पञ्चम सुमन · प्रकरण 28
कुल्ला करना तथा मुंह धोना
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337( E ) कुल्ला करना तथा मुह धोना ।
मल - त्यागके बाद अन्य शुद्धि करके फिर गण्डूष ( कुल्ला ) करनेका विधान भी आया है, यह भी रहस्यपूर्ण है । हम किसी गली में जारहे हैं; और वहाँ मल - पात्र पड़ा हुआ है - वा पेशाबका स्थान है | हम उस स्थलसे जाते हुए एक तो मुँह और नाक बन्द कर लेते हैं, और उस स्थानको पार करके मुँहसे थूक गिरा देते हैं । उसमें कारण क्या है? यही कि तब हमारे मुखमें दुर्गन्धके परमाणु आ जाते हैं । वे भीतर न चले जावें; अतः उन्हें निकालने केलिए थूका जाता है । उस स्थलको पार करना तो थोड़े से समयका है; पर पुरीषालय में अथवा पुरीष करनेकेलिए किसी खुले स्थानपर कुछ काल तक रहना पड़ता है । तब मुखमें गये हुए गन्दे परमाणुओं को हटानेकेलिए साधारण थूकसे काम नहीं चलता; तब बारह बार कुल्ला किया जाता है, जिससे पूर्ण शुद्धि हो जाय । मुनियोंने उसका परिमाण जो बनाया; वह इसीलिए कि इतनी संख्या तक करनेसे वे परमाणु पूर्णरूपसे निकल जाते हैं । मूत्रोत्सर्गके समय मलकी अपेक्षा परमाणुओंकी शक्ति न्यून होनेसे चार बार कुल्ला करना पर्याप्त होजाता है । इसीलिए आश्वलायनका यह प्रमाण मिलता है - ' कुर्याद् द्वादश गण्डूषान् पुरीषोत्सर्जने ततः । मूत्रोत्सर्गे तु चतुरो भोजनान्ते तु षोडश । भक्ष्यभोज्यावसाने तु गण्डूषाष्टकमाचरेत् ' II । भोजनके समय १६ कुल्ला करनेका लाभ दन्तस्थित उच्छिष्टको सर्वथा बाहर निकालनेकेलिए है; नहीं तो दांतों में उच्छिष्ट रह जानेसे दांत शीघ्र टूट जाते हैं ।
338अस्तु; कुल्ला करनेके बाद मुँह तथा आंखें भी धोनी चाहियें । वहाँ भी मल आदिके परमाणुओं को दूर करना लक्ष्य होता है; नहीं तो शुद्धि न करने से आँखोंकी हानि होती है । मुहमें पानी भरकर तब शुद्ध शीतल जलसे मुँह और आँख धोने चाहियें । इससे आँखों की नसें अधिक तेजस्वी हो जाती हैं और नेत्र शीघ्र विकृत नहीं होते । मुँह धोना दिनमें तीन - चार बार होना चाहिए अपने कार्यसे आकर फिर भी मुँह शीतल जलसे धोना चाहिए । इससे आँखोंकी ज्योति बढ़ती है । प्रातः मुख धोने से रातकी उत्पन्न मैल आँखों से हटती है ।
( १० ) दातन वा मंजनका प्रयोग ।
रातको जब हम सोते हैं; तो भोजन करके सोते हैं; सोते हुए ही उस भोजनकी पाकक्रिया होती रहती है । फिर गन्दे श्वास- प्रश्वास निकला करते हैं; उसका मुहके भीतर, जीभ तथा दांतों पर भी प्रभाव पड़ता है । उस समयकी थूक विषाक्त होती है । उसका प्रमाण यही है कि— यदि हम उस थूकको अपने फोड़े में लगाएँ; तो वह शीघ्र नष्ट हो जाता है । अतः उस समय दांतोंकी तथा मुखके भीतरी भाग- जिह्वा आदिकी शुद्धि अपेक्षित होती ही है । यदि ऐसा न किया जावे; तो दांत पीले बने रहते हैं, और वह मैल भोजन खानेके समय अन्दर जाकर हानि पहुंचाता है ।
दांतोंका महत्त्व सभी जानते हैं । दांतोंके स्वास्थ्यपर शारीरिक स्वास्थ्य निर्भर है । डाक्टर लोग कई युवकोंके दांत इसलिए निकलवा देते हैं कि - यदि ऐसा न किया गया; तो उसको राज-
In English
Rinsing the Mouth and Washing the Face
This chapter explains the ritual and practical reasons for rinsing the mouth with water and washing the face. It argues that specific numbers of rinses remove invisible impurities caused by bodily waste, and that washing the eyes helps maintain vision.
This chapter answers
- How many times should one rinse their mouth after defecation?
- Why do hindus rinse their mouth after urinating?
- Benefits of washing face and eyes with cold water?
- Why is it necessary to clean teeth and tongue in the morning?
Also written: Kulla, Karana, Tatha, Munha, Dhona, Kulla Karana Tatha Munha Dhona, कुल्ला करना तथा मुंह धोना