Shatapathabrahman 1 1 — पृष्ठ 241–250
शतपथ ब्राह्मणम् भाष्य - १-१ - मोतीलाल शास्त्री · पृष्ठ 241–250
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३४५ तर्कत्रयी ( ३० ) ३४६ शब्दब्रह्मत्रयी ( ३१ ) ३४७ अनलत्रयी ( ३२ ) ३४८ तत्त्वत्रयी ( ३३ ) ३५.६ त्रिफलत्रयी ( ३४ ) ३५० कालखण्डत्रयी ( ३५ ) ३५.१ त्रिकुटी ( ३६ ) ३५२ वित्तगतित्रयी ( ३७ ) ३५३ आत्मगतित्रयी ( ३८ ) ३५४ संस्कारत्रयी ( ३६ ) ३५५ संस्कारप्रकारत्रयी ( ४० ) ३५६ प्रमाणत्रयी ( ४१ ) ३५७ नियतिस्त्रयी ( ४२ ) ३०८ प्राणायामत्रयी ( ४३ ) ३६६ वीर्यत्रयी ( ४४ ) ३६० शक्तित्रयी ( ४५ ) ३६१ पुण्यपापत्रयी ( ४६ ) ३६२ आस्तिकभेदत्रयी ( ४४ ) ३६३ नास्तिकभेदत्रयी ( ४ = ) ३६४ जिनत्रयी ( ४६ ) ३६५ अप्सरात्री ( ५० ) ३६६ योगत्रयी ( ५१ ) ३६७ शरीरयात्रासाधनत्रयी ( ५२ ) ३६८ निगमत्रयी ( ५३ ) ३६६ व्याधित्रयी ( ५४ ) ३७० पशुश्रेष्ठत्रयी ( ५५ ) ३७१ पक्षिश्र ेष्ठत्री ( ५६ ) ३७२ वायुविशोधकवृक्षत्रयी ( ५७ ) ३७३ त्रिसत्य आत्मदेवता २७४ त्रिगुणात्मक वेदशास्त्र ३७५, महोक्थ - महाव्रत - पुरुष - रूप - वेदतत्त्व ३७६ वेदमूर्त्ति ईश्वर ३७७ वेदमूर्ति यज्ञमय ईश्वर ३७८ पञ्चावयव - यज्ञ ५८ ३७६ पञ्जदेवता, और भौतिक विश्व ३८० यज्ञात्मक विष्णु की सर्वव्याप्ति " ३८१ ' अन्तर्यामी ' शब्द का समन्वय ३८२ पृष्ठचतुष्टयी , ३८३ पृष्ठस्वरूप - दिगदर्शन " ३८४ शिव, और विष्णु का हृदयैक्य 17 11 ३८३ वाङमय इन्द्रतत्त्व ५१६ ३८६ अन्नादमय अग्नितत्त्व ३८७ समष्ट्यात्मक शिवतत्त्व 77 ३ - ८ स्पर्द्धा, और वीरण 21 ३८६ श्रुतिसमन्वय 11 ३६० मलानुगता वेदसाहस्री 11 ३६१ तूलानुगता - लोक – वाक् –साहस्री 11 ३६२ वेद - लोक - प्रजा - त्रयी 71 ३६३ वेदत्रयी. " ३६४ लोकत्रयी ३६५ देवतात्रयी 77 ३६६ अथर्व, श्रापः, और पितर 17 ३६७ वेद - लोक - प्रजा समन्वयात्मक विश्व " ३६८ त्रयीवेद, श्रौर अथर्ववेद २६६ अग्निवेद, और सोमवेद II ४०० वेदि, और महावेदि. 11 ४०१ यावती वेदि, तावती पृथिवी " ४०२ पार्थिव - ‘ यज्ञम।त्रिकवेद ' 17 ४०३ कृष्णमृगचर्म्म, और पार्थिववेद " ४०४ वेदत्रयी, और गोपथब्राह्मण 77 ४०५ आत्मा - प्रतिष्ठा ज्योति 17 ४०६ अग्निवेदत्रयी का स्वरूप- समन्वय ४०७ प्रतिष्ठात्मिका वेदत्रयी I ४०८ आत्मधृति, और वेद 13 ४०६ असतोधृति, और वेद 11 सतोधृति, और वेद ४१० " ४११ आत्मानुगता वेदत्रयी ४१२ उक्थ, और वेद 11 ७४
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शतपथ - प्रथमखण्ड ४१३ ब्रह्म, और वेद ४१४ साम, और वेद ४१५ ज्योतिर्लक्षणा वेदत्रयी . ४१६ ज्योतिस्त्रयी ४१७ यजुर्वेदात्मक आत्मवेद ४१८ पञ्चधा विभक्त भूतज्योति ४१६ भूतज्योति और सत्यज्योति ४२० ज्योतिषां ज्योति: ४२१ सर्वमिदं विभाति ४२२ भूतज्योति, और चतुरिन्द्रिय ४२३ विशेष, और विशिष्ट - भाव ४२४ अमृतत्त्व, और विशेषभाव ४२५ नामरूपात्मक सत्य विवर्त्त ४२६ सत्य से अमृत का श्राच्छादन ४२७ ज्योतित्री का पारस्परिक सम्बन्ध ४२८ ] अन्तर्ज्योतिर्लक्षण ज्ञानज्योति ४२६. ज्ञानज्योति, और भूतज्योति ४३० ज्योतियों का अन्तर्भाव ४३१ सौरज्योतिर्विवर्त्त ( १ ) ५२५ ४४७ आत्मा, और यजुः ४४८ ज्योतिः, और साम ५२६ ४४६ सत्तात्मिका प्रतिष्ठा 29 ४५० रसानन्दात्मक- श्रात्मा " " ४५१ चेतनामय – ज्योतिर्भाव " " ४५२ सच्चिदानन्दवेदमूर्ति ईश्वर ४५३ कृष्णमृगचर्मात्मक वेद ५२७ ४५४ प्रसङ्गसङ्गति ( १ ) ४५८ निर्वाह कैक्य सङ्गति " " ४५५ उपोद्घातसङ्गति ( २ ) " " ४५६ हेतुतासङ्गति ( 3 ) " " ४५७ अवसरसङ्गति ४ ) ( ५ ) " ४५६ काय्यैक्यसङ्गति ( ६ ) 13 ४६० कृष्णो भूत्त्वा चचार " ४६१ कृष्णमृगचर्म्म, और यज्ञ " ४६२ ऐतरेयसम्मता यज्ञपरिभाषा " ४६३ यजुःसम्मता यज्ञपरिभाषा " ४६४ यज्ञमूलक तीन अनुबन्ध ४६५ अन्न, ऊर्क्, और प्राण - समन्वय ५२८ ४३२ चान्द्रज्योतिर्विवर्त्त ' ( २ ) 37 ४६६ यज्ञ का निष्कर्षार्थ ४३३ ग्राग्नेयज्योतिर्विव ' ( ३ ) ४३४ वाङमयज्योतिर्विवत् ( ४ ) ४३५ ' आत्मज्योतिर्विवत्त ' ( ५ ) " ४६७ विश्व की यज्ञरूपता " ४६८ सोरयज्ञस्वरूपदिग्दर्शन " ४६६ देवग्रामघन सूर्य ४३६ श्रात्मप्रतिष्ठात्मक सूर्य्य " ४७० सौरयज्ञ की देवरूपता ४३७ नामरूपात्मिका सत्यज्योति का स्वरूप-४७१ भूपिण्ड, और सूर्य का सामीप्य 33 समन्वय ४३८ ज्ञान, भूत, सत्य, त्रयी ४३६. ज्ञानज्योतिर्मय ब्रह्मनिःश्वसितवेद " ` ४७२ उपग्रहनिर्माण - दिग्दर्शन 33 ४७३ सूर्य्यं के विविध उपग्रह ४४० भूतज्योतिर्म्मय गायत्री मात्रिक वेद " " ४७४ भूपिण्ड का सूर्योपग्रहस्व ४४१ सत्य, अग्निभाव ५२६ ४७५ भूतमयी पृथिवी ४४२ सत्याग्नि, और यजुर्वेद ४४३ बजुर्वेद, और पुरुषतत्त्व , ” ४७६ सौर सावित्राग्नि 39 ४७७ पार्थिव गायत्राग्नि ४४४ सत्य, और सामवेद ४४५ ज्योतिर्मय सामवेद की त्रयीरूपता ४४६ प्रतिष्ठा, और क " ४७८ सौर- आदित्यप्राण • ४७६ पार्थिव श्रादित्यप्राण 76 ४८ • श्रङ्गिरा का ऊर्ध्वगमन ७५
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४८१ सौराग्नि का प्रतिफलन ४८२ प्रतिफलित अग्नि, और अश्व ४८३ अग्निप्रधान भूलोक ४८४ इन्द्रप्रधान - सूर्यलोक ४८५ सौराग्नि की शुक्लरूपता ४८६ पार्थिवाग्नि की कृष्णरूपता ४८७ वृक्ष में सुप्त कृष्णाग्नि ४८८ तन्द्रारहित पार्थिव अग्नि ४८६ हव्यवाट् पार्थिव अग्नि ४६० पार्थिव अग्नि की मृग्यमाणता ४६.१ पार्थिव अग्नि की कृष्णमृगरूपता ४६ २ पार्थिवस्तर की कृष्णमृगचर्मरूपता ४६ ३ प्राणात्मक अमृताग्नि ४६४ भूतात्मक मर्त्याग्नि ४६५ पार्थिव प्राणाग्नि का व्याप्तिस्थान ४६६ सप्तदशस्तोमस्थ आहवनीयाग्नि ४६७ अग्नीषो गत्मक - वितानयज्ञ ४६८ वेदाः सत्यम् ४६६ यज्ञ के द्वारा सत्य का वितान ५०० त्रयीमय यज्ञ की कृष्णमृगरूपता ५०१ यज्ञ, और कृष्णाजिन ५०२ कृष्णमृग के तीन वर्ण ५०३ यज्ञाधारभूत कृष्णमृग ५०४ भूपिण्ड का कृष्णमृगत्त्व ५०५ भ्रुमहिमा का कृष्णमृगचर्म्मत्त्व ५०६ सौरदेवमण्डल से कृष्णमृग का पलायन ५०७ पार्थिवदेवताओं के द्वारा चर्म्मग्रहण ५०८ पार्थिवपरिभ्रमण, और कृष्णमृगचर्म्म ५०६ श्रुत्यक्षरसंस्मरण ५१० मूर्त्तिमय ऋग्वेद ५.११ मण्डलात्मक सामवेद ५१२ मण्डलात्मक द्युलोक ५१३ मूर्तिरूप भूलोक ५१४ मध्यस्थ अन्तरिक्षलोक विषयसूची ५३४ ५३१ ५१५ वस्तुमण्डलात्मक वषट्कार ५२२ ५१६ वषट्कारात्मिका महावेदि ५१७ चतुर्लोकात्मिका महापृथिवी 19 ५१८ वेद, और वेदि ५१६ वेदप्रतिष्ठात्मिका वेटि " ५२० त्रिवृत्स्तोम, और ऋग्वेद की कृष्णता ५२१ पञ्चदशस्तोम, और यजुर्वेद की बभ्रुत ता ५२२ एकविंशस्तोम, और सामवेद की शुक्लता " ५.२३ यदि वा इतरथा " ५२४ एकविंशस्तोम, और ऋक् की शुक्लता 31 ५,२५ त्रिणवस्तोम, और यजु की बभ्रु ता " ५२६ त्रयस्त्रिंशस्तोम, और साम की कृष्णता 39 ५२७ सौरवेदसंस्थान " ५२८ एकविंशस्तोमात्मक हिरण्मयमण्ड न ५२६ त्रयस्त्रिशस्तोमात्मक आपोमण्डल " ५.३० चतुस्त्रिशस्तोमात्मक वेदमण्डल ५:३१ चतुस्त्रिंश प्राजापत्यमण्डल 17 ५३५ ५३३ ५३२ सूर्य्यपिण्ड का घोरकृष्णत्त्व ५३३ ज्योतिः - प्रवर्त्तक सोम " ५.३४ सौरवेद के कृष्ण - शुक्ल - भाव 37 ५.३५ सौरवेद के शुक्ल - कृष्ण - भाव " " " ५.३६ वस्तुस्वरूप - परिचय " ५३७ ऋक् की व्याप्ति का समन्वय 17 " " ५३८ ऋङमयी मूर्तियों का वितान 91 39 ५३६ ऋक् से समतुलित साम " " 33 ५४० ' ऋचा समं मेने ' 31 " ५४१ पूर्व - पूर्व - मण्डलों का ऋकृत्व 37 " " ५४२ उत्तर - उत्तर- मण्डलों का सामच्त्व 22 " " ५४३ ऋक्, और सामों का विपर्य्यय " " ५४४ त्रयीविद्यामय सूर्य ५३४ " , ५४५ श्वेतद्वीपनिवासी सूर्य्यनारायण ५४६ कृष्णमृगत्रवीस्वरूपपरिलेखः ५३६ 7 ५४७ पञ्चविधसामानुगत - पार्थिव - साममण्डल -I I परिलेख: ५२७ " ७६
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शतपथ - प्रथमखण्ड ५४६ पार्थिव सम्वत्सरातिमान परिलेखः ५४८ पारावतपृष्ठानुगत - पार्थित्र- त्र - जागतमण्डल-परिलेख: ५५० यज्ञमात्रिकवेदत्रयी का संस्मरण ५५१ विश्वानुमता वेदत्रयी ५५२ ईश्वरप्रजापति की पाँच कलाएँ ५५३ पञ्चकलात्मक महाविश्व ५३८ ५८१ ऋक् यजुः - साम, और वेदत्रयी ५८२ यज्ञात्मलक्षण दैवात्मा ५.४१ 29 ५३६ ५८३ शिल्पी प्रजापति ५४२ 26 ५४० ५८४ प्रजापति का विश्वशिल्प ५८५ असंस्कृत - विश्वातीत प्रजापति 19 " " ५५४ विश्वात्मक सर्वहुतयज्ञ ५५५ विश्वयज्ञ की पाङ ्मक्लता ५५६ मौलिक, और यौगिक तत्त्व ५५७ विश्व के अमृतप्रधान पर्व ५५८ विश्व के मृत्युप्रधान पर्व ५५६ विश्व का उभयात्मक पर्व ५६० परब्रह्म, और अमृतभाव ५६१ श्रवरब्रह्म, और मृत्युभाव ५६२ परावरब्रह्म, और उभयभाव ५६३ ‘ पर ' आत्मा, और अमृतविश्व ५६४ ' अवर ' आत्मा, और मर्त्यविश्व ५६५ ' परावर ' आत्मा, और उभयविश्व ५६६ अन्नादमय - पृथिवीलोक ५६७ अन्नमय - चन्द्रलोक ५६८ वाङमय - सूर्य्यलोक ५६६. आपोमय - परमेष्ठी लोक ५७० प्राणमय - स्वयम्भूलोक ५७१ यज्ञमूर्ति ईश्वरप्रजापति ५७२ पृथिवी, और कृष्ण - ऋक् " " 27 ,, ५८६ संस्कृत - विश्वचरप्रजापति ५८७ आत्मसंस्कृति और शिल्प ५८ छन्दोमय आत्मसंस्कार ५८६ प्राणात्मक प्राजापत्य शिल्प ५६० ' प्राणा: शिल्पानि ५६१ अनुरूप - प्रतिरूप- शिल्प ५६२ उभयात्मक - अभिरूप शिल्प .. ५६३ प्रतिकृतिशिल्प 71 22 27 ५६४ चित्रजगत्, और प्रतिकृति 17- ५६५ ईश्वरीय- प्रतिकृतिशिल्प ५६.६ मानव, शालग्राम, और कच्छप ५६.७ शिल्पानुगत उपासनाकाण्ड ५६८ यज्ञशिल्पात्मक मानव ५६६. कश्यपशिल्पात्मक कूर्म्म ६००कूर्म की दधि घृत - मधुरूपता ६०१ त्रैलोक्यरस - समन्वय ६०२ कूर्म्मचिति, और यज्ञप्रतिकृति 17 11 " 11 " 37 ५४३ 11 " " " 11 11 11 23 ६०३ स्वयम्भू का प्रतिकृतिशिल्प शालग्राममूर्ति ५४४ ६०४ शालग्राम का वास्तविक स्वरूप ६०५ पार्थिवाग्नि प्रजापति का प्रतिकृति - शिल्प -33 ५.७३ चान्द्रान्तरिक्ष, और बभ्र - यजुः ५७४ सूर्य्य, और शुक्ल साम ५७५ परमेष्ठी, और कृष्णसामात्मिका ऋक् ५७६ स्वयम्भू, और शुक्ल साम ५७७ त्रयीविद्यात्मक यज्ञ का स्वरूप- समन्वय ५७८ हौत्र - प्रौद्गात्र - श्रध्वर्यव, और कर्म्मत्रयी ५७६ शस्त्र – स्तोत्र - ग्रह - और कर्म्मत्रयी ५८० अग्नि वायु - आदित्य और कर्म्मत्रयी ५४१ कृष्णमृग ६०६ कृष्णमृगाग्निप्रधान देश , " ६०७ कृष्णमृग का त्रयीवेदत्त्व ३०८ कृष्णमृगचर्म की यज्ञरूपता ६०६ वेदसम्पत्ति, और कृष्णामृग ६१० यज्ञिय - भारतराष्ट्र ६११ यज्ञ की सर्वता, और कृष्णाजिन " " ६१२ कृष्णमृगचर्म्मग्रहण समन्वय " " ६१३ सौर ब्रह्मवर्चस् " " 13. 31 21 ५४५ 71 27 ७७
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६१४ ब्रह्मवर्चस, और कृष्णामृगचर्म ६१५ सावित्रीसंस्कार, और कृष्णमृगचर्म्म ६१६ पद्धतिस्वरूप - समन्वय ६१७ कृष्णमृगचर्म्म, और शर्म्म ६१८ वेदभाषा का ' शम्म ' शब्द ६१६ संस्कृतभाषा का ' चर्भ ' शब्द ६२० निरुक्तक्रमानुगत वर्णविपर्यय ६२१ प्रयत्नतारतम्यमूलक व्यवहार ६२२ अग्निमय - वाग्विवर्त्त ६२३ अग्निंचलाचल, और उच्चारणभेद ६२४ देवो भूत्त्वा देवं भावयेत् ६२५ शर्मा - वर्मा - गुप्त - शब्दत्रयी ६२६ शक्तित्रयरूपा वर्णत्रयी ६२७ प्रकृतिसिद्ध आक्रमण ६२८ आधिभौतिक आक्रमण ६२६ श्रध्यात्मिक आक्रमण ६३० आक्रमणरक्षिका वर्गद्वयी ६३१ शर्म्मा, और वर्म्मा का स्वरूप - समन्वय ६३२ कृष्णमृगचर्म्म का अवधूनन ६३३ श्रवधूनन, और असुर - पराभव ६३४ ' राक्षस ' स्वरूप ' - परिभाषा ३३५ ' ' अराति ' स्वरूप - परिभाषा ६३६ अवधूननकर्म्म - समन्वय ६३७ कृष्णमृगचर्म्मास्तरण ६३८ श्रदिति की त्वचा ६३६ अक्षुब्धा अदिति, और चर्म ६४० व्यापक ईशभाव ६४१ प्राणसाजात्यमूला स्वस्ति ६४२ पारस्परिक - संजानन ६४३ सौर- अदिति मण्डल परिलेख ६४४ उलूखल - स्थापन ६४५ कर्म्मानुगता - स्वतन्त्र - धारा ६४६ अन्तराय से धारा विच्छेद ६४७ धाराविच्छेद से सुरप्रवेश विषयसूची ५४५ ६४८ स्पर्शानुगत - धाराकम ६४६ सान्तपन अग्नि, और ब्राह्मण 99 " ६५० असुरघ्न, और रक्षोघ्न अग्नि ४४६ ६५१ ' ब्राह्मणो हि रक्षसामपहन्ता ' ६५२ हविर्यज्ञानन्तर भावी यज्ञों का संस्मरण 21 ६५३ सोम, और ' राजा ' ६५४ ' राजा ', और ' अन्न ’ 93 22 ६५५ सोम, और सोमवल्ली ६५६ सोमांशु का अभिषव ६५७ हविःसोम, और हविर्यज्ञ 13 ६५८ वल्लीसोम, और सोमयज्ञ 31 12 ३५६ घनतासम्पादक ' अद्रि ' सोम ५४७ ६६० ‘ अश्मा ', और - ‘ अद्रि ' 1 ६६ ९ वानस्पत्य अि " ६६२ पृथुबुध्न ग्रावा 17 ६६३ अदिति - उलूखल, और मुसल ६६४ परस्पर संजानन, और स्वस्ति 11 ६६५ उलूखल में हविःस्थापन 39 ६६६ यज्ञस्वरूप - संस्मरण ६६७ यज्ञ, और यज्ञात्मा 27 ५४८६६८ पिण्ड, और सोमाहुति ६६६ संकोचधर्म्मा सोम ६७० अग्नि का सशरीरत्व ६७१ यज्ञ, और देवात्मा 23 ६७२ ‘ तेनाग्नेस्तनूः ’ 17 ६७३ हविग्रहण, और वाग्विसर्जन ६७४ ' हविष्कृदेहि ', और वागविसर्जन 29 " ६७५ विभिन्न पक्ष, और उनकी कामचारता ६७६ हविः, और वाक् ५४६ ६७७ अग्नि, और वाक ५५.० ६७८ वाक्, और वाग्विसर्जन ६७६ वाग्विसर्जन समन्वय 99 ६८० हविग्रहानुगता विशेषता ६८१ विष्णु, और यज्ञस्वरूप 19
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६८२ विश्वसञ्चालक- अक्षरपञ्चक ६८३ यज्ञ, और यज्ञसंधान ६८४ ' यज्ञो वै विष्णुः ' का समन्वय ६८५ बृहद्यावा, और मुसल ६८६ हविः संस्कारक मुसल शतपथ - प्रथमखण्ड ५५३ ७१४ श्रव्ययानुगता भावसृष्टि " 37 ७१५ अक्षरानुगता गुणसृष्टि ७१६ क्षरानुगता विकारसृष्टि ५५७ ,, ५५४७१७ ऋषि, और मनु ७१८ मनु, और मानसी सृष्टि ७१६ आयु, और मनु ७२० अमृत – मर्त्य – कलाविवर्त्त " " ७२१ विकारपञ्चकात्मक पञ्च विश्वपुर ७२२ अमृत- मर्त्य - श्रमृतमर्त्य - विवर्त्तत्रयी " 76 21 " ५५८ " ७२३ पञ्चकल विश्व, और उस के तीन विवर्त्त " " " 71 ६८७ हविष्कृत, और वाक् ६८८ पञ्चकोशब्रह्म का संस्मरण ६८६ पार्थिव मृद्भाग की सर्वरूपता ६६० पञ्चभूतमयी पृथिवी ६६१ ' भूतानां रसः पृथिवी ' ३६२ वाक से हवि का निर्माण ६६३ वाक् का प्रतिनिधि आग्नीध ६६४ विसर्जनानुगत यज्ञवितान ६६५ वाङमय यज्ञ ६६६ अनुगम, निगम- परिभाषाएँ ६६७ ‘ चत्त्वारिं वाक् परिमिता पदानि ' ६६८ एहि, और ब्राह्मण ६६६ आगहि, और क्षत्रि ७०० द्रव, और वैश्य ७०१ श्रधाव, और शूद्र ७०२ प्रकृतिसिद्धा आह्वानचतुष्टयी ७०३ एहि ' स्वरूप- समन्वय ७०४ ब्राह्मण, और उसका मित्रभाव ७०५ यजमानपत्नी, और हविष्कृत् ७०६ दृषदुपलानुगत -- समाहननकर्म्म ७०७ वैदिक - आाख्यान - प्रकारों का संस्मरण ७०८ मनु मानवी ऋषभादि का संस्मरण ७२४ कोशात्मक अव्ययब्रह्म ४५५ ७२५ अव्यथानुबन्धी- सर्वज्ञ अक्षर 17 " , ७२६ अक्षरानुबन्धी – सर्वशक्ति अक्षर ७२७ क्षरानुबन्धी - सर्ववित I अक्षर ७२८ मध्यस्थ अक्षर की सर्वरूपता ७२६ मुक्तिसाक्षी अव्ययात्मा ७३० सृष्टिसाक्षी अव्ययात्मा ७३१ कलाभात्रों का रहस्यपूर्ण समन्वय " ७२२ विश्वकला – स्वरूप - तालिका 21 ५५६ अथ मनुःस्वरूपदिग्दर्शनम् ७०६ सूत्रात्मक बीजाव्ययपुरुष का संस्मरण ८१० अव्यय की विश्वालम्बनता ७११ अव्यय का विश्वस्रष्टृत्र ७१२ अव्यय का विश्वरूपत्त्व ७१३ अव्यय का षोडशीप्रनापतित्त्व ७३२ ईश्वरप्रजापति – स्वरूप – तालिका ७३४ हिरण्यगर्भमूला सृष्टि, और सूर्य्य ७३५ अपूर्वसत्ताधारणात्मक वस्तु का ‘ जन्म ’ 17 ७३६ जन्म, और - ‘ ग्रस्तिमान् ' " ७३७ आत्मकलात्रयी का समन्वय " ७३८ वस्तुभाव, श्रौर- ' अस्ति ' ७३६ सत्ता का स्वरूप - लक्षण ७४० प्रथमसत्तात्मक सूर्य्य ७४१ ‘ सनवर्त्तत – अग्रे ' ७४२ चतुर्विधा सृष्टि ५५७ ७४३ सृष्टिचतुष्टयी का मूल सूर्य्य " ७४४ मनु का तात्त्विक स्वरूप- परिचय ७४५ कालाग्नि, और कालपुरुष 78 ७४६ सर्वहुतयज्ञ ७६ ७४७ कालानुगत यज्ञपुरुष " 11 11 " " " ५५६ " 22 ५६० " " 11 27 "
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७०८ अग्नि और मनु ७४६ शाश्वतब्रह्म, और मनु ७५० परात्पर, और शाश्त्रतब्रह्म ७५१ क्षर, और पारिभाषिक –'ब्रह्म ' ७५१ निर्विशेष, और ऐकान्तिक सुख ७५२ पुरि शेते, और पुरुष ७५३ गीतावचन - संस्मरण ७५४ श्रात्ममहिमाविव र्तोपक्रम ( श्रवधेय ) ७५५ माया, और कला - परिग्रहद्वयी ७५६ गुण, और त्रिकार परिग्रहद्वयी ७५७ आवरण, और अञ्जन- परिग्रहद्वयी ७५८ अचिन्त्य, अप्रतक्य - तत्त्व ७५६. परात्पर - परमेश्वर ७६० परात्पर, और – ‘ शाश्त्रतधर्म्म ' ७६१ शुद्धरस, और -'ऐकान्तिक सुख ' ७६२ परमेश्वर की भूमा ७६३ मायापरिग्रहावच्छिन्न मायी ७६४ ' मायी, और महेश्वर विषयसूची ५६० 39 " ७८१ ' सहस्रधा महिमानः सहस्रम् ' ७८८२ महती सम्भूतिः ७८३ अश्वस्थ, और अव्ययपुरुष 17 ७८४ पुरुष, और प्रकृति ५६१ ७ = ५ पुरुषानुगता प्रकृति 27 ७८६ रसानुगता अमृता प्रकृति 27 ७८७ बलानुगता मर्त्या प्रकृति " ७८८ अमृता पराप्रकृति " ७८६ मर्त्या अपराप्रकृति 39 ७६० त्रिपुरुषपुरुषात्मक पुरुषाव्यय " ७६१ सतपुरुषपुरुषात्मक – स्वयम्भू " ७६२ त्रिपुरुष, और गीता 33 ' ७६३ ' पुरुष ' और – अमृतम् ' ८६४ ' परा प्रकृति ' और ' ब्रह्म ' 22 ७६५ ‘ अपराप्रकृति ', और ' शुक्रम् ' " ७६६ ' अमृतम् ', और ' श्रधिष्ठान ' 22 ७६७ ' ब्रह्म ', और ' निमित्त ' " ' ७६८ ' शुक्रम् ', और ' उपादान ' ७६५ महेश्वर ' और अश्वत्थब्रह्म ७६६ प्रथमरेखाचित्रानुगत महेश्वर ६६७ माया - प्रकृति, और मायी महेश्वर ७६८ अखण्ड धरातल और अगणित ' वृत्तीजा ' ७६६. अगणिताण्डपराणुचर्या ७७० ' जा के रोम कोटि ब्रह्मण्डा ' ७७१ अर्काभिव्यक्ति, और अश्वत्थ ७७२ अश्वत्थात्मक सहस्रवत्शेश्वर ७७३ सहस्र शब्द का समन्वय ७७४ वल्शात्मिका शाखा ७७५ पञ्चपुण्डीरा - प्राजापत्यात्रल्शा ७७३ ‘ सहस्र ं वै पूर्णम् ’ १७७७ असंख्य - अनन्त - श्रश्वत्थ ७७८ ‘ सहस्रत्रल्शा त्रि वयं रुहेम ' ७७६ हजारो के हजारों ' ७८० वर्त्तृलमण्डल की अच्छिद्रपवित्रता " " ५६२ " ७६६ ब्रह्म - ब्रह्मात्मक - अक्षरपुरुष ८०० अमृतप्रधान - अधिदैवतविवर्त्त ८०१ ब्रह्मप्रधान - अध्यात्म विवर्त्त ८०२ शुक्रप्रधान - श्रधिभूतविवर्त्त ८०३ श्रात्मा के तीन महिमा विवत्तं ८०४ अमृत, और प्रतिष्ठा ८०५ ब्रह्म, और धृति ८०६ शुक्र, और विधृति ८०७ सञ्चरपक्ष, और तीन आत्मा " ८०८ प्रतिसञ्चरपक्ष, और एक आत्मा 17 ८०६ तदेव और श्रात्मा " 23 ८१० अश्वत्थब्रह्मस्वरूप - समन्वय ८११ सनातन अश्वत्थ, और कठोपनिषत् ८१२ पाङक्त - यज्ञ का संस्मरण ८१३ पञ्चचिति, और पञ्चावयव यज्ञ " ८१४ प्राथमिक छन्दोरूप ८० ५
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P ८१५, छन्दोरूपात्मक कालपुरुष ६१६ छन्दितरूपात्मक यज्ञपुरुष ८१७ ' कालो यज्ञ ' समैरयत् ' ८१८ कालपुरुषानुगत यज्ञपुरुष ८१६. कालपुरुषात्मकं अश्वत्थब्रह्म ८२० विवर्त्त'त्रयी, और पञ्चमहिमाभाव ८२१ मृताव्यय के पञ्चमहिमाभाव ८२२ ब्रह्माक्षर के पञ्चमहिमाभाव ८२३ शुक्रक्षर के पञ्चमहिमाभाव ८२४ षोडशकल - अश्वत्थप्रजापति ८२५ मनोघना ज्ञानज्योति ८२६ प्राणघना कर्म्मज्योति ८२७ बागघना अर्थज्योति ८२८ ज्योतिषांज्योतिर्लक्षण परज्योति ८२६ सहस्रशेश्वर की सर्वव्याप्ति ८२० अमृताव्ययात्मक ईश्वरविव ८३१ ब्रह्माक्षरात्मक जीवविवत्त ८३२ शुक्रज्ञरात्मक जगद्विवर्त ८३३ उक्थ- ब्रह्म - साम - मय श्रात्मा ८३४ प्रभव - प्रतिष्ठा - परायणात्मक श्रात्मा ८३५ प्राकृतात्मविवत्त - पञ्चक ८३६ ईश्वरीय - प्राकृतात्म - विवर्त्त पञ्चक ८३७ जैव - प्राकृतात्मविवत पञ्चक ८३८ षट्परिग्रह- संस्मरण ८३६ ' कला ' नामक द्वितीय - परिग्रह ८४० ' कला ' और ' कलभाव ' ८४१ कलभाव, और ' सकल ' भाव ८४२ सकल, और ' सकलषोडशी ' ८४३ सनातन षोडशी ८४४ महेश्वर, और सकल का समन्वय ८४५ उभयात्मक आधिदैविक ईश्वर ८४६ गुणपरिग्रह का संस्मरण ८४७ गुणात्मक सगुणभाष ८४८ सगुणात्मक - ' सत्यप्रजापति ' शतपथ - प्रथमखण्ड ५६४ ८४६ विकारपरिग्रह का संस्मर ५० विकारात्मक - सविकारभाव " ८५१ सविकारात्मक - ‘ यज्ञप्रजापति ' " ८५२ द्वयात्मक ब्रह्माक्षरसंस्थान " " ८५३ इन्द्राविष्णू, और द्वितीय संस्थान " ८५४ उभयात्मक - ‘ प्रतिमाषोडशी ' ८५५ विश्वेश्वर प्रजापति " ८५६ उभयात्मक - आध्यात्मिक जीव >> ८५७ श्रावरण परिग्रह का संस्मरण ८३८ आवरण, श्रौर सावरणविद् " ५६५ ८५६ विराट्प्रजापति ८६० अञ्जन - परिग्रह का संस्मरण " और साञ्जन विश्व ८६१ अञ्जन, ८६२ द्वयात्मक शुक्रसंस्थान " " ८६३ ' उपेश्वरषोडशी ' " ८६४ उभयात्मक आधिभौतिक जगत् ८६५ त्र्यात्मक पोडशीपनापति " ८६६ षोडशी के महिमाभाव 37 ८६७ अश्वत्थ तालिका ८६८ सनातनषोडशी - तालिका " ८६६ प्रतिमाषोडशी - तालिका ८०० उपेश्वरषोडशी - तालिका ८७१ सनातनघोडशी - दिग्दर्शन " ५६६ ८७२ प्रतिमाषोडशी - दिग्दर्शन ८७३ उपेश्वरषोडशी - दिग्दर्शन " ८७४ अश्वत्थषोडशी - दिग्दर्शन " " ८७५ षोडशीत्रयी, और ग्रात्मन्वीभाव ८७६ आत्मन्वी स्वरूप- परिभाषा 77 " ८७७ विवर्त्तत्रयी का दहरोत्तर - सम्बन्ध ८७ वसुधानकोश - सम्बन्ध ७६ दहर और उत्तर " ८५० सम्बन्ध - समन्वय गर्भ, और दहरोत्तर " ८२ श्रात्मन्वी की विशिष्टरूपत्ता " " II
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८८३ हृदि - श्रयमात्मा ८८४ आत्मा, पदं - पुनःपम् ८८५, अन्तःशरीरात्मक - पदम् ६ बहिःशरीरात्मक - पुनः पदम् ८८७ शरीर और महिमा शरीरात्मक - पदम् महिमात्मक - पुनः पदम् ८६० अन्तःपृष्ठ, और बहिःपृष्ठ ८६.१ पिण्ड, और मण्डल ८६. २ पदम्, और पुन: पदम् ८६३ शरीर, और शरीरमहिमा ८६४ स्पृश्यानुगत निण्डभाव ८६५ दृश्यानुगत महिमाभाव ८६६ त्रिसमन्वयात्मक - प्रजापति ८६७ एतावानस्य महिमा ८६८ तो ज्यायश्च पूरुषः ८६६ व्यष्टि भावानुवन्धी विवर्त्त ६०० श्रात्मस्थानीय अन्तर्यामी ६.०१ पदस्थानीय - वेदात्मा ६०२ पुनः पदस्थानीय सूत्रात्मा ६०३ व्यात्मक प्रथम उपेश्वर ६०४ आत्मरूप - ब्रह्मा ६०५ पदरूप स्वयम्भू ६०६ पुनः पदं रूप परमाकाशः ६०७ आत्मरूप - विष्णुः ६०८ पदं रूप - परमेष्ठी ६०६ पुनः पदं रूप- महासमुद्रः ६० त्र्यात्मक - द्वितीय उपेश्वर ६.११ श्रात्मरूप - इन्द्रः ६१२ पदरूप - सूर्यः ६.१३ पुनः पदं रूप - सम्वत्सरः ६१४ त्र्यात्मक तृतीय उपेश्वर ६१५ आत्मरूप अग्निः ६१६ पदंरूप - भूपिण्ड: विषयसूची ५६६ ६१७ पुनःपरूप - इलान्दम् १८ व्यात्मक चतुर्थ उपेश्वर 17 ६१६ आत्मरूप सोमः ६२० पदंरूप - चन्द्रमाः " ६२१ पुनः पदंरूप - परि लवः 11 ६२२ त्र्यात्मक - पञ्चम - उपेश्वर 11 ६.२३ हृदय, पिण्ड, महिमा - मण्डजत्रयी १२४ एकवल्शा का विस्तारात्मक समन्वय 11 ६.२५ विस्तारसमन्वय - तालिका १२६ अनन्त - अविज्ञेय - परमेश्वर ६२७ अनन्त - दुर्विज्ञेय – महेश्वर 17 ६२८ श्रावारनिष्ठा का तत्यति अवरोध " ६२६ योगमायावच्छिन्न- ज्ञेय प्रजापति " ६३० योगमाया से आवृत्त प्रजापति ५७० ६३१ विश्वकर्मा - भौवन- प्रजापति ६३२ विश्वेश्वर - सत्यप्रजापति " ६३३ परोजा - प्रतिमाप्रजापति 11 ६३४ पुत्रं मित्रवदाचरेत् " ६३५ विश्वकर्मा का परमधाम 29 ६३६ विश्वकर्मा का मध्यमधाम " ६३७ विश्वकर्मा का अवमधाम " ६२८ ज्ञातव्य कर्त्तव्याधिष्ठात्मा विश्वकर्मा " ६३६ विश्वकर्मा का ऋषि के द्वारा स्तवन 17 ६४० ज्ञेयप्रजापति का विज्ञेय स्वरूप 12 ६४१ यज्ञ, और अधियज्ञ 19 ६४२ यच्छन्तां पञ्च का संस्मरण 21 ६४३ यज्ञ की मौलिक- परिभाषा " 2 ६.४४ श्राहित और आहुति " ६४५ स्वयं यजस्व तन्वं वृधानः 77 ६४६ ' विश्वदानि ' यज्ञ ६४७ ' सर्वहुतं हि जुहोति ' " ६.४८ ' प्रतियज्ञ ' का आविर्भाव II ६४६ पञ्चदशाहयज्ञ का संस्मरण " ६.५० नवाहवश का संस्मरण 22 ८२
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६५१ स्तोमयज्ञत्रयी का संस्मरण ६५२ पार्थिव यज्ञों का संस्मरण ६५३यज्ञ की व्याप्ति ६५४ धारावाहिक - यज्ञक्रम ६५५ स्थितिक्रमानुगत चन्द्रमा ६५६यज्ञानुगत- प्रतिपद्भाव १५७ यज्ञानुगत- अनुचग्भाव ९ ५८ ग्रहोपग्रहमूला प्रतिपदनुचरविद्या ६५६यज्ञ यज्ञ का यजन ६० मूलप्रतिपत् - यज्ञेश्वर ६६१ तूल - सापेक्ष प्रतिपदनुचरभाव १.६२ अविचाली - स्थिर –स्वयम्भूः ६६३ सर्वतोदिग्गतिमान् स्वयम्भूः ६६४ पारमेष्ठ्यभ्रमणानुगत रजोवृत्त ६६५ सौरभ्रमणानुगत अयनवृत्त ६६६ भूपिण्ड भ्रमणानुगत क्रांतिवृत्त शतपथ - प्रथमखण्ड ५७३ ६८५भूः, और पृथिवी " ६८६ भूपिण्ड का संस्मरण ५७४ ६८७ प्रतिष्ठा, और भूमि 22 " " " " " 26 ८८ भूमि और भूः ६८६ अद्भ्यः पृथिवी 17 ६६० मरीचि, और पृथिवी II ६६१ भूपिण्ड के आठ पर्व ६६२ अष्टाक्षर – गायत्राग्नि ६६.३ गायत्री - रूपा पृथिवी ६६४ प्रथनशीला - पृथिवी " ६६५ त्रिःसत्या वै देवाः " ६६६ सकृदिव वै पितरः ६६७ त्रित्वानुगत देवप्राण ६६८ एकत्त्वानुबन्धी- पितरप्राण ६६६. आत्म - ब्रह्म - देव सत्यत्रयी १००० देवसत्य - स्वरूप - संस्मरण ५७५ ५७६ " 3 79 " 73 22 33 27 37 22 ५७७ H ६६७ चान्द्रभ्रमरणानुगत - दक्षवृत्त ६६८पर माकाशमूर्त्ति स्वयम्भू ६६६ महाममुद्रमूर्त्ति - परमेष्टी ६७० सम्वत्सरमूर्त्ति - सूर्य्य ६७१ इलान्दमूत्ति भूपिण्ड ६७२ परिप्लत्रमूर्त्ति - चन्द्रमा ६७३ स्वाक्षपरिभ्रमणात्मक सूर्य्य, और भूपिण्ड ७५ दृष्टयपेक्षया अन्तिम भूपिण्ड ७ पार्थिवविवर्त्त का संस्मरण ६७६ पृथिवीविद्या, और शतपथप्रथमकाण्ड ६ ७७ हविर्यज्ञ, और पृथिवी " ६७ हविर्यज्ञ, और तन्निरूपक प्रथमकाण्ड ६७६ राजा, वाज, ग्रह हविः - सोमचतुष्टयी 17 ६८० पुरोडाशात्मक - पार्थिव - हर्विद्रव्य १ भू, और मही " ६८२ सागरम्बरा, और पृथिवी 17 ६८३ मेदिनी, और घरा, " ६८४ धरित्री, और धरिणी 23 33 " " १००१ देवसत्य का अन्वेषण - प्रयास १००२ गायत्राग्निब्रह्म, और देवसत्य १००३ प्रजापति, और प्राजापत्य ५७५ १००४ उक्थ, और अर्क " " 27 " १००५ भौतिक - विनाशी - कार्य्यकारणभाव १००६ प्राणनिबन्धन - विनाशी कार्य्यकारणभाव १००७ ' एष नित्यो महिमा ब्रह्मणः १००८ अमृतरूप चितिनिधेयाग्नि १००६ प्राणार्काग्नि की अवस्थात्रयी " " " " 3, 29 7: ?? १०१० अग्नि - अक्षर और तद्गर्भित चार अक्षर ५७८ १०११ अक्षरों का ऊर्ध्ववितान १०१२ वितानात्मक विभिन्न स्तोम १०१३ घनाग्निस्तोम, और पृथ्वी " १०१ तरलाग्निस्तोम, और अन्तरिक्ष " ८३ १०१५ विरलाग्निस्तोम, और द्युलोक १०१६ भास्वरसोम, और त्रिणवपृष्ट १०१७ दिक्सोम, और त्रयस्त्रिंश- पृष्ठ १०१८ इन्द्र, और चतुश्चत्वारिंशत्पृष्ट " "