Tritiya Kand Dwitiya Khand Satpath Brahaman — पृष्ठ 1–10

शतपथ ब्राह्मणम् भाष्य - ३-२ - मोतीलाल शास्त्री · पृष्ठ 1–10

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शुक्लयजुर्वेदीय- माध्यन्दिन शतपथब्राह्मरण विज्ञानभाष्य " अध्वरनाम " तृतीयकाण्डान्तर्गत [ द्वितीय खण्ड ] पं. मोतीलाल शास्त्री वेद arat- पथिक ब्रह्मवचस राजस्थान वैदिक संस्थान तत्व शोध नवाश्रम -१ विद्यापीठ जयपुर , मूल्य: १०० ) रुपये मात्र

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प्रकाशक: राजस्थान पत्रिका प्रा ० लिमिटेड, केसरगढ़, जवाहरलाल नेहरू मार्ग, जयपुर । © सर्वाधिकार लेखकाधीन मुद्रक: श्री बालचन्द्र यन्त्रालय, " मानवाश्रम ", दुर्गापुरा रोड, जयपुर - १५

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वेदवाचस्पति पं ० मोतीलालजी शास्त्री

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प्रकाशकीय ( स्व ० ) पं ० मोतीलाल शास्त्री जी के शतपथब्राह्मण विज्ञानभाष्य के तृतीय काण्ड का द्वितीय खण्ड प्रस्तुत करते हुए परम प्रसन्नता होती है । विगत सितम्बर ८८ में हमने तिथि प्रथम थी । खण्ड का प्रकाशन किया था । उस दिन २० सितम्बर को पंडितजी की निर्वारण- विस्तार अब दूसरा खण्ड पाठकों के समक्ष प्रस्तुत है । इसके साथ ही सोम - तत्त्व का विशद रूप के साथ पाठकों के सामने प्रस्तुत है । जैसा कि वेद का सिद्धान्त है " अग्नीषोमात्मकं जगत " अर्थात् अग्नि में सोम की प्राहुति से ही जगत उत्पन्न होता है और इसी यज्ञ के रूप में वह संचालित होता रहता है । शतपथ-ब्राह्मण वेद के इस सिद्धान्त को क्रियात्मक रूप में प्रस्तुत करता है अतः वेद के मन्त्र - भाग को में समझने के लिए ब्राह्मण - ग्रन्थों को नितान्त आवश्यक बताया गया है । प्रस्तुत दोनों खण्डों अग्नि- सोममय जगत के सोम - भाग पर विस्तार से प्रकाश डाला गया है । शीघ्र ही हम अग्नि तत्त्व का विवेचन करने वाले ब्राह्मणभाग का भी प्रकाशन करने का प्रयत्न कर रहे हैं । " शतपथब्राह्मण विज्ञानभाष्य " के प्रकाशन में हमें सबसे बड़ा सहारा स्वामी सुरजन दास जी का रहा है जो ८४ वर्ष की आयु में भी अजमेर में रहते हुए ब्राह्मण की मूल efuser का विस्तृत अनुवाद करके हमें भिजवाते हैं । ( स्व ० ) शास्त्री जी के ज्येष्ठ पुत्र श्री कृष्णचन्द्र शर्मा का अनुग्रह है कि वे प्रकाशन के लिए हमें पाण्डुलिपियां प्रदान करते हैं । उनकी यह निष्ठा और सहभागिता हमारा बड़ा सम्बल है । डॉ ० मदनगोपाल शर्मा ने पाठ - निर्धारण और भाषासम्पादन के अतिरिक्त मुद्रण हेतु निर्णीत प्रति तय्यार कर सारे कार्य को अपनी देख - रेख में सम्पन्न कर ग्रन्थ के प्रकाशन को सम्भव बनाया है । ( स्व ० ) शास्त्री जी के सुपौत्र श्री प्रद्युम्न कुमार शम्र्मा ने न केवल ग्रन्थ के शीघ्र एवं स्तरीय मुद्रण की व्यवस्था की है, अपितु मूल- कण्डिका भाग के प्रूफ पठन के साथ ही ग्रन्थ में उद्धृत सन्दर्भों के मूल स्रोतों का सन्धान कर, तत्सम्बद्ध सन्दर्भ - ग्रन्थ सूची के अतिरिक्त प्रस्तुत में ग्रंथ की विषय - सूची भी तय्यार की है, जिससे ग्रंथ की प्रामाणिकता एवं उपयोगिता वृद्धि हुई है । श्री अश्विनी कुमार ने प्रस्तुत खण्ड का शुद्धि - पत्र तय्यार करने का जो श्रम किया है । उसके लिए वे धन्यवाद के पात्र हैं । होंगे । मैं आशा करता हूँ कि वेद - निष्ठ महानुभाव हमारे इस तुच्छ प्रयास से लाभान्वित अक्षय तृतीया, संवत् २०४६ वि ० - कर्पूरचन्द्र ' कुलिश '

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शतपथब्राह्मण हिन्दी विज्ञानभाष्य तृतीयकाण्डानुगत द्वितीयखण्ड विषय - सूची विषय पृष्ठ संख्या विषय पृष्ठ संख्या अथ पञ्चम अध्याय धिष्ण्याग्नि के आठ भेद मानुष - सोमयज्ञ की आठ धिष्ण्याग्नियाँ २१ २१ १ - वेदिनिर्माण ब्राह्मण हविर्धान एवं सदो - मण्डप २१ निर्माण ब्राह्मण ( मूल ) प्राचीन वंश २२ १ निर्माण ब्राह्मण ( अनुवाद ) ५ हविर्वेदि का निर्माण २२ हिन्दी विज्ञान - भाष्य प्रारम्भ १६ बर्षिष्ठ अर्थात् स्थूणराज २२ उपलब्धि और वेद १६ महावेद - सौम्यवेदिका अन्तः पात २२ यत् -जू र यजु - पुरुष १६ शङ्कु -स्थापन और वेदि का स्वरूप २३ यज्ञ - मात्रिक वेद १७ विराट् छन्द के चार भेद २५ ऋक् मूर्ति का स्वरूप १७ दस प्राणों से विराट् की स्वरूप - निष्पत्ति २५ वेदत्रयी का स्वरूप १८ आत्मा - सृष्टिसाक्षी एवं मुक्तिसाक्षी २५ त्रयी विद्या प्रतिष्ठा और वेद १८ वेद की प्रतिष्ठा वेदि १६ निष्कल प्रजापति की पाँच कलाएँ मन - प्राण - वाक् का अविनाभूत स्वरूप २६ २६ पृथिवी यज्ञ का स्वरूप १६ आत्म और स्वयम्भू प्रजापति २६ अग्नि का अधिष्ठाता नर २० मानसी और मैथुनी सृष्टि २६ वैश्वानर अग्नि २० अक्षत् और यौगिक तत्त्व २६ पृथिवी का दर्शपूर्णमास यज्ञ २० प्राणों के १२ भेद २६ प्राकृतिक यज्ञों का स्वरूप २० अव्यय में प्रशनाया बल की क्रिया २७ पूषा और सोम २१ अशनाया - बल से वायुमय पिण्ड की उत्पत्ति २७ ज्योतिष्टोम यज्ञ २१ हिरण्यगर्भ ब्रह्मा २७ दक्षिणाग्नि और आहवनीय अग्नि २१ ब्रह्मा की स्त्री - पुरुष भेदों में परिणति २८ [ ५ · 1

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शतपथ ब्राह्मण ( तृतीय काण्ड ) विषय विषय सूची ( द्वितीय खण्ड ) पृष्ठ संख्या विषय पृष्ठ संख्या चितेनिधेय अमृताग्नि और मनु २८ ३६ विक्रम की वेदि का निर्माण ४५ मनु वैराज के विभिन्न स्वरूप २८ अग्नि के तीन भेद ४५ वैराज मनु से दस ऋषि - प्राण २६ पार्थिवाग्नि के २४ विभाग ४६ ऋषि और पितर प्राण २६ २४ विक्रम के यज्ञ का पूर्वार्द्ध भाग ४६ प्राण - प्रपात - व्यान का स्वरूप ३० नाक और उत्तरावेदि ४७ विवस्वान् आदित्य से प्रकाश का उद्भव ३१ रोदसी त्रिलोकी II प्रकृति और मानुष सद्यःक्री यज्ञ ३१ पृथिवी के उपादान - मूलक आठ तत्त्व ४८ मुक्ति एवं सृष्टिसाक्षी कलाएँ ३२ चित्य - चितेनिधेय अग्नि I मन - प्रारण वाक् का स्वरूप श्रमृता मर्त्या वाक् श्वा इन्द्र का स्वरूप देवता एवं भूत प्रजा ३३ सोम के दो भेद ४६ ३३ ब्राह्मणस्पत्य सोम ४६ ३३ श्वः सुत्या और श्रद्यसुत्य -सद्यः की यज्ञ II ३४ आदित्य यज्ञ - अद्यसुत्या ५३ सत्यावाक् के पाँच भेद ३४ आङ्गिरस यज्ञ श्वः सुत्या ५३ पाँच मण्डलों का स्वरूप ३५ वाक्के विभिन्न भेद ५३ पार्थिव वाक् और अङ्गिरा अग्नि ३६ आकाश के दो भेद ५३ सौर - तेज और श्व ३६ युग और शम्या ५५ भूमा और श्व ३७ शम्या के तीन नाप ५५ केन्द्रकर्षिणी और केन्द्रापसारिणी शक्तियाँ ३६ अश्वस्वरूप उतरावेदि का निर्माण ५५ सौर आदित्य - प्राण ४० शङ्कु स्थापन ५७ आन्तरिक्ष्य व्यान वायु और ११ रुद्र देवता ४० चात्वाल निर्माण ५८ पार्थिव श्राठ व्याहृतियाँ और ग्राठ वसु ४१ सहस्रमण्डल ६० पृथिवी के रथन्तर साम के तीन भेद ४१ ३३ अहर्गण के चार स्तोम ६० दिक्- भास्वर सोम ४१ अग्नि वायु एवं आदित्य ६० विराट् के चार भेद ४२ पृथिवी अन्तरिक्ष एवं द्युलोक ६० दर्शिनी विराट् ४२ आप्या नामक पानी का अग्नि ६० चारों विराट् के चालीस पदार्थ ४२ आप्याग्नि के १४ भेद ६० प्रजापति की चार प्रजाएं ४२ त्रिता अग्नि और आयु ६२ तीन विराटों की एक त्रिलोकी ४३ पुरुष का नाप ८४ अंगुल ६५ aft का श्रोणि- निर्माण ४३ अष्टावयव पार्थिवाग्नि ६५ खगोल के सात छन्द ४४ पार्थिवाग्नि गायत्री ६५ ४८ अंशात्मक क्रांतिवृत्त और सात छन्द ४४ पुरुष के तीन विभिन्न नाप ६५ प्रत्येक छन्द के ३६० अंश ४४ पाँच मण्डलों की पाँच वाक् ६५ नवाक्षरा बृहती छन्द ४५ पार्थिव सौराग्नि ६६ [ ६ ]

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. शतपथ ब्राह्मण ( तृतीय काण्ड ) विषय विषय सूची ( द्वितीय खण्ड ) पृष्ठ संख्या विषय पृष्ठ संख्या शब्द- ब्रह्म ६६ मन्त्र और वाक् से यज्ञ - वितान १०५ बिन्दु और अक्षर ६६ यज्ञमूर्ति - विष्णु १०६ २- अग्निप्रणयन ब्राह्मण संतप्त ( क्ष - धुरा ) पर घृताहुति १०७ द्वादश आदित्य और विष्णु १०६ श्रग्निप्रणयन ब्राह्मण ( मूल ) ६६ संतप्त अक्ष और प्रजनन १११ अग्निप्रणयन ब्राह्मण ( अनुवाद ) ७१ असुर्य्यावाक् ११२ हिन्दी विज्ञान भाष्य प्रारम्भ ७५ विष्णु द्वारा रोदसी त्रिलोकी का निर्माण ११५ चार अङ्ग - कर्म्म ७६ पूर्व - पश्चिम कपाल ११६ ब्रह्म और क्षत्र की यावा ८० रायस्पोषवनि से याश्वा ४- उपरव ब्राह्मण ८० उपरव ब्राह्मण ( मूल ) ११६ ३ - यज्ञपुरुष ब्राह्मण उपरव ब्राह्मण ( अनुवाद ) १२२ यज्ञपुरुष ब्राह्मण ( मूल ) ८२ हिन्दी विज्ञान भाष्य प्रारम्भ १२८ यज्ञपुरुष ब्राह्मण ( अनुवाद ) ८५ यज्ञ का मस्तक - हविर्धान- मण्डप १२८ हिन्दी विज्ञान - भाष्य प्रारम्भ ६४ उपरव खनन का अभिप्राय १२८ हविर्धान मण्डप का निर्माण ६४ भूतसर्ग चतुर्दशविध १२६ पृथिवी का स्वाक्ष परिभ्रमण ६४ कृत्या का स्वरूप १२६ नैशिक - दिव्याग्नि कृत्या साधक वलगा १३० तीन विश्व एवं तीन नर II हविर्धान में चार उपरवों ( गड्ढों ) १० गौ और ३४ वां प्रजापति ६५ का खनन १३१ वराह, आदि यज्ञ, श्वेत- एमूष & # उपरव के लिए अभि द्वारा चिह्नांकन १३३ ३३ अहर्गण के ६ स्तोम ६६ अक्ष्णया क्रम के विभिन्न पक्ष १३४ नवाह यज्ञ ६६ रक्षोहण और वलगहन वाक् १३५ धिष्ण्याग्नियाँ- आठ ६६ शत्रुता के प्राठ भेद १३८ चौरासी लाख योनि - भेद ६७ चार प्रकार केशत्रु १४० अधिदैवत से अध्यात्म का निर्माण ६७ ' भद्रं भद्रम् ' भाषण १४२ यज्ञपुरुष का स्वरूप निर्माण ६८ उपरवों का प्रोषण १४२ यज्ञपुरुष का आकार ६६ अथ षष्ठ अध्याय उदरस्थ दस प्रारण १०० हविर्धान- सदोमण्डप का स्वरूप १०१ १ - सदो ब्राह्मण दो शकटों का निर्माण १०२ सदो ब्राह्मण ( मूल ) १४५ शकट पर चटाई- भित्ति - निक्षेप १०३ दो ब्राह्मण ( अनुवाद ) १४६ प्रसविता ( सविता ) प्राण १०४ हिन्दी विज्ञान भाष्य प्रारम्भ १५६ [ ७ ]

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av थ ब्राह्मण ( तृतीय काण्ड ) विषय पृष्ठ संख्या सदोमण्डप में होने वाले कर्म्म १५६ दुम्बरी का स्थापन १५७ ऊ ' नामक अन्न १५७ श्रदुम्बर ( गुलर ) का महत्त्व १५७ ऊर्क की प्राण - रूप में परिणति १५८ दुम्बरी गाड़ने की विधि १५८ यवमती जल से प्रोक्षरण १६० यवमती - प्रोक्षण की उपपत्ति १६१ अन्न और पानी का संयोग १६१ यव ( जौ ) की महत्ता १६२ देवदेवस्य और पितृदेवत्य १६५ १६६ द्युतान नामक वायु रोदसी क्रन्दसी संयती लोक १६६ १६६ यमवायु साम्ब सदाशिव वायु १६७ १६७ सूत्रात्मा वायु प्राणोदान एवं मित्रावरुण १६७ श्रदुम्बरी - स्थापनानन्तर पानी का छिड़काव १६८ विष्ट र ब्रह्मा - विष्णु - इन्द्र १६६ सदोमण्डप की इतिकर्तव्यता १७० सदोमण्डप में उदीचीन वंश की स्थापना १७१ हविर्मण्डप में प्राचीन वंश की स्थिति १७१ इन्द्र - इन्द्रपत्नी वाक् १७२ आग्नीध्र वेदि निर्माण १७३ २- धिष्ण्या ब्राह्मण frover ब्राह्मण ( मूल ) १७७ या ब्राह्मण ( अनुवाद ) १८० हिन्दी विज्ञान भाष्य प्रारम्भ १८६ सोम और धिष्ण्या में सम्बन्ध १८६ धिष्ण्या - सोम का प्रभव स्थान १६० कद्रू - सुपर्णी श्राख्यान १६१ [ ८ विषय सूची ( द्वितीय खण्ड विषय पृष्ठ संख्या वाक् और सुपर्णी १६१ पुरुष - वैश्वानर श्रग्नि १६४ रश्मि के सात भेद १ ९ ३ गायत्री त्रिष्टुप जगती छन्द १६५ वाक् की वर्तुल - वृत्तता १६५ सोमयज्ञ के सोलह ऋत्विक् १६६ गन्धर्वप्राण १६६ दीक्षा- तप १६७ इरा रस और खदिर १६८ श्रग्निमय सौम्य प्राण एवं अच्छावाक् १६६ प्रकृति - यज्ञ के तीन सवन २०३ ग्यारह अग्नियाँ किंवा ग्यारह रुद्र २०५ २०७ सम्पा - पान ३ - वैसर्जन ब्राह्मरण सर्जन ब्राह्मण ( मूल ) २०६ वैसर्जन ब्राह्मण ( अनुवाद ) २१२ हिन्दी विज्ञान - भाष्य प्रारम्भ २१६ दीक्षा से यज्ञ का आत्मसात २२० व्रत- विसर्जन २२० विसर्जन हेतु होम की आवश्यकता २२१ तेतीस यज्ञिय देवता २२२ विष्णु की तीन लोकों में व्याप्ति २२३ पदपांशु के चार भाग २२५ बिन्दु के तीन प्रकार २२७ ग्रप्स - सोम का स्वरूप २२८ चालीस ग्रहों के चार भेद २२६ अग्नि की महत्ता २३२ सोम का अभिषव २३३ वैष्णवी ऋचा का उच्चार २३५ ४- यूपमान ब्राह्मण पमान ब्राह्मण ( मूल ) २३६ यूपमान ब्राह्मण ( अनुवाद ) २४२ ]