Essays of gurudeva

जप क्या है।

समाहित चित्त (मन को किसी विषयमें संहृत करके), मन्त्र का अर्थ विचार करते हुए, अतन्द्रित (आलस्य रहित), तूष्णी (मौन) भाव से, माला के समान अनवच्छिन्न, न द्रुत न विलम्बित, उपांशु (अनुच्चस्वर से जब केवल होंठ हिलते हों परन्तु शब्द अन्य को सुनाइ न दे, ऐसे उच्चारण) अथवा मानस अक्षरावृत्ति (वार वार अभ्यास करने) को जप […]

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The concept of Vaata – वातः, Pitta – पित्तम् & Kapha – कफः

The concepts of Vaata – वातः, Pitta – पित्तम् and Kapha – कफः, called Dhatu (धातुः), are central to Ayurveda – the ancient Indian system of long and healthy life. For understanding these concepts, one has to look at the physics of everything, because the body represents the universe (यत्पिण्डे तद्ब्रह्माण्डे). What we know as

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उपनिषत् के पुरुष का स्वरूप

उक्थका सम्बन्ध विश्वके त्रिवृत् करण से है । विश्वमें उक्थ, अर्क, अशीति तीन विभाग है । इन्हे आत्मा, प्राण और पशु भी कहते हैं । जो केन्द्रमें है, जिसके सत्तासे विश्वका अथवा किसी विश्वसन्तान का सत्ता है, उसे उक्थ कहते हैं । उक्थसे निकलने वाले रश्मीयां अर्क कहलाती है । वाहर के भाग अशीति है,

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ॐ कार, प्रणव और उद्गीथ। ॐ प्रेति चेति चेति।

ॐ “कार”है। “कृ॒ञ् कर॑णे” अथवा “कृ॒ञ् हिं॒साया॑म्” धातु से “भावे घञ्”प्रत्यय से उत्पन्न “कारः”शब्द वधः अथवा निश्चयात्मक है। इसीलिये प्रत्येक अक्षरको, जो स्वयं को निश्चितरूपसे अन्य अक्षरों से भिन्न कर के (अपमर्दन कर के) दिखाता है, उसे “कार”कहते हैं – जैसे अकार, ककार, यकार आदि। “शिक्षा”नामक वेदाङ्ग ग्रन्थों में इसके विषय में विशेष चर्चा किया

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जाति का वैज्ञानिक आधार

किसी विदेशी सज्जनने मुझे लेखा कि जातिप्रथा केवल भारतमें ही है तथा यह एक घृणित प्रथा है। उत्तरमें मैंने उनको विश्व इतिहास लेख कर भुल प्रमाणित किया और कहा कि मनु प्रणीत जाति प्रथा विज्ञानसम्मत है। यह genetic mutation के उपर आधारित निहित कौशल (potential for excellence in a field) जानने के पन्था है। नीचे

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