Part III Mahamanglik pitrswarup — पृष्ठ 211–220

महामाङ्गलिक पितृ स्वरूप आत्म विज्ञानोपनिषत् - मोतीलाल शास्त्री ३ · पृष्ठ 211–220

पृष्ठ 211

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४ - ब्राह्म- अहोरात्रम् अघतनानघतनानुगतम् ( पारमेष्ठयम् ) ( स्वयम्भु ) १५ इन्द्रः वैिवस्वतो सावशीः इन्द्र an I an १४ ११ ब्रह्म 2 उत्तमो ALI तोमसोधर्मः १२ १० £ स्वायम्भुवःसून खारोचिषो" वृक्षः I शुक्लः सूयसा-वरि माची दवाना अहः पिन्दरा रात्रिः... अ ' सूर्य्य: ' परमेष्ठी ) हः पिवकपाल २५ २० धर्म उत्तमो ब्रह्म २४ खारोचिषों रक्षः २३ efecteler सा- सूर्य: कृष्णा मध्यरात्रिः सावशिि सूप प्रतीची En E । सारितः ब्रह्म २० साबरी द दक्षर सार्व II धर्म उत्तरा रात्रि | | | वारुणी | | ॥ अनघतनं रुद्रसावर्णि 1 पाल ॥ पश्चिमक हे निशारम्भः इन्द्र सापाशी, सायः ७ ५ ब्रह्म सावर्णिः धर्मसावणिः रुद्रसावरी देवसावरि अचतन : FTIIITT दक्षिणा चैत्र मह सादर्शि इन्द्र मित्रोदयः आतः रूपन निशा साव रेवती रुद्रः नामको म इन्द्रसाव १४- हुन्छः परन्द्रास् पूर्वा

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पूर्वापवृत्तम् ) अहोरात्रविभाजकम् ( अस्तबिन्द साथ : * :. बिन्दुः मध्याह- . मध्य अहः रात्रिः उत्तरा अ देवनां पिन्हरण प्रीतीची निशारम्म् , हः -: भूः रात्रिः दिवाना रात्रिः पिन्ह अहः दक्षिणा( मध्य बिन्दु मध्यरात्रिः यास् अहः प्राची उदय विद प्रात : निशावसानम १- मानुष - अहोरात्रम् - ( उदयस्तमनानुगतम् ) ( पार्थिवम् ) रात्रिः

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• अम्योत्तरवृत्तम् शुक्लाष्टमी मध्याह्नः वायव्य 2 उत्तरा दबाना अहः रात्रि अ शुक्लाष्टमी चन्द्रमा १४ १३ १२ | इंशान पैत्रं - अहोरात्रम्- ( उदयस्तमनानुगत्तम् ) साय १५ पूर्णिमा अय : बिन्दुः ) 27-112 ( १५ १६ पूर्णिमा निशारम्भः LaPele By रा कृष्णाष्टमी दक्षिरणः । विद्वशां देवानी रा त्रिः रात्रिः अहः कृष्णाष्टमी चन्द्रमाः / त्रिः नश्रृत १० ११ १२ १३ DE १४ अमावास्या निशावासानम् ३० अमोनशप्रतिपन् प्रातः अय विन्दुः पूर्वापरवृत्तम् मध्यरात्रि रेखा याम्योत्तरव

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उदयास्तमनानुगतम् ३- देव - अहोरात्रम ( सौरम् ) पिरमेष्ठी २ ग्रीष्मः आषाढ १२ ज्येष्ठः निधावमानम कृष्णा-आषाढ अमावास्या प्रतिपत् आषाढस्यामोत्त प्रातः उदद्यबिन्दुः प्राची ११ वैशाखः वस परसक्रान्ति : अमावास्या चैत्र कृष्णा मध्यरात्र : दक्षिण देवाना ! X फाल्गुनः पृथियो दक्षिणा गोल रा पृथिवी ( सूर्य ) ) पृथिवी ( त्रिः उत्तर ) पृथिवी ( गोल अ प्रतीची शिशिर ६ माघ : I , मोतरा पूणि निशारम्भः पौष प्रतिपत् पौष शुक्ल पूर्णिमा साय : - अस्तावीन्ट शरत् ४ कार्तिक अश्विनः पूर्णिमाउत्तरा अध्याः परसकन्तिः आश्विन , अहः रात्रिः उत्तरा अहः देवानां पिन्दूणा ३ भाद्रपदः ३ वर्षाः : श्रांवरेगा : हेमन्त ५ मार्गशीर्ष विष्त हुन

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उदयास्तमनानुगतम ( पारमेष्ठयम् ) ४ ब्राह्म- अहोरात्रम् ये सावर्शिी २० २७ ११. २४ दक्षसावशी II '१३ प्रस सावरिः २६ he । धर्ममः : सावशि रूद्र २५ सावाशी देिवसावशि । १० 7 उपसंहार सा ० ० सु कु , १४ निशावसानम 4 ) प्रातः स्वामनोकपथुम उद्घादिन् £ ४ कुसा उत्तम फर्म तामसो रुद्र ए खारी चिपोख् स्वायम्भवः चाम्रोदेव रात्रि अहः II JABA टो ( परमेष्ठी ) , सावर्णि इन्द्र दिवसाको सादर्शिी २२ धर्मस्वरूद्ध सूर्य इन्द्र सावारी देवस्वनी रा . देवः २० चाक्षुष प खेतो रुद्रः तामसो धम्म १६ उत्तम खारोचिषाद. १८ कृष्णो वैवस्वतः ध्यरात्रि : पिन्दर दक्षिण अहः देवाना रा fa तांत्र १७ अ an उपयमुन निशारम्भः कृस्वा साय सूर्य अस्त वशी बिन्ट सहार ह्नः १४ १३ पाव सावारी ब्रह्म * १५ सावि सूर्य सूय स्वायम्भुवः १४ - सन्धि

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