपूजन विधि ३६ ७५ विभिन्न देवों के नैवेद्य ३७-४६ ७५ -ब्रह्मा की बलि का मंत्र ४७ ७७ महादेव की बलि का मन्त्र ४८ १७७ "विष्णु की बलि का मन्त्र ४९ ७७ इन्द्र की बलि का मन्त्र ५० ७७ -स्कन्द की बलि का मन्त्र ५१ ७८ -सरस्वती की बलि का मन्त्र ५२ ७८ राक्षसों की बलि का मन्त्र ५३ ७८ लक्ष्मी की बलि का मन्त्र ५४ ७८ -वायु की बलि का मन्त्र ५५ ७८ अग्नि की बलि का मन्त्र ५६ ७८ -सूर्य की बलि का मन्त्र ५७ ७९ चन्द्र की बलि का मन्त्र ५८ ७९ नन्दी आदि गणों की बाली का मन्त्र ५९ ७९

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१६ नाट्यशास्त्रम् विषय श्लोक पृष्ठ * पितृगणों की बलि का मन्त्र ६० ७९ गन्धवों की बलि का मन्त्र ६१ ८० यम तथा मित्र की बलि का मंत्र ६२ ८० नागों की बलि का मंत्र ६३ ८० वरुण की बलि का मंत्र ६४ ८० गरुड़ की बलि का मंत्र ६५. ८० कुबेर की बलि का मंत्र ६६ ८० नाट्यमाताओं की बलि का मंत्र 9 ६७ ८१ रुद्र एवं विष्णु के आयुध की बलि का मंत्र ६८ ८१ यमराज, काल, मृत्यु तथा नियति के आयुध की बलि का मंत्र ६९ ८१ वास्तुदेवों के आयुध की बलि का मंत्र ७० ८१ अवशिष्ट देवों के आयुध की बलि का मंत्र ७१ ८१ रंगमण्डप के मध्य में जलपूर्व घटस्थापन ७२ ८२ घट पूजन विधि... ८२ जर्जर पूजन विधि ७३ ८२ जर्जर के पाँचों पर्वो के वस्त्रों की विधि ७४-७५ ८२ वाद्ययंत्र पूजन विधि ७६ ८३ जर्जर का अभिमंत्रण ७७ ८३ जर्जर की प्रार्थना ७८-८१ ८३ हवन विधि ८२ ८४ परिमार्जन विधि ८३ ८४ अभिषेक विधि ८४-८५ ८४ मंगलाचरण ८६-८७ ८५ कुम्भ- भेदन ८८ ८५ कुम्भ का भेदन न करने से दोष ८९ ८५ Iww रंग मंच को दीपक से प्रकाशित करने की विधि ९० -९ १ ८६w रंगस्थल में युद्ध की विधि ९ २- ९ ३ ८६ रंगमण्डप -पूजन के लाभ ९४ ८६w रंगमण्डप के पूजन न करने से उत्पन्न दोष ९५ - ९६ ८६ रंगमण्डप पूजन- प्रशंसा ९७- ९ ८ ८७3

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विषयानुक्रम १७23333 विषय श्लोक पृष्ठ नाट्य के अनुचित प्रयोग के दोष ९९ ८७ रंगमण्डप पूजन प्रशंसा १०० ८७ विधानहीन बलि प्रदान व हवन के दोष १०१ ८८ उपसंहार १०२ ८८ चतुर्थ अध्याय- भरत मुनि की ब्रह्मा से नाटक प्रयोग की प्रार्थना ८९ ब्रह्मा द्वारा भरतमुनि को अमृत मंथन समवकार को अवतारण का आदेश २-४ ८९ शिव के सम्मुख अमृत मंथन एवं त्रिपुरदाह का प्रदर्शन ५-१० ८९ शंकर जी का ब्रह्मा से निवेदन ११-१६ ९० ब्रह्मा जी का शंकर जी को उत्तर देना १६-१७ ९२ ब्रह्मा द्वारा तण्डु को आदेश १७-१८ ९२ तण्डुमुनि द्वारा भरतमुनि को करणों व अंगहारों का उपदेश १८-१ ९२ बत्तीस अंगहारों के नाम १९.९ ९ ३ अंगहार- वर्णन का उपक्रम २८-२० ९ ३ करण वर्णन का उपक्रम २९ -३० ९४ करण का लक्षण ३० ****९४ नृत्यमातृका, अंगहार, कलापक, मण्डक तथा संघातक का लक्षण ३१-३२ ९४ अंगहार लक्षण तथा करण वर्णनोपक्रम ३३-३४ ९४ एक सौ आठ करणों के नाम ३४-३५ ९५ करणों के प्रयोग स्थल ५६-५७ ९७ सभी करणों की साधारण मुद्रा ५७-५८ ९७ अंगों का संचालन ५८-५९ ९७ मातृका तथा करण का लक्षण ५ ९ ९७ सौष्ठव का लक्षण ६० ९८ १०८ करणों का क्रमशः वर्णन... ९८-१३१ ( १ ) तल पुष्पपुट करण का लक्षण ६१ ९८ ( २ ) वर्तित करण का लक्षण ६२ ९८ २ ना० (विष० )

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३८ नाट्यशास्त्रम् विषय श्लोक पृष्ठ ( ३ ) वलितोरु करण का लक्षण ६३ ९९ ( ४ ) अपविद्ध करण का लक्षण ६४ ९९ ( ५) समनख करण का लक्षण ६५ ९९ ( ६ ) लीन करण का लक्षण- ६६ १०० (७) स्वस्तिकरेचित करण का लक्षण ६७ १०० (८ ) मण्डल स्वस्तिक करण का लक्षण ६८ १०० (९ ) निकुट्टन करण का लक्षण ६ ९ १०० ( १० ) अर्धनिकुट्ट करण का लक्षण ७० १०० ( ११ ) कटिच्छिन्न करण का लक्षण ७१ १०२ ( १२ ) अर्धरेचित करण का लक्षण ७३ १०२ ( १३ ) वक्षःस्वस्तिक करण का लक्षण ७४ १०३ ( १४) उन्मत्त करण का लक्षण ७५ १०३ ( १५ ) स्वस्तिक करण का लक्षण ७६ १०३ ( १६ ) पृष्ठस्वस्तिक करण का लक्षण ७७ १०३ ( १७ ) दिक्स्वस्तिक करण का लक्षण ७८ १०४ ( १८ ) अलात करण का लक्षण ७९ १०४ ( १ ९ ) कटीसम करण का लक्षण ८० १०४ ( २० ) अक्षिप्त रेचित करण का लक्षण ८१ १०५ ( २१ ) विक्षिप्ताक्षिक करण का लक्षण ८२ "3 ( २२ ) अर्धस्वस्तिक करण का लक्षण ८३ 19 ( २३ ) अंचित करण का लक्षण ८४ 19 ( २४ ) भुजंगत्रासित करण का लक्षण ८५ १०५ ( २५ ) ऊर्ध्वजानु करण का लक्षण ८६ १०६ ( २६) निकुचित करण का लक्षण ८७ 11 ( २७) मत्तल्लि करण का लक्षण ८८ ( २८) अर्ध मत्तल्लि करण का लक्षण ८९ १०६ ( २ ९ ) रेचितनिकुट्टित करण का लक्षण ९० १०७ ( ३० ) पादापविद्धक करण का लक्षण ९ १ 13 ( ३१ ) वलित करण का लक्षण ९२ १०७ ( ३२) घूर्णित करण का लक्षण ९ ३ १०८ ( ३३ ) ललित करण का लक्षण ९४ 19

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विषयानुक्रम १९ विषय श्लोक पृष्ठ (३४ ) दण्डपक्ष करण का लक्षण ९५ १०८ ( ३५ ) भुजंगत्रस्त रेचित करण का लक्षण ९६ १० ९ ( ३६ ) नूपुर करण का लक्षण ९७ 19 ( ३७ ) वैशाखरेचित करण का लक्षण ९८ 93 (३८) भ्रमरक करण का लक्षण ९९ १० ९ ( ३ ९ ) चतुर करण का लक्षण १०० ११० (४० ) भुजङ्गञ्चित करण का लक्षण १०१ 11 (४१ ) दण्डकरेचित करण का लक्षण १०२ ११० (४२ ) वृश्चिककुट्टित करण का लक्षण १०३ १११ ( ४३ ) कटिभ्रान्त करण का लक्षण १०४ १११ (४४ ) लतावृश्चिक करण का लक्षण १०५ ११२ (४५ ) छिन्न करण का लक्षण १०६ " (४६ ) वृश्चिक रेचित करण का लक्षण १०७ 03 ( ४७ ) वृश्चिक करण का लक्षण १०८ " (४८) व्यंसित करण का लक्षण १० ९ ११२ ( ४ ९ ) पावनिकुट्टक करण का लक्षण ११० ११३ ( ५० ) ललाटत्विलक करण का लक्षण १११ 13 ( ) ५१ क्रान्तक करण का लक्षण ११२ ( ११३ " ५२ ) कुचित करण का लक्षण ( ५३ ) चक्रमण्डल करण का लक्षण ११४ ११३ ( ५४ ) उरोमण्डल करण का लक्षण ११५ ११४ (५५ ) आक्षिप्त करण का लक्षण १ ९ ६ 21 ११७ "1 ( ५६ ) तलविलसित करण का लक्षण ११८ "1 ( ५७ ) अगंल करण का लक्षण (५८ ) विक्षिप्त करण का लक्षण ११ ९ ११४ (५ ९ ) आवर्त करण का लक्षक्ष १२० ११५ ( ६० ) डोलापाद करण का लक्षण १२१ ११५ ( ६१ ) विवृत्त करण का लक्षण १२२ ११६ ( ६२ ) विनिवृत्त करण का लक्षण १२३ ११६ ( ६३ ) पार्श्वक्रान्त करण का लक्षण १२४ ११६ ( ६४) निशुम्भित (निःस्तम्भित ) करण का लक्षण १२५ ११७

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२०% नाट्यशास्त्रम् विषय श्लोक पृष्ठ ( ६५ ) विद्युद्भ्रान्त करण का लक्षण १२६ ११८ ( ६६ ) अतिक्रान्त करण का लक्षण १२७ ११८ ( ६७ ) विवर्तित करण का लक्षण १२८ *११८ ( ६८) गजक्रीडित करण का लक्षण १२९ ११९ ( ६९ ) तलसंस्फोटित करण का लक्षण १३० 31 (७० ) गरुडप्लुतक करण का लक्षण १३१ ११९ (७१ ) गण्डसूची करण का लक्षण १३२ " (७२ ) परिवृत्त करण का लक्षण १३३ 37 (७३ ) पार्श्वजानु करण का लक्षण १३४ १२० (७४) गृधावलीनक करण का लक्षण १३५ १२१ ( ७५ ) सन्नत करण का लक्षण १३६ (७६) सूची करण का लक्षण १३७ 37 ( ७७ ) अर्धसूची करण का लक्षण १३८ 13 (७८) सूचीविद्ध करण का लक्षण १३ ९ १२१ (७९ ) अपक्रान्त करण का लक्षण १४० १२२ (८० ) मयूरललित करण का लक्षण १४१ १२२ ( ८१ ) सर्पित करण का लक्षण १४२ १२२ (८२) दण्डपाद करण का लक्षण १४३ १२३ ( ८३ ) हरिणप्लुत करण का लक्षण १४४ " ( ८४ ) प्रेङ्खोलित करण का लक्षण १४४-१४५ " ( ८५ ) नितम्ब करण का लक्षण १४६ १२३ ( ८६ ) स्खलित करण का लक्षण १४७ १२४ (८७) करिहस्तक करण का लक्षण १४८ १२४ (८८) प्रसर्पितक करण का लक्षण १४९ १२५ ( ८९ ) सिंहविक्रीडित करण का लक्षण १५० 17 ( ९ ० ) सिंहाकर्षित करण का लक्षण १५१ 33 ( ९ १ ) उद्वृत्त करण का लक्षण १५२ १२५ ( ९ २) उपसृतक करण का लक्षण १५३ १२६ ( ९ ३ ) तलसङ्घट्टित करण का लक्षण १५४ १२६ ( ९ ४ ) जनित करण का लक्षण १५५ १२७ ( ९ ५ ) अवहित्थक करण का लक्षण १५६ १२७

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विषयानुक्रम २१ विषय श्लोक पृष्ठ ( ९ ६ ) निवेश करण का लक्षण १५७ १२७ ( ९७ ) एलकाक्रीडित करण का लक्षण १५८ १२८ " ( ९ ८) ऊरुवृत्त करण का लक्षण १५ ९ (९९ ) मदस्खलित करण का लक्षण १६० १२८( १०० ) विष्णुक्रान्त करण का लक्षण १६१ १२९( १०१ ) सम्भ्रान्त करण का लक्षण १६२ १२९ ( १०२ ) विष्कम्भ करण का लक्षण १६३ १३०27 ( १०३ ) उद्घट्टित करण का लक्षण १६४१६५ "( १०४ ) वृषभक्रीडित करण का लक्षण ( १०५ ) लोलित करण का लक्षण १६६ १३० ( १०६ ) नागापसर्पित करण का लक्षण १६७ १३१ ( १०७ ) शकटास्य करण का लक्षण १६८ ( १०८ ) गंगावतरण करण का लक्षण १६९ १३१ करणों का उपसंहार १७० १३२ 32 करणों में वृत्तहस्तों की प्रयोग विधि १७१ 12 समीकरणों की सामान्य मुद्रा १७२ 11 १७३ मातृका लक्षण अंगहारों का उपक्रम १७३-१७४ १३२ बत्तीस अंगहारों का क्रमशः वर्णन १३२-१४७ ( १ ) स्थिरहस्त अंगहार का लक्षण १७५-१७७ १३३ (२ ) पर्यस्तक अंगहार का लक्षण १७८-१८० १३४"1 ( ३ ) सूचीविद्ध अंगहार का लक्षण १८० १८२ ( ४ ) अपविद्ध अंगहार का लक्षण १८२-१८४ १३४ (५ ) आक्षिप्तक अंगहार का लक्षण १८४-१८६ १३५33 (६ ) उद्घट्टित अंगहार का लक्षण १८६-१८७ (७ ) विष्कम्भ अंगहार का लक्षण १८७-१९० १३५ (८) अपराजित अंगहार का लक्षण १ ९०-१९ २ १३६ (९ ) विष्कम्भापसृत अंगहार का लक्षण १ ९२-१९ ४ १२७ ( १० ) मत्ताक्रीड अंगहार का लक्षण १९४-१९७ १३७ ( ११ ) स्वस्तिक रेचित अंगहार का लक्षण १९७-१९९ १३८ ( १२ ) पार्श्वस्वस्तिक अंगहार का लक्षण -१ ९९-२०२