Shatapathabrahman 1 1 — पृष्ठ 201–210

शतपथ ब्राह्मणम् भाष्य - १-१ - मोतीलाल शास्त्री · पृष्ठ 201–210

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३५६ ' न विजानामि यदि वेदमस्मि ' ३५७ निरर्थक ब्रह्मसत्ता विरोध ३५८ क्रियामय विश्व का स्वरूप ३५६ क्रिया का निष्क्रिय आधार ३६० विभिन्न ज्ञानधाराएँ विषयसूची २७६ ३८३ प्रकृतिवत् भौमब्रह्मा के श्रावासस्थान की भी २७७ 29 27 पुष्करता ३८४ अग्नि- वायु-- श्रादित्य, और त्रैलोक्य— व्यवस्था ३६१ विभिन्न श्रानन्दधाराएँ ३८५ शवसोनपात् - प्रतिष्ठावा देवता 22 ३८६ पृथिव्यधिष्ठाता अग्निदेव 17 ३८७ अन्तरिक्षाधिष्ठाता वायुदेव 27 ३८८ द्युलोकाधिष्ठाता मघवेन्द्र ३६२ विभिन्नों का अविभिन्न आधार ३६३ ब्रह्मसत्ता की स्वीकृति ३६४ ब्रह्मसत्ता के आधार पर विभिन्न दशवादों का निर्विरोध समन्वय ३६५ नासदीयसूक्त का संस्मरण ३६६ ब्रह्मसत्ता के प्रतिष्ठापक महापुरुष ३६७ यशोनामात्मक - ' ब्रह्म ' किंवा ' ब्रह्मा ' नाम-करण ३६८ जगद्गुरु भौमत्रह्मा ३६६ आदिब्रह्मा ३७० आदिब्रह्मा की जन्मभूमि पुष्करक्षेत्र ३७१ आर्य्यायण देशान्तर्गत वाह्लीक, और तत्रस्थ पुष्कर क्षेत्र ३७२ यण, और ईरान ३७३ वाह्लीक, और बलख ३७४ पुष्कर, और बुखारा ( चलख - बुखारा ) ३७५ राजस्थानप्रान्तान्तर्गत- पुष्कर तीर्थ ३७६ ब्रह्मा का एकमात्र मन्दिर पुष्कर में १७७ ब्रह्मा के द्वारा प्रकृतिस्वरूप - निरीक्षण ३७८ प्रकृतिसिद्धा व्यवस्था का सनाततत्त्व ३७६ अधिदैवतवत् अधिभूलव्यवस्था ३८० प्रकृतिजगद्वत् पृथिवी पर सम्पूर्ण - व्यव -स्थाओं का व्यवस्थापन ३८१ पृथिवी - अन्तरिक्ष - द्य लोक की परि— भाषाएँ ३८२ रथान्तरपृथिवी के पुष्करद्वीप में प्रतिष्ठित आधिदैविक - ब्रह्मा 11 २७८ 11 31 13 " 99 " 99 " २७६ 11 " " 99 ३८६ भूपिण्ड का अग्निमयत्त्व ३६० भूगर्भस्थ पाषाणशिलाएँ, और अग्निवेग का निरोध ३६१ अग्निविस्फोटन के संरक्षक महीधर २६२ भूतलानुगता पर्वतशिखाएँ ३६३ भूगर्भस्था विशाल पर्वतश्रेणियाँ ३६४ यमकोटयनुगत श्राग्नेय भूकम्प ३६५ पाषाणस्तरानुगता सलिलधाराएँ ३६६ जलस्रोतों से अग्नि का साम्य ३६७ प्रचण्डवेगेन प्रवाहिता - नद - नदी - धाराएँ ३६८ भूगर्भस्था जलधाराओं से अनुप्राणिता ' दगा-र्गलविद्या ' ३६६ दगालविद्या के परिशिष्ट चिह्न, और राजस्थान " " २८० " " 99 99 99 99 " 11 " " ४०० केन्द्रस्थ पार्थिवाग्नि " ४०१ तदुपरि सलिलस्तर ४०२ तदुपरि पाषाणस्तर ४०३ तदुपरि मृत्स्तर ४०४ सर्वोपरि ओषधि-- वनस्पतयः 99 91 " २७६ ४०५ पार्थिव शरीर के केश -लोम ४०६ केन्द्र की गर्भरूपता ४०७ ' गर्भ ' शब्द - निर्वचन ४०८ ' प्रजापतिश्चरति गर्भे ' ४०६ केन्द्रानुप्राणित निर्मारत्व " ३४ ४१० अग्निव्याप्तिमण्डलात्मक दृश्यजगत् ४११ अग्निपरिसमाप्ति में पदार्थ की दृश्यता " " " २८२ " "

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४१२ एकविंश - अहर्गणात्मक अग्नि ४१३ षट्स्तोमात्मक वौषट्कार ४१४ केन्द्रादि शब्दों का श्रासुरभाषात्त्व ४१५ गर्भ - हृदय- सान्तर - शब्द ४१६ वषट्कार, और वौषटकार ४१७ ' अम्निकम्मैव तत्सर्वम् ' शतपथ - प्रथमखण्ड ४१८ पार्थिवाग्निकाका २४ अंशानुगत व्यासा-र्द्धात्मिक वृत्त ४१६ अग्नि की उत्तरसीमा, ओर सुमेरु ४२० दक्षिणसीमा, और कुमेरु ४२१ पार्थिव - आग्नेय ' ज्ञ ' ४२२ स्वानुगत अक्ष, और स्वाक्ष ४२३ स्वाक्ष, और स्वाक्षपरिभ्रमण ४२४ भूपिण्डानुगता - उभयगति ४२५ ज्योतिष्चक्रात्मक खगोल ४२६ ध्रुवाबद्ध प्राजापत्याग्नि ४२७ प्राजापत्याग्नित्रिन्दु का अचलत्त्व ४२८ अचलभावानुगत- सुमेरु, कुमेरु ४२६ हिरण्यरेता अग्नि और सुमेरुचिन्दु की हिरस्मयता ४३० परिभाषा विलुप्ति से पुराणशास्त्र के आर्ष-सिद्धान्तों में भ्रान्ति ४३१ ध्रुवस्वरूप - दिग्दर्शन ४३२ ऐन्द्र - सौम्य - ध्रौव - विद्य त् ४३३ काशिराज प्रतर्द्दन, इन्द्र और ४३४ हिततमा इन्द्रविद्युत् ४३५ सौम्यविद्य त् - स्वरूप - दिग्दर्शन ४३६ सूर्योर्ध्वस्था सौम्य विद्युत् ४३७ अभिवाक्यमहः, और सौम्य विद्युत् ४३८ महाव्रतमहः, और सौम्यविद्युत् ४३६ लौहचुम्बकानुगता ध्रौवविद्य त् ४४० विद्युदुरूप इन्द्र ४४१ विद्युत् - स्वरूपवेत्ता महर्षि २८२ ४४३ ध्रुवविद्युत् के द्वारा आबद्ध भूपिण्ड ४४४ भूपिण्डाधार प्राजापत्याग्नि ४४५ उत्तरानुगत स्वर्ग " " ४४६ स्वर्गानुगत मेरु, और मेरुदण्ड ४४७ हिरण्यरेत । अग्नि " " ४४८ अग्नि, और सुवर्णाचल ४५० ध्रुव की श्रापेक्षिक स्थिरता ४४६ अग्निस्कम्भात्मक सुवर्णाचल २८३ ४५१ ध्रुवानुगत २४ अंशात्मक व्यासार्द्ध वृत्त ,, ४५२ ध्रु नपरिभ्रमणवृत्त ,, ४५३ कदम्बचिन्दु, और विष्णुपद ५४ पारमेष्ठ्य - विष्णुस्थान " " " ४५५ दृष्टिनिग्रह के द्वारा विष्णु की उपासना " ४५६ कदम्बसम्मुखानुगत विष्णु ४५७ विष्णुप्राण की आराधना " ४५८ ' तद्विष्णोः परमं पदम् ' ,, ४५६ ध्रुवपरिभ्रमणकाल - इयत्ता " ४६० ध्रुवपरिभ्रमणानुगत अयनपरिवर्त्तन ४६१ विष्वत्परिवर्त्तनात्मक अयनपरिवर्त्तन 99 ४६२ रोहिणी नक्षत्रानुगत बसन्तसम्पात ४६३ कृत्तिकानक्षत्रानुगत वऩन्तसम्मात " ४६४ उत्तरभाद्रपदानुगत वसन्तसम्पात " ४६५ मृगशिरोऽनुगत वसन्तसम्पात ,, ४६६ ‘ मासानां मार्गशीर्षोऽस्मि ' 22 ४६७ ध्रुव का विचालित्त्व २८४ ५६८ ग्रभिजिन्नक्षत्र का ध्रुवत्त्व, और वेदस-23 मृद्धियुग ४६६ ' अयं ध्रुवो रयीणामाचिकेतत् ' " 17 ४७० स'न्तर्षि, और सप्तमाता ४७१ ऋक्षानुगत ध्रुवनक्षत्र ४७२ वर्त्तमान ध्रुवनक्षत्र ४ ३ लक्ष्मी, और भेधा ४७४ रूसदेशानुगत ध्रुव " " ४४२ ऋषिशास्त्र की विलुप्ति के भीषण परिणाम ,, ४७५ मिश्रदेशानुगत ध्रुव ३५

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४७६ पाश्चात्यदेशानुगत - ध्रुव ४७७ ऋद्ध परिक्रमोपराम ४७८ पाश्चात्यदेशानुग्रहोपराम ४७६ ध्रुव की पूर्वदेशानुर्गात, और भारत-राष्ट्र का अभ्युदयोपक्रम ४८० युगपरिवर्तन के सम्बन्ध में श्रार्षवचन ४८१ सुमेरुबिन्दु की परिवर्तनशीलता ४८२ हिरण्यशृङ्गानुगत -- प्राग्मेरु ( पामीर ) ४८३ प्राग्मेरु की आज समुद्र में विलुप्ति ४८४ ब्रह्मनिवासभूमि प्राग्मेरु ४८५ हिरण्यशृङ्ग पर्वत और ब्रह्मा ४८६ निरक्ष से ६० अश पर हिरण्यशृङ्ग ४८७ निरक्षवृत्तानुगता लङ्का ४८८ ६० अंशात्मिका मौमत्रिलोकी ४८६ शणावत पर्वतानुगत पृथिवीलोक ४६.० निषधपर्वतानुगत पृथिवीलोक ४६१ प्राग्मेरुपर्य्यन्त – स्वर्गलोक ४ ९ २ लोकत्रयाधिष्ठात्री - भौमदेवतात्रयी ४६३ इन्द्राधीना पृथिवी, और अन्तरिक्ष ४६.४ पार्थिवप्रजा के भरण - पोषणाधिष्ठाता भारत-अग्नि, और भारतवर्ष विषयसूची २८६५०७ पश्चिम भारत, और यण ५.०८ हिन्दुस्थान, और पारस्थान २८८ २८६ " ५०६ जरथुस्त्रानुयायी पारसी 29 २८७ ५१० छन्दोभ्यस्तानुगता ऐन्द्रभाषा * ५११ जन्दावस्तानुगता वारुणभाषा, ५१२ श्रार्य्यायण, और ईरान ,, ५.१३ भारत की प्राच्यसीमा पूर्णसमुद्र ( चीन का पीतसमुद्र ) ५१४ भारत की प्रतीच्य सीमा - पश्चिमसमुद्र " ( भूमध्यसागर - महीसागर - मेडिट्रे नियेन्सी ) ५१५ त्रिपुर के द्वःरा तीन पुरों का निर्माण 29 ५१६ महीसागरानुगत- शर्वतीर्थ 27 ५१७ त्रिपुरी, और त्रिपुरारि " 1 ५१८ त्रिपुरी और ट्रिपली ,, ५१६. भारतीय सम्राट् वैवस्वतमनु , " ५,२० भारतीयप्रजा, और मनुष्य 77 ५२१ स्वायम्भुवी दहरैशिया ., ५२२ श्रान्तरिक्ष्य प्रजा, और मरुद्गण ५.२३ दिव्यप्रजा, और देवता ५२४ हिमालयान्त मनुष्यलोक " ५२५ श्रलतायी पर्वतान्त मरुल्लोक ४६.५ इन्द्र की महारम्भा - ' सग्धि ' ( सहभोज ) २८८ ५२६ प्राग्मेरुपर्यन्त दिव्यलोक ४६.६ ऋभु - विभ्वा - बाज का सम्मान ४६७ सवनत्रयात्मिका इन्द्रसग्धि ५२७ इन्द्रविष्टप्, और भौमस्वर्ग " " ५२८ सौवीरराष्ट्र, और अमरावती ४६८ भारतीय राजाओं का सग्धि में सम्मान 21 " " " " " 77 " 23 , " " " " " 17 " " ४६.६ ब्रह्मा के ज्येष्ठपुत्र श्रोङ्कार ५०० वामदेव के द्वारा वसोर्धारा में अन्नसंग्रह 31 ५०१ भरत - भारत - अग्नि, और श्र श्रुति 37 ५०२ भारतवर्ष की मौलिक - अभिधा का तास्विक समन्वय ५०३ ऋज्राश्वऋषि, और महाभाग जरथुस्त्र ५०४ ऐन्द्र, और वारुण - ब्राह्मणों में संघर्ष ५०५ ब्रह्मा के द्वारा भारतवर्ष का विभाजन ५०६ पूर्वभारत, और आव ५:२६ एशियाईरूस, और स्वर्गप्रदेश ५३० न्यूसाइवीरिया, और स्वर्गप्रदेश २६० 23 19 ५३१ हिमाच्छन्न आज का साइवेरिया " ५३२ सुधर्मा नामकी इन्द्रसभा 27 ५३३ भद्रगिरि, चन्द्रगिरि पर्वत 17 ५.३४ विष्णु विष्टुप् ,, ५३५ नैर्ऋतकोणानुगत ब्रह्मविष्टप् " ५३६ त्रिविष्टिप् - स्वरूप - दिग्दर्शन ,, ५३७ भौमपितृस्वर्ग 77 " " " " 11 22 ५३८ ' यस्यां पितर आसते ' 27 ३६

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` ५३६ व्रघ्नस्य विष्टर् ५४० स्वर्गघरुणात्मक स्कम्भ ५४१ तारतरप्रान्त, और टारटरी ५४२ ब्रह्मा का प्राग्ज्योतिषनगर ५४३ ब्रह्मा की ' कान्तिमती सभा ' ५४४ देवासुरों का कान्तिमन्ती में समन्वय ५४५ हिरण्यशृङ्ग पर्वतानुगता चार नदियाँ ५४६ उत्तरभागानुगता - पद्र सोमा ( वी ) ५४७ दक्षिणभागानुगता अलकनन्दा ५४८ पूर्वभागानुगता सीता ( ह्राङ्हू ) शतपथ - प्रखमखण्ड ५७० ' ऊँचा ' और ' नीचा ' ५७१ ' उत्तर ' और ' दक्षिण ' ५७२ उत्तरभ्र् वात्मक - उच्चभाव ५४६ पश्चिमभागानुगता - ' यतुं ' ( चक्षु - अमू-एक्सस् ) ५५० अलकनन्दा, और भागीरथी ५५१ चतुर्गङ्गम् II ५५२ विष्णुसरोवर, और जह्व का श्राश्रम ५५३ बिन्दुसरोवर, ५५४ सप्तशाखात्मिका अलकनन्दा, और स'न्तगङ्गम् ५५५ ' यक्षु ' नदी के विविध रूपान्तर ५५६ जम्बुनद, और जाम्बूनद सुवर्ण ५५७ हिरण्यशृङ्ग की सुवर्णरूपता ५५८ उदयाचल, और अस्ताचल की स्वरूप-परिभाषा ५५६ मणिजाजाति, और मनुष्यब्रह्मा " " ५७३ दक्षिणध्रु वात्मक - निम्नभाव " ५७४ भूपिण्डानुगत विष्वत् की त्रैलोक्यानुगता 67 76 विष्वक्त .... ५७५ सुमेरु – कुमेरु - अनुगत भूपिण्ड ५७६ १८० अंशात्मक ध्रुवान्तर ५७७ अधोभुवनात्मक पाताल ५७८ शुम्भ निशुम्भ असुर ५८६ ' त्रैलोक्यमिन्द्रो लभताम् ५८० ' यूयं प्रयात पातालम् ' ५८१ ' शेषाः पातालमाययौ ' ५८२ भूमि का निम्न प्रदेश, और पाताल ५८३ भूपिण्ड की पद्मरूपता ५८४ पद्म, और पद्मकर्णिका ५८५ पद्मकर्णिका से पश्चिम का भारतलोक ५८६ पूर्व का भद्राश्वलोक २६१. ५८७ उत्तर का— कुरुलोक " " ५८८ पश्चिमका - केतुमाललोक ५८६ उज्जैनानुगता मध्यरेखा ५६० ' सा मध्यरेखा - भुवः ' " ५६१ भारतवर्ष की इयत्ता ५६.२ भूपिण्ड के चार पत्र ( पत्ते ) ५६० ब्रह्मा के द्वारा प्रकृतिवत् व्यवस्था व्यवस्थिति २६२ ५६३ पाद्मभुवनकोश का समन्वय ५६४ वर्षभुवनकोश ५६१ भुवनकोश, और भूगोल ५६२ यज्ञभुत्रनकोश ५६३ पाद्मभुवनकोश ५६४ वर्षभुवनकोश ५६५ मध्यरेखात्मक विषुव ५६६ विषवमूलक भौमत्रैलोक्य ५६७ उत्तरध्रुव, और खस्त्रस्तिक ५६८ दक्षिणध्रुव, और अधःस्वस्तिक ५६६ दृश्यमण्डलानुगता त्रैलोक्यव्यवस्था ५६.५ वर्षानुगत ६ खण्ड ५६.६ स्तूप - प्रत्यन्त - कुल - शाखा - भेदभिन्ना पर्वत चतुष्टयी ५६७ उत्तरभागानुगत किंपुरुषवर्ष .... " " 6 ५६८ हिमालय, और द्रोणि ( दर्रा ) 21 ३७ ६६६ कैलाश, और गौरीशङ्कर ६०० धवलगिरी, और धौलागिरि- ( एत्ररेस्ट )

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६०१ हरिवर्ष और कंपुरुष की विभाजिका हेमकूट-पर्वतश्रे रिश ६०२ परिलेखानुगत नव - वर्ष ६०३ हिरण्यशृङ्गानुगत चार वृक्ष ६०४ महाभारतीय - भौमस्वर्ग ६०५, प्राकृत - ब्रह्मा - सम्बन्धी प्रश्नोपराम ६०६ चतुर्मुख ब्रह्मा ६०७ विष्णु की नाभि से कमल - विनिर्गमन ६०८ कमल पर समासीन ब्रह्मा विषयसूची ६३३ प्राणमुखानुगता वेदसृष्टि २६४ ६३४ ब्रह्माग्नि का संस्मरण २६५ ६३५ छन्द, और छन्दित वस्तु " ६३६ यजुः का तात्त्विक स्वरूप 31 ६३७ सन्तपुरुषपुरुषात्मक प्रजापति ६३८ सर्वप्रतिष्ठात्मक वेदमय ब्रह्मा २६७ ६३६ वेदमय ब्रह्मा के द्वारा अपसृष्टि ३०० के द्वारा अप की प्रसूति, और तद्द्वारा 77 39 " 27 ? ' ६४० वाक् 69 सर्वात ६०६ वेद के द्वारा विश्वसर्जन 76 ६४१ ' आपः ' का स्वरूप – समन्वय ६१० षोडशीपुरुष - प्रजापति ६११ षोडशकलं वा इदं सर्वम् ६४२ द्विब्रह्मात्मक ब्रह्माग्नि 19 ६४३ षड्ब्रह्मात्मक — सुब्रह्मसोम ६१२ प्रथमज - ब्रह्म, और ब्रह्मा 17 ६४४ काम - तपः - श्रम- का समन्वय ६१३ प्रतिष्ठा - ब्रह्म, और ब्रह्मा 29 ६४५ सृष्टिधारा की प्रवृत्ति 76 ६१ स्थितिलक्षण ब्रह्मा ६१५ स्थितिरूप ब्रह्मा के चार माहमाविवर्त्त ६१६ ब्रह्मा - विष्णु - महेश के द्वारा विश्वप्रपञ्च का विस्तार ६१७ प्रकृति, पुरुष का श्रनादित्त्व ६१८ प्रकृति के अमृत, मर्त्य - विवर्त्त 69 ६४६ वेद, स्वेद, सुवेद, त्रयीब्रह्म, स्वेद वेद, . आदि पारिभाषिक शब्द ६४७ स्वेदवेदात्मक – ‘ सुवेद ' के सम्बन्ध में गोपथ-श्रति २६ = ६४८ सुबह्मात्मक सोमवेद 22 ६४६ महान्, औरमहद्ब्रह्म ३०१ 11 27 27 37 27 ३०२ " ६१६ अत्ता, और ग्राय की व्यापकता ६२० चतुर्मुख ब्रह्मा का स्वरूप - समन्वय ६२१ वेदमूला - सृष्टि ६२२ पृथक्सस्थाश्च निर्ममे ' ६२३ ' वेदादेव प्रसूयन्ते ' ६२४ वेदशब्द का स्वरूपोपबृंहण ६२५ प्रज्ञा - प्राण- भूत- मात्रात्रयी ६२६ अमृतात्मक मनःप्राणवागूविवर्त्त ६२७ मर्त्यात्मक - नामरूपकर्म्मविवर्त्त ६२८ वेदत्रयी का स्वरूप - दिग्दर्शन ६२६ मूर्त्ति - मण्डल - गति - भावत्रयी ६३० ' उपलब्धि ' वेदस्वरूप – समन्वय ६३१ विश्वोपादानभूत मौलिक -- वेदतत्त्व ६३२ त्रयीविद्यात्मक भूतभौतिक विश्व ६५० महद्ब्रह्मात्मक प ६५१ शुक्रतत्त्व, और महद्ब्रह्म 77 11 ६५२ ' ते शुक्रमेतदतिवर्त्तन्ति वीराः ’ 17 19 ६५३ प्रथमा वेदसृष्टि 11 ६५४ द्वितीया लोकसृष्टि 77 11 ६५५ ब्रह्मा का द्वितीय पोमुख २६. ६५६ पोमुख परमेष्ठी 11 ५५७ वाङ्ंमुख सूर्य्य 11 ६५८ वाङमय प्रजासृष्टि " 17 ६५६ अन्नादमुखानुगता धर्म्मसृष्टि ६६० ‘ तत्सृष्ट वा तदेवानुप्राविशत् ' ६६१ ‘ तत आण्डं समवर्त्तत ' 12 ६६२ कमलासनस्थ ब्रह्मा ३०० ६६३ पञ्च पञ्चजन ३८ 17 27 11 ३०३ " 11 77 23

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६६४ स्वायम्भुव ब्रह्ममण्डल शतपथ - प्रथम खण्ड ३०३ ६६५ ब्रह्मा के द्वारा धर्म्मसृष्टि की व्यवस्था ६६६ प्रकृत्यनुगत लोकविभाग ६६७ पूर्वापरात्मक बृहतीछन्द .... ६६५ पारमेष्ठ्य - विष्णुमण्डल 27 ६६६ सौर इन्द्रलोक " ६६७ चान्द्र - सोमलोक ६६८ बृहतीछन्दोरूप विष्वद्वृत्त 21 ६६८ पार्थिव - अग्निलोक ६६६ दीर्घवृत्तात्मक क्रान्तिवृत्त 17 ६६६ पञ्च ब्रह्माण्ड ६७० दिब्रह्मा स्वयम्भू ६७१ द्वितीय ब्रह्मा परमेष्ठी ६७२ तृतीय ब्रह्मा हिरण्यगर्भ ६७३ चान्द्रब्रह्मा निधन ६७४ पार्थिवब्रह्मा पद्मभूः ६७५ पर्य्यायार्थक शब्द ६७६ पार्थिव – कमलोद्भव ब्रह्मा ६७७ पुष्कर, और पुष्करपर्ण " " ७०० पुराण के अठारह विषय ७०१ दीर्घवृत्तस्वरूप - परिचय ३०४ ७०२ भातिसिद्ध पूर्वापरवृत्त " ७०३ ३६० अंशात्मक वृत्तभाव " " ७०४ सप्ताश्वरूप सात अहोरात्रवृत्त 27 " " ७०५ याम्योत्तरवृत्त - स्वरूप - परिचय ७०६ ध्रुवप्रोतवृत्त ७०७ मित्रकपाल, और वरुणकपाल " ७०८ पूर्वक पाल, और पश्चिमकपाल ६७८ पुष्करपर्ण की अब्रूरूरता " ७०६ दिकपालद्वयी ६७६. पोमय पुष्करपर्ण " ७१० कपालद्वयात्मक खगोल ६८० पुष्पकरपर्ण से भूपिण्ड का निर्माण 27 ७११ कपालानुगत दिक्सोम ६८१ पुष्करपर्ण के विभिन्नरूप ६८२ पुष्करात्मक पद्मों की समष्टि, और भूपद्म 33 ६८३ अर्णवसमुद्र में भूपद्म का सन्तरण 13 ६८४ ' समुद्रमभितः पिन्वमानम् ' ६८५ वेद - लोक - प्रजा - धर्म्म - भेदेन ब्राह्मी सृष्टि-चतुष्टयी ६८६ ब्राह्मीसृष्टि का स्वरूप - दिग्दर्शन ३०५ ७१२ दिक्सोममय अप्सरातत्त्व ७१३ द्रौणकलशानुगत सोमरस 31 " 1 ७१४ मित्रावरुण का रेतः स्खलन ७१५ मैत्रावरुण - अप्सरापुत्र ७१६ नक्षत्र, तथा राशियुक्त ज्योतिश्चक्र ७१७ नाक्षत्रिक – आकाशीय पृथिवीलोक ७१८ नाक्षत्रिक - श्राकाशीय अन्तरिक्षलोक ६८७ सूत्रवायु, और तपोलोक ६८८ वाय्वनुगत -महर्लोक ६८६ रुद्रवायु, और भुवर्लोक " " ७१६ नाक्षत्रिक आकाशीय द्यलोक 17 ७२० नाक्षत्रिक आकाशीय पितृलोक 32 ७२१ नाक्षत्रिक देवयानमार्ग " ७२२ नाक्षत्रिक पितृयाणमार्ग ६६० भुवर्लोकात्मक चन्द्रलोक ६६१ नित्य ब्रह्मा, तथा तत्काय्यों का स्वरूप-समन्वय ६६२ वेदग्रन्थव्यवस्थापक भौम- मानवब्रह्मा ६६.३ ब्रह्मा के द्वारा वर्णसृष्टि, एवं गोत्रसृष्टिकी व्यवस्था ६६४ ब्रह्मा के द्वारा प्रजासृष्टि की व्यवस्था ३०६ ३६ ७२३ शुक्ल - कृष्ण - मार्ग ७२४ ‘ ताभ्यां बिश्वमेजत् समेति ' ७२५ शुक्ल - कृष्ण - गतियाँ ७२६ बुद्धियोगात्मक निवृत्तकर्म्म ७२७ निवृत्तकर्म्म के द्वारा सूर्य्यभेदन ७२८ पुनरगति

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७२६ समवलयमुक्तिगति ७३० सौराग्निमय अ।काशीय पृथिवीलोक ७३१ आकाशीय वायुलोक ७३२ आकाशीय घ्र वलोक ७३३ महाव्रतात्मक विद्युल्लोक ७३४ सौम्यविद्युन्मय अविवाक्यमहः ७३५ ध्रु वविद्य त्, और भूपिण्डाकर्षण ७३६ शनैश्चर, और यमराज ७३७ यमराज, और धर्म्मराज ७३८ इन्द्र - वायु- श्रग्नि - यम - चतुष्टयी ७३६ अभिजियुक्त २८ नक्षत्र ७४० ऐरावतमार्ग विषयसूची ३११७६२ ‘ प्रजापतिर्वै महान्देवः ’ " ७६३ व्योमकेशात्मक रुद्रभगवान् " _७६४ ‘ अग्निर्वा रुद्रः ’ 23 22 ७६५ शिवातनु, और घोरतनु ७६६ ब्रह्मणस्पति, और अम्भः ३१२ ७६७ ब्राह्मणस्पत्य- पवित्रसोम ३१५ " 22 " " ३१६ 11 ७६८ पुण्यसलिला भागीरथी " 23 ७६६ भागीरथ । का विनिर्गमन ७७० गाङ्गेय की पूतता " ७४१ जरद्गवमार्ग ७४२ वैश्वानरमार्ग ७४३ मार्गानुगता ६ नक्षत्रनीथियाँ ७४४ पुराणसम्मत देवयान, पितृयाण ७४५ लोक, लोकाधिपति, और प्रजा ७४६ भूतलानुगत विष्वत्, और सुमेरु ७४७ प्रकृतिवत् भूतल पर त्रैलोक्यव्यवस्था ७४८ देवता, एवं मनुष्यों का सह निवास, और भारतवर्ष ७४६ वर्त्तमानयुग का कल्पित इतिहास ७५० भारतीयों की आगन्तुकता का आवेश ७५१ आवेश का निराकरण ७५२ मनु, और मनुष्य ७५३ पुष्कर, और कुरुक्षेत्र ७५४ त्रिविध पुष्करक्षेत्र ७५५ त्रिविध कुरुक्षेत्र ७५६ सौरमण्डलात्मक कुरुक्षेत्र ७५७ प्राची सरस्वती, और बालकशील ७५८ यज्ञान्त - श्रवभृथस्नान ७५६ धर्म्मक्षेत्रात्मक कुरुक्षेत्र ७६० ' ग्रहणेषु काशी ' ७६१ ' प्रजापतिर्वै चन्द्रमाः ' षधिपति चन्द्रमा 37 ७७१ गङ्गा, और पुराणशास्त्र " ७७२ 23 ७७३ सौम्या — गाङ्ग ेया - श्रोषधियाँ " ७७४ गङ्गाजल से ओषधियों की दिव्यता 27 ७७५ हमारा मतिविभ्रम 27 ७७६ गङ्गात्रतरण के सम्बन्ध में रहस्यपूर्ण— एक आख्यान ७७७ सौर इन्द्र की शिवरूपता ३१३ " 27 ७७८ ‘ श्रीर्वै स्वरः ’ " ७७६ माता ब्रह्मद्रची ' ७८० अम्भः, और पवमान 77 ' ७८१ हरिद्वार, और मायापुरी ३१४ ७८२ गङ्गा का भूतल से संस्पर्श ७८३ महादेव, और गङ्गाधर ७८४ गङ्गा के तीन मार्ग " " " " " ३१८ - " " " " " " " 22 22 " ७८८५ त्रिपथगा भगवती भागीरथी ", ३१६ ७८६ ग्रहण, और काशी " 22 ७८८७ गङ्गास्नान, और ग्रहण और काशी " ७८८८ चन्द्रग्रहण, ३१५ ७८६ सूर्य्यग्रहण, और कुरुक्षेत्र ७६० भौममनुष्यदेवताओं के विविध - संस्मरण " 21 " " " " 11 22 11 इति — मनुष्य विधदेवतास्वरूप दिग्दर्शनम् " " " ४० " "

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शतपथ ब्राह्मणम् भाष्य - १-१ - मोतीलाल शास्त्री, पृष्ठ 208 का मूल पृष्ठ
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७६१ पुरुष विध - चान्द्रदेवतोपक्रम ७६२ संहितातत्त्व ७६३ पूर्वरूप, उत्तररूप, सन्धि, सन्धान ७६४ माण्डू केय - सम्मता संहिता ७६५ माण्डू के य - पुत्र - सम्मता संहिता ७६६ शूरवीर महर्षि - सम्मता संहिता ७६७ शाकल्यमहर्षि –सम्मता संहिता ७६८ प्रमुखा - प्रजापतिसंहिता ७६६ श्रदितिसंहिता संहितानुगत प्रजननधर्म्म ८०० ८०१ आधाता सूर्य ८०२ गर्भग्रहीत्री पृथिवी ८०३ मिथुन भावानुगता प्राणी - सृष्टि ८०४ भौतिकी सृष्टि का उद्गम ८०५ चतुद्दशविध चान्द्र - भूतसर्ग ८०६ महान् परमेष्ठी, और जीवसर्ग ८०७ सूर्य का दर्शपूर्णमास ८०८ सत्त्वमहान्, और सौर दर्शपूर्णमास ८०६ रजोमहान्, और चान्द्र दर्शपूर्णमास ८१० तमोमहान्, और पार्थिव दर्शपूर्णमास ८११ ‘ या भूतेभिर्व्यजायत ’ ८१२ सत्त्वविशाल सर्ग ८१३ रजोविशालसर्ग ... १४ तमोविशाल सर्ग ८१५ अग्नित्रयी की प्राणरूपता ८१६ प्राणस्वरूपपरिभाषा शतपथ - प्रथमखण्ड १.२. ३२० ८२७ तापधर्म्मा अग्निं ८१८ ' अजातवेदां ' अग्नि " ८१६ ' जातवेदा ' अग्नि " ८२० विश्वरूप - वैश्वानर " " ८२१ ' विश्वरूपः प्राणोऽग्निरुदयते ' " ८२२ वैश्वानर अग्नि का पार्थिवत्त्व " " ८२३ पार्थिव - रथन्तरसाम, और वैश्वानर " " ८२४ वैश्वानर की व्याप्ति " ८२५ स्तौम्यत्रिलोकी, और वैश्वानर " ८२६ प्रजापतिसंहिता का स्वरूप- समन्वय " ७२७ ‘ अथातः प्रजापतिसंहिता ' ८२ महीदास ऐतरेय, और अदितिसंहिता " 1 ८२६ प्रदितिसापेक्षा दिति 23 ३२१ ८३० प्रदितिपृथिवी के तीन लोक ८३१ अदिति का मातृत्त्व " " ८३२ अदिति का पितृत्त्व ८३३ प्रिित का पुत्रत्त्वं ८३४ विराट्पुरुष, और अदिति 11 ८३५ ' विराड् वै यज्ञः ' ८३६ त्रेताग्निस्वरूप- दिगदर्शन ८३७ अधिभूतानुगन ११ रुद्र 17 ८३८ अधियज्ञानुगत ११ रुद्र 27 ८३६ अध्यात्मानुगत ११ रुद्र ८४० अधिदैवतानुगत ११ रुद्र 99 ३२२ = ४१ अध्यन्त रिक्षानुगत ११ रुद्र = ४२ आध्यात्मिक वैश्वानरपुरुष " ४१ अत्रैव च – अपुरुषविध - सौरप्राणदेवता - स्वरूप-निदर्शनमुपरतम् - ( १ ) अथ- ( ३ ) –चान्द्रदेवतास्वरूप दिग्दर्शनम्

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शतपथ ब्राह्मणम् भाष्य - १-१ - मोतीलाल शास्त्री, पृष्ठ 209 का मूल पृष्ठ
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८४३ ' अत्यतिष्ठद्दशाङ्ग ु लम् ' ८४४ ' सहस्राक्षः ', और विज्ञानचक्षु ' ८४५ ' प्रज्ञानेत्रो लोकः ' ८४६ हृत्प्रतिष्ठ - जिर- मन ८४७ प्रतिष्ठात्मिका - भूमि ८४८ ' सहस्र ' शब्दार्थ- समन्वय सहस्रम् --भमा - पूर्ण, एवं सहस्र-८४६ ' सर्वं वै ८५० ‘ भूमा वै सहस्रम् ’ ८५१ सर्व - परम -- भ शब्द ८५२ प्राणनिम्वसाहस्री ७५३ सहस्रमस्तक २४ सहस्र नेत्र ८५ सहस्र चरण ८५६ सर्वभूतान्तरात्मा साक्षी ८५७ महिमामण्डल ८५८ दिति पृथिवी विषयसूची ३७ " ८७ः भोक्ता सुपर्णरूप जीव ८७७ ' द्वा सुपर्णा सयुजा सखायौ ' ८७८ सुपर्णचिति, और सुपर्ण " ८७६ वैश्वानराग्निमय विराट्पुरुष " 13 11 ८८० विराडात्मा और देवसत्य 71 ८८१ हिरण्यगर्भात्मा, और देवसत्य ८२ सर्वज्ञात्मा और देवसत्य ८८३ वैश्वानर की सर्वव्याप्ति ८८४ दशकल वैश्वानरात्मा पारिभाषिक ' परमात्मा ' 27 ८८६ धातु - मूल - जीव - सर्गत्रयी ३२८ ८८७ योनि, और रेतोभाव 73 " कुमाराग्नि, और वैश्वानर चित्राग्नि, और वैश्वानर 77 ८० पाशुकाग्नि, और वैश्वानर 17 ८६१ पाश - पशु - पशुपति " ८६२ चेतनसर्ग ८५६ स्तौम्यत्रिलोकी 77 ८६३ श्रृद्ध चेतनसर्ग ८६६ ब्रह्मसत्य - गर्भित देवसत्यात्मा ८६० उख्यापृथिवी ८६१ प्राणपृथिवी ८६२ देवसत्य चन्द्रमा ८६३ यज्ञात्मक देवसत्य ८६४ सत्यात्मक ब्रह्मसत्य ८६५ सत्यस्य सत्यात्मक आत्मसत्य ८६६ प्राणिनां देहमाश्रितः ' ८६७ ब्रह्मसत्य, और देवसत्य का तारतम्य ८६८ उभय सत्यानुगत श्रात्मसत्य ८७० देवसत्यात्मक पारिभाषिक ' ईश्वर ' ८७१ देवसत्यात्मक - पारिभाषिक- ' जीव ' ३२६ ६०२'श्रद्ध'बेतन - सृष्टि " ८६४ चेतनसर्ग ८६५ अचेतनसर्ग - स्वरूप- समन्वय 17 ८६६ शिपिविष्ट - अ चेतन सर्ग 13 ८६७ रयि, और प्राण " ८६८ रयि, और ' मूर्ति ' भाव " 1 ८६६ धातुसृष्टि, और विष्णु, 27 ६०० विष्णु, और शिविविष्ट " ६०१ एकात्मक धातुजीव 17 ६.०३ पुष्करपर्णात्मक स्तम्बसर्ग 37 ६०४ सौरतेज की अभिभूति 37 ६०५ वैश्वानर, और तैजस ८७२ देवसत्यात्मक - पारिभाषिक ' भोक्तात्मा ' ८७३ कर्मात्मा रूप देवसत्यात्मा 27 ६०६ द्वयामक मूलजीव " " ६०७ वृक्षचैतन्य का समन्वय ८७४ ' भोक्त ' त्याहुर्म्मनीषिणः ' " " ६०८ ' तस्मात् पश्यन्ति पादपाः ' ८७५ साक्षीसुपर्णरूप ईश्वर ६० त्वगिन्द्रियप्रधान पादपसर्ग ४२

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शतपथ - प्रथमखण्ड ६१० ' वृक्षाणामचैतन्यं न विद्यते ' ६११ श्रद्धं चैतन्यात्मक वृक्षचैतन्य ६१२ अन्त: संज्ञ - सर्ग ६१३ ‘ सुख - दुःख- समन्विताः ' -६१४ मूलजीव - व्यवहारसूत्र १५ प्रधान वैश्वानराग्नि ६१६ क्रियाप्रधान तैजसवायु ६१७ ज्ञानप्रधान प्राज्ञ आदित्य ६१८ हैमवती उमा, और चिच्छक्ति ६१६ चेतन सृष्टि स्वरूप- समन्वय ६२० जीव, और चेतन ६२१ ' पादप ' शब्द -- समन्वय ३३२ ६३४ मानवसृ ष्टिस्वरूप - समन्वय " ६४३ ' यो वै पादः, स हस्तः ’ ६४६ वानर, और मनुष्य ३३३ ६४७ विकल्प - नरात्मक- वानर " ६४८ पशु, और मानव - धर्म्मसमन्वित - वानर " ६४६ डारविन का प्रतिवाद ६५० नालच्छेदशून्या वानरसृष्टि ६५१ नाल च्छेदान्विता मानवसृष्टि.... " ६५२ भारतीय - विकासवाद " ६५३ विकासवादात्मक महिमावाद ६५५ महिमाविस्तार की सच्छन्दस्कता " ६५४ सछन्दस्क - मर्य्यादित विकास ६२२ पादसृष्टि ६२३ सपादसृष्टि ६२४ उपक्रमात्मिका श्रपादसृष्टि ६२५ मध्यस्था सपादसृष्टि ६२६ उपसंहारात्मिका - अपादसृष्टि ६२७ “ अमूल – उभयतः पुरुषः ' ६२८ ष्टविध देवसर्ग ६२६ प्रथमा मसंज्ञासृष्टि, और कृमि ६३० ' प्राणोऽस्नि प्रज्ञात्मा ' ६३१ अग्न - वायु, इन्द्र, और ' तृण ' ६३२ इन्द्र का ज्ञानीय तृरंग में विलयन ६३३ भृगुत्रयी, और अङ्गिरात्रयी ६३४ ईश्वरशरीर का महान् ६३५ ' मम योनिर्महद्द्ब्रह्म ' ६३६ आप्य वायव्य - सौम्य - नीव ६३७ कीटसृष्टि - स्वरूप- समन्वय ६३८ सहस्रपात् सृष्टि ६३६ शतपात् - सृष्टि ६४० अष्ट - षट् - पात् - सृष्टि ६४१ पशुसृष्टि - स्वरूप- समन्वय ६४२ सौर- पार्थिव - प्राणसाम्यानुगता पशुसृष्टि ६४३ पक्षिसृष्टि - स्वरूप- समन्वयः - ' ' ' ३३४ ६५६ श्राध्यात्मिक - प्राणविकासक्रम 99 ६५७ शिरोगुहा, और सप्तप्राण ६५८ उरोगुहा, और सन्तप्राण " ६५६ उदरगुहा, और सप्तप्राण " ६६० त्रस्तिगुहा, और सप्तप्राण " ६६१ ' गुहाशया निहिताः सप्त सप्त ' 77 ६६२ सप्तप्राणाः " " " 17 ६६३ सप्तार्चिषः " ६६४ सतहोमाः " ६६५ सप्तलोकाः 23 ६६६ चक्षुः स्वरूपसमन्वय 33 ६६७ सप्त - सस- तावात्मक गुहास्वरूप-परिलेख ३३५ ६६८ द्विपाद - मानव सृष्टिधारा " " ६६६ सहस्रपाठोपकान्ता द्विपाद - सर्गोपसंहृता " 29 ६७० सांख्याभिमत सर्गसमन्वय " ६७१ मानव और सर्बज्ञ – इन्द्र ६७२ इन्द्र, और तन्निबन्धन व्याकरण " ६७३ ' त्रायुः खात्, शब्दस्तत् ' ३३६ ६७४ वर्णविभाजक प्राज्ञ इन्द्र ४३ ६७५ ध्वनिवागनुगता पश्वादिसृष्टि