भरत नाट्यशास्त्र - नाट्य चन्द्रिका टीका १ — पृष्ठ 601–610
भरत नाट्यशास्त्र - नाट्य चन्द्रिका टीका १ · Chowkambha Sanskrit Series · पृष्ठ 601–610
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नाट्यशास्त्रम् ५१० अध्याय /श्लोक पृष्ठ प्रतीक ३३५ अद्भुत दृष्टि- विनियोग ८५१० २७२ अद्भुतरस के अनुभाव की ६।७४ के बाद गद्य २७१ अद्भुत रस के लक्षण २७२ ६/७५ अद्भुतरस विभाव ३२२ व्यभिचारी भाव ७।११७ अद्भुतरस २९४ ७१४३ ३८६ अधम मद pe - 80712 ९।१७२ उ०- १७३ पू० ३८७ ९।१७४ उ० अभ्रमहस्त PPPI अधमहस्त ८।१३ ९ उ०-१४० पू० ३५२-५३ अधर के ६ कर्म ३५२-५३ P ८।१४१ उ०-१४४५० अधरकर्म के विनियोग This: ३३३ ८।३४ पू०, अधोगत शिर-लक्षण ८।३४ उ० ३३३ अधोगत शिर- विनियोग ३८८ ९/ १८१, अधोमुख अंग प्रचारPIY ३८८ ९।१८२ एवं १८१ अधोमुख हस्त-प्रचार ४१० अविचारी ( भौमी १०1१० २८०८१ लक्षण ( गद्य युक्त ) ७१५-६ गद्ययुक्त अनुभाव ८।१०५ उ० ३४६ अनुवृत्त दर्शन-प्रकार 912 १२२ ४/१४ अपक्रान्त करण ४१६ ३०४ १०।३१ अपक्रान्ताचारी ( आकाशीय ) ८८ FES ३।१०१-१०२ अपप्रयोगजन्य १३६ FEE दोष2913 ४।१ ९ ० उ०-१९ २ पू० अपराजित अंगहर 65919 ४।१८१ उ०- १८३ पू० १३४ अपविद्ध अंगहार 59 ९९ ४६४ अपविद्ध करण SHOE SFPIS ९/ २२० ३९ ५ अपविद्ध हस्तकरण १४६ EPY ४।२४३ उ०-२४४ पू० अपसपित अंगहार SPF सोही९।२३८ पू० ३ ९८ अपसृत पाश्वं कर्म लक्षण क ३ ९८ ९।२४० पू० अपस्त पाश्र्वकर्म विनियोग ३०६ ७।७३-७४ गद्ययुक्त OPP अपस्मार OFPIX १०।२६ उ० ४१४ अपस्यन्दितावारी ( भौमी ) ३६४ ६/५८ ४३ अपहसित हास्य SUP ७।६२ के बाद गद्य ३०२ अप्रियश्रवणकृत आवेग
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वर्णक्रमगत विषयानुपूर्वी ५११ प्रतीक SP / अध्याय श्लोक पृष्ठ FPS अप्सराओं के २४ नाम १।४७ उ०.५० पू०१ ९ PSP अभिघातजमरण का अभिनय ७१८५ के बाद गद्य ३१२ १ अभिघातजमरण के लक्षण ७१८५ के बाद गद्य ३१२ Sep अभितप्तादृष्टि लक्षण ८1७१ TUTIES ३४० अभितप्ता दृष्टि- विनियोग ८१८९ द्वि० BEPE ३४४ अभिनय के ४ भेद ६।२३,८ ९ २२४३२८ अभिनय लक्षण टाट ३२८ अभिनय-वस्तु के तीन भेद ८1१५ ३२९ अभिनय व्युत्पत्ति ८1६-७ ३२७ १०६ अमर्ष संचारी भाव ६।२१, ७: १०८ के बाद २२३, ३२० अराल असंयुतहस्त लक्षण ९।४६ ३६५ अराल असंयुतहस्त- विनियोग ९।४७-५२ ३६६ अरालखटकामुख नृत्तहस्त का ३८९ g लक्षण ९।१८८33 अगल करणलक्षण ११४ ४।११८ - अर्धचन्द्र असंयुक्त हस्त -लक्षण ९१४३ ३६५ अर्धचन्द्र असंयुत हस्त - विनियोग ९।४४-४५९ ३६५ अर्धनिकुट्टक अंगहार लक्षण ४२४५-४७ १४७ VRE अर्धनिकुट्टक करणलक्षण ४७० १०० अर्ध मत्तल्लि करणलक्षण 913. ४१८९ १०६ अर्ध मुकुल दृष्टिलक्षण 9913 ८२७५३४१ १४ अर्धमुकुल दृष्टिविनियोग ८ ९ १३४४ ४ अर्धरेचित करणलक्षण ४० ४७३१०२ अर्धसूची करणलक्षण 201 ४१३८१२१ ४६ अर्धस्वस्विस्तिक करणलक्षण ४१८३ १०५SP अलपल्लव (अलपदम् ) असंयुक्त ९९ १ ३७३ फिल63 हस्त लक्षण PP अलपल्लव (अलपदम् ) असंयुत ९९२ • ३७३ ४399 - 3 हस्त विनियोग बलात अंगहार-लक्षण ४।२२३-२२५१४२ बलात करणलक्षण ४।७ ९ १०४ अवकृष्टा ध्रुवा का उदाहरण ५ अंतिम प्रक्षिप्त २१३
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५१२ नाट्यशास्त्रम् अध्याय /श्लोक पृष्ठ 33 प्रतीक ११ अवकृष्टा ध्रुवा की उपोहन विधि ५ प्रक्षिप्त अंश २० ९, २१२ १८१ ५/५० पू० [9 ] अवकृष्टा ध्रुवा का फल १९२ अवकृष्टा ध्रुवा का लक्षण ५।१०३ ० अवतारणा का लक्षण उ० १७२ ३३२ ४४६ अवधूत शिरःकर्म -लक्षण 313 ५।१७८०२८ पू० ८।२८ उ० ३३२ अवधूत शिरःकर्म विनियोग ७।२९ 313 अवनद्ध आतोद्य अवलोकित दर्शनप्रकार PIS ८1१०४, १०७ ३४६ अवहित्था संचारी भाव 33 ६।२०, ७१८० २२३ एवं पूर्व गद्य ३० ९ १२७ अवहित्य करण ४१५६ पू० ३८३ अवहित्थ संयुतहस्त -लक्षण ९।१५६ अवहित्थ संयुक्तहस्त -विनियोग ९ १५७ ३८३ ३।९ ५ - ९ ६ ३।१०१ ७८७८८ SPP अशुभ रंगमंडप- पूजन के दोष ६।२२७/ १०६ २२४३१ ९ अश्रु सात्विकभाव के विभाव ३६० असंयुक्त हस्त के २४ भेद ४७ ९।४-७ ६।१ ९ ७।५७-५८ असूया संचारी भाव ६।१८ २२३ ० अहिदंशजन्य अभिघात ४ ७२८७-८८ गद्ययुक्त ३१३-१४ आकम्पित शिर-लक्षण 2018 आ ८/२० पू० ८२२ ३३० PE आकम्पित शिर-विनियोग ८।२२ ३३० आकाशीय चारियों के १६ भेद ४६ १० ११-१३ ४११९ आकाशीय चारियों के विनियोग १०४६४१ 75 आकेकरा दृष्टि लक्षण ८७८३४२ आकेकरा दष्टि-विनियोग ८ ९२ ३४४ आंगिक अभिनय के ३ भेद ८1११३२८३।१०० TO19 535 ८७ आचार्य लक्षण ४।२३५-२३७ १४५ आच्छुरित अंगहार 9918 २२६ आतोद्य के ४ भेद ६।२७-२८ ७३४२ ९२ आत्मसमुत्थ शंका ५०० आदान धनुषकरण १०।९ ६ ४२८ आधूत शिर का लक्षण ८।२७ उ० 15३३१
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वर्णक्रमगत विषयानुपूर्वी ४५१२ प्रतीक 28 / 62 अध्याय श्लोक 281 बघूत शिर-विनियोग ८२८ ३३२ ७।११ के पूर्व आर्या व गद्य २८४208 आनन्दज रुदित FOR PSIC ३ ९ ५ 895 ९ ।२२४ कडू क अभुग्न उरकर्म 83812 अभुग्न उर: कर्म विनियोग ९ २२५ ३ ९ ५ 918 आरम्भ ५।१८ पू० १७२ रुदित384 आतिज आलस्य संचारीभाव Pas ७।११ के पूर्व गद्य २८४ ६।१८७।७१ २२३३०५ आलीढ अंगहार ४२३१-२३३ १४४ CONT आलीढ स्थानक -लक्षण १०।६७ उ० ६८ पू० ४२३ आलीढ स्थान विनियोग SP १०1६८ उ० ७० पू० ४२३ 337 आलोकित दर्शन प्रकार 212 ८1१०३ FIRE ३४६ आवर्त करण ४१२० ११५ आवर्तित जंघाकर्म लक्षण P12 ९।२५८ उ०-२५९ ० ४०२ आवर्तित जंघाकर्म विनियोग ९।२६२० ४०३ ३८९ आविद्धाचक्रक नृत्तहस्त ९।१ ९० PE TEPIPSE ४१७ आविद्ध चारी ( आकाशीय ) १०1३८ 362 TEPIPIS ७।६२ के बाद गद्य ३०१ PES P आवेग भाव PPF ७६३.६५३०२-३०३ 751 आवेग भाव के विभाव ३१८ ७१ ९७ F FISE SP आवेष्टित हस्तकरण ९।२१५ ३९४ 238 ५४५ १८० आश्रावण का फल 8312 WSP आश्रावणा का लक्षण ५.१८ ३० १७२ ४ आसारित लक्षण ५।२१ १७४ SSP महायें अभिनय ८1९ ३२८ ९ १६६ ३८५ आह्वान हस्तक में 23. FSIP ११४ ESP ४।११६ TW TO TAPINGS 13-2018 आक्षिप्त करण आक्षिप्तक अंगहार १३५ ४।१८४-१८६ क ESP आक्षिप्तरेचित अंगहार 300 ४२३७-२४० १४५ १०५ Por आक्षिप्तरेचित करण 2310 ४१८१ PSE PSF आक्षिप्ताचारी ( आकाशीय ): १०३७ ४१७ ई ७| ११ पूर्व गद्य २८५ PF ईर्ष्याजन्य रुदित
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५१४ नाट्यशास्त्रम् पृष्ठ प्रतीक IIII १४९ ईश्वरी पिण्डी ( ईश्वर की ) ४२५३ ७१८१ गद्ययुक्त ३० ९ उ उग्रताभाव ३ ९४ 995 उत्कर्षण हस्तक ९ ।१६६ 995 उत्क्षिप्त शिर- लक्षण 997 ८३३ पू० ३३३ FUP उक्षिप्त शिर-विनियोग ८।३३ उ० ३३३ ३४८ उत्क्षेप भूकर्म लक्षण? Ple ८1११७ ३४९ ६ उत्क्षेप भूकमं विनियोग ८।१२१-१२२ P उत्तम पात्र के कर ९।१७२ पू० ३८६ १७३५० ३८६ ३८७ १७४ पू० I उत्तल हस्त प्रचार 27/0 १८१ की टिप्पणी ३८८ ९ ।१८१ एक ३८८ उत्तान अंगप्रचार EPIS एक श ३९ ० PP उत्तान वंचित नृत्त हस्त PI ९ 1१ ९ ५ ९ ।१६ ९ ३८५ उत्तान हस्तप्रचार 412 ३८८ उत्तान हस्तप्रचार 82912 ९।१८२० १७५ PSE ५।२२ उत्थापना लक्षण 98812. सिए १८९ eP उत्थापना फल उ० २०६ उत्थापनी ध्रुवा का उपसंहार ५।४८५ अंतिम प्रक्षिप्त २११ ६०६६० उत्थापनी ध्रुवा की उपोहनविधि ५ अन्तिम प्रक्षिप्त २११ १८३ SPE उत्थापनी ध्रुवा का प्रयोग काल ५1५८ १८३ 828 उत्थापनी ध वा लक्षण 12 ५।५ ९ -६१ १८४ उत्थापनी प्रथम परिवर्त ५।६४ १८५ Sup उत्थापनी द्वितीय परिवर्त ५/६५ 1 ५१६४, ५/७५, ५८२ १८४; उत्थापनी तृतीय परिवर्त १८७, १८८ SFE PSE उत्थापनी चतुर्थ परिवर्त ५१८२-८६ १८८८९ we PP उत्थापनी ध्रुवा ( त्र्यश्रा ) १८३ ५।५ ९ -६१ क w Se PEP का लक्षण Pr १८३ ५1५८ ZyP उत्थापनी वा प्रयोग काल ७१६५ के बाद गद्य ३०१ Pop उत्पातकृत आवेग PSIV ३८१ ety उत्संग संयुक्त हस्तलक्षण ९ ।१३९ उत्साह स्थायीभाव ७।२१ गद्य युक्त २८६
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वर्णक्रमगत विषयानुपूर्वी ५१५BP प्रतीक कलिय / अध्याय श्लोक पृष्ठ उत्पन्दिता चारी ( भौमी ) १०/२४४१४ उद्घट्टित अङ्गहार ४।१८६. १८७१३५ उद्घटित करण ४।१६४१३० epp उद्घट्टित पादकर्म लक्षण ४ ९/ २६६-२६७४०३ उद्घट्टित पादकर्म विनियोग ९ ।२६७ उ०- २६८ ०४०४ IIII ५।१६७, १६८ PIPE २०७ उद्घात्यक लक्षण उद्वर्तन उरुकर्म लक्षण Pre ९/ २५३४०० उद्वर्तन उरुकर्म विनियोग S ९ ।२५५ उ० 75876 ४०१ २०४ उद्वाहि मुखकर्म लक्षण 1912 ८1१५५ MSR ३५४ ०६४ उद्वाहि मुखकमं विनियोग ०१ ८/१५६ ३५५ उद्वाहित उर:कर्म लक्षण ९।२३१ पू० 10 BETE ३ ९ ६ ९।२३१०३ ९ ६205 उद्वाहित उर: कर्म -विनियोग 09 उद्वाहित कटिकर्म लक्षण ९।२४७ उ० ३९९ of उद्वाहित कटिकर्म विनियोग ९।२५० उ०३ ९९ 299 उद्वाहित जंघा कर्म लक्षण ९।२६१ उ० ४०२ ६३ उद्वाहित जंघाकर्म विनियोग ९।२६४ उ० ४०३ उद्वाहित शिर ८/२७ ३३१ ८२७० ३३१ 70519 उद्वृत्त शिर924 उद्वृत्त करण 86919 ४।१५२ १२५ ४ उद्वृत्त वृत्तहस्त 70813 ९।१८५ ३८८ उद्वृत्तक अंगहार ) ४२२ ९ -३३२ १४३ उद्वृत्ताचारी ( आकाशीय ) १०।३ ९ ४१७ ९ ।२१६, २२१३ ९४, ३ ९ ५228 उद्वेष्टित हस्तकरण 201 उन्नत प्रोवा- लक्षण ८1१७२ ३५७ EPY उन्नत ग्रीवा विनियोग OP ८।१७२०३५७ euf उन्नत (समुन्नत ) पार्श्वकर्म -लक्षण ९/ २३६३ ९ ७ ( ) उन्नत समुन्नत पाश्र्वकर्म विनियोग ९।२३ ९ ३ ९८३०१ उन्मत्त करण ४।७५ १०३2PX, उन्माद संचारीभाव ६।२०७१८४ द्ययुक्त २२३ ३११ - 912 उन्मेष नेत्रपुटकर्म लक्षण ८1१०८ ३४७ · 912४ उन्मेष नेत्रपुट विनियोग ८११२ ३४७
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५१६ नाट्यशास्त्रम प्रतीक कला / अध्याय श्लोक कहिए ४ उपसंहार, प्रथम अध्याय का 10 १।१२६ ि ३८ P उपसंहार, द्वितीय अध्याय का २०१०५ ६७ उपसंहार, तृतीय अध्याय का १४ ३।१०२ एक ८८ चतुर्थ अध्याय का ४३२० १६७ ०४ उपसंहार,४४ उपसंहार, पश्चिम अध्याय का 12 ५।१७४ एवं प्रक्षिप्त २१५ उपसंहार, षष्ठ अध्याय का PIN ६।८३ २७७, सप्तम अध्याय का 212 ७।१२१ ३२५ ० उपसंहार Par उपसंहार, अष्टम अध्याय का ८।१७५ ३५८ ६ उपसंहार, नवम अध्याय का PiS ९।२३८४०७ उपसंहार, दशम अध्याय का RS १०।१०४ र ४३० उपसृत करण ४।१५३ १२६ १६ उपोहन विधि ( ध्रुवा की ) ५।१७४ के बाद प्रक्षिप्त २० ९ उपोहन के वर्ण ५ प्रक्षिप्त २१० ६ उपोहन विधि के अक्षर ५ प्रक्षिप्त २१० ०४ उपांगों के ६ भेद ८।१३ उ० ३२ ९,, ६०५७ २६२ २६३ ० उपहसित हास्य ०४३६६५२ PES उर: कर्म के ५ भेद EPIS ९ ।२२३ ३ ९५ PEE उरः पाश्वर्धमण्डल नृत्तहस्त ९/ २०५ ३९२ / २०४ एक ३९२ FP उरोमण्डली नृत्तहस्त ९ उल्लोकित दर्शन प्रकार PSPIR ८।१० ९ ० ३४७ Exp उल्वण ( अलपल्लवोल्वण ) वृत्तहस्त ९ २०८३ ९ ३ उदरकर्म के तीन भेद ९।२४१० ३ ९ ८ उदरक के चार भेद ९ २४३ ३ ९९, २५१० ४०० क ऊरुकर्म के ५ भेद ९।२५० उ० ऊरुवृत्ताचारी भौमी epis १०।२२ ४१३ ऊर्णनाभ असंयुतहस्त ) १२ ३७७ ऊर्णनाभ असंयुतहस्त विनियोग ९ ।१२० च०-१२१ ३७८ ४१८६ एक समक १०६ ६ ऊर्ध्वजानुकरण ४१६ PP ( ) जानु चारी आकाशीय लक्षण १०।३३९ २०३० ३९ १ 01. ऊर्ध्वमण्डली नृत्तहस्त ९।२२० PS 3gr pe ऊर्वसंस्था हस्तकरण ३९५
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वर्णक्रमगत विषयानुपूर्वी ५१७ प्रतीक अध्याय /श्लोक ऊर्ध्व ( उत्तान ) हस्तप्रचार ९ १८१ ३८८ ४।१५७ उ०, १५८905ए एलकाक्रीडित करण पू० १२८ एकाक्रीडिताचारी (भौमी) १०।२० ४१३ ऐरावती पिण्डी (इन्द्र की) ४२५५ १४ ९ , ७।१०८ के २२३, ओ औत्सुक्य संचारी भाव ६।१ ९ बाद प्रक्षिप्त ३२ ९ क कटिकर्म के ५ भेद ९।२४४ उ०- २४५ पू ० ३९९ टिच्छिन्न करण ४.७१ उ०७२ पू० १०२ कटिभ्रान्त करण ४।१०३ उ०- १०४ तु० १११ कटिरेचक ४२४८ १४७ 762 कटिसम करण ४।७ ९ उ०.८० पू० १०४ tee कपित्थ असंयुक्त हस्त ३६८ -कपित्थ असंयुतहस्त, विनियोग ९८६० I PES ३६८ ३७९ ( -कपोत कपोतक ) संयुत हस्त -लक्षण ९ उ० -कपोत (कपोतक ) संयुत हस्त- SPP ९।१३१।१३० उ० १३३ पू ० ३७९ विनियोग कम्प सात्त्विक भाव ६२२, ७/ ९ ६ २२४, ३१७ -कम्पन अधरकर्म लक्षण ८।१३ ९ च० ३५२ UPE कम्पन अधरकर्म विनियोग ८।१४२ पू० ३५२ -कम्पन ऊरूकर्म. लक्षण ९।२५१ उ० ४०० OVE -कम्पन ऊरूकर्म विनियोग ९ ।२५४० ४०१ exf कम्पित गण्डकर्म लक्षण ८1१२५ ३५१ Pay कम्पित गण्डकर्म विनियोग ८।१३७ द्वि० ३५२ ३०४ ४।३० १०/३ ९४, ४० ९ २४६ करण का लक्षण [ 2PPIS करणों का पूर्व रूप ४।५७-५८ ९७ १०८ करणों के नाम ४ / ३४-५५ की ९ ५ - ९ ६ करणों के प्रयोगस्थल 2315 - ४१५६-५७ ९७ करिहस्त करण-लक्षण ४।१४७ उ०- १४८ पू० १२५ करिहस्त नृत्तहस्त ९।१ ९९ बैंक ३ ९ १ करुण रस का लक्षण PIS ६।६१ के बाद गद्य ३६५ NE करुण रस के अनुभाव Pis ६।६१ के बाद गद्य ३६५
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५१८ नाट्यशास्त्रम् अध्याय /श्लोक पृष्ठ शु प्रतीक करुण रस के भेद ६॥७८ २७२ करुण रस के विभाव ६।६१ के बाद गद्य ३६५ शि करुण रस के व्यभिचारी भाव ७।१११ ३२१ करुण रसदृष्टि-लक्षण ८।४७ प्र० द्वि० तृ० ३३५ करुण रसदृष्टि - विनियोग ८०४७ च० ३३५. कर्कट संयुक्तहस्त लक्षण ९ ।१३३ उ०- १३४१० ३८० कर्कट संयुतहस्त विनियोग ९ ।१३४ उ०- १३५ ५० ३८० कर्त्तरीमुख असंयुतहस्त लक्षण ९ ।३९ ३६५. गाडीक PPP कर्तरीमुख असंयुत हस्त-विनियोग ९।४०-४२, ३६५ कडीक esp ९४ कलापक का लक्षण ४।३२ प्र० 84p कागुलक असंयुतहस्त लक्षण ९ ८८ ३७३ SPE कागुलिक असंयुतहस्त विनियोग ९।८९.९० ३७३ 326 कान्ता रसदृष्टि लक्षण ८०४४ पू० ३३५ १८६ कान्ता रसदृष्टि -विनियोग ८।४४ उ० ३३५ कुचित करण ४।११३ ११३ कुचित गण्डकर्म ८०१३५ तृ० ३५१ कुचित गण्डकर्म विनियोग ८।१३७ उ० ३२२ कुचित ग्रीवाकर्म • लक्षण ८।१७१ प्र० ३५७ कुचित ग्रीवाकर्म विनियोग ८०१७१ द्वि ३५७ कुचित नेत्रपुटकर्म लक्षण ८1११० प्र० ३४७ कुचित नेत्रपुटकर्म विनियोग ८।११३ उ० ३४७- ४०६ कुचित पादकर्म लक्षणFRIS ९।२७७ उ०-२७८ पू०पीक ९।२७८ उ०-२७९ पू० ४०६ कुचित पादकर्म विनियोग ३४९. ८1११ ९ पू० १०४ कुचित कर्म लक्षण ३४९ कुचित कर्म विनियोग ८.१२५FIFT Sop ३४० ८1७० 32-92 "चिता संचारीभावदृष्टि लक्षण ३४४ कुचित संचारीभाव विनियोग ८८९ पू० ७।६२ के बाद गद्य ३०१ कु जिराभ्रमणकृत आवेग का लक्षण कुट्टन चिबुककर्म -लक्षण ८।१४५ ० ३५३ ८१४० उ० एक ३५४ 938 कुट्टन चिबुककर्म विनियोग
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वर्णक्रमगत विषयानुपूर्वी BP / प्रतीक अध्याय श्लोक पहिर ५१पृष्ठ९ 828 कुम्भभेदन- विधान ३१८८ BEES BREA ८५ ८५ SPP कुम्भभेदन न होने से दोष ३१८९ २८६. ४०६ कृत ७२० ३९ १ UFF # ( 1 केशबन्ध नृत्तहस्त ९।१ ९७ PSP OPC कैशिक न्याय १०१८४ उ०-८५ पू० ४२६ १०१७४ द्वि० ४२४ कैशिकी वृत्ति की योजना १।४२ १६ PFP क्रान्तक करण ४| ११२ ११३ 328 क्रुद्धा स्थायिभावदृष्टि -लक्षण ८५६ प्र० द्वितृ० ३३७ 08p क्रुद्धा स्थायिभावद ष्टि - विनियोग ८०५६ च० ३३७ क्रोध के ५ भेद ७/१५ २८५ PEE क्रोध भाव का लक्षण ७।१४ के बाद गद्य २८५ ३६८ - ख खटकामुख असंयुत हस्त लक्षण९।६० / ६१.६३ ३६८FER खटकामुख असं युतहस्त विनियोग ९ 199 खटकावर्धमानक संयुक्त हस्त- लक्षण ९ ।१३७ उ० 799 खटकावर्धमानक संयुतहस्त-विनियोग ९ ।१३८ FP ३८०३८० खण्ड लक्षण १०/४ पू० or for ४० ९ Sep खण्डन चिबुककर्म- लक्षण ८1१४५ उ ० ३५३ EPP खण्डन चिबुककर्म विनियोग ८. १४८ पू० ३५४ app खल्व उदरकर्म ९ / २४१ पू० २४१ SXE खल्व उदरकर्म लक्षण ९ ।२४१० ३९८ खल्व उदरकर्म विनियोग ९।२४२ उ०- TEE ३ ९८ ग गंगावतरण करण ४।१६ ९ १३१ गजक्रीडितक करण EUE गजतन्तसंयुतहस्त लक्षण ४१२९।१५४९ ३८३११ ९. गजदन्तसंयुतहस्त विनियोग ३८३ UPP गण्ड कर्म के ६ भेद ८।१३३ उ०- १३४ पू० ३५१ गण्डकर्म लक्षण EPI ८।१३४०-१३५ ३५१ 895 गण्डकर्म विनियोग ८। १३६-१३८ १० ३५२ ४।१३२ ११ ९. गण्डसूची करण 310 गतिमण्डल अङ्गहार ४२१०-२१२ १४