पञ्चम सुमन · प्रकरण 73

मास - नाम - रहस्य

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615वाला नक्षत्र चन्द्रमाके साथ आ जाता है । इसी प्रकार फिर आगेकी पूर्णिमामें उसका भी अग्रिम एक नक्षत्र छूटकर उस छूटे हुए का अगला नक्षत्र चन्द्रमा के साथ आ जाता है । किसी -

किसी मासमें दो नक्षत्र छूटकर उनसे अग्रिम - नक्षत्र चन्द्रमाके साथ आ जाता है । जो नक्षत्र पूर्णिमामें चन्द्रके साथ होता है, उसी नक्षत्रके नामसे उस मासका नाम रखा जाता है । पूर्णिमावाले दिन उसी नक्षत्रसे मास पूर्ण होता है; अतः उसे पूर्णमासी कहा जाता है ।

अब ' आलोक ' पाठकगरण इस बातको सम । - जिस दिन पूर्णिमाको चन्द्रमाके साथ अश्विनी नक्षत्र होता है, उस मासका नाम ६ आश्विन होता है । ं व्याकरणानुसार ' अश्विनी ' से अणू - प्रत्यय होकर पूर्व अचूको वृद्धि करके अन्तिम ' ई ' को लुप्त करके ‘ आश्विन ’ बनता है । फिर उससे अग्रिम मासकी पूर्णिमा में भरणी नक्षत्र छूटकर कृतिका आ जाता है । उस मासका पूर्ववत् व्याकरणानुसार ७ कार्तिक नाम होता है । फिर उससे अभिम - पूर्णिमा में रोहिणी - नक्षत्र छूटकर मृगशिर आ जाता है, उस मासका नाम ८ मार्गशीर्ष होता है । उससे आगेकी पूर्णिमा में आर्द्रा और पुनर्वसु यह दोनों नक्षत्र छूटकर पुष्य नक्षत्र आ जानेसे ६ पौष मास नाम रखा जाता है । उसके बादकी पूर्णिमामें आश्लेषा छूटकर मघा

जानेसे १० माघ, उसके बादकी पूर्णिमामें पूर्वाफाल्गुनी छूटकर उत्तरा फल्गुनी आ जाता है; तो ११ फाल्गुन मास नाम रखा जाता है ।

616फिर अगले महीने में हस्त नक्षत्र छूटकर चित्रा आ जाने से १२ चैत्रमास, स्वाति छूटकर विशाखा आ जाने से १ वैशाख, अनुराधा समाप्त हो जाने और ज्येष्ठा आ जाने से २ ज्येष्ठ, मूल छूटकर पूर्वाषाढा आ जानेसे ३ आषाढ मास नाम रखा जाता है । उत्तराषाढा छूटने से श्रवण आकर ४ श्रावण नाम, धनिष्टा और शतभिषा यह नक्षत्र छूटकर पूर्वा भाद्रपदा नक्षत्र आ जाने से ५ भाद्रपद मास नाम रखा जाता है । फिर उत्तरा भाद्रपदा और रेवती दो नक्षत्र छूटकर उसके बाद अश्विनीका क्रम होता है, जिससे ६ आश्विन मास बनता है - यह पूर्व कहा जा चुका है । यह है हमारे देशी मासोंके नामोंका रहस्य ।

वार - क्रम - रहस्य |

सूर्य, चन्द्र आदि वारोंका नाम सात दृश्य ग्रहोंके कारण है- यह तो स्पष्ट है, पर सूर्यके चन्द्र और चन्द्रके बाद भौम आदिका यह क्रम क्यों है - इसपर भी पाठकगण याद रखें । ' सूर्यसिद्धान्त ' एक ज्योतिषका प्रसिद्ध, प्रामाणिक एवं प्राचीन ग्रन्थ है । यह २

कृतयुग – ( सत्ययुग ) के अन्तमें बनाया गया है, जैसा कि उसमें कहा है- ' अष्टाविंशाद युगादस्माद् यातमेतत् कृतं युगम् ' ( १ | २३ ) ' अल्पावशिष्टे तु कृते ' ( १।२ ) । अस्तु ।

उसी सूर्य - सिद्धान्त में व्योमकक्षा में ग्रहों का क्रम इस प्रकार कहा है - ' ब्रह्माण्डमध्ये परिधिव्यमकक्षाभिधीयते । तन्मध्ये भ्रमणं

यहां पर ' संज्ञापूर्वको विधिरनित्यः ' इस परिभाषा के बलसे पूर्व अचूको वृद्धि नहीं होती ।

In English

The Secret of Month Names and the Order of Days

This text explains how Hindu months are named based on which lunar mansion (nakshatra) appears with the full moon. It also introduces the sequence of days named after planets and references the Surya Siddhanta regarding planetary order.

This chapter answers

  • How are hindu month names determined?
  • What is the relationship between nakshatras and months?
  • Why are days named after planets?
  • What does surya siddhanta say about planetary order?

Also written: Masa, Nama, Rahasya, Masa Nama Rahasya, मास - नाम - रहस्य

मूल ग्रन्थ

यह पाठ सनातन धर्मालोक ५के मुद्रित पृष्ठ 615–616 से ज्यों-का-त्यों लिया गया है — न कुछ जोड़ा गया है, न घटाया। स्कैन किया हुआ मूल पृष्ठ देखनेके लिये —

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