चरक संहिता हिन्दी भाष्य — पृष्ठ 71–80

चरक संहिता हिन्दी भाष्य · Chaukhamba · पृष्ठ 71–80

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प्रसह पशु - पक्षी गण भूमिशय ( बिल में रहनेवाले ) जीव आनूप वर्ग बारिशय वर्ग वारिचर वर्ग जालपशु वर्ग विष्किर वर्ग प्रतुदपक्षि वर्ग ( चोंच या पक्ष से चोट करके खानेवाले पक्षी ) प्रसह आदि मांसवर्गों की परिभाषा प्रसाद मांसवर्ग के गुण बकरे के मांस का गुण भेड़ के मांस का गुण मयूर के मांस का गुण हंस के मांस का गुण मुर्गे के मांस का गुण तितिर के मांस का गुण ( २२ ) ५३१ | चौराई के शाक का गुण सभी सूप्य शाक के गुण " " " ५३२ " सन, कोविदार ( लाल कचनार ), कर्बुदार ( सफेद कचनार ) और सेमर का फूल के शाक का गुण न्यग्रोध ( व ), उदुम्बर ( गुलर ), पीपल, पकड़ी और कमल आदि की पत्तियाँ 39 वत्सादनी ( गुडूची ) के शाक का गुण 27 ५३३ गण्डीर, चित्रक, गजपीपल, विल्वपर्णी, " बिल्व इनके पत्र का शाक के गुण " निशोथ, शतावर, बरियाग, जीवन्ती, दूब, ५३४ पर्वपुष्पी खाली ( मलिहारी ), ५३४ रक्त एरण्ड, तिल, बैन, श्वेत एरण्ड, " बरें इनके शाक का गुण ५३५ " " " गौर तित्तिर के मांस का गुण 39 लवा के मांस का गुण गोह के मांस का गुण सादी के मांस का गुण कबूतर के मांस का गुण सुग्गे के मांस का गुण चटक ( गौरैया ) के मांस का गुण खरहे के मांस का गुण पेण ( मृगविशेष ) के मांस का गुण गोमांस का गुण भैंस के मांस का गुण मछली का गुण रोहू मछली का गुण कछुए के मांस का गुण खड्ग ( बेटा ) के मांस का गुण हंस आदि पक्षियों के अंडों के गुण " 19 " " " " ५३६ 29 33 " " 29 ५३७ ४. शाक वर्ग ( Class of Vegetables ),, मकोय के शाक का गुण राजक्षवक के शाक का गुण पुष ( खग ), एक पकी हुई ककड़ी, अलावू ( कद्दू ) के शाक का गुण " " चिरभी ( फूट ) और एक इन दोनों के कच्चे फल के शाक का गुण ५३८ " ५३ ९ पके हुये कूष्माण्ड ( दबेत कोड़ा ) के शाक का गुण कठगुलर, कदम्ब, नदीभाषक, ऐन्दुक के शाक का गुण उत्पल ( नील कमल ) की पत्ती के शाक का गुण ताल के शाक, खजूर तथा ताड़ केफल की मज्जा के शाक का गुण कुमदनी का कन्द मिसाइ, कमलकन्द छोटा कशेरू, कशेरुक, सिघाड़ा, अङ्गालोय के शाक का गुण " " कोई, नील कमल की फूल, फल के शाक का गुण कमल के बीजों के शाक का गुण मुआतक के शाक का गुण विदारीकन्द के शाक का गुण " " " 7 ५४० " " " अम्लिका के कन्द शाक का गुण 97 " सरसों, पटुवा, पिण्डाल के शाक का गुण 33 " कालशाक का गुण सर्पच्छत्रक को छोड़ कर अन्य सभी " " मटर के शाक का गुण छत्रक जाति के शाक का गुण " " 27 खट्टी चांगेरी के शाक का गुण ५. फल वर्ग ( Class of Fruits ) ५४१ " पोई का शाक का गुण मुनक्का, खर्जूर ( छोहाडा ) 99

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फल्गु ( अंजीर ), फालसा और महुवा आम्रातक ( आमड़ा ) पके हुए ताल तथा नारियल का फल भव्य ( कमरख ) का फल अम्ल परूषक, मुनक्का, बेर, आम्क ( आलू बुग्वारा ), छोटी बेर, बल आलूखारा ( पका ) पारावत ( अमरूद ) मधुर तथा अम्ल गम्भारी का फल टंक ( नासपाती ), कच्चा तथा पक्का कैंथ पके हुए तथा कच्चे बिल्व का फल कच्चा तथा पक्का आम का फल पक्का जामुन का फल ताजा तथा सुखा बैर फिल ( व ) गाक करील, दिम्बी तनं गमन, कटहल, केला, खिरनी, जयली कदम्य सोआ पीला मलिका, " विकडून प्राचीनामलक का फल डी. निम्बुक ( तेंद ) का फल बहेड़ा, अनार ( २३ ) ५४१ ६. हरित वर्ग ( Class of Greens ) ५४५ " " अदरख " जम्बीर " " " " " ५४२ " " कोमल बाल्यावस्था की मूली, खेहसिद्ध मूली का शाक सुरस ( तुलसी ) | अजवायन, अर्जक, सहिजन, शालेय मृष्टक गण्डीर, जलपिप्पली ( जलपनियाँ ) तुम्बरु ( नेपाली धनियाँ, तुम्बल ), शृङ्गवेरिका 39 भूस्तृण ( हरद्वारी तृण ), खराड़ा " " धनियाँ ( हरी धनियाँ ), अजगन्धा ( ममरी ), सुमुख ( तुलसी का भेद ) " गृञ्जनक 27 पलाण्डु ( प्याज ) लशुन ( लहसुन ) ७. मद्य वर्ग ( Class of Wines or fermentative Products ) 33 मद्य के सामान्य गुण मदिरा ( प्रसन्ना ) " " " " " " " ५४६ ५४३ सुरा " 99 मीठा अनार, वृक्षाग्ल जगल ( मद्य का नीचे का गाढ़ा भाग ) " " , " पकी इमली, अम्लन अरिष्ट " मातुलुङ्ग ( बिजौरा नीबू ) का केशर शायर ( शर्करा से बनाया हुआ मच ) " " 79 कचर पक्करस शीधु " " नारही " " ५४७ ५४४ बादाम, अभिषेक, अलोट ( अखरोट ), मुकूलक ( पिस्ता ), निकोचक ( चिल गोजा ), उरुमाण ( खुरमानी ), प्रियाल ( विज ) मानक ( बहुवार - लसोटा ), डेरा, शमी, करअ आम्रातक, दन्तशठ ( जम्बीरी नीबू ), करौंदा, ऐरावतक ( नारङ्गी ), वार्त्ताक, पर्यटी 27 आक्षिकीफल ( आच्छुक वृक्ष का फल ) अश्वत्थ ( पीपल ), गूलर, पाकड़, वट का फल, भिलावा की गुठली, भिलावे के फल का छिलका गूदा अपकरस शीधु गौड ( गुड़ से बना हुआ मद्य ), बहेड़े का मद्य 29 सुरासव, मध्वासव, मैरेय 29 व के फूल से बने हुये मद्य, अंगूर तथा ऊख के रस का आसव मधु ( मधु से बनी हुई मदिरा ) जी की बनी मण्ड सहित सुरा 29 गेहूं से बनी सुरा " " सौवीरक एवं षोदक अम्लकाञ्जिक ( धान्याम्ल आरनाल ) प्रायः सभी नवीनमय विधिपूर्वक सेवित मद्य का गुण ८. जलवर्ग ( Class of Waters ) आकाशीय जल के स्वाभाविक गुण " ५४८ " 29

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भूमि के अनुसार जल का स्वाद ऐन्द्र जल के गुण ऋतु के अनुसार बरसे हुए जल के गुण हेमन्त शिशिर, वसन्त श्रीष्म ऋतु का जल नदियों के जल के गुण ( २४ ) ५४४ ११. कृतान्न वर्ग ( Class of Cooked Foods ) ५५५ 99 पेया ५४ ९ विलेपी मण्ड 39 बरसाती नदियों के जल के गुण ५५० लाजपेया अहितकर जल लाजमण्ड समुद्र के जल का गुण " लाजसत्त " ५५६ ९. गोरस वर्ग ( Class of Milks and its Prodents ) गोदुग्ध का गुण भैंस के दुग्ध का गुण ऊँटनी के दुग्ध का गुण घोड़ी आदि एक सुर वाले पशुओं के दुग्ध भात चावल को भूज कर बनाया गया भान मांसादि के साथ बना हुआ भात कुल्माष ( घुघुरी ) 97 ५५१ सत्तू का गुण 29 " 99 का गुण बकरी के दुग्ध का गुण भेड़ के दुग्ध का गुण 33 हथिनी के दूध का ग " स्त्री के दुग्ध का गुण दधि का गुण मन्दक तथा जात - दधि के गुण मई का गुण मक्खन का गुण घृत का गुण पुराने घृत का गुण 39 चावल ( धान्य ) से बनाया हुआ सत्त जौ का बना पूआ, जौ का मण्ड और वाट्य, पानासंलक्ष्य, विरुतधान्य, शष्कुली, पिण्ड सहित मधुकोट मालपू. पलिका पैष्टिक संस्कारित खाद्य द्रव्य फल मांसादि वेशवार ५५२ | वे सभी भक्ष्य पदार्थ जो गुट, तिल, दुग्ध 37 " " " 39 मधु और चीनी के संयोग से बनाए जाते हैं " " ५५७ 29 99 " " " गेहूं के आटे में घृत, तेल मिलाकर और घृततैल आदि ह में पका कर बनाए गए अनेक प्रकार के भक्ष्य पदार्थ, पृथुक ( चिउरा ) 29 पीयूष, मोरट और अनेक प्रकार के किलाट ५५३ तक्रपिण्ड के गुण १०. इष्ठ वर्ग ( Bazaronne and its Products ) दाँतों से चूसे हुए ईख के रस का गुण सूय अन्न से बने मध्य पदार्थ विमर्दक रसाला ( श्रीखण्ड ) 39 पानकों के गुण " ५५८ " " पौण्ड्रक ईख के गुण गुड़ का गुण क्षुद्र गुड़ के भेद और गुण 29 चीनियों के गुण मधु के मे ५५४ मधु के सामान्य गुण उष्ण मधु का प्रयोग न करने का कारण मधुसेवनजन्य आमाजीर्ण में उष्ण चिकित्सा विरुद्ध क्यों है इस प्रश्न का समाधान ५५५ राग और पाठव के गुण आम और आँवले की चटनियों के गुण शुक्त ( सिरका ) के गुण शिण्टाकी, आसुनादि १२. आहारयोगि वर्ग ( Class of Adjuvants of Foods ) तैल के सामान्य गुण एरण्डतैल " ५५ ९ " " 99 " ५६०

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( २५ ) ५६० | ( ८ ) संस्कारपरीक्षा ( ९ ) मात्रा के अनुसार परीक्षा नीरोग रहने योग्य पुरुष ५६६ 29 ५६७ सरसों का तैल चिरौंजी का तेल 35 तीसी का तैल " 29 अध्याय के विषयों का संग्रह बरें का तेल मज्जा और वसा ११ सौंठ 99 आई तथा शुष्क पिण्पली 29 मरिच हींग सेंधा नमक मंचर नमक विड नमक उद्भिज्ज ( रेह से बनाया ) नमक काला नमक समुद्री नमक यवक्षार कारवी कुञ्चिका ( मँगरैला ), जीरा, अजवायन, धनियाँ, तुम्बुरु विविधाशितपीतीयाध्याय २८ ( १ ) आहार- पाक प्रक्रिया ( Process " " of Digestion & Metabolism ) ५६८ आहार- पाचन का फल " " आहार का परिणाम और काय ५६१ | हितकारी तथा अहितकारी आहार का फल 19 ( २ ) हितकर आहारविषयक शङ्का " ( Doubts Regarding Wholesome Diet ) ५६ ९ ५७० हिन अहित आहारविषयक अधिवेश का प्रश्न " " आत्रेय का समाधान 99 दोष और रोग का सम्बन्ध " आहारयोगि द्रव्यों की रचना का अनिश्चय " पुराने धान्य के गुण ५६२ ( ३ ) रसादिजन्य विकार ( Diseases ) एवं उनकी चिकित्सा ( Trestments ) रसज आदि रोगों की गणना " ५७१ 39 39 निषिद्ध मांस मांसरस निषिद्ध शाक निषिद्धफल अनुपान विभिन्न व्यक्तियों के लिये अनुपान अनुपान सेवन से लाभ भोजन के बाद जल न पीने योग्य व्यक्ति ( ग ) अन्नपानविषयक परीचय ( Pactors to be Examined Regardi ng Diets ) ५६५ अन्नपान का प्रयोग करते समय " दुष्टरसन रोग 99 दुष्टज रोग दुष्टमांस रोग 29 ५६३ ५६४ 29 " " " " ५७२ दुष्टमेदोज रोग दुध अस्थि के रोग विकृत मज्जा के रोग दुष्ट शुक्रज रोग इन्द्रियदोषज रोग खायु आदि दोषज रोग मलगत दोषज रोग अहित अशित आदि के गुण रसजरोगों की चिकित्सा " " 99 19 99 ७७३ " ( १ ) चरपरीक्षा मांस रोगों की चिकित्सा 33 ( २ ) शारीरिक अवयवों के अनुसार परीक्षा ( ३ ) स्वभावतः परीक्षा " " ( ४ ) धातु के अनुसार परीक्षा " ( ५ ) क्रिया के अनुसार परीक्षा मलज रोगों की चिकित्सा " ( ६ ) लिङ्ग के अनुसार परीक्षा ( ७ ) प्रमाण के अनुसार परीक्षा अस्थिगत रोगों की चिकित्सा मज्जा और शुक्रगत रोगों की चिकित्सा इन्द्रियजन्य रोगों की चिकित्सा कोष्ठ से शाखाओं में दोषों के गमन के कारण ” " दोषों का शाखा से कोष्ठ में जाने का कारण ५७४ 99

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स्वस्थ और रोगियों के लिए लाभकर विधि ५७४ विद्वान् और मूर्ख में अन्तर परीक्षक मनुष्यों के गुण ( २६ ) 19 वाक्यशः का विवरण वाक्यार्थः का विवरण ५८५ 29 " " अवयवशः का विवरण 27 19 आयुर्वेदविषयक प्रश्न 19 अज्ञानी व्यक्ति में दोष हितकर आहार के फल अपथ्य त्याग का फल अध्याय- उपसंहार दशप्राणायतनीयाध्याय २६ ( 1 ) दश प्राणायतन ( Ten LifeSpots ) दश प्राणायतन प्राणाभिसर वैद्य का लक्षण प्राणाभिसर ( Saviours of ( Lives ) तथा रोगाभिसर ( Votaries of Diseases ) चिकित्सक दो प्रकार के चिकित्सक प्रागामिसर वैद्य के लिए तय रोगाभिसर वैद्य की परिभाषा रोगाभिसर के लक्षण रोगियों को फँसाने में दृशन्न मृत्यु के अनुचर वैद त्याज्य वैद्य उत्तम वैद्य की प्रशंसा अध्याय- उपसंहार अर्थदशमहामूलीयाध्याय ३० ( १ ) हृदय प्रकरण ( Topic of Hridaya ) हृदय का वर्णन हृदय की प्रधानता ओज का वर्णन धन स्रोत और सिरा की निरुकि हृदय की रक्षा आवश्यक हैं । प्राणवर्धन आदि में एक - एक की प्रधानता ( २ ) आयुर्वेद - विद् के लक्षण ( Signs of Knowers of Science of Life ) आयुर्वेदविद् के लक्षण ५७५ ( १ ) प्रश्न: आयुर्वेद का वेद कौन? 77 ( कं वेदमुपदिशन्ति ), उत्तर " ५७६ 97 " ५७७ ८७ ९ 39 ५८० " " 97 ५८१ ५८१ 91 ( २ ) प्रश्न: आयु क्या है? ( किमायुः ), उत्तर ( ३ ) प्रश्न: आयुर्वेद नाम क्यों? ( कस्मा-दायुर्वेद ) उत्तर " सुख और असुख आयु के लक्षण हित और अहित आयु के लक्षण आयु का मान ( ४ ) प्रश्न: आयुर्वेद का प्रयोजन क्या? ( किमायुर्वेद ), उत्तर ( ५ ) प्रश्न: शाश्वत या अशाश्वत है? ( शाश्वतोनोवा ) उतर ( ६ ) प्रश्न: कितने और कौन इसके अङ्ग है ५८६ ५८७ 95 ५८८ ( कति, कानि चास्याङ्गानि ), उत्तर ५८ ९ ( ७-८ ) प्रश्न: किसको और क्यों इसको पढ़ना चाहिए १ ( कैश्वायमध्येनयः, किमर्थं च ) उत्तर तंत्र आदि ८ प्रश्न तंत्र तंत्रार्थ ५ ९ ० , " " ५ ९ १ ( ३ ) चरकसंहितान्तर्गत अध्याय विवरण ( Enumeration of Chapters of Charaka Samhita ) सूत्र स्थान के अध्यायों का संग्रह लोक स्थान की निरुक्ति ५८२ निदान स्थान के अध्यायों का संग्रह ५८३ विमान स्थान के अध्यायों का संग्रह ५८४ शारीर स्थान के अध्यायों का संग्रह 29 इन्द्रिय स्थान के अध्यायों का संग्रह 27 चिकित्सा स्थान के अध्यायों का संग्रह करस्वान के अध्यायों का संग्रह सिद्धिस्थान के अध्यायों का संग्रह ५८५ अध्यायार्थ प्रश्न का लक्षण ५ ९ २ 33 93 77 ५ ९ ३ 33 " ५ ९ ४ 39

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प्राका लक्षण तंत्रादि शब्दों की निरुक्ति उत्तम, हीन वैद्य की परीक्षा सज्जन वैद्य का अपमान न करें मूर्ख उद्दण्ड वैद्य को परास्त करें वादी को परास्त करने वाला वैद्य ज्वरनिदानाध्याय १ ( २७ ) ५ ९ ४ | मूर्ख वैद्य के बहाने ५ ९ ५ त्याज्य और सेव्य वैद्य शान, अज्ञान में गुण दोष ५ ९ ६ अन्धों की दृष्टि शास्त्र अध्याय - उपसंहार ५ ९ ७ | सूत्र स्थान की निरुक्ति निदानस्थान ( 1 ) सर्वरोग निदान - प्रकरण ( निदान पञ्चक ) निदान का लक्षण रोगों के विविध और विविध प्रकार कफज्वर की सम्प्राप्ति कफज्वर का लक्षण ५ ९९ | द्वन्द्वज और सन्निपान ज्वर के निदान ६०० द्वन्द्वज तथा सन्निपातज्वर के लक्षण ६०१ | आगन्तुज ज्वर ज्वर का प्रकार भेट व्याधि का लक्षण निदानपशक निदान ६०३ पूर्वरूप का लक्षण ६०० ज्वर के सामान्य पूर्वरूप ज्वर की महत्ता रूप का लक्षण " उपशय का लक्षण सम्प्राप्ति का लक्षण ६०७ सम्प्राप्ति के भेद ६०८ संख्या संप्राप्ति " प्राधान्य सम्प्राप्ति विधि सम्प्राप्ति चिकित्सा - सूत्र ६०५ | जीर्ण ज्वर में घृत का महत्त्व आवश्यकतानुसार पुनरुक्त दोष नहीं अध्याय - उपसंहार रक्तपित्तनिदानाध्याय २ रक्तपित्त रोग के कारण रक्तपित्त की निरुक्ति विकल्प सम्प्राप्ति " रक्तपित्त के पूर्वरूप बल और काल सम्प्राप्ति ६० ९ रक्तपित के उपद्रव निदान - पञ्चक का प्रयोजन 29 आठ रोगों का क्रमिकत्व 99 ( २ ) ज्वर प्रकरण रक्तपितका विप्रकष्ट कारण ज्वर का प्राधान्य ६१० रक्तपित्त के दो मार्ग साध्यासाध्यता ज्वर के ८ भेद वातज्वर का निदान ज्वर की सम्प्राप्ति वातज्वर का लक्षण पित्त ज्वर का निदान पिन्चर की सम्प्राप्ति पिशर के लक्षण " " " ६११ " ६१२ कफज्वर का निदान चिकित्सा सूत्र साध्यासाध्यता में कारण अधोग रक्तपित्त की याप्यता रक्तपित्त की असाध्यता असाध्यता का कारण असाध्य का लक्षण अध्याय- उपसंहार गुल्मनिदानाध्याय ३ गुल्म की संख्या सम्प्राप्ति

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( २८ ) " " गुल्मों की विशेषता समझने के लिए अग्निवेश का प्रश्न निदानपञ्चक से गुल्म के भेद वात गुल्म का निदान गुल्म की सम्प्राप्ति पैत्तिक गुल्म के निदान पैत्तिक गुल्म की सम्प्राप्ति और लक्षण कफज गुल्म के निदान कफज गुल्म की सम्प्राप्ति और लक्षण ६२४ ( ९ ) शनैर्मेह | ( १० ) आलालमेह [ Albuminuria ] 29 [ [ " पित्तज प्रमेह का निदान ६२५ | पित्तज प्रमेह की सम्प्राप्ति 33 ६२६ पित्तज प्रमेह के ६ नाम पित्तज प्रमेहों की याप्यता ( १ ) क्षार मेह ६३५ ६३६ 39 " " " 33 ६२७ ( २ ) कालमेह 99 ( ३ ) नील मेह ६२८ ( ४ ) रक्तमेह [ Haematuria ] ६३७ " " ( ५ ) माजिष्ठमेह [ Haemoglobinuria ],, ( ६ ) हारिद्रमेह [ Bilirubinuria ] वात प्रमेह का निदान 99 ६२ ९ वान प्रमेह की सम्प्राप्ति वातज ४ प्रमेहों की असाध्यता में हेतु वातज प्रमेह के ४ भेद 33 39 ६३८ 23 29 त्रिदोष गुल्म रक्तज गुल्म रक्तज गुल्म का निदान और सम्प्राप्ति रक्तज गुल्म के लक्षण गुल्म के पूर्वरूप सभी गुल्मों में वान की प्रधानता साध्यासाध्य विचार और चिकित्सा सूत्र 37 सभी गुल्म में वातघ्न चिकित्सा आवश्यक " अध्यायार्थ संग्रह प्रमेहनिदानाध्याय ४ प्रमेह के भेद ( १ ) निदानदोषदृष्य विमर्श रोगों की उत्पत्ति में निदानादि का योग ( २ ) प्रमेह प्रकरण 27 29 " " ( १ ) वसामेह ६३० ( २ ) मज्जमैह ( ३ ) हस्ति मेह ( ४ ) मधुमेह प्रमेह के पूर्वरूप उपद्रव रोगोत्पत्ति क्रम ६३१ संक्षेप में चिकित्सा सूत्र प्रमेह के निदान ६३२ प्रमेहों में दृष्यों का वर्गीकरण " " दोषत्रय में कफ की प्रधानता ६३३ कफ के दश प्रमेह नाम भेद से दश प्रमेह कफज प्रमेह की साध्यता सभी कुष्ठ त्रिदोषज " " ६३ ९ 25 ६४० " " 22 22 27 ६४१ 99 ६४२ " " प्रमेह रोग में उपमा स्थूलादि व्यक्ति के लिये प्रमेह घातक किन को प्रमेह नहीं होता है अध्याय में आये हुए विषयों की सूची कुष्ठ निदानाध्याय ५ ६३४ कुष्ठ के सात द्रव्य - प्रकृति ( कारण ) 99 ( १ ) उदक मेह [ Diabetes Insipidus ] ६३५ | कुष्ठ के भेद ( २ ) इक्षुवालिकारसमेह [ Alimentary Glycosuria ] ( ३ ) मान्द्रमेह [ Phosphaturia ] ( ४ ) सान्द्रप्रसाद मेह ( ५ ) शुक्कुमेह [ Chyluria ] ( ६ ) शुक्रमेह [ Spermaturia ] ( ७ ) शीतमेह [ Reoal Glycosuria ] ( ८ ) सिकतामेह सप्तकुष्ठों में दोष सम्बन्ध सभी कुष्ठों के संक्षेप में निदान 22 कुष्ठ का पूर्वरूप +9 कपाल कुष्ठ के लक्षण [ [ " उदुम्बर कुष्ठ के लक्षण 13 मण्डल कुष्ठ के लक्षण ऋष्यजिह्व कुष्ठ के लक्षण पुण्डरीक कुष्ठ के लक्षण 33 39 ६४६ ६४३ " " ६४४ " ६४५

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सिध्म कुष्ठ के लक्षण काकणक कुष्ठ के लक्षण साध्यासाध्यता का विचार कुष्ठ में दोषों के आधार पर लक्षण कुष्ठ के उपद्रव ( 2 ) ६४६ आगन्तुज उन्माद के लक्षण 99 देवादि ग्रहों के आवेश का स्थान और समय ६४७ | देवादिग्रहों के आवेश होने में कारण " साध्य ग्रह की चिकित्सा सामान्यतः सभी रोगों में शीघ्र ही चिकित्सा | निज और आगन्तु उन्माद का आपसी का उपदेश अध्याय की सूची शोष के कारण ( १ ) साहस की व्याख्या शोषनिदानाध्याय ६ ६४८ " " ६४ ९ सम्बन्ध ६५ ९ ६६० 29 ६६१ अपने कर्म से ही आगन्तु उन्माद होता है । " " देवादि ग्रह मनुष्य को कष्ट नहीं देते हैं अध्याय की सूची अपस्मारनिदानाध्याय ८ ( १ ) अपस्मार - प्रकरण ६६२ साहसजन्य यक्ष्मा की सम्प्राप्ति साहसजन्य यक्ष्मा के लक्षण ( २ ) संधारण की व्याख्या संधारणजन्य राजयक्ष्मा की सम्प्राप्ति संधारणजन्य राजयक्ष्मा के लक्षण ( ३ ) धातुक्षय यक्ष्मा का कारण " अपस्मार के भेद ६५० अपस्मार की सम्प्राप्ति 29 अपस्मार का स्वरूप " ६५१ अपस्मार का पूर्वरूप वातज अपस्मार के लक्षण ६६३ 39 ६६४ " सान्निपातिक अपस्मार के लक्षण चिकित्सा सूच निदानस्थान में आये हुए रोगों की उत्पत्ति-क्रम क्षयजन्य शोष की सम्प्राप्ति 29 पित्तज अपस्मार के लक्षण आहार का परम सार शुक्र ६५२ कफज अपस्मार के लक्षण ( ४ ) जन्य शोष के कारण ६५३ राजयक्ष्मा की निरुक्ति ३५४ राजयक्ष्मा का पूर्वरूप यक्ष्मा के एकादश रूप " ६५५ यक्ष्मा की साध्यासाध्यता उन्माद के भेद उन्माद - सम्प्राप्ति उन्माद का स्वरूप पूर्वरूप आदर्श चिकित्सा उन्मादनिदानाध्याय ७ वातज उन्माद के सामान्य लक्षण वित्तज उन्माद के लक्षण कफज उन्माद के लक्षण त्रिदोषज उन्माद के लक्षण अपस्मार का उपसंहार रोगज्ञान का फल " " ६५५ 99 " 99 ६६६ ६५६ ( २ ) निदान विषयक सामान्य सिद्धान्त निदानार्थंकर रोग ६५७ व्यावि संकर हेतु तथा व्यादि में संवन्ध ६५८ व्याधि और चिकित्सा का सम्बन्ध संक्षेप में दोषज उन्मादों का चिकित्सा सूत्र ” आगन्तुज उन्माद आगन्तुज उन्माद के पूर्वरूप साध्यासाध्यता दोपावस्था का महत्त्व लक्षण और व्याधि के सम्बन्ध ६५ ९ विकार और प्रकृति का महत्व " " भूतज उन्माद होने की प्रक्रिया 97 " ६६७ आठवें अध्याय तथा निदान स्थान का उपसंहार " " " " " ६६८ ६६ ९ " ६७०

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रसविमानाध्याय १ ( ३० ) विमानस्थान ( १ ) रस और दोष के पारस्परिक सम्बन्ध विमानस्थान के उपदेश का प्रयोजन ६७१ रसों के भेद 1 दोषों के भेद रसों के गुण दोषों की वृद्धि एव शमन में रसों की प्रकृतिसमसमवेत सिद्धान्त कारणता ६७२ 23 11 ( ३ ) मात्रापूर्वक आहार से लाभ ( ४ ) आहार जीर्ण होने पर भोजन करने से लाभ ( ५ ) अविरुद्ध वीर्य वाले आहार से लाभ ( ६ ) इष्ट देश में आहार से लाभ ( ७ ) अतिद्रुत भोजन से हानि ( ८ ) अनिविलम्बित आहार से हानि ( ९ ) तन्मना आहार लेने से लाभ ६८४ 27 " " ६८५ 33 " " " ६७३ ( १० ) आत्मशक्ति के अनुसार आहार लेने 23 विकृतिविषमसमवायसिद्धान्त " " उपसंहार ६७५ चतुर्विध प्रभावों का उपदेश ६७६ द्रव्यप्रभाव तैलप्रभाव 19 17 से लाभ रसादि ज्ञान आवश्यक अध्यायगत विषयों का उपसंहार त्रिविधकुक्षीयविमानाध्याय २ ( १ ) त्रिविध कुक्षिविभाग कुक्षि के तीन विभाग आहारविधि विशेष मात्रा अमात्रा का विचार मात्रापूर्वक आहार के लक्षण घृतप्रभाव 29 मधुप्रभाव अष्ट 29 उपसंहार आवश्यक ,, अत्यधिक सेवन में वर्जित द्रव्य ६७७ ( १ ) पिप्पली ( २ ) क्षार " " ६७८ ( ३ ) लवण क्रमशः त्याग से लाभ " " ६७ ९ सात्म्य के लक्षण 23 ( २ ) अष्ट आहारविधिविशेषायतनानि अष्टविध आहार विधि - विशेष आयतन ६८० ( १ ) प्रकृति [ Natural Qualities ] ( २ ) करण [ Preparation ] 22 99 ( ३ ) संयोग Combination ] ६८१ ( ४ ) राशि [ Quantum ] ( ५ ) देश [ Habitat ] आयतन भी हीन मात्रापूर्वक आहार से हानि अनिमात्रा में आहार से हानि आमोत्पत्ति में अन्य कारण मात्रा से भी खाये हुये पथ्य के न पचने में कारण " " ६८६ " ६८७ 27 39 ६८८ ( २ ) विसूचिका - अलसक ( दो आमदोष ) दो तरह के आम दोष विसूचिका का रूप अलसक तथा दण्डालसक के रूप आम विष की भयंकरता " " ६८२ अलसक की चिकित्सा विसूचिका की चिकित्सा 29 33 29 99 ६८ ९ 33 11 ( ६ ) काल [ Time ] ( ७ ) उपयोग संस्था [ Rules of use ] ( ८ ) उपयोक्ता [ User ] उपर्युक्त अष्टविधि विशेष आयतन से लाभ आहार विधि विधान आनदोष में आहार की व्यवस्था " आम दोष की चिकित्सा 21 आमदोष से मुक्त व्यक्ति की चिकित्सा ६२० 23 ६ ९ १ जनपदोद्ध्वंसनीय विमानाध्याय ३ " " " ६८३ आमाशय वर्णन " " ( २ ) स्निग्ध आहार से लाभ " विषय - प्रवेश ( १ ) उष्ण आहार से लाभ

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( ३१ ) ( १ ) जनपदोद्ध्वंस ( Epidemic ) प्रकरण: अध्याय- उपसंहार जनपदध्वंस का पूर्वरूप ६ ९ २ जनपदोद्ध्वंस [ Epidemic ] के कारण के विषय में अग्निवेश का प्रश्न " उपर्युक्त - विषयक भगवान् आत्रेय का उत्तर 29 ( १ ) विकृत वायु के लक्षण } ७०४ त्रिविधरोगविशेषविज्ञानीयाध्याय ४ त्रिविध रोग विज्ञान ( १ ) आप्तोपदेश ( २ ) प्रत्यक्ष का लक्षण ६ ९ ३ " ७०५ 27 ( २ ) विकृत जल के लक्षण ( ३ ) विकृत देश के लक्षण ( ४ ) विकृत काल के लक्षण जनपदोदध्वंस के कारण जनपदध्वंस की सामान्य चिकित्सा देश आदि की सकारण प्रधानता प्रधानता का प्रयोजन जनपदोदध्वंस की सामान्य चिकित्सा वातादि के विकृत होने में कारण वातादि की विकृति का मूल कारण अधर्म युद्ध मृत्यु भी अधर्ममूलक है भूतादि आक्रमण भी अधर्ममूलक है शाप भी अधर्ममूलक है 23 " " ६ ९ ४ ( ३ ) अनुमान का लक्षण निदान में प्रमाणत्रय की आवश्यकता प्रमाण दो या तीन ( १ ) आप्तोपदेश से शेय ( २ ) प्रत्यक्ष के द्वारा परीक्षा " श्रोत्र द्वारा परीक्ष्य विषय 33 चक्षु द्वारा परीक्ष्य विषय 33 ६ ९ ५ 22 ७०६ " ७०७ " रसना द्वारा परीक्ष्य विषय ( अनुमान द्वारा परीक्षा ) " " " घ्राण द्वारा परीक्षा स्पर्श द्वारा परीक्षा " ६ ९ ६ ( ३ ) अनुमान द्वारा परीक्षा ७०८ आदियुग में अधर्ममूलक लोभ की उत्पत्ति त्रेता युगों में क्रमशः धर्म का हास ६ ९ ७ युगानुसार धर्म और आयु में क्रमशः हास " ( २ ) नियत तथा अनियत आयु प्रकरण आयु - विषयक प्रश्न ६ ९ ८ निश्चित और अनिश्चित आयु में युक्ति दैव तथा पुरुषकार की परिभाषा त्रिविध कर्म कर्मानुसार आयु कर्म फल के नियत और अनियत होने में युक्ति काल और अकाल मृत्यु परीक्षा का फल स्रोत विमानाध्याय ५ स्रोतों का प्रकरण स्रोतों का समुदाय ही पुरुष हैं क्या? 93 ७० ९ 27 कुछ आचार्य स्रोतों के भेद 27 " " ६ ९९ " 2 ७०० काल और अकाल मृत्यु होने में युक्ति ७०१ उष्ण जल हितकर क्यों? उष्ण जल के कार्य निदान विपरीत औषध का निर्देश अपतर्पण का भेद " ७०२ 33 " 3 लहून, पाचन और दोपावसेचन से लाभ ७०३ 22 " " प्राणवहस्रोतस की दृष्टि के लक्षण उदकवह स्रोतस् की दृष्टि के लक्षण अन्नवह स्रोतस् की दृष्टि के लक्षण रसादि सप्त धातुवह स्रोतों की दुष्टि के लक्षण मूत्रवहस्रोतस की दृष्टि के लक्षण पुरीषवहस्रोतस की दृष्टि के लक्षण स्वेद्रवहस्रोतस की दृष्टि के लक्षण स्रोतों के पर्याय प्राणवहस्रोतस की दृष्टि के हेतु रसवहस्रोतस की दुष्टि के हेतु अन्नवह स्रोतस् की दृष्टि के हेतु रसवहस्रोतस की दुष्टि के हेतु ७१० ७११ ७१२ 22 " ७१३ 33 27 अचिकित्स्य पुरुष वैद्य का कर्त्तव्य 99 रक्तवह स्रोतस् की दुष्टि के हेतु " मांसवहस्रोतस की दुष्टि के हेतु " "