पञ्चम सुमन · प्रकरण 65

भोजनके बादके नियम

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543वह घृताक्त हाथ आंखोंपर फेरना चाहिये - इससे आंखोंकी ज्योति बढ़ती है । घृतको हाथसे उतारने के लिए साबुन से हाथ धोकर हाथको रूखा करना ठीक नहीं । ( घ ) भोजनके बाद पहले वीरासनसे बैठना चाहिए; उस समय ' अगस्त्यं कुम्भकर्णं च शनिं च वडवानलम् | अन्नस्य परिपाकार्थं स्मरेद् भीमं च पञ्चमम् ' अगस्त्य आदिको याद कर लेना चाहिये । इस स्मृति से हमारे भोजन- परिपाककी क्रियापर प्रभाव पड़ता है । कई इस मन्त्रसे उस समय पेटपर हाथ फेरते हैं; पर हमें वह उचित नहीं जंचता । यद्यपि उससे भोजनके पचने में सहायता मिलती है; तथापि वह भोजन सर्वथा निस्सार हो जाता है ।

इस विषय में एक आख्यायिका प्रसिद्ध है कि — दो दैत्य थे, कहीं जंगल में रहते थे । आनेवाले अतिथि सत्कारका ढोंग करते थे । एक भाई दूसरी ओर आवरण में अपने भाईको मारकर उसका मांस पकाकर अतिथिको खिला दिया करता था । जव वह खा चुकता तो वह दैत्य संजीवनी विद्याके बलसे अपने भाईको बुलाता । वह भाई उस अतिथिका पेट फाड़कर बाहर निकल आता । उससे वह पथिक मर जाता । महात्मा बने हुए वे दोनों उसे खा जाते थे । इस प्रकार बहुतसे व्यक्ति मर गये । अगस्त्य मुनिको पता लगा । वे भी गये । जब वे भोजन कर चुके, तो दैत्य जब अपने भाईका संजीवनी विद्यासे आह्वान करने लगा; तो मुनिने अपने पेटपर हाथ फेर दिया । आह्नानसे भी वह दैत्य बाहर न निकला तो अगस्त्य मुनिने कहा कि- 544मेरे पेट पर हाथ फेरनेसे वह गल गया - निस्सार होगया; अब नहीं निकल सकता । इससे दैत्य मुनिपर झपटा तो मुनिने हुँकार से उसे मार डाला और लोकरक्षा की । इस प्रकार पेट पर हाथ फेरनेसे भोजन निःसार हो जाता है । हां, समुद्रपायी - अगस्त्य बहुत खत्रैया कुम्भकर्ण, वृकोदर भीमसेन आदिके स्मरणकी भावना कर लेनी चाहिये । जिससे हममें भी उत्साहशक्ति संकुचित होकर भोजनका परिपाक हो जावे ।

( ङ ) भोजनके बाद भुक्त्वा शतपदं गच्छेत, कोऽरुक्, कोऽरुक्, को s रुक्? ( बीमार कौन नहीं होता? ) वामशायी, शतपदगामी, सोऽरुक्, सोऽरुक्, सोऽरुक्, ( बांई करवट सोने वाला, और भोजन- के बाद सौ कदम चलनेवाला कभी बीमार नहीं होता ) इन वचनों के अनुसार धीरे - धीरे सौ कदम चलना चाहिये । इससे यथायोग्य रक्तसंचलन होनेसे भोजनकी परिपाक - क्रियामें सहायता मिलती है । तेज़ चलने में रक्तसंचलनकी गति बहुत बढ़ जानेसे भोजन भस्म हो जाता है । बड़ी हानि होती है । आयु घटती है । खाकर बैठने से बड़े पेटका सेठ वन जाता है । एकदम सो जावे; तो पाक- क्रिया न हो सकनेसे अजीर्ण हो जाता है । न घूमने से पेट बड़ा हो जाता है । घूम - फिरकर भोजन करना भी खतरे से खाली नहीं; क्योंकि उस समय भी रक्त - संचलन जल्दी जल्दी होता है ।

In English

Rituals and Digestion After Eating

This text describes specific actions to take after a meal to aid digestion, such as rubbing hands with ghee and walking one hundred steps. It argues that remembering certain powerful figures helps process food properly and warns against walking too fast or sleeping immediately after eating.

This chapter answers

  • How to improve eyesight after eating?
  • Why should i walk 100 steps after a meal?
  • Benefits of sitting in virasana after eating?
  • Why is walking too fast after food bad for health?
  • Story of sage agastya and the demons?

Also written: Bhojanake, Badake, Niyama, Bhojanake Badake Niyama, भोजनके बादके नियम

मूल ग्रन्थ

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