वैदिक विज्ञान (Vaidika Vigyana)

॥ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥

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  • काव्यानुशीलन
    काव्यानुशीलन। श्रीमद्वासुदेव मिश्रशर्म्मा सक्तुमिव तितउना पुनन्तो यत्र धीरा मनसा वाचमक्रत।अत्रा सखायः सख्यानि जानते भद्रैषां लक्ष्मीर्निहिताधि वाचि। ऋग्वेदः १०-७१-२. बृहस्पतिराङ्गिरसः ऋषिः, ज्ञानम् देवता, त्रिष्टुप् छन्दः। “ऐसा हो जाय” – इस प्रकार के चित्तवृत्ति को इच्छा कहते हैं… Read more: काव्यानुशीलन
  • आधुनिक नव्यन्याय एक वैशेषिक विरोधी अज्ञान/चक्रान्त है ।
    आधुनिक नव्यन्याय एक वैशेषिक विरोधी अज्ञान/चक्रान्त है । श्रीमद्वासुदेव मिश्रशर्म्मा एकमेव दर्शनम् । ख्यातिरेव दर्शनम् । पञ्चशिखाचार्य । भारतीय आस्तिक दर्शन एक ही है । वह समस्त वस्तुओं के सम्पूर्ण ख्याति (प्रसिद्धिः, ख्या॒ प्र॒कथ॑ने) अर्थात सम्पूर्ण… Read more: आधुनिक नव्यन्याय एक वैशेषिक विरोधी अज्ञान/चक्रान्त है ।
  • KARMA (कर्म) VS ACTION.
    KARMA (कर्म) VS ACTION -Shree Basudeba Mishra Sharma A scientist friend asked the meaning of: कर्म कर्मसाध्यं न विद्यते । वैशेषिक – १,१.११ । Literally it means, there is no proof to show that action gives… Read more: KARMA (कर्म) VS ACTION.
  • प्रातः जगने से सोने तक के मन्त्र
    भगवान मनु कहतें हैं धर्म की रक्षा करो धर्म तुम्हारी रक्षा करेगा । अब प्रश्न उठता है कि हम धर्म की रक्षा कैसे करें तो इसका उत्तर है अपने नित्य कृत्यों को जब हम शास्त्रानुसार करेंगे… Read more: प्रातः जगने से सोने तक के मन्त्र
  • विप्रै: संवर्द्धितो विष्णुर्जपहोमार्चनादिभि:
    पण्डित श्रीमद्गङ्गाधर पाठक ‘मैथिल’ चाकचिक्य वाले वर्णधर्मविहीन बड़े बड़े संस्थानों में वेद और वेदशास्त्रज्ञों का कोई महत्त्व नहीं। जिन वेदज्ञों को विशेष रूप से सम्मानित शुद्धासन मिलना चाहिए; उन्हें टेंट की दरी पर बैठने के लिए… Read more: विप्रै: संवर्द्धितो विष्णुर्जपहोमार्चनादिभि:
  • पुराण ।
    पुराण । श्रीमद्वासुदेव मिश्रशर्म्मा  यो विद्याच्चतुरो वेदान्साङ्गोपनिषदान्द्विजाः ॥  इतिहासपुराणाभ्यां वेदं समुपबृंहयेत् । बिभेत्यल्पश्रुताद्वेदो मामयं प्रहरिष्यति ॥ ब्रह्माण्डपुराणम् पूर्वभागः १,१.१७०-१७१ ॥ जो संस्कारी व्यक्ति चारों वेद, वेदाङ्ग तथा उपनिषद के ज्ञाता हो उसीको वेद को विस्तार से… Read more: पुराण ।
  • हमारी संस्कृति के धरोहर ।
    हमारी संस्कृति के धरोहर ।श्रीमद्वासुदेव मिश्रशर्मा अनन्तं शास्त्रं बहुवेदितव्यं स्वल्पश्चकालो बहवश्च विघ्नाः ।यत्सारभूतं तदुपासनीयं हंसो यथा क्षीरमिवाम्बुमध्यात्॥ सनातन संस्कृति में शास्त्रों की सङ्ख्या अनन्त कहागया है । परन्तु हमारी आयु सीमित है । अतः जैसे हंस… Read more: हमारी संस्कृति के धरोहर ।
  • पुराणों के दशलक्षण ।
    श्रीमद्वासुदेव मिश्रशर्मा पुराणों के दशलक्षण । अत्र सर्गो विसर्गश्च स्थानं पोषणमूतयः । मन्वन्तरेशानुकथा निरोधो मुक्तिराश्रयः ॥ श्रीमद्भागवतम् द्वितीयस्कन्ध दशमोऽध्यायः में पुराणों के दशलक्षण नहीं, परन्तु श्रीमद्भागवत के विषयवस्तु का निर्द्देश हैं । यह है सर्ग, विसर्ग,… Read more: पुराणों के दशलक्षण ।
  • ज्योतिष
    ज्योतिष । श्रीमद्वासुदेव मिश्रशर्म्मा वेद हि यज्ञार्थमभिप्रवृत्ताः कालानुपूर्व्या विहिताश्च यज्ञाः ।तस्मादिदं कालविधानशास्त्रं यो ज्योतिषं वेद स वेद यज्ञान् ॥ याजुषज्योतिषम् ३॥ ज्योतिषामयनं चक्षुः । ज्योतिष वेद के चक्षुस्थानीय है, जिससे भूत-भविष्यत जाना जा सकता है ।… Read more: ज्योतिष
  • छन्दः
    छन्दः । श्रीमद्वासुदेव मिश्रशर्म्मा। मा छन्दः । प्रमा छन्दः । प्रतिमा छन्दः । ऽ अस्रीवयश्छन्दः । पङ्क्तिश्छन्दः । ऽ उष्णिक् छन्दः । बृहती छन्दः । ऽअनुष्टुप् छन्दः । विराट् छन्दः । गायत्री छन्दः । त्रिष्टुप् छन्दः… Read more: छन्दः
  • ಯಜುರ್ವೇದ ಕಾಣ್ವಶಾಖಾ ಪ್ರಥಮೋಽಧ್ಯಾಯಃ
    शुक्लयजुर्वेद काण्वशाखा – Shukla Yajurveda Kanva Shakha ಅಥ ಪ್ರಥಮೋ ದಶಕಃ।ಅಥ ಪ್ರಥಮೋಽಧ್ಯಾಯಃ। ॥ಓ೩ಮ್॥ ಇ॒ಷೇ ತ್ವೋ॒ರ್ಜೇ ತ್ವಾ॑ ವಾ॒ಯವ॑ ಸ್ಥ।ದೇ॒ವೋ ವಃ॑ ಸವಿ॒ತಾ ಪ್ರಾರ್ಪ॑ಯತು॒ ಶ್ರೇಷ್ಠ॑ತಮಾಯ॒ ಕರ್ಮ॑ಣೇ॥೧॥ ೧ ಆಪ್ಯಾ॑ಯಧ್ವಮಘ್ನ್ಯಾ॒ ಇನ್ದ್ರಾ॑ಯ ಭಾ॒ಗಂ ಪ್ರ॒ಜಾವ॑ತೀರನಮೀ॒ವಾ ಅ॑ಯ॒ಕ್ಷ್ಮಾಃ।ಮಾ ವ॑ ಸ್ತೇ॒ನ ಈ॑ಶತ॒ ಮಾಘಶ॑ꣳ ಸಃ ॥೨॥ ೨ ಧ್ರು॒ವಾ… Read more: ಯಜುರ್ವೇದ ಕಾಣ್ವಶಾಖಾ ಪ್ರಥಮೋಽಧ್ಯಾಯಃ
  • व्याकरणम् ।
    व्याकरणम् । श्रीमद्वासुदेव मिश्रशर्म्मा। मुखं व्याकरणं स्मृतम् – व्याकरण वेद का मुखस्थानीय है । अर्थात् पदपदार्थज्ञानशक्ति है । व्यक्त, व्युत्पन्न एवं सार्थक शब्द ही संस्कृतभाषाको अन्यतरीभाषासे विशेष वनाता है । शब्द तथा अर्थका सम्पूर्ण समन्वय ही… Read more: व्याकरणम् ।
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