शुक्रनीति - विद्योतिनी हिन्दी टीका सहित - ब्रह्माशंङ्कर शर्मा — पृष्ठ 521–526

शुक्रनीति - विद्योतिनी हिन्दी टीका सहित - ब्रह्माशंङ्कर शर्मा · Chowkhamba Sanskrit Series Office Varanasi · पृष्ठ 521–526

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स्वात्यन्तसन्निकर्षेण ६० । १२ ९ स्वात्यन्तसन्निकर्षेण स्वाधिकारिगणस्यापि ३८८ । स्वाधीनं सञ्चितं द्वेषा १०७ स्वानुत्पादितसंप्राप्त ७१ स्वान्तेऽग्निचूर्णसंधातृ २५७ स्वान् दुर्गुणान् परित्यज्य १४ । स्वान्दोलाथितरूढस्तु ३३१ । स्वामिकार्ये विनष्टोय १२० स्वामित्वं चैव दातृत्वं १ ९ स्वामिन्येवानुरक्तो यो ४०७ स्वामी स एव विज्ञेयो ४०५ स्वाम्यमात्यसुहृत्कोश १० स्वाम्यसेवक सेव्या २०५ स्वारम्भपूतिसदृशे ११२ स्वाराध्यो नीतिमान् राजा ३ स्वाविरुद्धं लेख्यमिदं ११३

श्लोकानुक्रमणिका

स्वीयां तु परकीयां वा १२८ । स्वीया तथा च सामान्या ४०७ स्येष्टहानिकरः शत्रुः २६ ९ ह | हंसाः स्खलन्ति कूजन्ति ४७ हयग्रीवो वराहश्च २५ ९ हरेत् पादं धनात्तस्य १ ९ ५ हस्तपादाङ्गुष्ठयोश्च २५६ । हस्त्यश्वरथचर्यांसु ३७७ हावभावादिसंयुक्तं २३२ हिङ्गुलस्य तथा कान्त ३५ ९ हितं स्वहितवच्चान्ते ४०० | हितास्तेयान्यथाकाम १२६ हितोपदेष्टा शिष्यस्य १३ | हित्वा प्राक्पश्चिमौ यामौ १४४ हिमांशुमालीव तथा २५ हिरण्यपशुधान्यादि १०६ ४३५ हीनमध्यादिसंयोग २३४ हीनश्मश्रुनिमेषां च २५ ९ हीनाङ्गी स्वामिनं हन्ति ” होनादिरससंयोगात् २३२ होना निम्ना छदिर्नस्यात् ३५ हीनाल्पकर्मिणश्चैते ८६ हीने तदर्था कटके ३२३ हीयते कुसहायेन... ५८ हीयते चान्यथा राजा ७५ हृतराज्यस्य पुत्रादौ ३ ९ १ हृदि विद्ध श्वात्यर्थं २६ हृन्मध्य- परिथिर्ज्ञेयः २५५ हृष्टं कृत्वा स्वीयवलं ३६७ हृष्टरोमा भवेद् बभ्रुः ४७ हेतु प्रमाणसम्बन्ध ११० हेतुलिङ्गौषथोभियों ८४ | हेमकारादयो यत्र ३१८ हेमाग्न्यम्बुस्वपुरुषाः २७४ वैशङ्ग पुस्तकालय भाग 2248 दिनाक CC - 0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri

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पृष्ठ 526

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नवीन प्रकाशन १ अथर्ववेद- परिशिष्ट । संपादक जार्ज मेलवीन बोलिङ्ग तथा जुलियर कॉन नेजलीन, हिन्दी - पणियों सहित सम्पादक डॉ ० रामकुमारराये ७५ - ०३ २ तत्त्वप्रकाशः । धाराधीश्वरभोजकृतः तात्पर्य दीपिका - वृत्ति व्याख्या इय हिन्दीभाषानुवादसहित । सम्पादक - डॉ. कामेश्वरनाथ मिश्र १००० ३ मन्त्रयोगसंहिता: मूल तथा श्रग्लानुपादसति । सम्पादक-डॉ ० राम कुमार राय ५-०० ४ सरस्वतीकण्ठाभरणम् । महाराजाधिराजभोजकृतं ( चित्रप्रकरण-सन्न् ि ) प्रथमोभागः । रत्नदर्पगाख्यसंस्कृत- स्वरूपानन्दभाष्यनाम हिन्दं व्याख्याद्वयोपेतम् । व्याख्याकार - डॉ ० कामेश्वरनाथ मिश्र ३-०० ५ तत्त्वप्रभावत्री | श्री श्रीवैतायनीयं विशिष्टं न्यायशास्त्रम् । पतिधुरन्धर-श्रीकृःणवल्लभाचार्यस्वामीनारायणविरचितम् ५-०० ६ श्रीयुगलशतदलम्! ( श्रीराधा प्णयुगलीयं रहो गीतिकाव्यम् ) श्रीसत्यव्रत शर्मा ' सुजन ', शास्त्री ४०-० आङ्ग्ल रोमा । अंग्रेजी मूल त्या संस्कृत अनुवादसहित । डॉ ० हरिहर [ वि ० त्रिवेदी तथा लक्ष्मीनारायण श्रो ० जोशी १५-०० ८ वेदान्तसिद्धान्त प्रकाशानन्दकृतं अंग्रेजी अनुवाद तथा टिप्पसहित । र वेनिस २५-०० १ ९ संगीत काकास और विभूतियां । - श्रोपद बन्द्योपाध्याय ६-०० १० श्रीमद्भगवद । श्रीमत्परमहंस परिव्राजक।चार्य - मधुसूदनसरस्वती विरचि डार्थदीपिका व्याख्यास | देता महामहोपाध्याय पण्डित श्रीहरिह · कृपालुद्विवेदिना कृततत्रतः सिटिप्पण हिन्दी भाषां न समलंकृता पण्डित श्रीदत्त दिना संपादिता च ५०-०० ११ मेघदनप् । कालीदास कृ कात्यायनी संस्कृत व्याख्या तया अवाद सहित, आलो नामक जुमिका सहित २०-०१ १२ भारतीयदर्शन । ( भारतवर्ष की दार्शनिक वैदिक और ताविक विचारधाराओं का प्रामाणिक विचन ) सभी विश्वविद्यालयों में बी ० ए ०, एम ० ए ० पाटयग्रन्थ लेखक आचार्य बलव उपाध्याय ३५-०० प्राप्तिस्थान — चौखम्भा संस्कृत संस्थान, वाराणसी CC - 0. Mumukshu Bhawan Varartasi Collection. Digitized by eGangotri