पञ्चम सुमन · प्रकरण 60

सिर बन्द करके भोजन न करना

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525होने में सुविधा होती है ।

( ५३ ) सिर वन्द करके भोजन न करना ।

मनुजीने कहा है- ' यद् वेष्टितशिरा भुक्ते यद् भुक्के दक्षिणा- मुखः । सोपानत्कश्च यद् भुक्के, तद् वै रक्षांसि भुञ्जते ' ( ३२३८ ) यहाँ सिर पटके ( साफे ) आदिसे बन्द करके और जूता समेत भोजन करने से वह भोजन राक्षसोंको मिलता है- ऐसा कहा है । . इस अर्थवाद में भी रहस्य है । वह यह कि भोजन खाते हुए जो ऊष्मा ( गर्मी ) सम्पूर्ण शरीरमें पैदा होती है, उस ( ऊष्मा ) के निकलनेके दो मुख्य मार्ग हैं, एक सिर, दूसरा पाँव | यदि यह दोनों बन्द होंगे; और वह ऊष्मा इन स्थानोंमें पहुँचकर बाहर निकलनेका जोर लगावेगी । पर दोनों मार्ग वन्द होनेसे वह ऊष्मा प्रकुपित होकर -वल - प्रयोग करेगी; इससे सिर तथा पैर, वल्कि सारे शरीरकी हानि होगी । पांओंमें जूता चर्ममय होने से वह दुर्गन्धित - परमाणुओं को भी भोजनके समय डालता रहेगा, ऊष्मा भी निकलने न देगा; इसलिए भी उस समय जूते पहरे रहना उचित नहीं । अन्य निकलनेका मार्ग है- गुप्त इन्द्रिय, तथा गुदेन्द्रियका छिद्र । भोजनके वाद लघुशंका अवश्य करनी चाहिये, उस मार्ग से भी ऊष्मा निकलेगी । गुदाप्रदेश से तो वह अपानवायु आदिके द्वारा निकलती ही रहती है; तथापि उस समय कौपीन ( लंगोट ) कसा हुआ भी न होना चाहिये ।

( ५४ ) कपड़े उतारकर वा रेशमी वस्त्रसे भोजन करना ।

हम पूर्व कह चुके हैं कि भोजन करते हुए शरीर में प्रचुर 526मात्रामें ऊष्मा उत्पन्न होती है; उसे रोमकूपोंसे बाहर निकलनेका अवसर भी देना चाहिये । उसमें कपड़े उतारकर भोजन करना भी एक उपाय है । वस्त्र पहिने हुए होनेपर रोमकूपोंपर आवरण पड़ा होनेसे ऊष्माके निकलने में बाधा पड़ेगी । वह यदि आवरण- वश भीतर रहे; तो हानि पड़ेगी । इसीलिए व्यायाम करनेके अवसर पर भी भीतरी ऊष्माके निकलनेकेलिए कपड़े उतारे जाते हैं । अथवा यदि कसे हुए कपड़े न हों; तो वह वाष्प भीतर से निकलती तो रहेगी, पर वह कपड़ों में लगेगी । एक तो उससे कपड़े खराब होंगे; दूसरा वे शरीरमें लगे होनेसे वह स्वेद - रूपसें निकली वाष्प फिर शरीरको खराब करती रहेगी; क्योंकि वह मलरूपमें जम जावेगी; तब रोमकूपोंके वन्द हो जानेसे कितनी हानि हो सकती है — यह स्वयं सोचा जा सकता है । इसलिए बीमारको जो पसीना आता रहता है उसे एक स्वच्छ कपड़े से साफ करते रहना पड़ता है; नहीं तो मलरूपमें जम जाने से उसकी हानि होती है । कपड़े उतरवा देना भी उसे बाहिरी वायुके लगनेका डर होनेसे विपद्जनक होता है । हाँ, उसके कपड़े बदलवा दिये जाते हैं ।

कई लोग भोजनके समय कपड़े उतारने में अन्य कारण बताते हैं; उनका आशय यह है कि हमने भोजन करना है; उसमें शुद्धता अपेक्षित होती है । अशुद्धता में भोजन नहीं किया जाता । धोती तो हम प्रतिदिन धो लिया करते हैं । ऊपरके कमीज आदि वस्त्र मैले होने से पूर्व हम नहीं धोते । उनका अशुद्ध होजाना भी सम्भव हो सकता है । अतः धोती न उतारकर अन्य वस्त्र भोजनके

In English

Rules for eating and heat regulation

This text explains the physiological importance of regulating body heat during meals. It argues that covering the head or wearing heavy footwear prevents heat from escaping, which can harm the body.

This chapter answers

  • Why should one not cover their head while eating?
  • Should you wear shoes while eating?
  • Does eating with clothes on affect body heat?
  • Why is it important to release heat after a meal?

Also written: Sira, Banda, Karake, Bhojana, Na, Karana, Sira Banda Karake Bhojana Na Karana, सिर बन्द करके भोजन न करना

मूल ग्रन्थ

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