इन्द्र, पुरुष, श्री, शरीर और प्रजापति नामों की व्याख्या – शतपथब्राह्मणम् माध्यन्दिनशाखा

इन्द्र, पुरुष, श्री, शरीर और प्रजापति नामों की व्याख्या – शतपथब्राह्मणम् माध्यन्दिनशाखा—-६.१.१.[१]असद्वा इदमग्र आसीत् । तदाहुः किं तदसदासीदित्यृषयो वाव तेऽग्रेऽसदासीत्तदाहुः केतऽऋषय इति प्राणा वाऽऋषयस्ते यत्पुरास्मात्सर्वस्मादिदमिच्छन्तः श्रमेणतपसारिषंस्तस्मादृषयः। हिन्दी – पहले यह असत् ही था। तब पूछा वह असत् क्या था? पहले वह असत् ऋषि ही थे। तब पूछा कौन वह ऋषि थे? प्राण ही वह ऋषि

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परोक्षप्रिया देवाः

परोक्षप्रिया इव हि देवा भवन्ति प्रत्यक्षद्विषः। यह देवता परोक्षप्रिय ही होते हैं, प्रत्यक्षद्वेषी। दिवति भासति इति देवम् । दृश्यमान मूल पदार्थ (stable fundamental particles) ही देव है । देव एव देवता (स्वार्थे तल्)। वही देवता हैं। सदारा विबुधाः सर्वे स्वानां स्वानां गणैः सह । यह देवता stable होने के लिए अग्निषोमात्मक (योषा-वृषा) लिङ्ग होना चाहिए

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Photon-Phonon interaction on our Genes, Brains etc.

-Basudeba Mishra To avoid ambiguity, this involves explaining the photon, the phonon, nature of their general interaction and its effect on our genes and brain that leads to conscious actions. We will try to explain it briefly. Photon-Phonon interaction on our Genes, Brains etc. Photons are “particles” representing a quantum of light or other electromagnetic

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सौन्दर्य क्या है।

– Basudeba Mishra सुन्दरता का भाव को सौन्दर्य कहते हैं। कथित है कि – रूपयौवनसम्पन्ना सुन्दरीत्यभिधीयते। रूप ऒर यौवन सम्पन्न स्त्री को सुन्दरी कहते हैं। रूप क्या है। चक्षुर्ग्राह्यं भवेद्रूपम्। द्रव्यों का उपलम्भक चक्षुग्राह्य स्पन्दन को रूप कहते हैं। कहते हैं कि – अङ्गान्याभूषितान्येव वलयादि विभूषणैः (केनचिद्भूषणादिना)। येन भूषितवत् भाति तद्रूपमिति कथ्यते। किसी नारी को

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