पुराण (Puraana)

वेद में अवतार १

कुछ मित्रों का प्रश्न है कि क्या वेद में भी अवतार का वर्णन अथवा प्रतिषेध है । इस प्रसङ्गमें यजुर्वेद 34-53 (अजः एकपात्) तथा यजुर्वेद 40-8 (स पर्य्यगाच्छुक्रमकायम्) मन्त्रों का उद्धरण किया जाता है । अब हम इन दो उद्धरणों का अनुशीलन करेंगे । वेद पूर्ण एवं सर्वस्वतन्त्र होने से, उसमें इन समस्त अर्थों का […]

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वैदिक अवतारवाद का वैज्ञानिक विश्लेषण

भगवद्गीता 4.7 में श्रीकृष्ण जी ने कहा है – “यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ।।” जब जब धर्म का ग्लानिः (बल का नाश, रोग) होता है, अधर्म का अभ्युत्थान (वृद्धि) होता है,  तब तब मैं ही अपने को (साकार रूप से) सृजन (सृ॒जँ॒ विस॒र्गे – प्रकट) करता हुँ (पृथ्वी पर अवतार लेता

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