भारतके प्राचीन घरोहर – वेद स्वरूप मिमांसा
गीता (15-15) में कहा गया है कि वेदैश्च सर्वैरहमेव वेद्यः। अर्थात सम्पुर्ण वेदके द्वारा मैं ही जानने योग्य हुँ। परन्तु यह वेदतत्व क्या है। इस गीता वाक्यमें मैं के द्वारा पुरुष का वोध कराया जा रहा है। उसके अनन्तर सव कुछ प्रकृति है। पुरुष शव्द से षोडशकल विश्वात्मा अव्ययपुरुष को निर्देशित किया गया है। प्रकृति […]
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