शाट्यायनीयोपनिषत्
उपनिषद् ॥ शाट्यायनीयोपनिषत् ॥ शाट्यायनीब्रह्मविद्याखण्डाकारसुखाकृति । यतिवृन्दहृदागारं रामचन्द्रपदं भजे ॥ ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ॥ वह (ईश्वर) पूर्ण है, यह (संसार) भी पूर्ण है। पूर्ण से पूर्ण उत्पन्न होता है। पूर्ण में से पूर्ण को ले लेने पर भी पूर्ण ही शेष रहता है। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥ हरिः ॐ […]