Essays of gurudeva

परोक्षप्रिया देवाः

परोक्षप्रिया इव हि देवा भवन्ति प्रत्यक्षद्विषः। यह देवता परोक्षप्रिय ही होते हैं, प्रत्यक्षद्वेषी। दिवति भासति इति देवम् । दृश्यमान मूल पदार्थ (stable fundamental particles) ही देव है । देव एव देवता (स्वार्थे तल्)। वही देवता हैं। सदारा विबुधाः सर्वे स्वानां स्वानां गणैः सह । यह देवता stable होने के लिए अग्निषोमात्मक (योषा-वृषा) लिङ्ग होना चाहिए […]

परोक्षप्रिया देवाः Read More »

Photon-Phonon interaction on our Genes, Brains etc.

-Basudeba Mishra To avoid ambiguity, this involves explaining the photon, the phonon, nature of their general interaction and its effect on our genes and brain that leads to conscious actions. We will try to explain it briefly. Photon-Phonon interaction on our Genes, Brains etc. Photons are “particles” representing a quantum of light or other electromagnetic

Photon-Phonon interaction on our Genes, Brains etc. Read More »

सौन्दर्य क्या है।

– Basudeba Mishra सुन्दरता का भाव को सौन्दर्य कहते हैं। कथित है कि – रूपयौवनसम्पन्ना सुन्दरीत्यभिधीयते। रूप ऒर यौवन सम्पन्न स्त्री को सुन्दरी कहते हैं। रूप क्या है। चक्षुर्ग्राह्यं भवेद्रूपम्। द्रव्यों का उपलम्भक चक्षुग्राह्य स्पन्दन को रूप कहते हैं। कहते हैं कि – अङ्गान्याभूषितान्येव वलयादि विभूषणैः (केनचिद्भूषणादिना)। येन भूषितवत् भाति तद्रूपमिति कथ्यते। किसी नारी को

सौन्दर्य क्या है। Read More »

अक्षरों का वर्गीकरण, उच्चारणप्रक्रिया तथा संख्या

– Basudeba Mishra, Topic – Varnamala पाणिनीय शिक्षा में कहा गया है – त्रिषष्टिश्चतुःषष्टिर्वा वर्णाः सम्भवतो मताः । प्राकृते संस्कृते चापि स्वयंप्रोक्ताः स्वयंभुवा । आकाशसम्भूत वर्णों में अथवा ब्रह्माजी के मत में प्राकृत तथा संस्कृत के वर्ण संख्या 63 अथवा 64 कहागया है । इनमें स्वरवर्ण 22 है । स्पर्शवर्ण 25 है । अन्तस्थ वर्ण

अक्षरों का वर्गीकरण, उच्चारणप्रक्रिया तथा संख्या Read More »