जप क्या है।
समाहित चित्त (मन को किसी विषयमें संहृत करके), मन्त्र का अर्थ विचार करते हुए, अतन्द्रित (आलस्य रहित), तूष्णी (मौन) भाव से, माला के समान अनवच्छिन्न, न द्रुत न विलम्बित, उपांशु (अनुच्चस्वर से जब केवल होंठ हिलते हों परन्तु शब्द अन्य को सुनाइ न दे, ऐसे उच्चारण) अथवा मानस अक्षरावृत्ति (वार वार अभ्यास करने) को जप […]