Essays of gurudeva

योगसूत्रम् 1-29 व्याख्या

ततः प्रत्यकचेतनाधिगमोऽप्यन्तरायाभावश्च । योगसूत्रम् 1-29. उससे प्रत्यक् चेतन का साक्षात्कार होता है और समस्त अन्तराय विलीन होता है । प्रत्यक् शब्द का एक अर्थ पश्चिम है, जो सूर्य के अर्थात प्रकाश के दिशा के विपरीत है । प्रकाश ही उसके विपरीत दिशा में अवस्थित वस्तु का दर्शन कराता है । उसीप्रकार अन्तर्यामी बाहर के संसार […]

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वैशेषिक दर्शन (महर्षि कणाद प्रोक्त)

महर्षि कणाद प्रोक्त वैशेषिक वा काणाद वा औलूक्य दर्शन , Vaisheshika of Maharshi Kanada १। वैशेषिक दर्शन का सुविख्यात प्रशस्तपादभाष्य यहाँ पढ़ें। Read the authoritative commentary of Acharya Prashastapaada on Vaisheshika. २। The hindi translation of Prashastapaada Bhashya is here. एक सुदृढ़ पाठ्यक्रम के रूप में वैशेषिक दर्शन को अधिकृत आचार्य से यहाँ पढ़ें। महर्षि

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साहित्य की मृत्यु

साहित्य (Sahitya) की मृत्यु । – Basudeba Mishra भवतु इति – यह ऐसा हो – इसप्रकार के चित्तवृत्ति को इच्छा कहते हैं । वह स्वीया – परकीया भेद से दो प्रकार का होती है । मैं अथवा मेरा ऐसा हो – इसप्रकार के आत्मसम्बन्धी इच्छा स्वीया है । अन्य समस्त परसम्बन्धी इच्छा परकीया है ।

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MEANING OF AANANDA (आनन्द) AND OTHER KOSHA (कोष) IN VEDANTA.

Basudeba Mishra Most people writing on Vedanta (वेदान्त) confuse the word Aananda (आनन्द) in Vedanta with happiness or joy. While happiness or joy are covered by the word Aananda, they do not convey its proper meaning. Its meaning is much more expansive and bliss is only nearer to it. Some so-called experts on Vedanta, who

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