शिक्षा (लेख का द्वितीय संस्करण)

शिक्षा । श्रीमद्वासुदेव मिश्रशर्म्मा। बृहस्पते प्रथमं वाचो अग्रं यत् प्रैरत नामधेयं दधानाः।यदेषां श्रेष्ठं यदरिप्रमासीत् प्रेणा तदेषां निहितं गुहाविः॥ (ऋक् १०/७१/१) ॥ ॐ शीक्षां व्याख्यास्यामः । वर्णः स्वरः । मात्रा बलम् । साम सन्तानः । इत्युक्तः शीक्षाध्यायः ॥ तैत्तिरीयोपनिषदत् – शिक्षावल्ली १ ॥ वेदाङ्गों में उच्चारणपद्धति का ज्ञान सम्बन्धी उपदेश को शिक्षा कहते हैँ (शिक्ष्यते ज्ञायते

शिक्षा (लेख का द्वितीय संस्करण) Read More »

चतुर्विध पुरुषार्थ ।

चतुर्विध पुरुषार्थ । श्रीमद्वासुदेव मिश्रशर्म्मा प्रजापति ने एकलक्ष अध्याय का प्रथम धर्मार्थकाममोक्ष सम्बलित ग्रन्थ लिखा । उसमें आन्विक्षिकी (आत्मविद्या), त्रयी (वेदों का प्रक्रिया सम्बन्धी चर्चा), वार्ता (वृत्तिरस्याम् अस्तीति – वृत्ति सम्बन्धी ज्ञान), तथा दण्डनीति (राज्यशासन कला) यह चार विभाग थे । मनु ने उसका धर्मसम्बन्धी आन्विक्षिकी भाग का संकलन कर तथा अन्य विषयों को गौण

चतुर्विध पुरुषार्थ । Read More »