भरत नाट्यशास्त्र - प्रदीप हिन्दी भाष्य १ — पृष्ठ 1–10
भरत नाट्यशास्त्र - प्रदीप हिन्दी भाष्य १ · पृष्ठ 1–10
पृष्ठ 1
पाठ पढ़ें पाठ छिपाएँ
केवल या और सिन्हा विशेषज्ञ लाभ हिन्दी नाट्य शास्त्र शुक्ल शास्त्री बाबूलाल चौरवम्भा संस्कृत संस्थान को ब • इस है और • सि तत्व ब रौनक अ निखार सिंघ भाप ग्राम पानी गार्ग 32.1 ग्राम से 14.9 ग्राम प. कैल्शियम, HT आयरन, 0. मिग्रा पोटेशि भी यार तो क कभी तो रुस रानी कुछ ऐस पर चलती ह है, लेकिन पहुंचते ला देखते वाराणसी लाइफ में बहुत लखने की उम्र में बातें स्वर्णिम देती है । मेशा स्वस्थ संवाद से आपकी राय क्योंकि एक छत के लग पार्टी बनकर है बातचीत हो, महौल बहुत बोझिल और आपकी दुनियाँ हो सकती क्योंकि दगी का मैगनेटिक में विशेष रूप से और प्यार की आज के दिन किसी में फांसले हो गये मसाला मिला दें । जार को बंद करके रखें । स्वादिष्ट खट्टा मीठा नीम्बू का अचार तैयार है । मिक्स चटपटा सामग्री: 500 ग्राम हरी मिर्च, 250 ग्राम खटाई, 250 ग्राम लहसुन छिलका निकाला हुआ, 250 ग्राम अदरक, सरसो का तेल आधा कप, नमक स्वादानुसार, जीरा भुना हुआ चार चम्मच विधि: अदरक लहसुन, मिर्च और लहसुन और जीरा को मूसल में डालकर कूट लें । अब इसमें खटाई मिलाकर फिर से कूट लें । इसके बाद इसमें नमक मिलाए और सरसो का तेल मिलाकर दिल्ले एक्स कहना है? डराओ नहीं, जो क फ कह दो । क्या बात है...? ठीक है । गुलाब मुझे क्यों दे रहे हो? र यह सब बातें कहो । • शिश तो करो । तुम्हारे कता है? जैसे ल मुझे इरिटेट कर रहे हो म्हारे पास । प आई और तुम इतन हो । क्या तुमनेयहां मुझे ? किया । आ रही हूं । जिसके लिएपरेशान की बात कहो । वह भी तुम्हारी तरह सामने
पृष्ठ 2
पाठ पढ़ें पाठ छिपाएँ
हिन्दी नाट्य शास्त्र 9 चौरखम्भा संस्कृत संस्थान • वाराणसी
पृष्ठ 3
पाठ पढ़ें पाठ छिपाएँ
इस पृष्ठ पर कोई पाठ नहीं मिला — ऊपर मूल चित्र देखें।
पृष्ठ 4
पाठ पढ़ें पाठ छिपाएँ
श्रीभरतमुनिप्रणीतं सचित्रम् नाट्यशास्त्रम् ( सप्तमाध्यायान्तः प्रथमो भागः ) ( परिष्कृत द्वितीय संस्करण )
पृष्ठ 5
पाठ पढ़ें पाठ छिपाएँ
इस पृष्ठ पर कोई पाठ नहीं मिला — ऊपर मूल चित्र देखें।
पृष्ठ 6
पाठ पढ़ें पाठ छिपाएँ
॥ श्रीः ॥ काशी संस्कृत ग्रन्थमाला २१५ श्रीभरतमुनिप्रणीतं सचित्रम् नाट्य शास्त्र स्त्रम् म् ' प्रदीप ' - हिन्दीव्याख्या - टिप्पणी - परिशिष्ट-प्रस्तावनादिभिर्विभूषितम ( सप्तमाध्यायान्तः प्रथमो भागः ) ( परिष्कृत द्वितीय संस्करण ) सम्पादक एवं व्याख्याकार श्रीबाबूलाल शुक्ल, शास्त्री एम ० ए ०, साहित्याचार्यं प्रभृति [ मध्यप्रदेश शासन ( साहित्य अकादमी ) सम्मानित ] प्राध्यापक एवं अध्यक्ष स्नातकोत्तर संस्कृत अध्यापन एवं संशोध विभाग शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, शाजापुर ( म ० प्र ० ) हमे ब्राह्मी सरस्वती भा संस्कृतसंहाराणा चौरवम्भा संस्कृत संस्थान भारतीय सांस्कृतिक साहित्य के प्रकाशक तथा वितरक पो ० आ ० चौखम्भा, पो ० बा ० मं ० १३ ९ जड़ाव भवन, के. ३७/११६, गोपाल मन्दिर लेन वाराणसी ( भारत )
पृष्ठ 7
पाठ पढ़ें पाठ छिपाएँ
प्रकाशक: चौखम्भा संस्कृत संस्थान, वाराणसी मुद्रक: विद्याविलास प्रेस, वाराणसी संस्करण: द्वितीय, वि ० संवत् २०४० मूल्य: रु ० ७५-०० चौखम्भा संस्कृत संस्थान, वाराणसी इस ग्रन्थ का परिष्कृत तथा परिवर्धित मूल पाठ एवं टीका, परिशिष्ट आदि के सर्वाधिकार प्रकाशक के अधीन हैं । अन्य प्राप्तिस्थान चौखम्भा विश्वभारती पो ० बाक्स नं ० ८४ चौक ( चित्रा सिनेमा के सामने ) वाराणसी - २२१००१ ( भारत ) फोन: ६५४४४
पृष्ठ 8
पाठ पढ़ें पाठ छिपाएँ
THE KASHI SANSKRIT SERIES 215 ***** NATYA SASTRA OF BHARAT MUNI Critically edited with Pradipa ' Hindi Commentary, Various readings, Introduction, Preface, Index and Critical notes ( PART FIRST ) ( Chapters 1 to 7 ) ( Second revised Edition ) By Prof. BABU LALA SUKLA, SASTRI M. A., SahityIcIrya Honoured by the Madhya Pradesh Government ( Sahitya Acedemy ) Professor and Head of Sanskrit Department in Postgraduate Teaching and Research, Government Postgraduate Coollege, Shajapur ( M. P. ) CHAUKHAMBHA SANSKRIT SANSTHAN Publishers and Distributors of Oriental Cultural Literature P. O. Chaukhambha, Post Box No. 139 Jadau Bhawan, K. 37/116, Gopal Mandir Lane VARANASI ( INDIA )
पृष्ठ 9
पाठ पढ़ें पाठ छिपाएँ
C Chaukhambha Sanskrit Sansthan, Varanast Phone: 65889 Edition: 1984 Price Rs. 75-00 Also can be had of CHAUKHAMBHA VISVABHARATI Post Box No. 84 Chowk ( Opposite Chitra Cinema ) VARANASI - 221001 Phone: 65444 Alan! ) ZAKAZAY
पृष्ठ 10
पाठ पढ़ें पाठ छिपाएँ
प्रस्तावना द्वितीय संस्करण भरतमुनि प्रणीत नाट्यशास्त्र के प्रदीप हिन्दी व्याख्यादि से मण्डित शोधपूर्ण संस्करण के प्रथमभाग के द्वितीय संस्करण को सहृदय पाठकों एवं विवेचक विद्वानों, प्राध्यापकों एवं अधीतिजन के समक्ष प्रस्तुत करते हुए प्रसन्नता हो रही है । इस व्याख्या के प्रकृत संस्करण के शीघ्र ही द्वितीय संस्करण होने की बात से यह भी स्पष्टतः दृष्टिगत होना आवश्यक है कि अब हमारे देश तथा प्रदेश में ' नाट्यविद्या ' का अनुशील प्रभूतमात्रा में विकसित है तथा विद्वानों के ऊहापोह का लक्ष्य भी बन रहा है । इसी बीच नाट्यशास्त्र के अनेक प्रकरण ग्रन्थों की भी हिन्दी व्याख्याएँ प्रकाश में आयी तथा कुछ संस्कृत मूल के साथ भी इसी क्रम में सम्पादित हुए तथा हो रहे हैं । यह सभी बातें अधिक उत्साहवर्धक हैं तथा नाट्यविद्या का अनुशीलन करने वालों को आशादायी भी । प्रथम से सप्तम अध्याय तक के प्रथम भाग के इस संस्करण में सभी प्रथम - भाग स्थलों दोहराया जाकर उनमें अपेक्षित सुधार करते हुए प्रस्तुत किया जा रहा है । इसके अतिरिक्त टिप्पणियों में भी पञ्चम अध्याय से सप्तम अध्याय पर टिप्पणियाँ लगाई गयी हैं तथा इन्हीं अध्यायों पर पूर्व में मूल के साथ लगी टिप्पणियों को भी व्यवस्थित करते हुए रखा गया है । इसी संस्करण को अनेक विश्वविद्यालयों के द्वारा ' एम. ए ' के लिये अनुमोदित तथा स्वीकृत ग्रन्थ के रूप में अनुशंसित करने के भी प्रयास अधिकाधिक होते जा रहे हैं तथा अनेक विश्वविद्यालयों में यह लगभग