Essays of gurudeva

वैदिक अवतारवाद का वैज्ञानिक विश्लेषण

भगवद्गीता 4.7 में श्रीकृष्ण जी ने कहा है – “यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ।।” जब जब धर्म का ग्लानिः (बल का नाश, रोग) होता है, अधर्म का अभ्युत्थान (वृद्धि) होता है,  तब तब मैं ही अपने को (साकार रूप से) सृजन (सृ॒जँ॒ विस॒र्गे – प्रकट) करता हुँ (पृथ्वी पर अवतार लेता […]

वैदिक अवतारवाद का वैज्ञानिक विश्लेषण Read More »

The concepts of अक्षर, वर्ण and छन्द

Let us focus on the word अक्षर. It is not the same as वर्ण. The word अक्षर which literally means imperishable, refers to the primordial energy of the universe. This is also called अमृतात्मा and षोडशी. It is one, but can become many due to interaction with the background structure. अक्षर has 9 विन्दु, whereas

The concepts of अक्षर, वर्ण and छन्द Read More »

भारतीय दर्शन

भारत के 6 आस्तिक (वैदिक) दर्शन और 6 मुख्य नास्तिक (अवैदिक) दर्शन माना गया है। कुछ लोग 3 आस्तिक (वैदिक) दर्शन और 3 नास्तिक (अवैदिक) दर्शन मानते हैं। 6 आस्तिक (वैदिक) दर्शन हैं – सांख्य, पूर्वमीमांसा, उत्तरमीमांसा, न्याय, वैशेषिक, योग। सृष्टि का आध्यात्मिक विवेचना (अव्यय का निरूपण) करनेवाला शास्त्र सांख्य है। विभिन्न ब्राह्मणम् ग्रन्थोंमें पायेजानेवाला

भारतीय दर्शन Read More »