आयुर्वेदः – आयुका वेद – सम्पूर्ण रोगमुक्तपद्धति – भाग ३
रसचिकित्सा । व्यासतस्तु ज्वरादीनां व्याधीनां दोषभेदतः । द्विषष्टिधा कल्पनोक्ता स्थूलसंख्या त्वतः परम् ॥ एकैकशस्त्रयो द्वन्दैर्नव सर्वे त्रयोदश । क्षीणाधिकसमैश्चान्यैर्दश द्वौ च प्रकीर्तिताः । आधुनिक विज्ञान में गणित का स्थान बहुत ही महत्त्वपूर्ण है। अतः कुछ गणित का चर्चा करते हैं। भारतीय गणितमें चित्त्युत्तर एक प्रस्तार शैली है, जिसे आधुनिक काल में recursive matrix or Pascal’s […]
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