पञ्चम सुमन · प्रकरण 39

मार्जन - विज्ञान

मुद्रित पृष्ठ 373–374 2 पृष्ठ

373कुशोंका, अपामार्ग तथा दूर्वाका मार्जन उपयुक्त किया जाता है । कुशसे तेजगत दोष, अपामार्ग से विशेषरूप से रक्तगत दोष, और दूर्वासे शुक्रगत दोष दूर किये जाते हैं ।

कुशोंमें विसर्पदाह, रक्त - मूत्राशय और नेत्र रोगोंको शान्त करनेमें क्षमता है, और दूर्वा में रक्तपित्त, कफ, दाह, पिपासा और क्षयको दूर करनेकी योग्यता है, अपामार्ग में कफ, वायु, दाह, अर्श, कण्डू, जठररोग और रक्तपित्त एवं विषदोषको दूर करनेकी शक्ति है ।

इनसे मार्जनके द्वारा जब स्नान कर चुके हुए भी पुरुषके शुष्क शरीर पर शुद्ध, एवं अभिमन्त्रित जलकी बूंदें पड़ती हैं; तब आक- र्षणशक्तिके प्रभावसे अशुद्ध ऊष्मा बाहर निकल जाती है; बाहरी शुद्ध वायु और सूर्यकी किरणें भीतर जाकर अवशिष्ट अशुद्ध - परमाणुओं को भी निकाल देते हैं । शीतकाल में तो स्नान एवं मार्जनसे अशुद्ध ऊष्मा वा भाफका बाहर निकलना प्रत्यक्ष ही होता है; परन्तु ग्रीष्मकालमें वायुमण्डलकी रूक्षता तथा उष्णतासे वह भाप अति- सूक्ष्मरूप होकर उड़ जाती है; इसी कारण अदृश्य होती है ।

गर्मीकी ऋतुमें किसीकी आंखें आई हुई हों; अर्थात् दाहयुक्त हों; उसपर कुशाद्वारा दिनमें दो बार जलद्वारा मार्जन करनेसे नेत्रदाह शान्त हो जाता है । यदि किसीको बिच्छूने काटा हो; तब वह स्नान करके श्रद्धासे अपामार्ग ( विशेष बूटी ) द्वारा अपने पर मार्जन करवा ले, तब बिच्छूका विष भी दूर हो जाता है । इस प्रकार दूर्वा - द्वारा मार्जनसे दाह वा व्याकुलता नष्ट हो जाती है । आर्यसमाज- 374प्रवर्तक स्वा ० श्रीदयानन्दजीने मार्जनके विषय में अपना नव्य— अनुभूत वैज्ञानिक (? ) आविष्कार भी अपने प्रसिद्ध ग्रन्थ ' सत्यार्थ प्रकाश में प्रकाशित किया है कि - मार्जनद्वारा

सन्ध्या में आती हुई नींद दूर हो जाती है । यह भी वैज्ञानिकतासें

एक नई कड़ी जुड़ गई है ।

( २७ ) अभिषेक ।

अभिमन्त्रित जलसे भरे घड़ेके जलसे

मस्तकको सींचनेका नाम अभिषेक हुआ करता है । यज्ञके बाद

यजमानका अभिषेक होता है । साधारण रीति से भी शिरपर जल

डालने से महान् लाभ होता है, तब यदि श्रभिमन्त्रित जलको विधि से डाला जावे; तो उसके लाभके विषयमें क्या कहना? आर्यसमाज प्रवर्तक स्वामी दयानन्दजीके गुरु स्वामी विरजानन्दजीके जीवनकी एक घटना है कि एकबार उन्होंने भ्रमसे संखिया अधिक मात्रा में खा ली । पता लगनेपर उन्होंने जलसे भरे घड़ोंका जल अपने सिरपर डलवाना शुरू किया । सायंकाल तक विषका प्रकोप सर्वथा शान्त हो गया । यह है अभिषेकका महत्त्व ।

( २८ ) आचमन - विज्ञान |

सन्ध्या में मार्जनके बाद संकल्प करना पड़ता है । संकल्पसे सृष्टिके समयका ज्ञान, अपने धर्मकी प्राचीनता, तथा वर्तमान देशी तिथि वार आदिके ज्ञानमें प्रवृत्ति बनी रहती है । इस पर ' विविध- पर्वविज्ञान ' में ' संवत्सरका आरम्भ ' में लिखा जायगा; यदि इस पुष्पमें स्थान निकल सका । फिर आसनशुद्धि एवं भूशुद्धि

In English

Ritual Cleansing: Marjana, Abhisheka, and Achamana

This text explains the medicinal and purifying uses of rubbing the body with water and specific plants like Kusha, Apamarga, and Durva. It describes how ritual bathing and pouring water over the head (Abhisheka) can neutralize heat, toxins, and physical ailments. It also introduces the concept of Achamana as a step following purification.

This chapter answers

  • Benefits of rubbing body with kush, apamarga, or durva?
  • How to treat scorpion venom with apamarga?
  • What is the purpose of abhisheka in hindu rituals?
  • How does ritual water pouring help with toxins?
  • What is the meaning of achamana?

Also written: Marjana, Vigyana, Marjana Vigyana, मार्जन - विज्ञान

मूल ग्रन्थ

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