Essays of gurudeva

भाषा की सृष्टि तथा विभाग ।

भाषा की सृष्टि तथा विभाग । श्रीमद्वासुदेव मिश्रशर्म्मा वाचं देवा उपजीवन्ति विश्वे वाचं गन्धर्वाः पशवो मनुष्याः । तैत्तिरीयब्राह्मणम् ।देव, गन्धर्व, पशु तथा मनुष्य वाक् (वचँ परि॒भाष॑णे – communication) के द्वारा ही जीवनके समीपतम प्रयोजन पूर्ण करने में समर्थ होते हैं । यहाँ देवा (देवनमिह क्रीडा यथा बालः कन्दुकैर्नित्यमिति हलायुधः – त्रयस्त्रीगंशत् तु एव देवा – […]

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Relativity & Thermodynamics – a Vedic analysis

RELATIVITY & THERMODYNAMICS – A VEDIC ANALYSIS. -Shri Basudeba Mishra Sharma What is mass (परिमाणम् – परिमितव्यवहार असाधारणकारणम् – unique measurable properties of an object)? The definition that it is the measure of the amount of matter (वस्तु) in a body is vague. It simply substitutes the word matter for mass, without clarifying what is

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शब्दब्रह्म और परम्ब्रह्म ।

शब्दब्रह्म और परम्ब्रह्म । -श्रीमद्वासुदेव मिश्रशर्म्मा मैत्रायणी उपनिषद 6-22 में कहा गया है –द्वे ब्रह्मणी वेदितव्ये शब्दब्रह्म परं च यत् ।शब्दे ब्रह्मणि निष्णातः परं ब्रह्माधिगच्छति । अमृतविन्दु उपनिषद् 1-17 में भी कहा गया है –द्वे विद्ये वेदितव्ये तु शब्दब्रह्म परं च यत् ।शब्दब्रह्मणि निष्णातः परं ब्रह्माधिगच्छति ॥ ब्रह्म का दो भेद जानने योग्य है –

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वेदः Veda

वेदः । –श्रीमद्वासुदेव मिश्रशर्म्मा। जिसमें समस्त शाश्वत ज्ञान निहित है (विदँ ज्ञाने॑), अथवा जिसमें समस्त सत्तावानवस्तु के विज्ञान है (वि॒दँ॒ सत्ता॑याम्), अथवा उसका विवेचना किया गया है (वि॒दँ॒ वि॒चार॑णे), अथवा जिसका विवेचना करने से हम इच्छितवस्तु को सुगमता से प्राप्त कर सकते हैँ (विदॢँ॑ ला॒भे),अथवा जिसमें जाननेयोग्य सबकुछ है (विदँ॒ चेतनाख्याननिवा॒सेषु॑), उसे वेद कहते हैँ

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सर्ग विज्ञान

पुराणों में कहीं दश या नौ सर्गों में सृष्टि का वर्णन किया गया है। श्रीमद्भागवतम् के तृतीय स्कन्ध के आधार पर यहाँ दशविध सर्ग विज्ञान उद्घाटित किया गया है।

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Vyasa Sewaka
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