भरत नाट्यशास्त्र - नाट्य चन्द्रिका टीका १ — पृष्ठ 521–530
भरत नाट्यशास्त्र - नाट्य चन्द्रिका टीका १ · Chowkambha Sanskrit Series · पृष्ठ 521–530
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नाट्यशास्त्रम् ४३० अशुद्ध ( दूषित ) हो, जो थका हुआ हो, जो भूखा-प्यासा हो,,जिसनेजिसकाभरपेटशरीरखा -पी लिया हो ऐसे व्यक्ति को व्यायाम नहीं करना चाहिए ॥ १०१.१०२ ॥ व्यायाम के अधिकारी पुरुष- वक्षसा ॥ १०२ ॥
अचलैर्मधुरैर्गात्रैश्चतुरस्रेण व्यायाम कारयेद्धीमान् वरमङ्गक्रियात्मकम् । ( अडिग, बलवान् ) तथा मधुर ( सुन्दर, सुडौल ) हों जिसकाजिसकेवक्षस्थलअङ्ग चौड़ास्थिर, ऐसे व्यक्ति को शरीर को पुष्ट बनाने के लिए व्यायाम करना चाहिए ॥ १०२-१०३ ॥ व्यायाम की उपयोगिता - कार्यश्चारीकृतो विधिः । १०३ ॥ एवं व्यायामसंयोगे में कुशल हो जाने के बाद ही विविध चारियों का अभ्यास इस प्रकार व्यायाम करना चाहिए । अध्याय का उपसंहार १०३ ॥ - ॥ १०४ ॥ अत ऊर्ध्व प्रवक्ष्यामि मण्डलानां विकल्पनम्
चारीविधानो नाम दशमोध्यायः ॥ ॥ इति भारतीये नाट्यशास्त्रे 111011 विविध भेदों का वर्णन किया जायेगा ॥ १०४ ॥
इसके बाद मण्डलों के नाट्यशास्त्र की ' नाट्यप्रदीप' नामक व्याख्या || इस प्रकारमें चारीभरतमुनिविधानप्रणीतनामक दसवां अध्याय समाप्त हुआ ॥ 1101
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परिशिष्ट खण्ड एक सौ आठ करणों की सूची ( नाट्यशास्त्र चतुर्थं अध्याय ) करण नाम करण की वास्तविक श्लोक पृष्ठ १ क्रम२संख्या ३ ४ २३अ अश्चित ८४ १०५ अतिक्रान्त ६६ १२७ ११८ अपक्रान्त ७९ १४० १२२ अपविद्ध ४ ६४ ९९ अर्गल ५७ ११८ ११४ अर्धनिकुट्टक १० ७० १०१ अर्धमत्तल्लि २८ ८९ १०६ अर्धरेचितक १२ ७३ १०२ अर्धसूची ७७ १३८ १२९ अर्धस्वस्तिक २२ ८३ १०५ अलातक १८ ७ ९ १०४ अवहित्यक ९५ १५६ १२७ ५५आ आक्षिप्त १५६ ११४ आक्षिप्तरेचितक २० ८१ १०५ आवर्त ५ ९ १२० ११५ १०३उ उद्घट्टित १६४ १३० उद्वृत्त ९१. १५२ १२५ उन्मत्त १४ ७५ १०३ उपसृत,९२ १५३ १२६ उरोमण्डल ५४ ११५ ११४ ९८ऊ ऊरूवृत्त १५ ९ १२८ ऊर्ध्वजानु २५ ८५ १०६ एएलकाक्रीडिता ९७ १५८ १२८
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४३२ नाट्यशास्त्रम् १ २ ३ ११ ७१ १०२ क कटिछिन्न कटिप्रान्त ४३ १०४ १११ कटीसम १९ ८० १०४ करिहस्तक ८७ १४८ १२४ कुचित ५२ ११३ १२३ क्रान्तक ५१ ११२ ११३ १०८ १६ ९ १३१ ग गङ्गावतरण गजक्रीडितक ६८ १२ ९ ११ ९ गण्डसूची ७१ १३२ १२० गरुडप्लुतक ७० १३१ ११ ९ गृध्रावलीनक ७४ १३५ १२१ ३२ ९ ३ १०८ घ घूर्णित ५३ ११४ ११३ च चक्रमण्डल चतुर ३९ १०० ११० ४५ १०६ ११२ छ छिन्न ९४ १५५ १२७ ज जनित डोलपाद ६० १२१ ११५ १ ६१ ९८ डत तलपुष्पपुट तलविलसित ५६ ११७ ११४ तलसङ्घटित ९ ३ १५४ १२६ तलसंस्फोटित ६९ १३० ११ ९ ३४ ९५ १०८ द दण्डपक्ष दण्डपाद ८२ १४३ १२३ दण्डकरे चित ४१ १०२ ११० दिक्स्वस्तिक १७ ७८ १०४ १०६ १६७ १३१ न नागापसर्पित निकुञ्चित २६ ८६ १०६ निकुट्टन ९ ६९ १०१ नितम्ब ८५ १४६ १२३ निवेश ९६ १५७ १२७
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परिशिष्ट ४३३ १ २ ३ निशुम्भत ६४ १२५ ११७ नूपुर ३६ ९७ १०९ ७२प परिवृत्त १३३ १२० पादापविद्धक ३० ९१ १०७ पार्श्वक्रान्त ६३ १२४ ११६ पार्श्वजानु ७३ १३४ १२० पार्श्वनिकुट्टक ४९ ११० ११३ पृष्ठस्वस्तिक १६ ७७ १०३ प्रसर्पितक ८८ १४९ १२५ प्रेङ्खोल्लित ८४ १४५ १२३ ३५भ भुजङ्गत्रस्तरेचित ९६ १० ९ भुजङ्गत्रासित २४ ८५ १०५ भुजङ्गञ्चित ४० १०१ ११० भ्रमरक ३८ ८९ १०९ मण्डलस्वस्तिक ८ ६८ १११ मत्तल्लि २७ ८८ १०६ मदस्खलित ९९ १६० १२८ मयूरललित ८० १४१ १२२ २९र निकुट्टित ९० १०७ ४४ल लतावृश्चिक १०५ ११२ ललाटतिलक ५० १११ ११३ ललित ३३ ९४ १०८ लोलित १०५ १६६ १३० लीन ६ ६६ १०० १३व वक्षःस्वस्तिक ७४ १०३ वर्तित २ ६२ ९८ वलित ३१ ९२ १०७ ३ ६३ ९९ विक्षिप्त ५८ ११ ९ ११४ विक्षिप्तक्षितक २१ ८२ १०५ २८ ना०
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नाट्यशास्त्रम् ४३४ १ २ ३ ४ विद्युद्भ्रान्त ६५ १२६ ११८ विनिवृत्त ६२ १२३ ११६ विवर्तितक ६७ १२८ ११८ विवृत्त ६१ १२२ ११६ विष्कम्भ १०२ १६३ १३० १०० १६१ १२९ विष्णुक्रान्त 7 वृश्चिक ४७ १०८ ११२ वृश्चिक कुट्टित ४२ १०३ १११ वृश्चिकरेचित ४६ १०७ ११२ वृषभक्रीडित! १०४ १६५ १३० वैशाखरेचित ३७ ९८ १०९ व्यंसित ४८ १०९ ११२ १०७ १६८ १३१ श शकटास्य ७५ १३६ १२१ स सन्नत ५ समनख ६५ ९९ सम्भ्रान्त १६२ १२९ सर्पित ८१ १४२ १२२ सिंहविक्रीडित ८९ १५० १२५ सिंहाकर्षितक ९० १५१ १२५ सूची ७६ १३७ १२१ सूचीविद्ध ७८ १३ ९ १२१ स्खलित ८६ १४७ १२४ स्वस्तिक १५ ७६ १०३ स्वस्तिकरेचित ७ ६७ १०० ८३ १४४ १२३ ह हरिणप्लुत SPP
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२. बत्तीस अङ्गहारों को सूचो PEP ( नाट्यशास्त्र चतुर्थ अध्याय ) SEP SP अङ्गहार का नाम क्रम संख्या श्लोक पृष्ठ १ २ ३ ४ अ अपराजित ८ १ ९ ० - ९२ १३६ 291 अपविद्ध ४ १८१-८३ १३४ अपसर्पित ३१ २४३-४५ १४६ अर्धनिकुट्टक ३२ २४५-४७ १४७ अलातक २२ २२३-२५ १४३ आ ५ १८३-८५ १३५ आक्षिप्तरे चित २९ २३७-४० १४५ आच्छुरित २८ २३५-३७ १४५ आलीढ २६ २३१-३३ १४४ उद्घट्टित उ ६ १८५-८७ १३५ उद्वृत्तक २५ २२ ९ -३१ १४३ १७ ग गतिमण्डल २१०-२१२ १४० २१ प परावृत्त २२१-२३ १४२ परिच्छिन्न १८ २१२-२१४ १४१ परिवृत्तरेचित १९ २१४२१८ १४१ पर्यस्तक २ १७७-७९ ३३४ पावच्छेद २३ २२५-२७ १४३ पार्श्वस्वस्तिक १२ १९९.२०२ १३८ १४ भ भ्रमर २०४२०६ १३ ९ मत्तस्खलित १५ म २०६२०८ १३ ९ मत्ताक्रीड १० १ ९ ४ ९७ १३७ मदविलसित १६ २०८२१० १४ रेचित २७ २३३-२३५ १४४ २४ व विद्युद्भ्रान्त २२७.२ ९ १४३
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४३६ नाट्यशास्त्रम् १ २ ३ विष्कम्भ ७ १८७-९० १३५ विष्कम्भापसृत १ ९ २ - ९ ६ १३७ वृश्चिकासृत १३ २०४२०६ १३८ वैशाखरेचित २० २१८-२१ १४२ ३ स सूचीविद्ध १७ ९.८१ १३४ स्वस्तिकरेचित ११ १९७- ९९ १३८ स्थिरहस्त १ १७४-७७ १३२ सम्भ्रान्त ३० २४०-४३ १४६
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३. रसों के भेद, वर्ण, देवता तथा तद्गतभावों की सूची ( नाट्यशास्त्र छठा एवं सातवां अध्याय ) नाम विवरण श्लोक पृष्ठ म आत्मस्थ हास्यरसभेद ६.४९ २६१ अतिहसि हास्यभेद ६।५३, ५ ९ २६२ अर्थापचयोद्भव करुणभेद ६।७८ २७२ अद्भुतरस के स्थायीभावादि २७१ अद्भुतरस के नौ भाव ७।११७ ३३२ आनन्दज अद्भुतरस भेद ६८२ २७४ अपहसित हास्यभेद ६।५२, ५८ २६४ अपराधोत्पन्न भयानकरस भेद ६।६ ९ २३९ उ उद्वेगी बीभत्सरस भेद ६।८१ २७३ उपहसित हास्यभेद ६५२,५७ २६३ २६५ क करुणरस के स्थायीभावादि कपोत रसवर्ण ६।४२ २५६ कृष्ण रसवर्ण ६।४३ २५६ काल रसदेवता ६।४५ २५६" ग गौर रसवर्ण ६।४३ वीररसभेद द दानवीर 6312 ६।७९ २७३ II IIII अद्भुतरस भेद २७४ दिव्य RFPPle घ घर्मोपघातज करुण रसभेद ६७८ २७२ धर्मवीर वीररसभेद ६७९ २७३ न नील रसवर्ण ६१४३ २५६ प परस्थ 201 हास्यरसभेद ६५० २६२ प्रमथ रसदेवता ६।४४ २५६11 रसवर्ण ६।४३2 पीत ब ब्रह्मा FRIE रसदेवता ६।४५ " भ भयानक रस के स्थायीभावादि २९६
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४३८ नाट्यशास्त्रम् नाम विवरण श्लोक पृष्ठ भयानक रस के आठ भाव ७।११५ ३२१ रसदेवता ६।४५ २५६ महाकाल 11म महेन्द्र रसदेवता ६१४५ रसदेवता ६।४४ २५६ य यम युद्धवीर वीररसभेद ६।४९ २७३ र रस का लक्षण सूत्र २२८ नाट्यरस ६।३२-३३ २५२ क्ष २५४ रसभाव सम्बन्ध ६।३६-३८ चार मूलरस ६०३ ९ २५५ त्र आठ रसों के नाम ६।१५ २२० रक्त रसवर्ण ६/४२ २५६ SHIP 31 रुद्र रसदेवता ६।४२ रौद्ररस के स्थायीभावादि २६६ रौद्ररस के नो भाव ७।११२ ३२१ वीररस के स्थायीभावादि २६८ बीभत्स रस के स्थायीभावादि २७० व विप्रलम्भ शृङ्गाररस भेद २५६ विष्णु रसदेवता ६।४४ २५६ विहसित हास्यभेद ६।५३, ५६ २६३ व्याजोत्पन्न भयानकरस भेद ६.८० २७३ वीररस के पन्द्रह भाव ७।११३-१४ ३२१ बीभत्स रस के सात भाव ७.११६ ३२२ बीभत्सरमभेद 2013 ६।८१ २७३ श शुद्ध २५७ शृंगाररस के स्थायीभावादि श्रृंगाररस के छियालीस भाव ७।१० ९ ३२० शोककृत करुणरस भेद ६।७८ २७२ श्याम रसवर्ण ६।४२ २५६ 7813 ६।४२ २५६ स सित रसवर्ण २५७ संभोग शृंगाररस भेद
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परिशिष्ट ४३ ९ नाम विवरण श्लोक पृष्ठ ३२२ संचारीरस ३२३ स्थायीरस स्मित हास्यभेद ६।५३,५४ २६३ भदह हसित ६५३,५५ २६३२६१ हास्यरस के स्थायीभावादि २६२ हास्य रस के छः भेद कल एक हास्य रस के आठ भाव ७११० ३२१ २७३ वीभत्सरस भेद ६।८१ क्षक्षोभज भयानकरस भेद ६।८० २७३ त्रासोत्पन्न 1 - STE 338 PPie SXIP SPIR 77-4210 2212 P THESTE PS7 0510-2712 9210 5912 ३ SECVIO SPIR