पञ्चम सुमन · प्रकरण 36
चन्दन - तिलक- विज्ञान
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365भी देवताओंकी दिशा मानी गई है । उत्तरायण होनेपर सूर्यका इधर ही झुकाव होता है । देवयान भी इधर ही माना गया है । उत्तरायण ही देवताओंका दिन होता है । देवाधिदेव महादेवकी ईशानकोण भी पूर्व और उत्तर दोनोंसे ही मेल खाती है । अतः देवकार्य पूर्वोत्तर ओर अभिमुख होकर करना निराधार नहीं ।
( २२ ) चन्दन - तिलक धारण- विज्ञान ।
स्नान के बाद सन्ध्याके अवसर में अपने देवको चन्दन चढ़ाकर आपस्तम्बगृह्यसूत्रमें कहा ' है - चन्दनेन
' उत्तरैर्देवताभ्यः प्रदाय, स्वयं माथेमें चन्दनका तिलक लगाना भी प्राचीन रीति है । जैसे कि उत्तरया अनुलिप्य ' ( ५ । १२ । १८ ) । मीमांसादर्शन के शावर भाष्य में भी कहा है – ' देवाय धूपो देयः पुष्पाणि अवकरितव्यानि, चन्दनेन अनुलेप्तव्यः, उपहारोस्मै उपहर्तव्यः, एवं कृते देवस्तुष्यति ' ( ५।१४ ) यहां देवताको चन्दन चढ़ानेसे देवताकी प्रसन्नता बताई गई है । अस्तु ।
चन्दन लगाना जहां पुण्यकार्य है, वहां लाभ - दायक भी । इससे दुर्गन्ध आदि दूर होती है । जो कि आजकलके व्यक्ति पुण्य नहीं मानते; उसमें उनके मस्तिष्ककी निर्बलता ही कारण है । यदि वे मस्तकमें चन्दन लगावें; तो उनका मस्तिष्क भी बलवान् बने । बात यह है कि — मस्तक में ऊष्माकी स्थिति होनेसे ही मस्तिष्कमें विकृति उत्पन्न होती है, और मस्तिष्ककी विकृति से ही दुष्कर्म होते हैं । मस्तकमें चन्दन लगानेसे उसमें ठण्डक रहती है, जिससे मस्तिष्क प्रकृतिस्थ ( स्वस्थ ) रहता है । मस्तिष्कके स्वास्थ्य में सुकर्म होते हैं; 366अतः चन्दन लगाने में पुण्य स्पष्ट ही है ।
' दुर्गन्धादिके दूर करनेके प्रयोजन. वाले चन्दनानुलेपनका धर्मसे सम्बन्ध कैसा? ' प्रतिपक्षियों को अपने इस प्रश्नका उत्तर अपने हवन - द्वारा जान लेना चाहिए । जैसे वे भी दुर्गन्धादि दूर करना ही हवनका प्रयोजन मानते हैं; तथापि जैसे उसे धर्म - कर्म कहते हैं, वैसे यहां भी समझ लेना चाहिए । वहाँ सारे देशका उपकार माना जाता है, यहाँ प्रत्येक व्यक्तिका होकर क्रमश: समाज का, इस प्रकार समूचे देशका उपकार हो जाता है ।
' अनुलिप्तं परार्थ्येन चन्दनेन परन्तपम् ' ( वाल्मीकि ० २।१६।६ ) यहाँ भगवान् रामका चन्दनानुलेपन स्पष्ट है । श्रीराम मर्यादा- पुरुषोत्तम थे; अतः चन्दनका लगाना भी प्राचीन मर्यादा हुई । चन्दनके गुण राजनिघण्टुमें कहे गये हैं, तब उसके अनुलेपन करनेवालेको भी वे ही गुण प्राप्त होंगे । तब जहाँ चन्दनानुलेपन की प्राचीनता सिद्ध हुई; वहां वैज्ञानिकता भी ।
। वैज्ञानिकता यह है - नासिकामें दो विजुलियाँ रहती हैं, एक नैगिटिव, दूसरी पाज़िटिव । एक ठण्डी होती है, दूसरी गर्म । ये दोनों यहां से मस्तक तक दो नसोंके रूपमें प्राप्त हैं । जब विद्य त् - प्रवाह प्रवाहित होता है; तब उसमें ऊष्मा बढ़ती है । उसमें ठंडक रखनेकेलिए मस्तकके ठीक मध्य में चन्दन तिलक लगानेका विधान है; नहीं तो विद्युत् प्रवाहसे ऊष्मा बढ़ जानेपर मस्तिष्कमें भी ऊष्मा जा पहुँचने से या पाप - सम्भावना होती है - या मस्तिष्ककी नस ही टूट जाती है, जिससे जीवन की भी समाप्ति हो जाती है । चन्दना-
In English
The Science of Wearing Sandalwood Tilak
This chapter explains the ritual and physiological importance of applying sandalwood paste to the forehead. It argues that sandalwood provides cooling properties necessary to maintain brain health and prevent heat-related neurological issues.
This chapter answers
- Why do hindus wear sandalwood tilak on the forehead?
- Benefits of applying sandalwood to the head?
- Scientific reason for sandalwood tilak?
- How does sandalwood affect the brain?
Also written: Chandana, Tilaka, Vigyana, Chandana Tilaka Vigyana, चन्दन - तिलक- विज्ञान