योगसूत्रम् 1-29 व्याख्या
ततः प्रत्यकचेतनाधिगमोऽप्यन्तरायाभावश्च । योगसूत्रम् 1-29. उससे प्रत्यक् चेतन का साक्षात्कार होता है और समस्त अन्तराय विलीन होता है । प्रत्यक् शब्द का एक अर्थ पश्चिम है, जो सूर्य के अर्थात प्रकाश के दिशा के विपरीत है । प्रकाश ही उसके विपरीत दिशा में अवस्थित वस्तु का दर्शन कराता है । उसीप्रकार अन्तर्यामी बाहर के संसार […]
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