पुराण ।
पुराण । श्रीमद्वासुदेव मिश्रशर्म्मा यो विद्याच्चतुरो वेदान्साङ्गोपनिषदान्द्विजाः ॥ इतिहासपुराणाभ्यां वेदं समुपबृंहयेत् । बिभेत्यल्पश्रुताद्वेदो मामयं प्रहरिष्यति ॥ ब्रह्माण्डपुराणम् पूर्वभागः १,१.१७०-१७१ ॥ जो संस्कारी व्यक्ति चारों वेद, वेदाङ्ग तथा उपनिषद के ज्ञाता हो उसीको वेद को विस्तार से जानने के लिए इतिहास (रामायण, महाभारत) तथा पुराण पढना चाहिए । नहीं तो अल्पशिक्षितों से वेद इसलिए दूर रहता […]