चरक संहिता हिन्दी भाष्य — पृष्ठ 81–90
चरक संहिता हिन्दी भाष्य · Chaukhamba · पृष्ठ 81–90
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मेदोवह स्रोतस की दुष्टि के हेतु अस्थिवह स्त्रोत की दृष्टि के हेतु मज्जवहस्रोतस की दृष्टि के हेतु शुक्रवाही स्रोतस की दृष्टि के हेतु मूत्रवहस्रोतस की दुष्टि के हेतु वह स्रोत की दुष्टि के हेतु स्वेद वह स्रोतस की दुष्टि के हेतु स्रोतों की दृष्टि के सामान्य हेतु स्रोतों का स्वरूप स्रोतों की दृष्टि के लक्षण चिकित्सा सूत्र रस आदि स्रोतों की चिकित्सा ( ३२ ) ७१३ | गुरुव्याधित और लघुव्याधित पुरुष सम्पूर्ण रूप से जानने योग्य विषयों का 93 विज्ञान " " 23 ७१४ 99 " " " मूर्ख और विद्वान वैद्य में अन्तर ७२४ 39 ७२५ ( २ ) बीस कृमिरोग प्रकरण ( Twenty Helminthic Diseases ) ( २० ) कृमिरोग सहज और वैकारिक कृमि बाह्य और आभ्यन्तर कृमि 33 33 रक्तज कृमि के निदान मज क्रिमियों के निदान " " 29 ७२६ ७२७ 27 पुरीषज क्रिमियों के निदान 27 23 22 संक्षेप में कृमिरोग की चिकित्सा ७२८ ७१५ ( १ ) अपकर्षण " ( २ ) प्रकृतिविधात दूषित मूत्रवहस्रोतस की चिकित्सा अध्याय उपसंहार रोगानीकविमानाध्याय ६ ( १ ) रोगभेद - प्रकरण ( Classification of Diseases ) रोग समुदाय के भेद विभिन्न वर्गीकरण [ Classification ] के ( २ ) दोष - विमर्श आधार मानस और शारीर दोष दोषत्रय से सभी रोग दोषों के अनुवन्ध्य और अनुबन्ध भेट ( ३ ) अग्नि तथा प्रकृति - प्रकरण चतुर्विध अनि प्रकृति विचार एकदोन प्रकृति वाले रोगी है । ( ३ ) निदान परिवर्जन 27 ७१६ ( १ ) अपकर्षण विधि का विस्तृत विवेचन " " ( २ ) प्रकृति विधान का विस्तृत विवेचन ( ३ ) निदानपरिवर्जन ७३४ ७१७ उपसंहार अध्याय की सूची ७१८ 19 ७१ ९ वातप्रधान पुरुष के रोग और चिकित्सा पित्तप्रधान पुरुष के रोग और चिकित्सा उस कुपित पित्त को जीतने के लिए ये उपाय होते हैं कफप्रधान पुरुष के रोग और चिकित्सा राजवैद्य के गुण अध्याय उपसंहार व्याधितरूपीयविमानाध्याय ७ ( १ ) गुरु तथा लघु व्याधित पुरुष ( Patients of Severe and Mild Diseases ) ७२४ " ७३५ रोगभिषग्जितीयविमानाध्याय म ( क ) शास्त्र परीक्षा ( Selestion_of the Branch of Medical Science ) शास्त्र परीक्षा ७२० | ( ख ) आचार्य परीक्षा Search for ७२१ 29 ७२२ " " " ७२३ " " Professor ) ( ग ) शास्त्र ज्ञान के साधन ( Means ७३६ of Learning for Medical Science ) ज्ञान के उपाय ७३७ कुशल वैद्य बनने के उपाप ( १ ) अध्ययनविधि ( Method of Study ) ( १ ) अध्ययन विधि ( २ ) अध्यापन विधि Method of Teaching ) ( २ ) अध्ययनार्थ शिष्य परीक्षा [ Medical Examination ] " 99 ७३८ " "
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( ३३ ) अध्यापन का प्रारम्भ [ Beginning of ( २० ) ऐतिह्य Session ] शिष्य कर्तव्य आयुर्वेद असीम ७३ ९ ७४० ( २१ ) उपमान ( २२ ) संशय ७४२ ( २३ ) प्रयोजन ( ३ ) तद्विद्यसंभाषापरिषद् ( Seminars & Symposia of Experts ) ( २४ ) सव्यभिचार ( २५ ) जिज्ञासा संभाषाविधि ७४३ ( २६ ) व्यवसाय संभाषा के दो भेद ७४४ ( २७ ) अर्थप्राप्ति ( १ ) सन्धाय ( अनुलोम ) संभाषा ( Friendly Discussion ) संधाय संभाषा की विधि ( २ ) विगृह्य ( प्रतिलोम ) संभाषा ( Hostile Discussion ) विगृह्य संभाषा की विधि विपक्षी के भेद ( १ ) परिषद् के भेद ( Types of Assembly ) परिषद् दो प्रकार की होती है । सभासदों को पहले से ही अनुकूल रखे वादमर्यादा का लक्षण चौवालीस वाद मार्गपद ( १ ) वाद ( २ ) द्रव्य ( ३ ) गुण ( ४ ) कर्म " ७४५ " ७५६ ( २८ ) सम्भव ( २ ९ ) अनुयोज्य ( ३० ) अननुयोज्य ( ३१ ) अनुयोग ( ३२ ) प्रत्यनुयोग ( ३३ ) वाक्यदोष ( ३४ ) वाक्य प्रशंसा ( ३५ ) छल ( ३६ ) अहेतु ( ३७ ) अतीत काल ७४ ९ " ७५० 39 39 ७५१ ( ३८ ) उपालम्भ ( ३ ९ ) परिहार ( ४० ) प्रतिज्ञा - हानि ( ४१ ) अभ्यनुज्ञा ( ४२ ) हेत्वन्तर ( ४३ ) अर्थान्तर ( ४४ ) निग्रहस्थान बाद के स्थल ( घ ) दशविधपरीच्य विषय ( Ten. Points for Investigation ) दशपरीक्ष्य भाव ( १ ) कारण ( २ ) करण ( ३ ) कार्ययोनि ( ४ ) कार्य ( ५ ) कार्यफल " " ( ५ ) सामान्य ( ६ ) विशेष ( ७ ) समवाय 22 " ( ८ ) प्रतिशा ( ९ ) स्थापना ( १० ) प्रतिष्ठापना ( ११ ) हेतु ( १२ ) दृष्टान्त 22 ( १३ ) उपनय ( १४ ) निगमन ( १५ ) उत्तर ( १६ ) सिद्धान्त +3 ७५२ ( ६ ) अनुबन्ध ( ७ ) देश ( ८ ) काल 99 ( १७ ) शब्द ( १८ ) प्रत्यक्ष ७५३ ( ९ ) प्रवृत्ति 29 ( १० ) उपाय ( १ ९ ) अनुमान ( ग ) परीक्षा के बाद ही कार्य का प्रारम्भ "
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वमनादिविषयक ९ प्रश्न परीक्षा के भेद ( ङ ) दशविध परीक्षा का चिकित्सा ( ३४ ) ७६६ ७६७ ( ५ ) अस्थिसार पुरुष के लक्षण ( ६ ) मज्जसार पुरुर के लक्षण ७७६ शास्त्र में प्रयोग ( Applied Aspect of Ten - Points Investigation in Medicine ) ( ७ ) शुक्रसार पुरुष के लक्ष ( ८ ) सत्सार पुरुष के लक्षण सारपरीक्षा का परिणाम सारपरीक्षा का प्रयोजन ( १ ) कारण ( चिकित्सक के गुण ) परीक्षा ७६८ | ( ४ ) संहनन परीक्षा ( Investigation ( २ ) करण ( भेपज ) परीक्षा ( ३ ) कार्ययोनि की परीक्षा ( ४ ) कार्य की परीक्षा ( ५ ) कार्यफल परीक्षा ( ६ ) अनुबंध परीक्षा ( ७ ) देश परीक्षा ' ( क ) भूमिपरीक्षा ( च ) दशविध आतुरपरीक्षा ( Ten Investigations Regarding Patients ) ७७१ ( ख ) रोगी शरीर परीक्षा रोगी के विशेष रूप से बल प्रमाण जानने के लिए आतुर - परीक्षाओं के नाम ( १ ) प्रकृति परीक्षा ( Investigation for Constitution ) ७७२ प्रकृति परीक्षा ( १ ) श्लेष्म प्रकृति के लक्षण ( २ ) पित्तप्रकृति के लक्षण ( ३ ) वातप्रकृति के लक्षण ( ४,५,६ ) द्वन्द्वज प्रकृति,, ( ७ ) समधातु प्रकृति 77 ( २ ): विकृति परीक्षा ( Pathological Investigation ) ७७५ विकृति परीक्षा ( ३ ) सारपरीक्षा ( Investigation for the Strength of the Syst ems ) सार परीक्षा ( १ ) त्वक्सार पुरुष के लक्षण ( २ ) रक्तमार पुरुष के लक्षण ( ३ ) मांससार पुरुष के लक्षण ( ४ ) मेदसार पुरुष के लक्षण ७६ ९ for the Compactness of the Body ) " " 27 ७७० संहनन परीक्षा " 23 27 " 2 " " ( ५ ) प्रमाण परीक्षा ( Investigation ७७७ 27 " ७७८ for the Proportionate Relation of the Different Organs ) ७७ ९ प्रमाण द्वारा आयुकी परीक्षा ( ६ ) साम्य परीक्षा ( Investigation for the Homologation ) सात्म्य द्वारा परीक्षा ( ७ ) सच परीक्षा ( Investigation for Mental State ) सत्व द्वारा परीक्षा ( ८ ) आहार परीक्षा ( Investigation for Intake and Digestive Capacity ) आहार शक्ति द्वारा परीक्षा विवि ७७३ ( ९ ) व्यायामपरीक्षा ( Investigation ७७४ 33 " for the Body Power ) 37 ?? ७८० " ७८१ " " व्यायाम शक्ति के द्वारा रोग की परीक्षा विधि, ( १० ) वयः परीक्षा ( Investigation for the Age ) वय द्वारा परीक्षा " प्रकृत्यादि दशविध परीक्षा का महत्त्व वयः परीक्षा ( ८ ) काल परीक्षा नित्यग काल ( ऋतु ) और संशोधन औषधि के काल तथा अकाल " " " ( ९ ) प्रवृत्ति ७७६ ( १० ) उपाय दशविध परीक्षा का उपसंहार " " परीक्षा का प्रयोजन ७८२ 29 99 " ७८३ 39 ७८५ 37 " " " " A
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( ३५ ) ( ४ ) कटुस्कन्ध कटुकास्कन्ध के द्रव्य ७ ९ १ ( ५ ) फिस्कन्ध तितस्कन्ध के द्रव्य ७ ९ २ ( ६ ) कपायस्कन्ध 22 कषाय स्कन्ध के द्रव्य " " ७८७ उपसंहार ७ ९ ३ ( छ ) पञ्चकर्मार्थ द्रव्यसंग्रह ( Drugs for Panch Karma Therapy ) 5 वमनादि प्रकरण प्रवृत्ति तथा निवृत्ति के संयोग में कर्त्तव्य ( १ ) वमनद्रव्यकल्प संग्रह वमनार्थ द्रव्य ( २ ) विरेचनद्रव्यकल्प संग्रह विरेचनद्रव्य ( ३ ) आस्थापनद्रव्यकल्प संग्रह आस्थापनार्थ द्रव्य ७८८ मधुरादिः स्कन्ध 23 ( १ ) मधुरस्कन्ध मधुरस्कन्ध के द्रव्य ७८ ९ ( २ ) अम्लस्कन्ध अम्ल स्कन्ध के द्रव्य शिरोविरेचन द्रन्य ७ ९ ० ( ३ ) लवणस्कन्ध षट् स्कन्ध और दोष - प्रकोप घट् स्कन्ध में यथालाभ ग्रहण करें 1 ) अनुवासनद्रव्यकल्प संग्रह अनुवासनार्थ द्रव्य " " ७ ९ ४ ( ५ ) शिरोविरेचनद्रव्यकल्प संग्रह ( ज ) उपसंहार ( Conclusions ) ७ ९ ५ लवण स्कन्ध के द्रव्य " अध्याय की सूची ७ ९ ७ शारीरस्थान कतिधा पुरुषीयशारीराध्याय १ पुरुषविषयक अग्निवेश के प्रश्न विषय प्रवेश पुनर्वसु आत्रेय के उत्तर ( १ ) प्रश्न: धातु की दृष्टि से पुरुष के भेद ( कतिया पुरुषो धीमन् वस्तुभेदेन भिद्यते? ), इसका उत्तर-७ ९९ 39 ८०१ मन के लक्षण मन के गुण मन के विषय मन के कर्म धानोरपति क्रम इन्द्रिय - वर्णन प्रारम्भ ( पचानेन्द्रिय ) पञ्चकर्मेन्द्रिय पचमहाभूत स्वाभाविक गुण बनाने के बाद महाभूतों में राशिपुरुष ही सबका आधार ( २ ) प्रश्न: पुरुष को कारण क्यों माना जाता है? ( पुरुषः कारणं कस्मात्? ), इसका उत्तर-८१० ८११ आत्मा की कारणता में कुम्भकारके दृष्टान्त निरात्मबादी बौद्ध मत का विवेचन निरात्मवादी मत का खण्डन ८१२ " आत्मा के कारणत्व में आत्रेय का मत ८१३ ८०३ ८०४ ८०५ " " ८०६ आत्मा को कारण मानने में हेतु ( ३ ) प्रश्न पुरुष की उत्पत्ति किससे? ( प्रभवः पुरुषस्य कः? ), उत्तर-इसका ( ४ ) प्रश्न: आत्मा ज्ञानी है या अज्ञानी 39 ८०७ ( किमज्ञो ज्ञः सः? ), इसका उत्तर करण सहकृत आत्मा ही कार्यकारी ८१४ 29 " " कोई अभाव जहेतुक नहीं 39 ( ५ ) प्रश्न: पुरुष नित्य है या अनित्य ( स नित्यः किं किमनिय निद शितः? ), इसका उत्तर— " ८०८ ८० ९ आत्मा में नित्यत्व की कल्पना ८१५ " " भूतावर गुण प्रवेश महाभूतों के बुद्धि - नामकरण बुद्धि के नाना मेव 99 बुद्धि की उत्पत्ति संयोग से " राशिपुरुष के २४ तत्त्व ८१० राशिपुरुष की परम्परा अनन्त है । प्रश्न ( ६ ) प्रकृति और ( ७ ) विकृति किसे कहते है? ( प्रकृतिः का विकाराः के? ), इसका उत्तर-८१६
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क्षेत्र का स्वरूप सृष्टि का स प्रलय का निरूपण ( ८ ) प्रश्नः अव्यक्त पुरुष के क्या लक्षण हैं? ( किं लिङ्गं पुरुषस्य च १ ) इसका उत्तर-पञ्चत्व की परिभाषा ( ९ ) प्रश्न: आत्मा निष्क्रिय होते हुए भी सक्रिय कैसे? ( निष्क्रियस्य क्रिया तस्य भगवन् विद्यते कथम् १ ), इसका उत्तर-( ३६ ) ८१६ " 9 ८१७ ८१८ " " " ( १० ) प्रश्न: स्वतन्त्र आत्मा इच्छा के विपरीत परतंत्र ( अनिष्ट ) योनि में क्यों जन्म लेती है ( स्वतन्त्रश्चेदनिष्टासु कथं योनिषु जायते १ ) इसका उत्तर ८१ ९ ( ११ ) प्रश्न: वशी आत्मा दुःखकर भावों से बलात् क्यों आक्रामित होती है? ( वशी यचसुखैः कस्माद्भावेराक्रम्यते बलात्? ), इसका उत्तर- " " ( १२ ) प्रश्न: सर्वगत आत्मा सम्पूर्ण वेदनाओं का अनुभव क्यों नहीं कर पाती है? ( सर्वाः सर्वगतत्वाच्च वेदनाः किं न वेति सः १ ), इसका उत्तर- " " ( १३ ) प्रश्न: पर्वतादि विभु आत्मा के देखने में बाधक क्यों न पश्यति विभुः कस्माच्छे लकुच्यतिरस्कृतम्? ), इसका उत्तर- ८२० ( १४ ) प्रश्न: आत्मा ( क्षेत्रज्ञ ) और शरीर ( क्षेत्र ) इसमें पहले उत्पत्ति किसकी? ( क्षेत्रत्रः क्षेत्रमथवा कि पूर्व मिति संशयः १ ) इसका उत्तर- 29 ( १५ ) प्रश्न: आत्मा साक्षी किसका? ( साक्षिभूतश्च कस्यायं कर्त्ता न्यो न विद्यते? ), इसका उत्तर ८२ ९ ( १६ ) प्रश्न निर्विकार आत्मा को सुख-दुःख का अनुभव कैसे? ( स्यात्कथं चाविकारस्य विशेषो वेदनाकृतः १ ), इसका उत्तर-( १७, १८, १ ९ ) प्रश्न रोगी की त्रिकाल-वेदना में किसकी चिकित्सा होती है? ( अथ चार्तस्य भगवंस्तसृणां कां चिकित्सति १ ) इसका उत्तर-अतीत काल की वेदनाओं की चिकित्सा करने में युक्ति भविष्यद् रोग की चिकित्सा में युक्ति तथा उदाहरण वर्तमान काल के रोगों की चिकित्सा में युक्ति " " उपधा ही दुःख में कारण ( २० ) प्रश्न: वेदनाओं के कारण क्या है? ( कारण वेदनानां किम् १ ), इसका उत्तर--बुद्धिविभ्रंश का लक्षण धृतिभ्रंश का लक्षण स्मृतिभ्रंश का लक्षम प्रज्ञापराध की परिभाषा प्रज्ञापराध का विस्तृत वर्णन प्रज्ञापराध का स्वरूप काल- सम्प्राप्ति का वर्णन भोग से ही कर्म का क्षय असारम्येन्द्रियार्थ संयोग का वर्णन शब्द के मिथ्यायोग स्पर्श के अयोग और अतियोग स्पर्श के मिथ्यायोग रूप है अनियोग और अयोग रूप के मिथ्यायोग रस के अतियोग, अयोग और मिथ्यायोग गन्ध के अयोग और अनियोग गन्ध के मिष्यायोग असात्म्य का स्वरूप असात्म्येन्द्रियार्थ संयोग से होने वाले रोग दुःखरूप वेदना के हेतु समयोगादिसुख - दुख का कारण सुख और दुःख का कारण तृष्णा हो सुख और दुःख का हेतु ( २१ ) प्रश्न: वेदनाओं के अविष्ठान क्या ८२१ है? ( वेदनानां किमधिष्ठानमुच्यते? ), " " इसका उत्तर ८२२ ८२३ " ८२४ " ८२५ " " " " ८२७ " " 29 ८२८ " " 17 " 9 29 " " ८२ ९ ८३०
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( ३७ ) ( २२ ) प्रश्न: सर्ववेदना की निवृत्ति ( समाप्ति ) कहां? ( क चेता बेदनाः सर्वा निवृत्तिं यान्त्यशेषतः ), उत्तर ८३० योग का लक्षण योगियों की स्वाभाविक शक्ति मोक्ष की परिभाषा मोक्ष के साधन दुःखाभाव में स्मृति कारण स्मृति के कारण मोक्षप्राप्ति का साधन सत्याबुद्धि का परिणम अशेष दुःख की निवृत्ति ( २३ ) प्रश्न: प्रशान्त भूतात्मा के क्या लिन हैं ( एकः प्रशान्तो भूतात्मा कैलिङ्गैरुपलभ्यते? ), इसका उत्तर ८३५ अतुल्यगोत्रीयशारीराध्याय २ सन्तानोत्पत्ति - विषयक प्रश्न ( १ ) प्रश्न शुक्रविषयक प्रश्न ( अनुस्यनो त्रस्येति ) का उत्तर गर्भ विषयक ५ प्रश्न ( १ - २३ ) प्रश्न: सम्पूर्ण देह, समय पर, सुखपूर्वक कैसे होता है ( सम्पूर्णदेहः, समये, सुखं च कथं जायते ) इसका उत्तर ( ४ ) प्रश्न: बन्ध्या न होती हुई भी स्त्री देर से गर्भ क्यों धारण करती है? ( सप्रजापि चिराद् गर्भ कथं विन्दति ), इसका उत्तर 27 ( ५ ) प्रश्न गर्भ होकर कैसे नष्ट हो जाना है ( भूत्वा केन गर्भः नश्यति ), इसका उत्तर कन्या या पुत्रोत्पत्ति विषयक ८ प्रश्न III ( १-२-२-४-५-६ ) प्रश्न कन्या, पुत्र, साथ साथ, अलग - अलग, दो पुत्र, दो पुत्र, बहुत सन्तान कैसे होती हैं ( कस्मात् कन्यां सुतं सहितौ पृथग्वा सुतौ सुनै वा तस्यान् बहून् वा प्रसूते इसका उत्तर-" " ८३१ " " ८३२ II " " ८३४ " " ८३७ 29 ८३८ ८३ ९ ८४० ( ७ ) प्रश्न देर से संतान क्यों होती है । ( कस्मात् सुचिरेण गर्भ प्रसूते ) इसका उत्तर ८४१ ( ८ ) प्रश्न दो बच्चे में एक बच्चा गर्मा-शय में ही क्यों पुष्ट और दूसरा दुर्बल होता है? ( कोऽभिवृद्धिं कस्मादभ्यु-पैति ) इसका उत्तर- ८४१ आठ प्रकार के नपुंसक होने के विषय में ८ प्रश्न ( १ ) प्रश्न: -- द्विरेता क्यों होता है ( कस्माद् द्विरेताः ) इसका उत्तर III ( २ ) प्रश्न पवनेन्द्रिय क्यों होता है ( कस्मात् पवनेन्द्रियो वा ) इसका उत्तर " ( ३, ४, ५ ) प्रश्न: संस्कारवाही, नर और नारीपण्ड क्यों होते है ( संस्कारवाही नरनारिषण्डौ ) इसका उत्तर ( ६, ७ ) प्रश्न वक्की और ईर्ष्यारति सन्तान कैसे उत्पन्न होती है ( वक्री तथेर्ष्याभिरतिः ) का उत्तर ८४३ " " ( ८ ) प्रश्नः - वातिक षण्ढ क्यों होता है । ( वातिकषण्डको वा ), इसका उत्तर 29 प्रश्न: गर्भ धारण एवं उसके लिङ्ग विषयक ५ प्रश्न -( १ ) प्रश्न: सद्यः गृहीत गर्भिणी का क्या लक्षण है ( ' सयोऽनुगतस्य गर्भस्य किं लक्षणम् ) ' इसका उत्तर " " ( २, ३, ४ ) प्रश्न: खां कुक्षि में स्त्री, पुरुष और नपुंसक के क्या लक्षण है ( स्त्रीपुंनपुंसामुदर स्थितानां किं क्ष-णम् ) इसका उत्तर ८४४ ( ५ ) प्रश्न: सन्तान के सदृश होने में क्या कारण है ( वेन अपत्यं सरूपता यानि किं कारणमिष्यते ) इसका उत्तर " " ( १ ) प्रश्न: विकृत, हीन, अधिक और विकल इन्द्रिय वाली सन्ताने स्त्री केसे उत्पन्न करती है ( कस्मात्प्रजां स्त्री विकृतानित्यादि ) का उत्तर II ( २ ) प्रश्न: एक देह से आत्मा दूसरे शरीर में कैसे जाती है ( देहात् कथं देहमुपैति ) इसका उत्तर " ( ३ ) प्रश्न: किन भावों से आत्मा सदा बँधी रहती है ( आत्मा सदा कैरनु-बध्यते ), इसका उत्तर ८४८
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प्रश्न रोग हर्षादि विषयक ५ प्रश्न -( १ ) प्रश्न रोग कैसे होते है ( रोगाः कुतः ), इसका उत्तर् ( ५ ) ८४ ९ ( २ ) प्रश्न रोगों का संशमन क्या है? ( संशमनं किमेषाम् ) इसका उत्तर- " ( ३४ ) प्रश्न हर्ष और शोक के कारण क्या है? ( हर्षस्य शोच किं निमित्तम् ), इसका उत्तर " ( ५ ) प्रश्न: शरीर और मन से शान्त हुये रोग पुनः क्यों नहीं होते ( शरीर सत्त्व प्रभवा विकाराः शान्ताः पुनः कथं नापतेः ) इसका उत्तर-निवृत्त का कारण रोगोत्पत्ति के पूर्व की चिकित्सा अध्याय उपसंहार ८५० खुडिका गर्भावान्तिशारीराध्याय ३ ( 1 ) गर्भ अवक्रमण प्रकरण गर्भोत्पत्ति की प्रक्रिया ( २ ) गर्भ के ६ भावविषयक भरद्वाज की शङ्का माता - पिता आदि सन्तानोत्पत्ति में कारण नहीं हैं " ( १-२ ) गर्भ में माता - पिता के कारणत्व का खण्डन ८५१ ८५२ ८५३ ( ३ ) गर्भ में आत्मा के कारणत्व का खण्डन, ” ( ४ ) गर्भ में सात्म्य के कारणत्व का खण्डन ८५४ ( ५ ) गर्भ में रस के कारणत्व का खण्डन " ( ६ ) गर्भ में मन के कारणत्व का खण्डन " भरद्वाज के मत का उपसंहार ८५५ ( ३ ) गर्भ के ६ भावविषयक शङ्का का आत्रेय द्वारा समाधान आत्रेय का सिद्धान्त ( १ ) माता की कारणता एवं मातृज भाव ( २ ) भाव ( ३ ) आत्मा जातत्व और अजानत्व माता - पिता और आत्मा में वकारिता का अभाव " " ( ५ ) रस की कारणता एवं रसज भाव ८५ ९ ( ६ ) मन की कारणता और मन के भाव ८६० गर्भ का समुदायजन ८६१ ( ४ ) भरद्वाज की पुनः आत्मा तथा अन्यविषयक शङ्कायं ८६३ पुनः भरद्वाज द्वारा मातृज आदि भावों का खण्डन ( ५ ) आत्रेय के आत्मा तथा अन्य विषयक शङ्काओं के उत्तर ८६४ आत्रेय का सिद्धान्त 39 " मनुष्य आदि से मनुष्य आदि की उत्पत्ति ८६५ आत्मा का सदा ज्ञत्व रहना " इन्द्रियरहित आत्मा है इसमें पुनः तीसरी युक्ति ८६६ आत्मज्ञान और विषयज्ञान की विशेषता 99 सभी उत्पत्तिशील वस्तुएँ सहेतुक हैं । 29 अध्यायगत विषयों को सूची ८६७ महतीगर्भावक्रान्ति शारीराध्याय ४ ( १ ) गर्भविषयक आठ प्रश्न ( Eight Question Regarding Embryo ),, अध्याय विषय प्रवेश -( १ ) प्रश्न: गर्भ जिससे उत्पन्न होता है । ( यतय गर्भः सम्भवति ) इसका उत्तर, ( २ ) प्रश्न: गर्भ नाम कल पड़ता है ( यस्मिथ गर्भसंज्ञा ), इसका उत्तर " " ( ३ ) प्रश्न गर्भ किससे निर्मित होता है ( यद्विकारथ गर्भः ) इसका उत्तर ( ४ ) प्रश्न: गर्भोत्पत्ति - क्रम ( यया चानु-पूति ) इसका उत्तर गर्भ में आत्मा के कार्य ( क ) प्रथम मास में गर्भ का स्वरूप " ( ख ) द्वितीय मास में गर्भ - स्वरूप " ( ग ) तृतीय मास में गर्भ - स्वरूप ८५६ गर्भ में पञ्चमहाभूत के भाव " " लोक तथा पुरुष साम्य का उपदेश जन्मोत्तर काल में उत्पन्न होने वाले अङ्ग गर्मिणी के लक्षण ( Signs of Pregna ८५७ आत्मज भाव ८५८ दोहद की उत्पत्ति ( ४ ) सात्म्य की कारणता एवं सात्म्यज भाव ८५ ९ ncy ) ८६८ 39 ८६ ९ 29 ८७० 99 22 ८७१ ८७२ " " ८७४
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गर्भिणी की इच्छा पूर्ति आवश्यक ' मानकर भाव ( ३६ ) ८७४ राजस सत्त्व के ६ भेद " ( १ ) आमुरस म इन्द्राभिधान से दानि ८७५ ( २ ) राक्षस मुख ( घ ) चतुर्थ मास में स्वरूप ( ३ ) पेशा सत्य " ( ङ ) पञ्चम मास में गर्भ का स्वरूप 23 ( ४ ) सर्पसत्त्व ( च ) छठे मास में गर्भ का स्वरूप 29 ( ५ ) प्रेतसत्त्व ८७६ ८८२ 21 " ८: ३ 27 ( छ ) सातवें मास में गर्भ का स्वरूप ( ज ) आठवें मास में गर्भ का स्वरूप और ओज का अस्थिरत्व ( झ ) नवें मास में प्रसवकाल गर्भ प्रकरण का उपसंहार ( ५ ) प्रश्न: गर्भवृद्धि के कारण ( यश्चास्य वृद्धिहेतुः ) का उत्तर ( ६ ) प्रश्न गर्भ को व्यापत्ति ( अजन्म ) में कारण ( यतश्चास्याजन्म ) इसका उत्तर ( ७ ) प्रश्न: कुक्षि में गर्भ के नाश में हेतु ( यतश्च जायमानः कुक्षी विनाश प्राप्नोति ) का उत्तर ( ८ ) प्रश्न जिससे गर्भ सम्पूर्ण रूप से नष्ट न होकर विकृति को प्राप्त होता है? ( यतश्च कार्त्स्न्येनाविनश्यन् विवृतिमापद्यते इसका उत्तर गर्भ में विकृत शुक्र का प्रभाव मातृ - पितृज अवयव विकृति से सात्म्यज ( ६ ) शाकुनसत्त्व पाशव ( तामस ) सत्त्व के तीन भेद ( १ ) पशुसव ( २ ) मात्स्य सत्त्व " " 99 ८७७ ( ३ ) वानस्पत्य सत्त्व " " " " संक्षेप में सत्वों का विवरण अध्याय उपसंहार पुरुषविचयशारीराध्याय ५ ( १ ) लोक पुरुष साम्य प्रकरण लोक पुरुष साम्यविषयक प्रश्न आत्रेय का उत्तर लोक और पुरुष में समानता के प्रयोजन-विषयक प्रश्न ८८८ ( २ ) मोच प्रकरण भगवान् आत्रेय का उत्तर निवृत्ति का लक्षण " 37 ८८४ " " ८८५ II 39 ८ ९ ० " " ८७८ मोक्ष का उपाय ८ ९ १ शुद्ध मन का स्वरूप ८ ९ २ आदि विकृतियों का निरूपण शुद्धि बुद्धि का स्वरूप 29 आत्मा का निर्विकार स्वरूप समानता का फ्ल ८ ९ ३ शारीरिक और मानसिक दोष शरीर के भेद ८७ ९ मुक्त का स्वरूप ८ ९ ३ मुक्ति का पर्याय " " ( २ ) सोलह मानस प्रकृतियों ( Sixteen Mental Constitutions ) सात्त्विक सत्त्व के भेद ( १ ) ब्राह्म सत्त्व का स्वरूप ( २ ) आर्धसत्त्व ( ३ ) [ पेन्द्र सस्त्र ( ४ ) याम्य सत्त्व ( ५ ) वारुण सत्त्व ( ६ ) कौबेरे सत्त्व ( ७ ) गान्धर्वसत्त्व 99 शरीर विषय का महत्त्व अध्याय उपसंहार शरीरविचयशारीराध्याय ६ ( १ ) शरीर विषय प्रकरण 23 " III ८ ९ ४ 99 शरीर - विचय का प्रयोजन " शरीर की परिभाषा 23 23 धातुओं को वृद्धि और हास ८ ९ ६ ८८१ वैध का कर्त्तव्य ८ ९ ७ " " शरीरधातुओं के गुण ८ ९ ८ " शरीरपातु के वृद्धि हास में कारण ८ ९९
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शरीर वृद्धिकर भाव बल - वृद्धिकर भाव आहार - परिणामकर भाव आहार परिणाम भाव के कर्म ( 80 ) ९ ०० ( ९ ) प्रश्न: परमायु प्राप्त करने का क्या " ९ ०१ " 7 शरीर धातु के दो भेद - मल और प्रसाद ९ ०२ वातादि दोष ही रोगकर एवं अरोगकर ९ ०३ शरीर का महत्त्व ( २ ) गर्भविषयक ९ प्रश्न Nine Questions Regarding Embryo गर्भ में अङ्गोत्पत्तिविषयक प्रश्न ( १ ) प्रश्न: गर्भाशय में कौन सा अङ्ग कारण है ( कानि चास्य परमायुषो निमित्तानीति? ), उत्तर ९ ० ९ अध्याय उपसंहार शरीरसंख्याशारीराध्याय ७ शरीर विज्ञानार्थ अग्निवेश का प्रश्न त्वचाओं का वर्णन अङ्गों का विभाग अस्थियों की संख्या " पाँच इन्द्रियाधिष्ठान हृदय प्राणायतन ९ ०४ कोष्ठाङ्ग पहले उत्पन्न होता है । ( किन्नु खलु गर्भस्याङ्गं पूर्वमभिनिर्वर्तते ), उत्तर ( २ ) प्रश्न: गर्भाशय में गर्भ का मुख किधर रहता है और वह गर्भाशय के अन्दर कैसे रहता है ( कुतोमुखः कथं चान्तर्गतस्तिष्ठति ), उत्तर ९ ०५ ( ३ ) प्रश्न: किस आहार पर गर्भ का जीवन - चक्र चलता है ( क्रिमाहारश्च वर्तयति ) उत्तर ( ३ क ) प्रश्न: प्रसव कैसे होता है ( कथं-भूतश्च निष्क्रामति ) का उत्तर ९ ०६ ( ४ ) प्रश्न: किन आहारों के उपयोग से गर्भ उत्पन्न होकर शीघ्र ही मर जाता है । ( कैश्चायमाहारोपचारैर्जातः सद्यो हन्यते ), उत्तर " प्रत्यङ्ग शरीर के छिद्र दृश्यों का वर्णन ही अभिप्रेत स्नायु -शिरा आदि की संख्या रसादि धातुओं के मान " ९ १० 99 ९ ११ ९ १२ " ९ १३ " ९ १४ " ९ १५ " " ९ १६ ( १ ) पार्थिव शारीरभाव ( २ ) जलीय शारीरभाव " " ( ३ ) तैजस शारीरभाव ( ५ ) प्रश्न: कैसे रोग रहित होकर बढ़ता है? ( कैरव्याधिरभिवर्द्धते ) का उत्तर " " ( ६ ) प्रश्न: क्या देवादिग्रहों के द्वारा बालकों में रोगोत्पत्ति होती है या नहीं ( किञ्चास्य देवादि प्रकोपनिमित्ता विकाराः सम्भवन्ति आहोस्विन्न ), उत्तर ९ ०७ काल तथा अकाल मृत्यु प्रकरण Topic of Timely or Untimely Death ( ७ ) प्रश्न: काल और अकाल मृत्यु के विषय में क्या विचार है । - ( किञ्चा स्य कालाकालेत्स्यादि ), उत्तर " " ( ४ ) वातज शारीरभाव ( ५ ) आकाशीय शारीरभाव ( ६ ) आत्मीय शारीरभाव अवयवों की असंख्यता अङ्गावयव ज्ञान का प्रयोजन जातिसूत्रीयशारीराध्याय = ( १ ) गर्भाधान ( Conception ) प्रकरण श्रेष्ठ सन्तानोत्पत्ति प्रकरण पूर्वकर्म ऋतुकाल में कर्तव्य सहवास की विधि ( २ ) गर्भ एवं गर्भिणीचर्या - प्रकरण ( Care of Product of Conception & Pregnant Women ) " " ९ १७ ९ १८ ९ १ ९ " 3 " 99 ९ २० ९ २१ " " उत्तम सन्तान के लिए कर्तव्य ( ८ ) प्रश्न: गर्भ की परमायु कितनी पुत्रेष्टि यज्ञ ९ २३ होती है ( किञ्चास्य परमायुः ), उत्तर ९ ० ९ मनोनुकूल पुत्रोत्पत्ति के उपाय "
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( ४१ ) पञ्च महाभूत की रूपोत्पत्ति में कारणता ९ २४ द्वितीयावस्था [ Second Stage of La-मन की विशेषता में कारण 99 शुक्र का गर्भ में परिणमन ९ २५ स्त्री - पुरुष की उत्पत्ति में उदाहरण ९ २६ पुंसवन संस्कार गर्भस्थापक औषधियाँ पघातकर भाव अहितकर भावों का त्याग आवश्यक गर्भिणी की चिकित्सा उपविष्टक रोग की सम्प्राप्ति और लक्षण नागोदर रोग की सम्प्राप्ति तथा लक्षण नागोदर और उपविष्टक की चिकित्सा लीन गर्भ के लक्षण और चिकित्सा गर्भिणी में उदावर्त रोग उदावर्तनाशक निरूह गर्भ की मृत्यु के कारण और मृतगर्भा स्त्री के लक्षण मृतगर्भा की चिकित्सा गर्भशल्योद्धरण के पश्चात् चिकित्सा गर्भिणी परिचर्या मासानुसार किक्किस की चिकित्सा आठवें मास का कर्तव्य मास का कर्तव्य मासिक परिचर्या का प्रयोजन " " ( ३ ) सूतिकागार, प्रसवविधि, एवं सूतिकोपचार ( Maternity Ward, Management of Labour & Puerperium ) " सूतिकागार का निर्माण [ Construcion of Maternity Ward ] सूतिका गृह में प्रसव से पूर्व संग्रहणीय वस्तुयें ( Equipment of Mat ernityward ) ९ ४० प्रसूतिगृह में गर्भिणी का प्रवेश [ Admission of Pregnant Women in Maternity Ward ] ९ ४१ प्रसव के पूर्वकालिक लक्षण [ Signs of Impending Labour i. e., First stage of Labour ] " " 22 ९ २७ ९ २८ bour ] अनागत प्रसव में कर्तव्य [ Management of Uterine Inertia ] गर्भिणी को शिक्षा [ Instructions to Pregnant Women ] ९ ४२ 29 ९ ४४ तृतीयावस्था [ Third Stage of Labour ] ९ ४५ ९ २ ९ सद्यः प्रसूत बालक की परिचर्या [ Care of ९ ३० Child just after Delivery ] ९ ४७ ९ ३३ | नालछेदन [ Section of Umbilical 99 29 ९ ३४ [ [ " ९ ३५ Cord ] अनुचित नालच्छेदन से होने वाले रो L और उनकी चिकित्सा [ Treatment of Diseases Caused by Improper Section of Umbilical Cord ] , जात - कर्म ९ ३६ " ९ ३७ ९ ३८ ९ ३ ९ " " 19 बालक का रक्षाविधान [ Protection of the New - born and Maternity Ward ] " " सूतिका स्वस्थ वृत्त [ Management of Puerperium ] सूतिकावस्था का चिकित्सा सूत्र ( ४ ) कुमार नामकरण, धात्रीव्यवस्था, कुमारागार एवं कुमारपरिचर्या ( Proper - Name Ceremony, Arrangement of Wet Nursing, Pediatric Ward and Care of the Child ) बालक का नामकरण [ Proper NameCeremoney ] दीर्घायु बालक के लक्षण ९ ४८ ९ ४ ९ ९ ५० ९ ५१ ९ ५२ ९ ५३ " ९ ५५ ९ ५७ " धात्री परीक्षा स्तन की उत्तमत्ता दूध की श्रेष्ठता ९ ५८ अशुद्ध दूध के लक्षण श्रीरदोष की चिकित्सा दुग्धोत्पादक द्रव्य ९ ५ ९ धात्रीकर्म " "