भरत नाट्यशास्त्र - नाट्य चन्द्रिका टीका १ — पृष्ठ 41–50
भरत नाट्यशास्त्र - नाट्य चन्द्रिका टीका १ · Chowkambha Sanskrit Series · पृष्ठ 41–50
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३२ नाट्यशास्त्रम् विषय श्लोक पृष्ठ ३. शंका ३३-३५ २९ १ ४. असू ३६-३७ २ ९३ ५. मद ३८.४६ २ ९ ३ ६. श्रम ४७ २९५ ७. आलस्य ४८ २ ९ ६: ८. दैन्य ४९ २९ ६ ९. चिन्ता ५०.५१ २ ९६ १०. मोह ५२-५३ २९ ६ ११. स्मृति ५४-५५ २९८ १२. धृति ५६५७ २९८- १३, व्रीडा ५८५ ९ २९९ १४. चपलता ६० ३०० १५. हर्ष ६१-६२ ३००- १६. आवेग ६३६५ ३०१32 [१ ] उत्पातकृत आवेग [२] वातकृत ३०२" [ ३ ] वर्षाकृत आवेग "" [४] अग्निकृत आवेग [५ ] कुञ्जरोभ्रमणकृत आवेग 33 [६ ] प्रिय श्रवण कृत आवेग "" [७] अप्रिय श्रवण कृत आवेग [८] विपत्तिकृत आवेग ३०२' १७. जड़ता ६६ ३०३ १८. गवं ६७ ३०३ १९. विषाद ६८.६९ ३०४ २०. औत्सुक्य ७० ३०५21 २१. निद्रा ७१-७२ २२. अपस्मार ७३-७४ ३०६- २३. सुप्त ७५.७६ ३०७ २४. विबोध ७७ ३०७ २५. अमर्ष ७८-७९ ३०८ २६. अवहित्थ ८० ३० ९
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PRESI विषयानुक्रम ३३ विषय श्लोक पृष्ठ २७. उपा ८१ ३० ९ २८. मति ८२ ३१० २९. व्याधि ८३ ३१० ३०. उम्माद ८४८५ ३११ ३१. मरण नामक व्यभिचारी भाव का लक्षण ३१२ ( १ ) व्याधिज मरण का लक्षण " अभिघातज मरण का लक्षण " व्याधिज मरण का अभिनय ८६ ३१२ I ( २) अभिघातज मरण का लक्षण ३१३ अभिघातज मरण का अभिनय " विषवेगों के आठ भेद ८७८८ क ३१३ 998 अभियान मरण का अभिनय ८९ ३१४ मरण सचारी भाव का उपसंहार ९० ३१४ बत्तीस त्रास नामक व्यभिचारी भाव का लक्षण ९१ 37 तैंतीस वितर्क नामक व्यभिचारी भाव का लक्षण ९२ ३१५ सात्विक भाव का लक्षण ९३ " ६ अठ सात्त्विक भाव ९४ ३१७ ( १ ) स्वेद का विभाव ९५ 39 1 ( २ ) स्तम्भ के विभाव ९६ "" ( ३ ) कम्प के विभाव ९६ "2 ( ४) अधु के विभाग ९७ "1 ( ५ ) वैवर्ण्य के विभाव ९८ ३१८ ( ६ ) रोमान्च के विभाव ९८ (७) स्वर भेद के विभाव ९९ (८) प्रलय के विभाव ९९ उपसंहार 900 12 स्तम्भ के अनुभाव १०१ 19 स्वेद के अनुभाव १०२ OFF रोमाञ्च के अनुभाव १०३ ३१ ९ स्वर भेद के अनुभाव १०४ 29 ३ ना० (विष ०)
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३४ नाट्यशास्त्रम् विषय लोक पृष्ठ ए वेपथु के अनुभाव १०४ ३.९ वैवर्ण्य के अनुभाव १०५ 33 अधू के अनुभाव १०६ 77 प्रलय के अनुभाव १०७ 27 उपसंहार १०८ ३२० उनचास भावों के नाम शृंगार रस के छिपालिस भाव १० ९ हास्य रस के आठ भाव fal ३२१ SPE करुण रस के आठ भाव १११ 37 रौद्र रस के नौ भाव एक ए ११२ 39 बीभत्स रस के पन्द्रह भाव मी 19 ए obbat 17 १११-१४ भयानक रस के सात भाव ११५ बीभत्स रस के सात भाव ११६ ३२२ अद्भुत रस के नौ भाज FIBEPS TO BI 990 " सात्त्विक भावों का प्रयोग ११८-१९ 39 स्थायी रस संबारी रस 23 स्थायी रस ३२३ साविक भावों का प्रयोग ( 1 ) 37 काव्य में अनेक रसों भावों तथा वृत्तिसों का प्रयोग 77 रसों के भेद शी... ३२४ सात्विक भावों का प्रयोग फ्री क "1 व्यभिचारी भावों का प्रयोग १२० 37 ( ) FIRE & रसों तथा भावों की तीन अवस्थायें उपसंहार १२१ ३२५ आठवां अध्याय- PIRFI S ऋषियों का प्रश्न १.३ ३२६ भरत मुनि का उत्तर 17 अभिनय की निरुक्ति तथा लक्षण ५-७ ३२७ अभिनय के चार भेद ८.९ ३२८ आङ्गिक अभिनय के 33 तीन उपभेद ११
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विषयानुक्रम ३५ विषय श्लोक पृष्ठ नाट्य प्रयोग सम्बन्धी छः अङ्ग १२ ३२८ नाट्य प्रयोग सम्बन्धी छः उपांग 185 10139 14 3015 १३ ३२९ १४ " नाट्याभिनय सम्बन्धी तीन वस्तुयें एक शाखा, अंकुर तथा नृत्त वस्तुओं का लक्षण १५ ३२९ सिर की चेष्टाओं का उपक्रम १६ " सिर की चेष्टाओं के तेरह भेदों के नाम १७-१८ आकम्पित तथा कम्पित सिर का लक्षण १९ -२० ३३० क आकम्पित सिर का विनियोग २० 6 २१ 27 * कम्पित सिर का विनियोग I ( १ ) 31 घुत तथा विधुत सिर का लक्षण 95 २२ धुत सिर का विनियोग २३ १ ३३१ IPE PEN 14 55 RY (( F)) 91 विधुत सिर का विनियोग परिवाहित तथा आधुत सिर का लक्षण २५ ( ४ ) 19 परिवाहित सिर का विनियोग २६ 11 उाहित (आधूत ) सिर का विनियोग २७ 13 अवधूत सिर का लक्षण तथा विनियोग २८ ३३२ अंचित सिर का लक्षण तथा विनियोग २९ 18 निहंचित सिर का लक्षण तथा विनियोग ३०-३१ परावृत्त सिर का लक्षण तथा विनियोग ३२ 11 उत्क्षिप्त सिर का लक्षण तथा विनियोग ३३ ३३३ अधोगत सिर का लक्षण तथा विनियोग ३४ 19 लोलित सिर का लक्षण तथा विनियोग ३५ 21 प्राकृत सिर का लक्षण तथा विनियोग ४ सिर की चेष्टाओं का उपसंहार ३६ 9133 ०४ दृष्टि की चेष्टाओं का उपक्रम ३७ 33 रस दृष्टियों के आठ भेद ३८ ३३४ स्थायी भाव सम्बन्धी दृष्टियों के आठ भेद ३९ 11 संचारी भाव सम्बन्धी दृष्टियों के बीस भेद ४०-४२ 11" रत सम्बन्धी दृष्टियों की चेष्टाओं के वर्णन का उपक्रम ( ). १ कान्ता दृष्टि का लक्षण तथा विनियोग ३३५ ( ) 13 २ भयानका दृष्टि का लक्षण तथा विनियोग
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३६ कलिड नाट्यशास्त्रम् PP विषय PIPE PSTR श्लोक पृष्ठ ( ३) हास्या दृष्टि का लक्षण तथा विनियोग ४६ " (४ ) करुणा दृष्टि का लक्षण तथा विनियोग (५) अद्भुता दृष्टि का लक्षण तथा विनियोग ( ६ ) रौद्री दृष्टि का लक्षण तथा विनियोग ३३६ (७ ) वीरा दृष्टि का लक्षण तथा विनियोग ( ८) बीभत्सा दृष्टि के लक्षण तथा विनियोग ( ९) शान्ता दृष्टि का लक्षण "7 स्थायी भाव सम्बन्धी दृष्टि चेष्टाओं के वर्णन का उपक्रम ५२ ( १ ) स्निग्धा दृष्टि का लक्षण तथा विनियोग ३३७ ( २) हृष्टा दृष्टि का लक्षण तथा विनियोग 17 ( ३ ) दीना दृष्टि का लक्षण तथा विनियोग " (४ ) क्रुद्धा दृष्टि का लक्षण तथा विनियोग (५ ) दृता दृष्टि का लक्षण तथा विनियोग ( ६) भयान्विता दृष्टि का लक्षण तथा विनियोग ३३८ (७ ) जुगुप्सिता दृष्टि का लक्षण तथा विनियोग 13 (८) विस्मिता दृष्टि का लक्षण तथा विनियोग 13 संचारीभाव सम्बन्धी दृष्टियों के वर्णन का उपक्रम 11 ( १ ) शून्या दृष्टि का लक्षण ३३ ९ ( २ ) मलिना दृष्टि का लक्षण ( ३) श्रान्ता दृष्टि का लक्षण (४ ) लज्जान्विता दृष्टि का लक्षण ६५. (५ ) ग्लाना दृष्टि का लक्षण " ( ६ ) शङ्किता दृष्टि का लक्षण ३४० ( ७ ) विषादिनी दृष्टि का लक्षण ३४० (८ ) मुकुला दृष्टि का लक्षण "" ( ९ ) कुञ्चिता दृष्टि का लक्षण ( १० ) अभितपा दृष्टि का लक्षण ७१ ( ११ ) जिह्मा दृष्टि का लक्षण ३४१ ( १२ ) ललिता दृष्टि का लक्षण ७३ 11 ( १३ ) वितर्किता दृष्टि का लक्षण ७४ 17 ( १४ ) अर्धमुकुला दृष्टि का लक्षण ७५ 17
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विषयानुक्रम ३७ SE विषय श्लोक पृष्ठE ( १५ ) विभ्रान्ता दृष्टि का लक्षण ७६ ३४१ ( १६ ) विप्लुता दृष्टि का लक्षण TRIS ७७ ३४२ ( १७) आकेकरा दृष्टि का लक्षण ७८ " ( १८) विकोशा दृष्टि का लक्षण ७९ ३४२ ( १ ९ ) त्रस्ता दृष्टि का लक्षण ८० ( २० ) मदिरा दृष्टि का लक्षण ८१ मध्यम दृष्टि का लक्षण ८२ ३४३ अधम दृष्टि का लक्षण ८३ छत्तीस दृष्टि चेष्टाओं का उपसंहार ८४-८५ संचारीभाव सम्बन्धी बीस दृष्टि चेष्टाओं का विनियोग ८६ - ९ ३ दृष्टि चेष्टाओं का उपसंहार ९४ ९ ५ ३४४ पुतलियों के नौ चेष्टाओं के नाम ९५- ९ ६ पुतलियों की नौ चेष्टाओं के लक्षण ९६ - ९८ ३४५ पुतलियों की नौ चेष्टाओं का विनियोग ९९ -१०२ " दृष्टि के आठ प्रकारों के नाम १०३-४. ३४६ दृष्टि के आठ प्रकारों के लक्षण १०४-७ पलकों की नो चेष्टाओं के नाम तथा लक्षण १०८-११ ३४७ पलकों की नो चेष्टाओं का विनियोग ११२-१५ " भौहों की सात चेष्टाओ के नाम ११५-१६ ३४८ भौहों की सात चेष्टाओं के लक्षण ११६.२१ भौहों की सात चेष्टाओं का विनियोग १२१-२६ ३४ ९ नासिका की चेष्टाओं के छः भेदों के नाम १२७ ३५० नासिका की चेष्टाओं के छः भेदों के लक्षण १२८-२९ नता नासिका का विनियोग १३० "1 मन्दा तथा विकृष्टा नासिका का विनियोग १३१ ३५१ सोच्छ्वासा, विकूणिता तथा स्वाभाविकी नासा का विनियोग १३२-३३ कपोलों की छः चेष्टाओं के नाम १३३-३४ 11 कपोलों की छः चेष्टाओं के लक्षण १३४-३५ 11 कपोलों की छः चेष्टाओं का विनियोग 16 E T १३६-३९ ३५२
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३८ नाट्यशास्त्रम् विषय 10 315 11श्लोक ( 2P ) पृष्ठ १ ओठों की छः चेष्टाओं के नाम १३ ९ -४० ३५२ ओठों की छः चेष्टाओं के लक्षण एवं विनियोग १४१४४ 27 5 चिबुक की सात चेष्टाओं के नाम १४४४५ ३५३32 •चिबुक की सात चेष्टाओं के लक्षण १४५-४७११) •चिबुक की सात चेष्टाओं का विनियोग उनी १४७-५० ३५४" नाम मुख की छः चेष्टाओं के लक्षण १५१५२१५०.५१ " मुख की छ: चेष्टाओं के 33 मुख की छः चेष्टाओं का विनियोग १५३५८ मुखवर्ण के चार भदों के नाम १५८-५९ ३५५ मुखवर्ण के चार भेदों का विनियोग १५ ९.६१ " मुखवर्ण के वर्णन का उपसंहार १६२.६७ ३५६ ग्रीवा की चेष्टाओं के नौ भेदों के नाम १६७६८ 33 ग्रीवा की चेष्टाओं के नौ भेदों के लक्षण तथा विनियोग १६८७२ ३५७ ग्रीवा चेष्टाओं के वर्णन का उपसंहार १७३-७५ ३५८ नवाँ अध्याय- अध्ययाय का उपक्रम क १३ ३५ ९ असंयुक्त हस्त की चौबीस मुद्राओं के नाम ४.७ ३६० संयुक्त हस्त की तेरह मुद्राओं के नाम के ८-१० ३६० नृत्त हस्त की तीस मुद्राओं के नाम क १०.१७ ३६१ असंयुतहस्त मुद्राएँ - ( १ ) पताकहस्त मुद्रा का लक्षण तथा विनियोग १८२७ ३६२ (२ ) त्रिपताक मुद्रा का लक्षण तथा विनियोग २८-३८ ३६३ ( ३) कर्तरीमुख मुद्रा का लक्षण तथा विनियोग ३ ९ -४२ ३६५ (४) अर्धचन्द्र मुख का लक्षण तथा विनियोग ४३-४५ ३६५ ( ५ ) मुद्रा का लक्षण तथा विनियोग ४६.५२ ३६६ ( ६ ) शुकतुण्ड मुद्रा का लक्षण तथा विनियोग ५३-५४ ३६६ (७) मुष्टि मुद्रा का लक्षण तथा विनियोग ५५.५६ ३६७ (८) शिखर मुद्रा का लक्षण तथा विनियोग ५७-५८ ३६७ ( ९ ) कपित्थ मुद्रा का लक्षण तथा विनियोग ५९ -६० ३६८
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विषयानुक्रम ३ ९ विषय क श्लोक पृष्ठ ( १० ) खटकामुख मुद्रा का लक्षण तथा निनियोग ६०-६३ ३६८ ( ११ ) सूचीमुख मुद्रा का लक्षण तथा विनियोग ६४-७८ ३६ ९ ( १२ ) पद्मकोश मुद्रा का लक्षण तथा विनियोग ७ ९-८३ ३७१ ( १३ ) सर्पशिरा मुद्रा का लक्षण तथा विनियोग ८४८५ ३७२ ( १४ ) मृगशीर्षक मुद्रा का लक्षण तथा विनियोग ८६-८७ ३७२ ( १५ ) कांगुल मुद्रा का लक्षण तथा विनियोग ३७३ ( १६ ) अलपल्लव मुद्रा का लक्षण तथा विनियोग ९१ -९२ ३७३ ( १७ ) चतुर मुद्रा का लक्षण तथा विनियोग १९३-१०० ३६३ ( १८) भ्रमर मुद्रा का लक्षण तथा विनियोग १०१-१०३ ३७४ ( १ ९ ) हंसवक्त्र मुद्रा का लक्षण तथा विनियोग १०४-१०५ ३७५ ( २० ) हंसपक्ष मुद्रा का लक्षण तथा विनियोग १०६-१०९ ३७५ ( २१ ) सन्देश मुद्रा का लक्षण तथा विनियोग ११०-११६ ३७६ (२२ ) मुकुल मुद्रा का लक्षण तथा विनियोग ११७-११९ ३७७ ( २३ ) ऊर्णनाभ मुद्रा का लक्षण तथा विनियोग १२०-१२१ •३७७ १ ( २४) ताम्रचूड मुद्रा का लक्षण तथा विनियोग १२२-१२६०४ ३७८ संयुक्त हस्त मुद्राएँ ( १ ) अंजलिहस्तमुद्रा का लक्षण तथा विनियोग १२८- १३० । ३७ ९ (२ ) कपोत मुद्रा का लक्षण तथा विनियोग १३०-१३३ ३७७९ ( ३ ) कर्कट हस्तमुद्रा का लक्षण तथा विनियोग १३३-१३४ ३८० (४ ) स्वस्तिक हस्तमुद्रा का लक्षण तथा विनियोग १३५-१३७ ३८० (५) खटकावर्धमानक हस्तमुद्रा का लक्षण तथा विनियोग १३७-१३८ ३८० ( ९ ३८१ ( ६ ) उत्संग हस्तमुद्रा का लक्षण तथा विनियोग १३ ९ -१४० (७) निषध हस्तमुद्रा का लक्षण तथा विनियोग १४१-१४७ (८) दोलहस्तमुद्रा का लक्षण तथा विनियोग १४८-१४९ ३८२ (९ ) पुष्पपुट मुद्रा का लक्षण तथा विनियोग १५०-१५१ ३८२ ) मकर हस्तमुद्रा का लक्षण तथा विनियोग १५२-१५३ ३८३ ( १० ( ) ११ गजदन्त हस्तमुद्रा का लक्षण तथा विनियोग १५४-१५५ ३८३ ( १२ ) अवहित्य हस्तमुद्रा का लक्षण तथा विनियोग १५६-१५७ ३८३
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४० अनाट्यशास्त्रम् विषय श्लोक पृष्ठ ( १३) वर्धमान हस्तमुद्रा का लक्षण TPS PBB 17 185 PARE तथा विनियोग १५८-१५९ ३८४ संयुक्त हस्तमुद्राओं का उपसंहार १६०-१६२ ३८४ हस्तकर्मों का उपक्रम १६३-१६५ ३८४ हस्तकर्मों के बीस भेदों के नाम 1 १६६-१६८ ३८५ हाथों की तीन सामान्य क्रियाए Top Ppe 18 १६९ ३८ ९ हस्तानिय विधि 195 लक १७०-१७५ ३८६ हस्ताभिनय का निषेध १७६-१७९ ३८७ हस्ताभिनय विधि 1811981 १८० " अंगसंचालन के तीन भेद एक १८१ ३८८ हस्तप्रचार के पांच भेद १८२ नृत हस्त- ( १ ) चतुरश्र नृत्त हस्त का लक्षण १८४ ( २ ) उवृत्त हस्त का लक्षण १८५ ( ) THE PE 15 १८६ ३८९ ३ तलमुख हस्त का लक्षण (४ ) स्वस्तिक हस्त का लक्षण १८७ (५ ) विप्रकीर्णक नृत्त हस्त का लक्षण १८७ ( ६ ) अरालखटकामुख नृत्त हस्त का लक्षण १८८-१८९ (७) आविद्धवक्रक नृत्त हस्त का लक्षण १ ९ ० (८) सूचीमुख नृत्त हस्त का लक्षण १ ९१-१९२ ( ९ ) रेचित नृत्त हस्त का लक्षण १ ९ ३ ३९ ० ( १० ) अर्धरेचित नृत्त हस्त का लक्षण १ ९४ ३९० ( ११ ) उत्तानवंचित नृत्त हस्त का लक्षण 19 ( १२) पल्लव नृत्त हस्त का लक्षण ११ ९९५६ ( १३ ) नितम्ब नृत्त हस्त का लक्षण १ ९ ६ 33 ( १४ ) केशबन्ध नृत हस्त का लक्षण १९ ७ ३९ १ ( १५ ) लता नृत्त हस्त का लक्षण १ ९८ ( १६ ) करिहस्त नृत्त हस्त का लक्षण १ ९९ ( १७ ) पक्षवंचितक नृत्त हस्त का लक्षण २०० ( १८ ) पक्ष प्रद्योतक नृत्त हस्त का लक्षण २०१ ( १ ९ ) गरुडपक्ष नृत्त हस्त का लक्षण २०१ 17
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विषयानुक्रम ४१ ABSTR 3 विषय श्लोक पृष्ठ (२० ) दण्डपक्ष नृत्त हस्त का लक्षण २०२ ३९ १ ( २१ ) ऊर्ध्वमण्डली नृत्त हस्त का लक्षण २०३ = ( २२ ) पार्श्वमण्डली नृत्त हस्त का लक्षण २०३ = ( २३ ) उरोमण्डली नृत्त हस्त का लक्षण = २०४. ( २४) उरः पार्श्वमण्डली नृत्त हस्त का लक्षण = २०५२०६ ( २५ ) मुष्टिकस्वस्तिक नृत्त हस्त का लक्षण = १( २६ ) नलिनीपद्मकोश नृत्त हस्त का लक्षण = २०७ ( २७) अलपल्लव नृत्त हस्त का लक्षण २०८ ३ ९ ३ (२८ ) उल्वण नृत्त हस्त का लक्षण २०८ ( २ ९ ) ललित नृत्त हस्त का लक्षण २० ९ (३० ) बलित नृत्त हस्त का लक्षण २० ९ -नृत्त हस्तों का उपसंहार २१० २११ हस्तकरणों का उपक्रम २१२-२१३ हस्तकरणों के चार भेदों के नाम २१४ ३९ ४ ( १) आवेष्टित करण का लक्षण २१५ 11 ( २ ) उद्वेष्टित हस्तकरण का लक्षण २१६ " ( ३) वर्तित हस्तकरण का लक्षण २१७ " (४ ) परिवर्तित हस्तकरण का लक्षण २१८ हस्तकरणों का उपसंहार २१ ९ 37 हाथ के दस करणों के नाम २२०-२२१ ३९ ५ हृदय, उदर तथा पार्श्व की चेष्टाओं के वर्णन का 11 उपक्रम २२२ • उदर चेष्टाओं के पांच भेद २२३ 19 ( १ ) आभुग्न उदर चेष्टा का लक्षण २२४ आभुग्न उदर चेष्टा का विनियोग २२५ 37 ( २) निर्भुग्न उदर चेष्टा का लक्षण २२६ ३ ९ ६ निर्भुग्न उदर चेष्टा का विनियोग २२७-२२८ " ( ३ ) प्रकम्पित उदर चेष्टा का लक्षण २२ ९ प्रकम्पित उदर चेष्टा का विनियोग २३० (४) उद्वाहित उदर चेष्टा का लक्षण तथा विनियोग २३१ ( ) “ ५ सम उदरचेष्टा का लक्षण तथा विनियोग २३२ ३ ९७ " उदर चेष्टाओं का उपसंहार २३३