पञ्चम सुमन · प्रकरण 67

घृतका दीपक जलानेका विज्ञान

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569करेगी । घृतमें कीटाणुनाशिनी शक्ति प्रसिद्ध है ही । कभी - कभी कु'एसे विषाक्त वायु ( गैस ) निकलती है; जो प्राणघातक तक सिद्ध हो जाती है । कभी कभी

- समाचारपत्रों में वृत्त देखा जाता है कि- कोई कुए में सफाईकेलिए घुसा, वह वापिस न आ सका, वहीं मर गया; क्योंकि विषाक्त गैससे प्रारणका नाश हो जाता है । तो घृतके दीपक से वहां की अशुद्ध गैस दूर होती रहेगी - यह लाभ हुआ । अन्य लाभ यह है कि यदि उस दिन भीतरी कारणों से सचमुच ही प्राणघातक विषाक्त गैस कुए से अधिक मात्रा में निकल रही होती है - वहां प्रयत्न करनेपर भी वह घृतका दिया जल नहीं सकता, जलानेपर भी बार - बार उस गैसके प्रभाव से बुझ जाता है । इस चिह्नसे कुएं में उतरनेवाले, वा कुएं पर आनेवालोंको सावधानता प्राप्त हो जाएगी । इससे सर्वसाधारणकी आशङ्कित हानि बच जावेगी ।

इस प्रकार अखण्ड - घृतदीपक जहां भी होगा, चाहे देवमन्दिर में, चाहे घरमें; उसका भी बड़ा लाभ है । घृत शुद्ध होना चाहिये । शुद्ध - घीसे अखण्ड दीपक जलता रखने से एक प्रकारका घृत - हवन निरन्तर अपने आप होता रहता है । ऐसा दीपक जिस स्थानपर प्रकाश करता रहता है, वह स्थान एक नित्य - अदृश्य ज्योतिसे प्रदीप्त रहता है । उस घृतके परमाणु दीपककी ज्योतिकी अग्नि से सूक्ष्म होकर वायुकी सहायतासे हमारे अन्दर प्राप्त होंगे । स्थूल घृत खानेकी अपेक्षा यह सूक्ष्म - घृत हमारे रोम कूपोंके द्वारा घुसकर इन्जेक्शन की भांति बहुत और शीघ्र लाभ देगा । उस दीपक के 570निकट वैठकर की हुई उपासना विशेष फलवती होती है । मन्दिर में या घर में बहुत ' लोगोंका आना जाना

- या निवास रहता है । उन पुरुषोंके भीतर से श्वास आदि निकलते रहते हैं । वे शुद्ध होते हैं; क्योंकि - भोजन - परिपाकादिके समय उसका विषाक्त अंश हमारे रोम कूपों वा मुखादिसे कारखाने की चिमनी से धुएँकी तरह निकलता रहता है । तब वही एक - दूसरेकी श्वास- वायु कुछ विषाक्त अंशयुक्त होनेसे एक - दूसरेको सूक्ष्म - हानि पहुँचा सकती है, पर अखण्ड - घृतका दीपक रखने से वह विषाक्त प्रभाव धीरे - धीरे मिटता रहता है । इसलिए जप श्रादिमें भी दीपक जलाया जाया करता है, धूप भी ।

अतः अखण्ड घृत जलते रहना - यह भी एक अखण्ड - यज्ञाग्नि रखनेका संक्षिप्त - संस्करण है । वल्कि उससे भी विशेष है; क्योंकि अखण्ड - अग्नि यद्यपि पहले संधुक्षित होती रहती है; तथापि हवनके समयसे ही उसे प्रज्वलित करके उसमें घृताक्त हवि डाली जाती है; पर घृत - दीपक तो निरन्तर प्रकाशमान होने से उस वातावरणमें दिव्य - ज्योति तथा पूर्वोक्त लाभोंको करता रहता है । अखण्ड अग्निमें प्रातः सायं दो ही वार घृतका हवन होता है - इसमें तो अहर्निश हवन होता रहता है ।

सूतकके समय प्रसूतिगृह में १० दिन तक अखण्ड - दीपक रखने से सुरक्षा होती है । मृत्युके समय उस मृत्युस्थल पर अखण्ड दीपक जलाना पड़ता है । क्योंकि मृत्युके समय मृतक - शरीरसे निकले हुए रोग - परमाणु, मनकी वेदना, मोह, शोक आदिके

In English

The Benefits of the Uninterrupted Ghee Lamp

This text explains how a continuous lamp lit with pure ghee purifies the air and provides safety. It argues that the flame neutralizes toxic gases in wells and removes impurities released through human breath or near death. The constant burning of the lamp acts as a continuous ritual offering that cleanses the environment.

This chapter answers

  • Benefits of keeping an unbroken ghee lamp?
  • How does a ghee lamp purify air?
  • Why light a lamp in a well?
  • Purpose of lighting a lamp during childbirth or death?

Also written: Ghritaka, Dipaka, Jalaneka, Vigyana, Ghritaka Dipaka Jalaneka Vigyana, घृतका दीपक जलानेका विज्ञान

मूल ग्रन्थ

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