Part I Atma Vigyanopanishad I - Motilal Shastri — पृष्ठ 1–10

आत्म विज्ञानोपनिषत् - मोतीलाल शास्त्री १ · पृष्ठ 1–10

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अथ खण्ड चतुष्टयात्मक ' श्राद्धविज्ञान ' ग्रन्थान्तर्गत आत्मविज्ञानोपनिषत् प्रथम खण्ड पं. मोतीलाल शास्त्री aratf थपथिकः प्रकाशक राजस्थान पत्रिका प्रा ० लिमिटेड, केसरगढ़, जवाहरलाल नेहरू मार्ग, TRENIR संशोधि जयपुर

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अथ खण्डचतुष्टयात्मक ' श्राद्धविज्ञान ' ग्रन्थान्तर्गत आत्मविज्ञानोपनिषत् प्रथम खण्ड पं. मोतीलाल शास्त्री वेदवीथिपथिकः ब्राह्मणो ब्रह्मन् ब्रह्मवर्चसी य संस्करण: राजस्थान वैदिक संस्थान तत्व शोध मानवाश्रम १ -विद्यापीठ जयपुर , मूल्य

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प्रकाशक: राजस्थान पत्रिका प्रा ० लिमिटेड, केसरगढ़, जवाहरलाल नेहरू मार्ग, जयपुर । © सर्वाधिकार - लेखकाधीन मुद्रक: श्री बालचन्द्र यन्त्रालय, ' मानवाश्रम ', दुर्गापुरा रोड, जयपुर - १५

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प्रकाशकीय आज से लगभग पचास वर्ष पूर्व पं ० मोतीलालजी शास्त्री ने चार खण्डों में ' श्राद्धविज्ञान ' नामक वृहत् वैज्ञानिक ग्रन्थ की रचना की थी जिसका प्रकाशन उन्होंने १८ वर्ष के सुदीर्घ अन्तराल के बाद प्रारम्भ किया, परन्तु अपने जीवन काल में वे उसे पूरा नहीं कर पाये । फिर भी वे प्रथम एवं तृतीय खण्डों का प्रकाशन कर गये । उनके उत्तराधिकारियों को यह श्रेय देना होगा कि उनके लिखे हुए बहुमूल्य ग्रन्थों को उन्होंने सम्पूर्ण निष्ठा के साथ सम्भाले रखा और नष्ट या लुप्त नहीं होने दिया । लगभग एक वर्ष पूर्व श्राद्ध-विज्ञान तृतीय खण्ड " सापिण्ड्य विज्ञानोपनिषत् का पारायण करने का अवसर मुझे मिला और पढ़कर विस्मित बिना नहीं रहा । इसके उपरान्त प्रथम खण्ड भी पढ़ गया और निश्चय किया कि इस ग्रन्थ के शेष दो खण्डों का प्रकाशन भी यथाशीघ्र किया जाय । प्रथम खण्ड की भी कोई प्रति शेष नहीं थी, अतः उसका भी दूसरा संस्करण प्रकाशित करके इस ग्रन्थ को पूर्ण रूप देने का काम हाथ में लिया गया । राजस्थान पत्रिका ने प्रकाशन का भार अपने ऊपर लिया । पिछले श्राद्धपक्ष में द्वितीय खण्ड ' पितर'-स्वरूपविज्ञानोपनिषत् छपकर तैयार हो गया । प्रथम खण्ड ' आत्मविज्ञानोपनिषत् ' आपके हाथों में है और चतुर्थ खण्ड भी अतिशीघ्र प्रकाश में आने वाला है । इसके प्रकाशन के साथ ही श्राद्धविज्ञान- परियोजना का संकल्प पूरा हो जायगा । इस कार्य को सुचारू रूप से सम्पन्न करने का भार पं ० मोतीलालजी के ही पौत्र चिरंजीव प्रद्युम्न कुमार ने अपने हाथ में लिया । पाण्डुलिपि से प्रेस कापी तैयार करने, प्रूफ संशोधन एवं सम्पादन करने का दायित्व महाराजा संस्कृत कॉलेज, जयपुर के प्राचार्य श्री कैलाश चतुर्वेदी ने उठाया और कार्य द्रुतवेग से चल पड़ा । ' श्राद्धविज्ञान ' भारतीय संस्कृति का एक दुर्लभ एवं महत्त्वपूर्ण ग्रन्थ है जो पूर्णतः वैदिक विज्ञान पर ग्राधारित जीवशास्त्र है । श्राद्ध एवं पिण्डदान के सम्बन्ध में सुधारवादियों एवं प्राधुनिकतावादियों ने जो नाना प्रकार की भ्रान्तियाँ फैला रखी हैं, उन्हें इस ग्रन्थ पर विशेषतः ध्यान देना चाहिए । तभी उन्हें अनुभव होगा कि विज्ञान क्या है । मुझे आशा ही नहीं दृढ़ विश्वास है कि इस ग्रन्थ का प्रकाशन वेद - विज्ञान की एक अमूल्यनिधि सिद्ध होगा और वेद - प्रेमी इससे लाभान्वित होंगे । बसन्त पंचमी वि. सं. २०४३ कर्पूरचन्द ' कुलिश '

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समर्पण भारतीय वेदविद्यासमुद्धारक वेदमूर्त्ति समीक्षा चक्रवर्ती स्व. पं. मधुसूदनजी ओझा विमल स्मृति में श्रद्धापूर्वक समर्पित ।

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श्राद्धविज्ञान प्रथम खण्ड श्रात्मविज्ञानोपनिषत् वेदमूर्ति समीक्षा चक्रवर्ती पं. मधुसूदन ओझा [ वि. सं. १ ९ २३ -१ ९९ ६ ]

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विषय गमिक स्तुति आगमस्तुति पितृस्तुति मङ्गलपाठ किमपि प्रास्ताविकम् श्रात्मस्वरूप परिचय आत्मविज्ञोपनिषत् प्रथम खण्ड विषयसूची पृ ० सं ० विषय पृ ० सं ० २ ब्रह्म का धावितान १२३ ४ रसबलात्मकब्रह्म की अनन्तविभूति १२७ पञ्चकल मायोपाधिक ब्रह्म १२८ दशकल - प्रकृतिब्रह्म १३० १३-१८ षोडशकल अमृतब्रह्म १३५ १८-६२ प्राण ब्रह्म के चार पाद १३५ ६४--६५ अमृतात्मस्वरूप परिचय १३६ प्रकरणोपसंहार १४२ अमृतात्मविज्ञानोपनिषत् - प्रथमा ( ६५-१४३ ) अव्यक्तात्मविज्ञानोपनिषत् - द्वितीय ( १४५ - १६६ ) चतुष्कलः षोडशकलो वा पुरुषात्मा ६६ अव्यक्तात्म स्तुतिः १४५ अमृतात्मस्तुतिः ६६-६७ ब्रह्म की विकार सृष्टि १४८ आत्मस्वरूपजिज्ञासा ६६ वाङ्मय अव्यक्तात्म १४नास्तिकाभिमत ग्रात्मस्वरूप ग्रास्तिकाभिमत ग्रात्मस्वरूप ७० अव्यक्तात्मा के तीन विवर्त्त १५० ७१ नियतिलक्षण अन्तर्यामी १५२ आस्तिकों का तत्त्ववाद ७१ ऋतसत्यलक्षण - सूत्रात्मा १५७ स्वयम्भू प्रजापति का आत्मोपदेश ७५ उपलब्धिलक्षण - वेदात्मा १५६ व्यासाभिमत आत्मतत्त्व परीक्षा ८६ त्रिः सत्यप्रजापति १६२ हमारी अध्यात्मसंस्था ६६ त्रित्त्वप्रवर्त्तक श्रव्यक्तात्मा १६२ सृष्ट्यनुगता ग्रागमद्वयी १०४ अव्यक्तात्मा का प्रकृतिभाव १६४ ग्रहोरात्रस्वरूप दिग्दर्शन १०५ | प्रकरणोपसंहार १६५ मनुःस्वरूप दिग्दर्शन १०६ यज्ञात्मविज्ञानोपनिषत् - तृतीया मनु र मन्वन्तर १०६ काल के विचालीभाव मन्वन्तरविज्ञान लयकाल मीमांसा नित्यानित्यविवर्त्त १०७ ( १६७ - १८ ९ ). १० ९ यज्ञात्मस्तुतिः ११८ पारमेष्ठ्यतत्त्व परिचय ११६ | आत्मसोपानपरम्परा १६७ १६६ १७०

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श्राद्धविज्ञान प्रथम खण्ड श्रात्मविज्ञानोपनिषत् विषय पृ ० स ० विषय पृ ० सं ० अदः इदं विवर्त्त १७२ | सुषुप्त्यधिष्ठाता महानात्मा २२३ यज्ञात्मस्वरूप समन्वय १७२ | आकृति प्रकृति - प्रहङ्कृतिभाव २२५ यज्ञात्मा के यज्ञ - चित् नामक दो विव १७४ सत्त्व - रज - स्तमोलक्षणा महानात्मा २२८ यज्ञात्मक विष्णु का स्वरूप परिचय १७४ चान्द्र महानात्मा २२६ परमेष्ठी का प्रथम विवर्त १७७ चान्द्र प्रज्ञानात्मा २३० विश्वप्रकृतिभूत यज्ञेश्वर यज्ञात्मा के विविध विवर्त्त आध्यात्मिक यज्ञात्मा १७८ प्रकरणोपसंहार २३३ १८५ १८६ यज्ञ का योनिभाव त्रयीमय त्रिगुणात्मा प्रकरणोपसंहार १८७ | प्राणात्मस्तुति प्राणात्मविज्ञानोपनिषत् षष्ठो ( २३५-३६६ ) १८७ श्रविज्ञानमूला, तथा क्षणिक विज्ञानमूला भ्रान्ति २३८ २३५ १८६ विभिन्न पक्ष समर्थन २३६ विज्ञानात्मविज्ञानोपनिषत् - चतुर्थी ( १ ९१-२१२ ) व्याख्यादोषमूला ग्रात्मस्वरूपविप्रतिपत्ति २४४ आत्मभेदस्वरूप परिचय २४४ आत्मपरिग्रहमूलक - आत्मस्वरूप भेद २४७ विज्ञानात्मस्तुति १ ९ १ सीमाभावप्रवर्त्तक ' माया ' परिग्रह २४८ परमेष्ठी का अपेक्षाकृत अव्यक्तत्त्व १ ९ ४ षोडषकलाप्रवर्तक- ' कला ' परिग्रह २४६ विश्वस्य हृदयम् १ ९ ४ सगुण- सविकारभाव प्रवर्त्तक सोम - चित इन्द्र - विभूतियाँ १६५ ' गुण - विकार ' परिग्रह २४६ यज्ञप्रवर्त्तक विश्वात्मा १६६ सावरण - साञ्जनभाव प्रवर्तक-सूर्य्यात्मक क्षत्ररूद्र १६६ ' आवरण अञ्जन ' परिग्रह २५० सौर अन्नादाग्नि के तीन विवर्त्त २०१ विभूति तथा पाप्मा २५१ सूर्य्यमूलक विज्ञानात्मा २०७ विप्रजापति २५१ धिषणा तथा प्राणविवर्त्त २१० सर्वधर्मोपपन्न पुरुषात्मा २५२ प्रकरणोपसंहार २११ प्रजापति - चतुष्टयी २५२ जीवात्मस्वरूपोपक्रम महानात्मविज्ञानोपनिषत् - पञ्चमी ( २१३-२३३ ) २५४ चिदात्मा, चिदंश, चिदाभास २५४ योग - बन्ध - विभूति २५५ महानात्मस्तुति महान् की महत्ता २१३ विदित - प्रविदित - विदिताविदितातीत-२१५ आत्मविवर्त्त २५७ महोदेव और महान् सोम - चित्र पितरप्राण प्रजापति के तीन विवर्त त्रिगुणात्मक पुरुषब्रह्म एकाक्षरमूर्ति महद्ब्रह्म २१६ २१६ पृथिवी, अन्तरिक्ष, द्यौः २५८ शब्दब्रह्मविवर्त्त २५६ २१८ विश्वाभुवनानि २६० २१६ रुद्र - त्रैलोक्य २६१ २२१ दक्षिणामूर्ति शिवतत्त्व २६१ विश्वयोनिलक्षण महानात्मा २२२ | वायुवेष्टित भूपिण्ड २६२

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श्राद्धविज्ञान प्रथम खण्ड आत्मविज्ञानोपनिषत् विषय पृ ० सं ० । विषय पृ ० सं ० श्रन्नादप्रकृति और भूपिण्ड २६२ | विभूतिलक्षण- देवतत्त्व ३२२ पार्थिव ' एमूषवराह ' २६३ विभूतिलक्षण - मनुतत्त्व ३२३ शूद्र और शूकरपशु २६४ विभूतिलक्षण - गन्धर्वतत्त्व ३२३ अमृत - मर्त्यलक्षणा पार्थिवसंस्था २६५ विभूतिलक्षण –ग्रहतत्त्व ३२३ देवासुर प्रतिस्पर्द्धा २६६ विभूतिलक्षण - पशुतत्त्व ३२३ विस्रस्त- पार्थिव प्रजापति शुक्रात्मक पार्थिव विवर्त्त पार्थिवाग्नि के विविध विवर्त्त पार्थिवाग्नि का अन्नादत्त्व कृष्णाजिन और पुष्करपर्ण अग्निचितिरहस्य - महाव्रत - उक्थ्य परिचय वाक्साहस्री स्वरूप परिचय वाङ्मय स्तोमविवर्त लोकसाहस्री - स्वरूप परिचय विभतिलक्षण - जीवतत्त्व २६७ विद्याचतुष्टयीलक्षणा - विद्याविभूति २६८ | महाविभूतिलक्षणा - कामविभूति २६६ | अनुष्ठानलक्षणा - कर्म्मविभूति २७० | बन्धनलक्षणा - शुक्रविभूति २७२ | गतिलक्षणा - प्राणविभूति २७२ जीवनयात्रा साधनलक्षरमा २६७ ३२४ ३२६ ३२७ ३२६ ३३५ ३३५ २७३ | ज्ञान- कर्मेन्द्रियविभूति ३३७ २७४ | सर्वव्याप्तिलक्षणा - पूर्णेन्द्र विभूति ३४० २७४ | सत्यसंकल्पत्त्व विभूति ३४२ प्रदिति - दिति विवर्त्त २७६ एकरसत्त्वविभूति ३४२ सर्वभूतान्तरात्मा २८० एकवस्त्वविभूति ३४२ आत्म- ब्रह्म - देव - विभूतित्रयी २८१ विश्वव्यापकत्त्व, विश्वसृष्टत्त्व विभूति ३४३ श्रात्मगत्यधिष्ठाता - सुपर्णात्मा २८२ सर्वसाक्षित्त्व, सर्ववशित्त्व, परिच्छिन्न - मृत्यु बन्धन २८५ कर्माध्यक्षत्त्वविभूति ३४३ चामत्कारिक - पुरुषात्मा २८५ पाप्मासंसृष्टत्त्वविभूति ३४४ प्राणात्मोपनिषत् की उपनिषत् २६२ पारयात्री भोक्तात्मा ३४६ वैश्वानर - हिरण्यगर्म - सर्वज्ञात्मक विराट् जीवात्मा की विभूतियाँ ३४७ के दर्शन २ ९ ४ | षडूम्मिस्वरूप परिचय ३५२ अर्थमूर्ति वैश्वानरात्मा ३०८ षडवस्थास्वरूपपरिचय ३५४ तंजसात्मा - क्रियामूर्त्तिः ३१२ अविद्यास्वरूपपरिचय ३५७ ज्ञानमूर्ति - प्रज्ञात्मा ३१२ बन्धस्वरूपपरिचय ३५७ वायुमूर्ति: - हंसात्मा ३१४ कर्म्मविपाकस्वरूपपरिचय ३६० बाह्यात्मा भूतमूर्ति ३१८ श्राशय स्वरूपपरिचय ३६१ सर्वज्ञ - अल्पज्ञसमतुलन ३२० पूर्णत्त्वस्वरूपपरिचय ३६१ विभूतिलक्षण ' ऋषि ' तत्त्व ३२१ संसार ( गमनागमन ) स्वरूपपरिचय ३६३ विभूतिलक्षण - पितृतत्त्व ३२२ प्रकरणोपसंहार ३६४ विभूतिलक्षण- असुरतत्त्व ३२२

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30 श्राद्ध विज्ञानग्रन्थान्तर्गत ' आत्मविज्ञानोपनिषत् ' प्रथम खण्ड परिलेख सूची क्र ० सं ० परिलेख पृ ० सं ० | क्र ० सं ० परिलेख पृ ० सं १. त्रिगुणभावापन्नयज्ञपुरुष परिलेख १६०-१९ १ १५. चिदात्मा प्रतिकृति २६२-२६३ २. सौर सम्वत्सर मण्डल परिलेख २०२–२०३ १६. भूतात्मा [ पृथिवी ] प्रतिकृति ३. पार्थिव सम्वत्सरमण्डल परिलेख परिलेख २०२ - २०३ २६२-२६३ ४. समुद्रगर्भित भूपिण्ड परिलेख२०२ - २०३ १७. द्युर्द्रुमाधः शिव परिलेख २६२-२६३ ५. अधिदैवत- अधिभूत परिलेख १८. ग्रमृत - ब्रह्म- शुक्र परिलेख २६२-२६३ २०२ - २०३ १६. पार्थिव ६. शरीरकाग्नि ( अध्यात्मिक सप्तर्षिमण्डल ) परिलेख वषट्कार परिलेख २७६–२७७ २०२-२०३ २०. भूविवर्तम् परिलेख २८० - २८१ ७. सर्वेश्वर कला परिलेख २२०-२२१ २१. दित्यदिति मण्डल परिलेख २८०-२८१ ८. परमेश्वर प्रतिकृति २४८-२४६ २२. अव्ययसंस्था परिलेख २६४-२६५ ६. महेश्वर प्रतिकृति २४८-२४६ २३. अक्षरसंस्था परिलेख २६४-२६५ १०. विश्वेश्वर प्रतिकृति २४८-२४६ २४. क्षरसंस्था परिलेख २६४-२६५ ११. उपेश्वर प्रतिकृति २४८- २४६ २५. समष्टि परिलेख २६४-२६५ १२. ईश्वर प्रतिकृति २४८ - २४६ २३. पूर्णन्द्र विभूतिरूप कश्यप प्रजापति ३४६ – ३४७ १३. अश्वत्थ प्रजापति परिलेख २५२-२५३ २७. ईशकला प्रदर्शन चित्रम् ३४६–३४७ १४. सर्वप्रजापति परिलेख २५२-२५३