पञ्चम सुमन · प्रकरण 7
सीमन्तोन्नयनका - रहस्य
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227( ३ ) सीमन्तोन्नयनसंस्कारका रहस्य ।......
' सीमन्तश्चाष्टमे मासि ' ( व्यासस्मृति ( १।१७ )
' सीमन्तोन्नयन संस्कार आठवें मासमें होता है ' । इस संस्कारमें सीमन्तका उन्नयन करके यह बताया जाता है कि अब स्त्री. शृङ्गार न करे, पति - सहवास न करे; नहीं तो गर्भपतनकी आशङ्का रहती है तथा सन्तानके विचार गन्दे होते हैं । सीमन्त शब्दके आनेसे स्त्रियोंका केश रखना गर्भहिताधायक सिद्ध होता है । इससे संतान के मस्तिष्कपर प्रभाव पड़ता है । इसीसे कोई भी सधवा स्त्री केशों को नहीं मुडवाती । विधवाएँ इसीलिए केशोंको मुडवाती हैं कि अब हमें सन्तान उत्पन्न नहीं करनी है । जैसे कि - संन्यासी पुरुष केशोंको मुडवा देते हैं; स्त्रियोंका वैधव्य ही उनका संन्यास है । केशोंमें बल हुआ करता है । स्त्रीकी अपेक्षा अधिक स्थानों में केशवाला होनेसे ही पुरुष ' पुमान् ' कहा जाता है । दाढ़ी - मूछोंवाला होनेसे ही पुरुष स्त्रीकी अपेक्षा वलवान् होता है । मूछें पु ंस्त्वका चिह्न होती हैं ।
यह संस्कार छठे - आठवें मास में करना पड़ता है । इससे देव- पूजाद्वारा गर्भकी रक्षा होती है । कइयोंका विचार है कि इससे सन्तानकी मानसिक शक्ति बढ़ती है; इसलिए इसे मनके देवता. चन्द्रमाकी आरम्भिकस्थिति ( शुक्लपक्ष ) में किया जाता है । सिरमें विभक्त हुई ' पाँच सन्धियाँ सीमन्त होती हैं । ' पञ्च संधयः शिरसि विभक्ताः सीमन्ताःः तत्र आघातेन उन्माद्भयचेष्टानाशैर्मरणम् ( सुश्रुत ॰ ' शारीर ० ६८१ ) सीमन्तस्य उन्नयनस् उद्भावनम् इति सीमन्तोन्नयनम् । ·
228इन सन्धियोंकी उन्नति वा प्रकाश होने से मस्तिष्क- शक्ति उन्नत होती है । इस समय गर्भ शिक्षण योग्य होता है । इन्हीं दिनों गर्भस्थ प्रह्लादको नारदका उपदेश और अभिमन्युको चक्रव्यूह -- प्रवेशका उपदेश मिला था इसलिए दोनों इस विषय में अप्रतिभट बने । अतः माता - पिता इन दिनों में अपनी मानसिक स्थितिको अच्छी रखें । शास्त्रविरुद्ध व्यवहार न रक्खें । जबसे गर्भ में स्पन्दन एवं अनुभूति प्रवृत्त हो जाते हैं, तबसे बच्चे के मनपर संस्कार प्रारम्भ होने लग जाते हैं और वे उसके समस्त जीवनके भावी निर्माण तथा विकास में प्रभाव डालते हैं । यदि उस समय माता- पिता कुसंस्कारों तथा शास्त्रविरुद्ध व्यवहारोंको धारण करेंगे तो भीतरी वच्चेपर भी वैसा कुप्रभाव पड़ेगा । अच्छे संस्कारोंसे बच्चे के आगेके संस्कार भी उत्तम बनते हैं । ' नवे हि भाजने लग्नः संस्कारो नान्यथा भवेत् । '
यह संस्कार ' मनुस्मृति ' में तो स्पष्ट नहीं; परन्तु पारस्कर, आश्वलायन आदि गृह्यसूत्रों में आया है ।
( ४ ) जातकर्मसंस्कार - रहस्य ।
स जातकर्मण्यखिले तपस्विना तपोवनादेत्य पुरोधसा कृते ।
दिलीपसूनुर्मणिर।करोद्भवः प्रयुक्तसंस्कार इवाधिकं बभौ ॥
( रघुवंश १८ )
जैसे
( खानसे निकली हुई मणि शानपर चढ़ाकर संस्कृत कर देनेके बाद अधिक चमकने लगती है, उसी प्रकार जब तपोवनसे आकर तपस्वी पुरोहित वशिष्ठजीने सम्पूर्ण जातकर्म संस्कार सम्पन्न
In English
The Secrets of Simantonayana and Jatakarma Samskaras
This text explains the Simantonayana ritual, which is performed during the sixth to eighth month of pregnancy to protect the fetus and enhance mental strength. It emphasizes that a mother's mental state and behavior during this time influence the child's future development. The text also introduces the Jatakarma ritual.
This chapter answers
- When is simantonayana sanskara performed?
- Why do married women keep their hair long?
- How does a mother's mental state affect the fetus?
- What is the purpose of simantonayana ritual?
Also written: Simantonnayanaka, Rahasya, Simantonnayanaka Rahasya, सीमन्तोन्नयनका - रहस्य