Tritiya Kand Pratham Khand satapathabrahman — पृष्ठ 711–714

शतपथ ब्राह्मणम् भाष्य - ३-१ - मोतीलाल शास्त्री · पृष्ठ 711–714

पृष्ठ 711

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ब्रम्हाण ( तृतीय काण्ड ) शुद्धि पत्र ( प्रथम खण्ड ) " 1 पृष्ठ संख्या: कण्डका / उद्धरण / अनुवाद / ४७३ भाष्य / पंक्ति - संख्या अशुद्ध मुद्रित पाठ वांछित शुद्ध पाठ ६१ ९ प्रमृशानीति प्रमृशानिति 31 क ० ७२ सोऽर्वन्तः सोऽर्वन्तः III १,१ वाजत अथानड्वाह्मव्राजन्ति " क ० १२६ घूर्षा हो पूर्वाह ४७७ १२ कृष्ण मृा.. कृष्णमृग III अनु । २ दक्षिणीयेष्टि दीक्षणीयेष्टि ४८६ फुटनोट. १ समीपेऽन III 19 ४६६ सं संत ६: सं अग्नीषोमत्मकं अस्तिवं चतुर्थो " सूर्यमेवं तत्... " 1 १.२. ४ ९ ६ उ ०1१ जखम्वेतं ५०० उ ०१२ भद्रो मेऽसि ५०.६ सं! श्रवतीय दुल्मुक उ ०।१ नमो मित्रस्य ५१ ९ ०१ या ते धामानि ५१६ अनु । २३ प्रतिपत्रिमात्र ५१७ अनु २० यजमान की मेवा में ५१६ धनु ।२५. पृथिवी केन्द सं ।२१ 11 ' घो वं विष्णुः ' सोमः सः ' " अनु | २१ ५२५ सं. १७ ५२६ सं । १४ ५२६ भाः १४ " 1 भा । ३० ५३० उ ०।१ अग्नेस्तनूर सि ५३३ भा । ५ " भा ।६ " धन्य निधानाय.... प्रोत्तम्म्यनाथमेथीकस्तम्भी यज्ञ केपुच्छ ( पूर्व भागत्य ) यद्वन्यतरो साम्राज्य ग्रमीण सामस्य श्येनादत्वा समीपेन अग्नीषोमात्मकं अस्ति के चतुर्थी " सूर्यमेवैतद्..... " धान्य निधानाय.... प्रोत्तम्भनार्थामेथी कस्तम्भी वा ० सं ० ४।३३ वा ० सं ०. ४ ३४ श्राहवनीयादुलमुक वा ० सं ० ४।३६ बा ० सं ० ४।३७ प्रतिपत्तिमात्र यजमान के सेवामें पृथिवी केन्द्र ' यो वै विष्णुः सोमः सः ’ यज्ञ के पुच्छ ( पूर्वमागत्य ) यद्वान्यतरो साम्राज्य ग्रामणी वा. सं ५।१ सोमस्य श्येनायत्वा " 2 भा । २५ इष्टि में [ ३७ ]

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शतपथ ब्राह्मण ( तृतीय काण्ड ) पृष्ठ संख्या कण्डिका / उद्धरण / अनुवाद / भाष्य / पंक्ति संख्या शुद्ध मुद्रित पाठ शुद्धि पत्र ( प्रथम खण्ड ) वांछित शुद्ध पाठ ५३४ भा । ११ श्रातिथयेटि " } भा । १८ छन्द का त्रिष्टुप् भा । २४ 11 ५३६ सं ।२२ दिया जाता है । हिनसन् ५३७ सं । १६ ५३६ _भा । १३,१६,१७; घृत ५४१ भा । २७ आपको में " सं ।५ ५४२ भा । २३ प्रयास से हट कर श्रातिथ्येष्टि छन्द का नाम त्रिष्टुप् दिया जाता है । हिंसन् मङ्ग घृत श्रापको मैं. श्रातिथ्येऽग्निम् प्रयाग से हट कर ५४४ उ ०1६ गायत्रेण त्वा बा ० सं. ५।२ ५४५ उ ०१६ भवतं नः वा ० सं ० ५।३ " 2 उ ०१२ अग्नावग्निश्चरति वा ० सं ० ५।४ ५४८ क ० ११।१ तनूप्ता तनूनप्ता ५५१ धनु ।६ संकस्प संकल्प ५५३ अनु ।१७ अन्तरिक्ष के अधिष्ठाता अन्तरिक्ष के अधिष्ठाता अग्नि सोम अनु ।२६ इदं ५५४ भा । ३१ हमारी हमारी ५५५ भाग ε भा | १३ " तपोपलोक ५५६ उ०- ३।३ सर्व 19 भा । १७ श्रति जनत लोक जनत् लोक तपोलोक सर्व श्रुति सं ।२२ " सर्वस्मादिदम् ५५६ भा । १६ एक विश ५६० भा । २ प्रकार के सर्वस्मादिदम् एकविंश प्रकार से भा ।२८ ५६३ भा । १६ दिया गया स्थानी ५६४ भा । १४ एवं भाव में दिया गया स्थानीय एवं नाना भाव में ५६६ भा । २५ देवताओं देवताओं ५६७ भा । ३० | सावघान सावधान [ ३६ ]

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शतपथ ब्राह्मण ( तृतीय काण्ड ) पृष्ठ संख्या कण्डिका / उद्धरण / अनुवाद / भाष्य / पंक्ति संख्या शुद्ध मुद्रित पाठ शुद्धि पत्र ( प्रथम खण्ड ) वांछित शुद्ध पाठ ५६६ भा । २६.. ५७५ भा । २८ तन्नून् पातयति ऋत्विक ५७७ सं । १५ " प्रापतयेत्वा " सं । २० परिपतयेत्वा 11 तनूं न पातयति ऋत्विक् " श्रापतये त्वा " परिपतये त्वा ५७६ भा । १० " ५८० | ४ पलाति पतति भा ०।१५ श्रनाघृष्ट प्रनाघुष्ट ५८१ भा ० । २५ हुँ ५८४ भा ० । ११ पृथिवी 21 भा ०।१२ श्रग्नीषोमात्मक रहूगा अग्नीषोमात्मक ५८७ सं ०।२६ चतुर्थोध्याये भा ० | २१ नानूनपत्र तानूनप्त्र ५६२ अनु ०।२३ ऋत्विजों ऋत्विजों ५६३ सं ०1१ समानुक्ते समाश्नुवते ५६६ अनु ०।२३ ऋत्विक् ६०६ सं ०।१४ हन्तुमिच्छान्ति ऋत्विक् हन्तुमिच्छन्ति ६११ सं ०1७ आत्माकं रूपमसाम " ६१५ 11 " 1 सं ०1६ सं ०।२२ कर्म्मश्य समुयायन् कलहो पशमनरूप सन्ध्नन्ति अकुर्वं स्तत् वस्रूप " 1 " 1 ६१८ सं ० | २३ ६१६ सं ०।१६ यज्ञोह ६२३ सं ० / ५ ६२७ भा ० | २१ ६२८ सं ०1३ निह्नवीर रन् ६३१ क ० | ५ | २ त्तीमाँ ६३२ क ० | १४ | ३ कल्मलम् ६३४ अनु ०।२१ प्रत्यक्षा अस्माकं रूपं साम कर्म्मस्य समुपायन् कल होपशमनरूप सनन्ति यज्ञो ह प्रकुवस्तत् स्वरूप निह्न वीरन् कुरुतऽइमानेवैतल्लोकान्प्रभिन- कुरुतऽइमानैवैतल्लोकान्प्रभिन-कुल्मलम् प्रत्यश्वा [ ३६ ]

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शतपथ ब्राह्मण ( तृतीय काण्ड ) शुद्धि ( ग्राम ) पृष्ठसंख्या कडक / उद्धरण / अनुवाद / अशुद्धमुद्रित भाष्य / पंक्ति संख्या ६३५ ० १२४ समूहस्य ६३७ अनु १ ९ ७ पुरंजयतीनि " 1 सम्प्रदान " २७ ६३८ अनु ०।२४ " " अनु ०।२५ ६४० वर श्राश्राव्य बैठ कर होता श्रध्वर्यु अनु ०१२ क्या सं । ८ भा । 5 भा १२ ' यज्ञो वै ' आतिथ्येष्टि कुर्वः शब्दो मदन ' प्रजापतिः इदं सुखपाठ समूळ्हमला पुरंजयतीति सम्प्रदाय बार बैठ कर तथा ' यज्ञो वे जणु ' श्रति टि पर्व न ' प्रजापति 22 ६४३ ६४८ सं २५ सर्वम् सृज ४५. " ६५० भा । २२ हीने वाली ६५३ सं । ६ मापाप्त ६५४ भा १६ ६५६ भाः । २४ ६६६ भा । ३ श्राधार उपसद स प्राघार उपसद म साम होने की मावाप्त सोम --४०