आयुर्वेद (Ayurveda)

आयुर्वेदः – आयुका वेद – सम्पूर्ण रोगमुक्तपद्धति – भाग ३

रसचिकित्सा । व्यासतस्तु ज्वरादीनां व्याधीनां दोषभेदतः । द्विषष्टिधा कल्पनोक्ता स्थूलसंख्या त्वतः परम् ॥ एकैकशस्त्रयो द्वन्दैर्नव सर्वे त्रयोदश । क्षीणाधिकसमैश्चान्यैर्दश द्वौ च प्रकीर्तिताः । आधुनिक विज्ञान में गणित का स्थान बहुत ही महत्त्वपूर्ण है। अतः कुछ गणित का चर्चा करते हैं। भारतीय गणितमें चित्त्युत्तर एक प्रस्तार शैली है, जिसे आधुनिक काल में recursive matrix or Pascal’s […]

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आयुर्वेदः – आयुका वेद – सम्पूर्ण रोगमुक्तपद्धति – भाग २

नाडीपरिक्षा । वातं पित्तं कर्फ द्वन्दं सन्निपातं रसं त्वसृक् । साध्यासाध्यविवेकश्च सर्वं नाडी प्रकाशयेत् ॥ वात-पित्त-कफ, इनका द्वन्द (वात-पित्त, वात-कफ, पित्त-कफ) तथा सन्निपात (समस्त दोष), एवं रोगों का साध्यासाध्यविवेक (कौन रोग साध्य है, कौन नहीं), यह सब नाडी प्रकाश करती है। नाडीपरिक्षा केवल स्पन्दनसंख्या (pulse rate) गणन नहीं है। नाडीपरिक्षाके अभ्यास किए बिना केवल पुस्तक

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आयुर्वेदः – आयुका वेद – सम्पूर्ण रोगमुक्तपद्धति – भाग १

यत्रौषधीः समम्मत राजानः समिताविव ।विप्रः स उच्यते भिषग् रक्षोहामीवचातनः ॥ ऋग्वेदः १०-९७-६ ॥ राजा जिसप्रकार सङ्ग्राममें अपने सैनिकोंके साथ विराजते हैं, उसीप्रकार शल्यादि अष्टतन्त्रज्ञ नाडीविज्ञान विशारद जिस विद्वानपुरुष नाना प्रकारके औषधीगणेंको एकत्रकर उनके साथ प्रतिष्ठित होता है, वह भिषक् (वैद्य) कहलाता है। जैसे राजा दुष्टपुरुषोंके अत्याचारसे प्रजाका रक्षाकरता है, भिषक् रोगजनित पीडाका उपशमकर जनताका कल्याण

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The concept of Vaata – वातः, Pitta – पित्तम् & Kapha – कफः

The concepts of Vaata – वातः, Pitta – पित्तम् and Kapha – कफः, called Dhatu (धातुः), are central to Ayurveda – the ancient Indian system of long and healthy life. For understanding these concepts, one has to look at the physics of everything, because the body represents the universe (यत्पिण्डे तद्ब्रह्माण्डे). What we know as

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