वेद स्तुति (नाम-रूप-कर्म) मीमांसा – 1
वेद स्तुति के विषय में हमें निम्न श्लोक प्राप्त होते है – ऋग्वेदः श्वेतवर्णश्च द्विभुजो रासभाननः।अक्षमालाम्बुपात्रं च बिभ्रन् स्वाध्ययने रतः॥अजाऽऽस्य पीतवर्णश्च यजुर्वेदोऽक्षसूत्रवान्।वामेचाङ्कुशपाणिस्तु भूतिदो मङ्गलावहः॥नीलोत्पलदलाभासः सामवेदो हयाननः।अक्षमालाधरः सव्ये वामे कम्बुधरः स वै॥अथर्वणाभिधो वेदो धवलो मर्कटाननः।अक्षसूत्रं च खट्वाङ्गं बिभ्रन् वै विजयप्रदः॥ वेद में देवताओं का स्तुति है। परन्तु उपरोक्त वर्णना में वेद को पुरुषरूप से कल्पना कर […]
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