आत्म विज्ञानोपनिषत् - मोतीलाल शास्त्री १
Part I Atma Vigyanopanishad I - Motilal Shastri · 401 पृष्ठ · 41 खण्ड
विषय सूची
- अथ खण्ड चतुष्टयात्मक ' श्राद्धविज्ञान ' ग्रन्थान्तर्गत आत्मविज्ञानोपनिषत् प्रथम खण्ड पं. मोतीलाल शास्त्री aratf थपथिकः प्रकाशक राजस्थान पत्रिका प्रा ०… 1–10
- वेदवाचस्पति पं. मोतीलालजी शास्त्री [ वि. सं. १ ९ ६५ – २०१७ ] 30 स्तुत्यात्मक – स्वरूपवर्णनात्मक मांगलिक ' पितृस्वरूप ' संस्मरण पितृस्वरूपवर्णनात्मिका… 11–20
- खण्डचतुष्टयात्मक “ श्राद्धविज्ञान " - ग्रन्थान्तर्गत ' आत्मविज्ञानोपनिषत् ' प्रथमखण्ड १ पितन्नमस्ये निवसन्ति साक्षाद्य देवलोके च तथान्तरीक्षे… 21–30
- श्राद्धविज्ञान प्रथम खण्ड प्रस्त'वन चेष्टा करने लगते हैं, तो उनकी यह चेष्टा आर्षप्रजा की में सर्वथा भ्रान्त, ग्रतएव अप्रामाणिक ही उद्घोषित होती है… 31–40
- श्राद्धविज्ञान प्रथम खण्ड प्रस्तावना करेगा, तो वह दण्डनीय समझा जायगा । आज्ञानुसार कनिष्ठ अधिकारी प्रजा में ग्राज्ञापत्र वितीर्णं कर देता है… 41–50
- श्राद्धविज्ञान प्रथम खण्ड प्रस्तावना होते हुए एक प्रकार से व्याजपूर्वक धर्माचरण ( धर्माचरण का ढोंग ) कर रहे हैं सच पूछिए तो ऐसे विद्वानों की कृपा से ही… 51–60
- श्राद्ध विज्ञान प्रथम खण्ड ६७ –बन्धलक्षणा ' शुक्रविभूति ' ६८ – गतिलक्षणा ' प्राणविभूति ' ६६ -– साधनलक्षणा ' ज्ञान - कर्मेद्रियविभूति ' ७० —… 61–70
- श्राद्ध विज्ञान प्रथम खण्ड - ** -[ ६२ ] प्रस्तावनः विधेय: -मोतीलाल शर्मा भारद्वाजः ( गौड़: ) थोड़े से प्रयास से अपनी चिरसंस्कारानुगता भुसंस्कृता मातृभाषा… 71–80
- श्राद्धविज्ञान प्रथम खण्ड श्रमृतात्मविज्ञानोपनिषत् चलते हैं, हाथ काम करते हैं, मन मनन करना है, बुद्धि विचार करती है… 81–90
- श्राद्धविज्ञान प्रथम खण्ड अमृतात्मविज्ञानोपनिषत् पुरुष की आंखों में अन्य पुरुष प्रतिविम्बित होता है, उस प्रकार शवशरीर की प्रांखों में प्रतिबिम्ब क्यों… 91–100
- श्राद्धविज्ञान प्रथम खण्ड श्रमृतात्मविज्ञानोपनिषत् " अथ योऽन्यां देवतामुपास्तेऽन्योऽसावन्योऽहमस्मीति, न स वेद… 101–110
- श्राद्धविज्ञान प्रथम खण्ड अमृतात्मविज्ञानोपनिषत् ईश्वर शरीर में ' स्वयम्भू - परमेष्ठी - सूर्य - चन्द्रमा पृथिवी ' में पाँच मुख्य प्राकृतात्मा हैं… 111–120
- श्राद्धविज्ञान प्रथम खण्ड अमृतात्मविज्ञानोपनिषत् पुराणकेमतानुसार श्रमरमतानुसार १८ – निमेषों की — १ काष्ठा १६ – निमेषों की - १ काष्ठा ३० - काष्ठाओं की - १… 121–130
- श्राद्धविज्ञान प्रथम खण्ड अमृतात्मविज्ञानोपनिषत् के उत्पादक - पालक - संहारक हैं । तीनों में इन्द्र ज्ञानप्रधान हैं, विष्णु अर्थप्रधान हैं, ब्रह्मा… 131–140
- श्राद्धविज्ञान प्रथम खण्ड अमृतात्मविज्ञानोपनिषत् दूसरे शब्दों में अव्ययपुरुष का पुरुषपना इन्हीं दोनों पर निर्भर है । कारण स्पष्ट है… 141–150
- श्राद्धविज्ञान प्रथम खण्ड अमृतात्मविज्ञानोपनिषत् बतलाती है, परन्तु पूर्व में ब्रह्मादि देवताओं का आत्मकोटि में ही अन्तर्भाव बतलाया गया है… 151–160
- श्राद्धविज्ञान प्रथम खण्ड अव्यक्तात्मविज्ञानोपनिषत् यः स्तनयिस्नौ तिष्ठन् ० x x, यः सर्वेषु लोकेषु तिष्ठन् ० x x, यः सर्वेषु वेदेषु तिष्ठन् ० x x, यः… 161–170
- श्राद्धविज्ञान प्रथम खण्ड श्रव्यक्तात्म विज्ञानोपनिषत् है, यह कौन नहीं जनता । बैंकों के सिपाही, कौन है?, यह तीन बार पूछेगें, तीसरी बार भी श्रागन्तुक ने… 171–180
- श्राद्धविज्ञान प्रथम खण्ड यज्ञात्मविज्ञानोपनिषत् १ - " स ( सोमः ) तायमानो जायते । स यज्जायते, तस्माद्यञ्जः । यञ्जो ह वै नामैतद्यज्ञ इति " ( शत ०३ । ६ । ४… 181–190
- श्राद्धविज्ञान प्रथम खण्ड यज्ञात्मविज्ञानोपनिषत् प्रसिद्ध है, एवं पृथिवी चन्द्रमा का विभाग अपरब्रह्म नाम से व्यवहृत होता है… 191–200
- श्राद्धविज्ञान प्रथम खण्ड विज्ञानात्मविज्ञानोपनिषत् रमेष्ठ्य ' बज्ञात्मा ' की मूलप्रतिष्ठा भृग्वङ्गिरोमय ' आप ' तत्त्व है, जैसाकि पूर्वप्रकरण में पा… 201–210
- श्राद्धविज्ञान प्रथम खण्ड विज्ञानात्म विज्ञानोपनिषत् पार्थिव सम्वत्सरमण्डल ( अधिभूत संस्था ) परिलेख: -वाक्आपः : वाक् आपः स्वः भुवः भूः वाक् पृथिवी Ye ple… 211–220
- श्राद्धविज्ञान प्रथम खण्ड विज्ञानात्मविज्ञानोपनिषत् प्रज्ञान मन में प्रज्ञा और प्राण, कलाएं हैं । चिविशिष्ट सोम प्रज्ञा है, यह वीध है… 221–230
- श्राद्धविज्ञान प्रथम खण्डं महानात्म विज्ञानोपनिषत् है । दूसरे शब्दों में जीवात्मा का स्वरूप एकमात्र अक्षर ही पर प्रतिष्ठित है, अध्यात्मसंस्था का एक मात्र… 231–240
- श्राद्धविज्ञान प्रथम खण्ड महानात्मविज्ञानोपनिषत् दोनों से जैसी सामग्री मिलती है, इसे उसी के अनुसार सुख दुःख भोगना पड़ता है… 241–250
- श्राद्धविज्ञान प्रथम खण्ड ( नित्यं ) विज्ञानमानन्दं ब्रह्म । १ । सत्यं ज्ञानमनन्तं ब्रह्म । २ । परं ब्रह्म परं सत्यं सच्चिदानन्दलक्षणम्… 251–260
- श्राद्धविज्ञान प्रथम खण्ड प्रारणात्मविज्ञानोपनिषत् परमेश्वर प्रतिकृति अनन्त महेश्वराधिष्ठाता श्रमायोपरमेश्वरः ' अविज्ञेय ' परिलेख: -महेम्बर महेश्वरः… 261–270
- श्राद्धविज्ञान प्रथम खण्ड ऊर्ध्वमूलोऽवाक्शाखः परात्परः अमृतम् निष्क ने महेश्वरः | सकलः षोडशी अव्ययः सर्वधर्म्मोपपन्न ग्रात्मसंस्था में श्रव्यय- प्रक्षर -… 271–280
- श्राद्धविज्ञान प्रथम खण्ड प्राणात्मविज्ञानोपनिषदं भूः - भुवः स्वः, इन तीनों लोकों का विकास इसी रुद्रसूर्य्य से हुआ है… 281–290
- श्राद्धविज्ञान प्रथम खण्डे प्राणात्मविज्ञानोपनिपत् अपेक्षाकृत तारतम्य से विभूति सम्बन्ध से देव - प्रासुर, दोनों भाव उपलब्ध होते हैं, जैसा कि आगे आने वाले… 291–300
- श्राद्धविज्ञान प्रथम दण्ड पार्थिव वषट्कार परिलेख: -पार्थिववषट्कारः सूर्य: त्र.वि. हृदयम् सजापति प्राणात्मविज्ञानोपनिषत् जिस स्थान पर बेदावच्छिन्न सौर… 301–310
- श्राद्धविज्ञान प्रथम खण्ड प्राणात्मविज्ञानोपनिषत् इन दोनों में सर्वभूतान्तरात्मा नामक देवसत्यात्मा ही ईश्वर है, भूतात्मा नामक देवसत्यात्मा ही ही जीव है… 311–320
- श्राद्धविज्ञान प्रथम खण्ड प्रणवो धनुः शरो ह्यात्मा ब्रह्म तल्लक्ष्यमुच्यते । प्रारणात्मविज्ञानोपनिषत् अप्रमत्तेन वेद्धव्यं शरवत्तन्मयोभवेत् । २… 321–330
- श्राद्धविज्ञान प्रथम खण्ड प्राणात्मविज्ञानोपनिषत् क्लेशकमोदि का अभाव है । अतएव इस का क्लेशकर्म्मविपाकाशयैरपरामृष्टः पुरुषविशेष ईश्वर: " यह लक्षण किया जाता… 331–340
- श्राद्धविज्ञान प्रथम खण्ड प्राणात्म विज्ञानापनिषत् ही ' उपांश्वन्तर्याम " नाम से व्यवहृत हुआ है… 341–350
- श्राद्धविज्ञान प्रथम खण्ड प्राणात्मविज्ञानोपनिषद सत्त्वभूतों के मूल महाभूत हैं, महाभूतों के मूल अपवीकृत भूत हैं, इन के मूल पञ्चतन्मात्रा नाम से प्रसिद्ध… 351–360
- श्राद्धविज्ञान प्रथम खण्ड प्राणात्मविज्ञानोपनिषत् श्रपितु पाप्मा है । ईश्वर नित्य काम होता हुआ भी निर्लेप है उस का काम निष्काम है… 361–370
- श्राद्ध विज्ञान प्रथम खण्ड प्राणात्मविज्ञानोपनिपत् विकास है । जीवात्मा नियतेन्द्रिय है, ईश्वर सर्वेन्द्रिय है । इसका कारण इसकी पूर्णता ही है… 371–380
- श्राद्धविज्ञानं प्रथम खण्डे प्राणात्मविज्ञानोपनिषत् यात्री यात्रा करने एकाकी नहीं जाता, अपितु यात्रोपयोगी अनेक उपकरणों को साथ लेकर खाने पीने की सामग्री (… 381–390
- श्राद्धविज्ञान प्रथम खण्ड ३ -- अविद्या ( ४ ) प्राणात्मविज्ञानापनिप ईश्वरीय विद्याविभूति का निरूपण करते हुए हमने सूर्य में घिबला - प्राण नाम के दो धातु… 391–400
- प ० मोतीलालजी शास्त्री द्वारा उपनिबद्ध एवं प्रकाशित वाङ् मय की सूची १. गीता विज्ञानभाष्यभूमिका- ' बहिरङ्गपरीक्षा ' प्रथमखण्ड २. " ३. 13 ४ 11 ५. " ६. " 1… 401–401