सनातन धर्मलोक ५ — पृष्ठ 21–30

सनातन धर्मलोक ५ · पृष्ठ 21–30

पृष्ठ 21

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[ ए ] ( ५ ) आपके सब ग्रन्थ हमने मँगाये थे; उन्हें पढ़कर हमः बहुत प्रभावित हुए । आपकी विद्वत्ता और श्रमशीलता सब प्रकार सराहनीय है... ' ( पं ० श्रीरामशर्मा आचार्य, सम्पादक ' अखण्ड - ज्योति ' मथुरा ) । ( ६ ) ' श्रीमतां श्रमविषये बहुज्ञताविषये च मम हृदये महान् आदरः ।... ' ( श्रीभगवदाचार्यस्वामी, श्रीरामानन्दसम्प्रदायके एक विद्वान् आचार्य, अहमदाबाद ) । ( ७ ) ' शास्त्रीजीने ' सनातनधर्मालोक ' का प्रकाशन आरम्भ कर धार्मिक - जगत्का महान् उपकार किया है । सनातनधर्मके दृष्टिकोण को ठीक - ठीक समझनेकेलिए इन पुष्पोंका अध्ययन परमावश्यक है ।... ' ( श्रीस्वामी राघवाचार्य महाराज, आचार्यपीठ, बरेली ) । ( ८ ) ' श्रीमन्तः शास्त्रिणो भारतीय - विद्वत्समाजे सुप्रसिद्धाः संस्कृत-संसारे प्रथितयशसो लेखकाः सन्ति । द्वात्रिंशद्वत्सरेभ्यो निरन्तरं प्रचलन्ती शास्त्रिणां लेखनी, न साम्प्रतं यावद् मनागपि श्रममनु-भवति । इमे नितान्त - शान्तस्वभावाः, आडम्बरविहीनाः, मननशीला विचारकाश्च सन्ति ।.... एभिः प्रकाशिते ' श्रीसनातनधर्मालोके ' युक्कयो न केवलं शास्त्रमूला एव, प्रत्युत विज्ञानमूला अपि - इत्ययं विशेष: ' ( पं ० श्रीकेदारनाथशर्मा सारस्वतः, ' संस्कृत - रत्नाकर ' - सम्पादकः देहली ) । ( १ ) ' आप देद - वेदाङ्ग पुराणादि अनेक शास्त्रोंके पारङ्गत विद्वान् हैं । शास्त्रीय - विषयोंपर आपकी लेखनीका पूर्ण अधिकार है । ' सनातन-धर्मालोक ' आपका विशाल ग्रन्थ अनेक - खण्डों में प्रकाशित हो रहा है, जिसमें, भारतीय - संस्कृतिके सब अङ्गोंका शास्त्रीय आधारपर विवेचन

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[ 1 किया गया है... ' ( श्रीकपीन्द्रजी, श्रीभवानीशङ्कर त्रिवेदी, ' मकरन्द'-सम्पादक, देहली ) । ! ( १० ) ' आलोक ' ४ र्थ पुष्प आज समाप्त किया । पढ़कर बहुत ही आनन्द प्राप्त हुआ । पुस्तक अतीव गवेषणापूर्ण है । आपका प्रयत्न प्रशंसनीय है । आपने सनातनधर्म पर बड़ा उपकार किया है ।... ' ( ० श्रीरामचन्द्र शर्मा, रिटायर्ड हैडमास्टर, आर्य हाईस्कूल, अम्बाला सिटी ) | ( ११ ) ' मेरी बिल्डिंग कालेज के एक प्रोफेसर रहते हैं, जिनके चोटी नहीं थी, जनेऊ नहीं था, अपनेको हिन्दु बताने में भी संकोच करते थे, पर ज्योंहीं उन्होंने मुझसे ' श्रीसनातनधर्मालोक ' लेकर पढ़ा और शास्त्रीजीके अकाट्य प्रमाणों द्वारा हिन्दुशब्दकी वैदिकता देखी; तो वह हिन्दु कहने में गौरव अनुभव करने लगे । मूर्तिपूजा-रहस्य पढ़कर ऐसे प्रभावित हुए कि - जो मन्दिरमें जानेसे घृणा करते थे; अब मन्दिर में जाने लगे । यह प्रद्भुत ग्रन्थ लिखकर शास्त्रीजीने हिन्दुजातिके ऊपर महान् उपकार किया है ।.... ' ( भक्त श्रीराम-शरणदास, पिलखुआ ) । एतदादिक अयाचित सम्मतियां बहुत अधिक आई हुई हैं; स्थानाभाववश सब प्रकाशित नहीं की जा सकीं । ' श्रीसनातनधर्मा-लोक ' - प्रन्थमाला स्वयं खरीदकर तथा दूसरोंसे खरीदवाकर सनातनधर्मके प्रचार तथा छठे सुमनके विकाशमें सहयोग दें । निवेदक-नारायण शर्मा ' राजीव ' सारस्वत शास्त्री, हिन्दी - प्रभाकर [ प्रकाशक ]

पृष्ठ 23

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पंचम- पुष्पकी विषय - सूची क्रमाङ्क विषय ( क ) प्रारम्भिक शब्द ( ख ) सम्मतियां एवं सूची १. वैदिक - मङ्गलाचरणम् २. श्रीगणेशका मङ्गलाचरण ( हिन्दुधर्मके प्रसिद्ध आचार ) ३. शिखाकी वैज्ञानिक - रहस्यपूर्णता ४. यज्ञोपवीत- रहस्य... ५. गायत्रीमन्त्रकी महत्ताका रहस्य... ६. कच्छ्बन्ध - रहस्य ( सोलह - संस्कार ) ७. षोडश संस्कार - रहस्य ८. गर्भाधान " ६. पुंसवन 33 १०. सीमन्तोन्नयन " ११. जातकर्म 39 १२. नामकरण " १३. निष्क्रमण १४. अन्नप्राशन १५. चूडाकरण 39 १६. कर्णवेध " १७. उपनयन 19 १८. केशान्त 33 १६. समावर्तन " पृष्ठ: ( तफ ) 9 २-६६ ६७-११६ ११७-१६० १६१-१६१ १६२-१६६ - १३७-२१४ २१४-२२२ २२२-२२६ २२७-२२८ २२८-२३० २३१-२४२ २४२-२४४ २४४-२४५ २४६-२४८ २४८-२१० २२०-२५३ २५३-२१४ २२४-२५१

पृष्ठ 24

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[ द क्रमाङ्क विषय २०. विवाह तथा अग्न्याधान २१. वैवाहिक रीतिविशेष- रहस्य २२. वैवाहिक - विधियोंका रहस्य २३. २३. वानप्रस्थ - रहस्य २४. परिव्रज्या - संन्यास २५. पितृमेध वा अन्त्यकर्म ( प्रातः से रात्रि तक ] ... के आचार २६. हिन्दुधर्मके याचार - विचारोंका वैज्ञानिक- रहस्य २७. ब्राह्ममुहूर्तमें उठनेका विज्ञान २८. प्रातः स्मरणपद्य २१. हस्तदर्शनका विज्ञान ३०. प्रातः भूमि - चन्दन ३१. मलमूत्र त्यागके नियम ३२. लघुशङ्का - आदिके अन्य नियम ३३. मट्टीले हाथोंकी शुद्धि ३४. कहां - कहां लघुशंकादि न करें ( ख ) मलमूत्र - त्यागके बादके नियम ३५. कुल्ला करना, मुँह धोना ३६. दातुन वा मञ्जनका प्रयोग ३७. तैलनियम - विज्ञान ३८. प्रातः स्नान - विज्ञान ३६. तीर्थस्नान - विज्ञान ४०. प्रातः ब्राह्मणका दर्शन अशुभ क्यों? ४१. स्नानादिके बाद व्यायाम ४२. खड़ाऊँ पहननेका विज्ञान ४३. प्रातः पुष्पचयन - विज्ञान ... पृष्ठ २११-२६४ २६४-२७७ २७७-२६८ २१८-२६६ २६६-३०२ ३०२-३१० ) ३११-३१७ ३१७-३२० ३२०-३२२ ३२२-३२४ ३२४-३२७ ३२८-३३२ ३३२-३३३ ३३३-३३४ ३३५-३३६ ३३६ ३३७-३३८ ३३८-३४० ३४०-३४३ ३४४-३४६ ३४७-३४८ ३४८-३४६ ३४६-३५०-३११ ३११

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[ ] क्रमाङ्क विषय ४४. विविध द्यासनोंका विज्ञान ४५. कुशासनका वैदिक - विज्ञान ४६. मृगचर्मासनका वैज्ञानिक- रहस्य ४७. देवकार्य पूर्वाभिमुख ४८. चन्दन - तिलक- विज्ञान ४६. भस्म - तिलकका विज्ञान ५०. मूर्तिपूजा - विज्ञान ५१. चरणामृत - विज्ञान ५२. मार्जन - विज्ञान १३. अभिषेक ५४. आचमन - विज्ञान ५५. शिखाबन्धन - विज्ञान ५६. प्राणायाम वा समाधिका विज्ञान ५७. सूर्यको अर्ध्य १८. जप- पाठ - विज्ञान ५६. मालाकी मणियां १०८ क्यों? ६०. मन्त्रसिद्धिका सूक्ष्म - विज्ञान ६१. परिक्रमाका विज्ञान ६२. वाणीका उपवास - मौन ६३: घण्टानाद तथा शंखध्वनि - विज्ञान ६४. यज्ञका वैज्ञानिक महत्त्व ६५. देवमन्दिर - गमन - विज्ञान ६६. चरणामृतका वैज्ञानिक महत्त्व ६७. श्रीतुलसीपूजन - विज्ञान ... ६८. गङ्गाजल - विशेषता- विज्ञान ६ ६. पीपलपूजन - विज्ञान ६२३-३२० ' ३२७-३६३ ३६३-३६१ ३६५-३६७ ३६७-३७० ३७० ३७२ ३७२-३७२-३७४ ३७४ ३७४-३७८ ३७८ ३७८-३८३ ३८३-३८१ ३८५-३६७ ३३७-४०८ ... ४०६-४१५ ... ४१५-४१७ ४१७-४२२ ४२२-४२६ ... ४३०-४६४ ४६४-४७० ४७०-४७३ ४७३-४८४ ४८४-४६४ ... ४६४-४६६

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[ न ] क्रमाक विषय ७०. वृक्षोंकी चेतनता ७१. पञ्चगव्य - गोमय - गोमूत्र ७२. गोमूत्र में गङ्गाका निवास ७३. गोबर में लक्ष्मीका निवास ७४. पूर्व की ओर भोजनका विज्ञान ७५. हस्तपादादि - शुद्धि - विज्ञान ७६. भोजनमें मौन - विज्ञान ७७. आहारशुद्धिका धर्मसे सम्बन्ध ७८. भोजन से पूर्व ग्रासादि - स्थापन ७६. सिर बन्द करके भोजन न करना ८०. वस्त्र उतार कर वा रेशमी वस्त्रसे भोजन ८१. भोजन- नियम ८२. घृतपक्व भोजन - शुद्धता ८३. बाजारू - अन्न खानेका निषेध ८४. दृष्टि - दोष ८५. शूद्रादिके भोजनका निषेध ८६. ग्रहण में भोजनादि - निषेध ८७. समान वर्णवालोंकी पंक्ति में भोजन ८५. पंक्तिभोजन- समाप्तिमें उठना ८६. भोजनके बादके नियम ६०. उपवास एवं एकादशी व्रत विज्ञान ६१. विशेष तिथियोंमें उपवास ६२. गायका दूध ६३. काली गाय के दूधकी विशेषता १४. छानकर गोदुग्ध पीना ६५. घृतदीपक - विज्ञान • पृष्ट : ४६७-५०७ : १०७-११० : ५१०-११२ ११२-११४ ११४-१११ ११५-५१६ ११६ ५१६-५२१ ५२१-१२४ १२५ ५२७-५२६ ५२५-५२७ १२६-१३३ ५३३-१३५ ५३६-१३६ ५४०-३४१ ... १३-१४० २४१-... २४२-२४४ ... २४५-५६४ २४१-२४२ १६१ ५६२-२६६ ५६६-२६७ २६७-२६८ २६८-२७१

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[ प ] क्रमाङ्क विषय ३६. शयनके समय दिशाका विचार ६७. ब्रह्मचारीका भूमिशयन ३८. शयनमें सिरहाने जल रखना ६६. अस्पृश्यता - विज्ञान १००. परलोक - वाद ( विविध पर्व - विज्ञान ) १०१. संवत्सरका आरम्भ ( कल्प एवं सृष्टिसंवत्सर ) १०२. मास एवं वारोंका नामक्रम - विज्ञान १०३. श्रीरामनवमी ( वेद में अवतारवाद ) १०४. श्रीव्यास - पूर्णिमा १०५. श्रावणी- रक्षाबन्धन १०६. श्रीकृष्ण - जन्माष्टमीत्रत - पूर्णतः वैज्ञानिक १०७. पितृश्राद्धपक्ष ( मृतक श्राद्ध - विज्ञान २-५ ) १०८. विजयदशमीका महत्त्व एवं विजयका रहस्य १०६. दीपावलीका वैज्ञानिक रहस्य ( लक्ष्मीपूजन एवं द्यत ) ११०. गोपाष्टमी - विज्ञान १११. गीताजयन्ती ११२. श्रोगीतोपदेशकी तिथि और गीताको महत्ता ११३. युद्ध में गीता - सुनाना सम्भव ११४. भगवद्गीताकी सर्वप्रियताका कारण ११५. गीताके अन्तिम मन्त्रका रहस्य ११६. गीताका गूढ उद्देश्य वा विषय ११७. श्रीगणेश - चतुर्थी ११८. श्रीमहीधरका ' गणानां त्वा ' मन्त्रका भाज ११६. संकटाशन- गणेशचतुर्थी पृष्ठ २७१-२७४ २७४- ५७७ २७७ ५७८-१६० ५०-५६१ .. ५६२-६१२ ६१३-६२६ ६२६-६१० ६५०-६५७ ६२७-६६१ ... ६६१-६६४ ६६४-६६२ ६६३-६६८ ६६६-७१६ ७१६-७२२ ७२२-७२५ ७२५-७२६ ७२६-७३४ ७३४-७४३ ७४४-७५३ ७२३-७६७ ७६७-७७१ ७७१-८०६ ८०७-८०८

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[ फ ] क्रमाङ्क विषय १२०. गणेशकी राजनीतिक व्याख्या १२१. वसन्त पञ्चमी १२२ शिवरात्रिकी शास्त्रीय महत्ता १२३. शिवरात्रिका मूषक एक सम्प्रदायका स्थापक १२४. होली विज्ञानकी कसौटी पर १२५. ' ओम्'का महत्त्व ( ग ) श्रीसनातनधर्मालोक - ग्रन्थमालाका परिचय पृष्ठ ८०१-८२७ ८२७-८२६ ८३०-८३२ ८३२-८१८ ८५८-८७२ ८०३-६१० ( क -- ख ) A

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पृष्ठ -८२७ -८२६ -८३२ -८१८ -८७२ - ६१० -ख ) 4

पृष्ठ 30

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' श्रीसनातनधर्मालोक ' प्रणेता शास्त्री दीनानाथ श्रीदीनानाथशर्मा शास्त्री सारस्वतः विद्यावागीशः, विद्याभूषणः, विद्यानिधिः प्रिंसिपल सं. हि. महाविद्यालय रामदल, दरीबाकलां , देहली । A