पञ्चम सुमन · प्रकरण 29
दातन वा मंजनका प्रयोग
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339यक्ष्मा ' होनेका डर सम्भव है । उन दांतों की शुद्ध्यर्थ दन्तधावनकाष्ठ आवश्यक है । इससे ' कम खर्च वाला नशीन ' कहावत चरितार्थ हो जाती है । नीम आदिका दातन करनेसे उसका कटुत्व जहाँ दांतों के कीड़ेको नष्ट करता है; वहाँ उदर रोगोंको भी दूर करता है । प्राचीन लोग दन्तशुद्धिकेलिए सद्यः काटे हुए विशेष - विशेष काष्ठको उपयुक्त करनेका आदेश देते हैं । इससे जहां दांतोंको चबानेका बहुत वल नहीं लगाना पड़ता; वहाँ दांतोंका मल भी शीघ्र दूर हो जाता है, और उसका कषाय - भाग भीतर प्राप्त होकर भीतरी मलको भी दूर कर दिया करता है । उन विशेष वृक्षोंका गुण उसके काष्ठमें होनेसे हमें लाभ पहुँचता है । उससे जीभकी भी शुद्धि हो जाती है । जीभकी शुद्धि भी आवश्यक है ।
इसके अतिरिक्त दन्तधावन - काष्टमें व्यय भी थोड़ा पड़ता है । पर आज के महाशय बहुमूल्यलभ्य विलायती पेस्टोंको लेकर ब्रुशसे दांतोंकी शुद्धि करते हैं । एक तो उसमें खर्च बढ़ता है । दूसरा उस ब्रु शमें दन्तमलके कीटाणु रह जाते हैं । तीसरा उस ब्रु शके बाल किसी प्रारणीके ही तो होते हैं; उन्हें मुहमें डालना उचित प्रतीत नहीं होता; और वह विलायती ओषधि अपवित्र भी हो सकती है; उसे मु'हमें डालने से धर्महानि भी स्पष्ट है । अतः प्राचीन रीतिका आश्रयरण ही सभी सुविधा और लाभोंको पहुँचाता है । उनमें शास्त्रका अनुसरण होता है, इससे हममें भारतीयता रहती है; हम विलायतकी ओर नहीं खिंचते; और अपने धर्म में निष्ठा रहनेसे दूसरोंके धर्मको घृणित समझकर उसमें हमारे 340प्रविष्ट होनेकी शंका नहीं रहती । अस्तु
यदि दन्तधावनका समय न हो, क्योंकि - आजकलके देश- कालमें इतने कार्यं बढ़ गये हैं कि - समयकी भी न्यूनता हो गई है; तब विशुद्ध मंजनका उपयोग कर लेना चाहिए । ' आंखों में अंजन, दांतों में मंजन ' यह लोकोक्ति भी प्रसिद्ध है । उसमें भी यदि सुविधा न हो; तो नमक और तेलसे दांतोंका घर्षण कर लेना चाहिए, इससे दांत दृढ हो जाते हैं; शीघ्र गिरते नहीं । दांतों में छिद्र भी नहीं होते, उनमें दुर्गन्ध भी नहीं रहता ।
( ११ ) तैल - नियमका विज्ञान ।
इसके बाद स्नानका क्रम आता है । उससे पूर्व तेल लगाना पड़ता है । शीतकालमें शरीरपर एकदम जल डालना हानिकारक हो सकता है; अतः पहले तेल लगा लेनेसे उसकी चिकनाहटके कारण जलका हानिकारक प्रभाव नहीं हो पाता । तेल शरीरमें बल भी देता है । इससे शरीरकी रुखाई भी दूर रहती है; मुख भी स्निग्ध रहता है । अङ्गों में लगाया हुआ तेल रोमकूपोंके द्वारा भीतर घुसकर लाभ पहुँचाता है । तेलका प्रयोग न करनेपर शरीरकी रूक्षता बढ़ जानेसे खुजली बढ़ती है, और शरीर से मट्टी निकलती हुई प्रतीत होती है । बहुतसे जल शरीरमें खुश्की बढ़ाते हैं; उस दोषके दूरीकरणार्थ तेलका प्रयोग आवश्यक है । सिर में तेल डालनेसे सिरके रोग नहीं होते, और मस्तिष्क बलवान् होता है । मुहमें तेल लगाने से मुखकी त्वचापर शीत - उष्णका प्रभाव नहीं पड़ता; आंखोंकी ज्योति तीव्र रहती है । कानों में तेल डालने से
In English
Dental Hygiene and the Science of Oil Application
This text explains the benefits of using traditional wooden sticks like neem for cleaning teeth compared to modern toothpastes and brushes. It also describes how applying oil to the body before bathing protects against cold, prevents skin dryness, and strengthens the head and eyes.
This chapter answers
- Benefits of neem twigs for teeth?
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Also written: Datana, Va, Manjanaka, Prayoga, Datana Va Manjanaka Prayoga, दातन वा मंजनका प्रयोग