Shatapathabrahman 1 1 — पृष्ठ 251–260
शतपथ ब्राह्मणम् भाष्य - १-१ - मोतीलाल शास्त्री · पृष्ठ 251–260
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१०१६ ब्रह्मा, और अष्टाचत्वारिंशत्पृष्ट १०२० पृथिवी की विश्वरूपता १०२१ महीपृथिवी का स्वरूप - परिचय १,२२ भूः भुवः स्वः - रूपा महा व्याहृतियाँ १०२३ अष्टविध त्रैलोक्य - संस्मरण १०२४ भू: - और रोदसीत्रिलोकी १०२५ भुवः - और क्रन्द्रसीत्रिलोकी १०२६ स्वः - और संगतीत्रिलोकी विषयसूची ५७८. १०५३ तनुसंरक्षक कर्म्म, और तानूनप्त्र 33 १०५४ राष्ट्रीय संगठन की वैज्ञानिक प्रणाली- तानून-त्रेष्टि २०५५ त्रिमूर्ति पार्थिव वैश्वानर विराट् 13 12 १०५६ त्रिमूर्ति - आन्तरिक्ष्य - हिरण्यगर्भ 73 १०५७ त्रिमूर्त्ति - दिव्य - सर्वज्ञ १०५८ अर्थशक्तिप्रधान - विराट - ग्रग्निदेव , f १०५६ क्रियाशक्तिप्रधान - हिरण्यगर्भ - वायुदेव १०६० ज्ञानशक्तिघन - सर्वज्ञ आदित्यदेव ५७६. १०६१ त्र्यात्मक - देवसत्यप्रजापति 24 ५८१ ५८२ १०६२ पार्थिव - देवसत्यमूर्ति - सुपर्णात्म - परिलेखः " १०२७ रोदसी त्रैलोक्य का स्वरूप- समन्वय १०२८ क्रन्दसीत्रैलोक्य का स्वरूप - समन्वय १०२६ संयतीत्रैलोक्य का स्वरूप- समन्वय १०३० तीन - सात - नौ - लोकों का समन्वय १०३१ ६ रजोलोक, और १ परोरजा १०३२ अज - अव्यय, और परजा १०३३ किमपि स्विदेकम् १०३४ त्रैलोक्य- त्रिलोकी- स्वरूप- परिलेख १०३५ यज्ञात्मिका - सर्वात्मिका- पृथिदी १०३६ देवसत्य का स्वरूप - समन्वय २०३७ देवसत्याग्नि का त्रयीव १०३८ पोषा एडात्मक भूपिण्ड १०३६ आग्नेयी पृथिवी १०४० त्रायव्या पृथिवी 67 १०६३ देवसत्यात्मक - महासुपर्ण 11 १०६४ महासुपर्णानुगत अग्निचयन " १०६५ साग्निक - ब्राह्मण 21 १०६६ भारताग्निमूर्ति देवसत्यप्रजापति ५८० १०६७ शाश्वतब्रह्मानुग्रन्धी मनु 97 ५८३ ". 27 १०६८ ब्रह्मविज्ञानाधार पर प्रतिष्ठित यज्ञविज्ञान 37 36 १०६ यज्ञविज्ञानमूलक यज्ञकर्म्म २०७० संस्मरणीय गीतावचन • " १०७१ त्रिः सत्यब्रह्मविवर्त्त ५८१ १०७२ विज्ञेयब्रह्म " " १८७३ शाश्वतधर्म्ममूर्त्ति - अविज्ञेयत्रह्म १०४१ आदित्या पृथिवी " १०४२ सौम्या पृथिवी १०७४ अमृतब्रह्ममूर्त्तिदुर्विज्ञेयब्रह्म 77 १०४३ मेदिनी पृथिवी १०४४ सागराम्बरा पृथिवी १०४५ गायत्री पृथिवी १०४६ त्रिष्टुप्पृथिवी १०४७ जगतीपृथिवी १०४८ स्तौम्यत्रिलोकी का स्वरूप - समन्वय १०४६ अग्निदेव, और गायत्री पृथिवी १०५.० वायुदेव, और त्रिष्टुप् - पृथिवी १०५१ आदित्यदेव, और जगती पृथिवी १०५२ तानून कर्म का संस्मरण 27 · " १०७५ ब्रह्मब्रह्मात्मक- ज्ञेयब्रह्म 27 १०७६ विश्वब्रह्मात्मक - विज्ञेयब्रह्म " १०७७ सुपर्णब्रह्मात्मक- सुविज्ञेयब्रह्म १०७८ आत्महिमाविवर्त्त, और गीता १०७६ मनु की शाश्वतब्रह्मता १०८० अणोरणीयान् मनु ,; १०८१ प्रथमरेखाचित्रात्मक - महेश्वर ( १ ), " १०८२ द्वि ० रेखा ० महेश्वर ( २ ) १०८३ अमृतब्रह्मवित.नात्मकरेखाचित्र ( ३ ) १:८४ सहस्रबल्शात्मक रेखाचित्र ( ४ ) १०८५ आध्यात्मिक पोडशी - रेखाचित्र ( ५ ) 17 ५८४ 27 21 27 77 17 77 37 " 97 " " ८४
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१०८६ षोडशीविवर्त्त- रेखाचित्र ( ६ ) १०८७ समष्ट्यात्मक्क रेखाचित्र ) ( क १०८८ प्रतिमाप्रजापतिरेखाचित्र ( = ) १०८६ यज्ञप्रजापति रेखाचित्र ( ६ ) १०६० महापृथिवी - रेखाचित्र ( ४० ) १०६१ त्रैलोक्यत्रिलोकी - रेखाचित्र ( ११ ) १०६२ महिमापृथिवी - रेखाचित्र ( १२ ) १०६३ देवसत्य- रेखाचित्र ( १३ ) १०६४ सूर्य्यानुगत मनुस्तत्त्व १०६५ इन्द्रात्मक मनुस्तत्त्व १०६६ अग्न्यात्मक मनुस्तत्त्व १०६७ प्रजापतिरूप मनुस्तत्त्व १०६८ इन्द्रात्मक - षोडशी प्रजापति १०६६ इन्द्रप्राणमय सौर मनु ११०० मनुर्म्मय इन्द्रप्रारण् ११०१ प्रशास्ता - मनु ११०२ रुक्ष्माभ मनु ११०३ परपुरुष - मनु ११०४ अणोरणीयान् मनु शतपथ - प्रथमखण्ड ५८४ १ ९ १८ मनसा, और भियः १ ९ १६ पुनन्तु मनवोधिया 77 " " " " " " ५८७ ५८८ इति - मनोस्तात्त्विकस्वरूपदि-ग्दर्शनम् थ - मनुपत्नी- मानवी - स्वरूप-दिग्दर्शनम् ५८५११२० सर्वव्यापक मनु पुरुष " " ११२१ सोममयी शक्ति मनुपत्नी मनावी ११२२ सौम्या श्रद्धा, और मनावी ५८८: 27 " " १ ९ २३ वृषात्मंक मनु, और योषात्मिका मनावी " ११२४ दाम्पत्यमूलक सृष्टिविवर्च 24 ५८६ ११२५ श्रद्धामूलक पञ्चाग्नियज्ञ 21 १ ९ ६ मन की शक्ति मनावी " " 1 ११२७ मनुपत्नी श्रद्धा का संस्मरण 36 37 ११२८ श्वोवसीयसमन, एवं उस का ' कामरेत ' ५८६ " ११२६ मन, और मनु 77 " ११३० मनोमय मनुनिबन्धन कामभाव 97 ११३१ ' श्रद्धादेव ' मनु ११०५ राजर्षिमनु और मनु ११०६ सम्वत्सरचक्र का प्रेरक मनु ११०७ मनु, और मन्वन्तर १ ९ ०८ मुहूर्त्त और मनु ११०६ मन्वन्तर, और मुहूर्त्त १ ९ १० मनु की अव्यक्त व्यक्तरूपता ११११ मन्वन्तर के ३० विवर्त १११२ मुहूर्त्त और लोकम्पृणा इष्टका १११३ मन्वन्तर - कल्प, और मनु १११४ आधिदैविक मनु १११५ आध्यात्मिक मनु ११३२ श्रद्धा का तेजोरूप सूर्य १ ९ ३३ ' तेज एव श्रद्धा ' ११३४ प्रकृति की आधारभूमि पुरुष " ११३५ शक्तिप्रभवस्थान पुरुष " ११३६ पुरुष की दुहिता श्रद्धा ५८७ ११३७. पुरुष की पत्नी श्रद्धा ११३८ विज्ञाननिचन्धन व्यवहारों का समन्वय " 1 " " ११३६ ' श्रद्धा वै सूर्य्यस्य दुहिता ' " " " 28 " - १११६ अव्यय - मन, और मनु 77 १११७ मनु, और बुद्धि 01 ८५ ११४० ' पुत्रासो यत्र पितरो भवन्ति ' ११४१ विज्ञानानुबन्धिनीं सङ्करव्यवस्थाएँ ११४२ संकरव्यवस्था, और श्रौतसन्दर्भ ११४३ मनु की पत्नी, और दुहिता "
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११४४ पारमेष्ठ्य सौम्यतत्त्व ११४५ मनुपत्नी मनावी का स्वरूपोपराम विषयसूची ५८६ ११७४ गोतत्त्व के पञ्च महिमाविवर्त्त ५६. इति - मनावी स्वरूप - दिग्दर्शनम् * -११७५. महर्षि तित्तिरि के द्वारा पञ्चविध गोतत्त्व का स्वरूप- समन्त्रय ५.६१ ( १ ) वाग्गोः का स्वरूपदिग्दर्शनम अथ - मनोः - ऋषभस्वरूदिग्दर्शनम् ११७६ देवपात्र का संस्मरण ११७७ मनःप्राणगर्भित तत्त्व की वागुरूपता ५६१ ५६२ ११४७ गोतत्त्व, और ऋषभ ११४६ लक्षीभूत मनु का ऋत्रभ ५६० ११७८ अकारात्मक मनोविवर्त्त " ११७६ उकारात्मक प्राणविर्त 39 ११८० मकारात्मक वाग्विवर्त्त ११४८ वाग् विराङ्गौ - इड़ा - भोग ११४६ वषट्कार, और वागगौ: ११५० दशर्षिप्राण, और विराड्गौ ११५१ सौरमण्डल, और गौरूप गौ ११५२ पार्थिवमण्डल, और इडा गौ ११५३ नान्द्रमण्डल, और भोगगौ ११५४ वाग्गौ की सर्वव्यापकता ११५५ पुरभावानुगत स्वयम्भू का वाङ् मयत्त्व १ ९ ५६ स्वायम्भुय प्राणमय ब्रह्मा ११५७ अव्ययवाक् की विकासभूमि स्वयम्भू ११५८ दशाक्षरछन्द विराट् ११५६ स्वायम्भुत्री वेदवाक् का स्वरूप- समन्वय १ ९ ६० वाक की आकाशरूपता ११६१ वाङमयाकाश से ' आप ' का आविर्भाव ११६२ तेज:, स्नेह, और अप्तत्त्व 13 ११६३ पिण्डस्त्ररूप - प्रवर्त्तक मातरिश्वा 19 १ ९ ६४ ब्रह्माग्नि, एवं सुब्रह्म सोम " ११६५ दाम्पत्य से विराट् का जन्म ११८१ अकारात्मक विष्णुदेव 77 ११८२ उकारात्मक महोदव " ११ = ३ मकरात्मक ब्रह्मदेव ११८४ त्रिदेवात्मक प्रणवप्रजापति ११८८३ मकार की वागरूपता 31 ११८६ वाक्, और बौक् " ११८७ मन:, प्राण का अञ्चन, और वौक् ११८ = वाक् - शब्द की स्वरूप - निष्पत्ति 27 " ११८६ सहस्रभावापन्न महामण्डल 23 ११६० पुनः पद, और विश्वरूप 71 १ ९ ६१ साहस्री, और महिमा 49 " ११६२ गोरश्मिसमूह, और अहर्गण ११६३ चतुखिंश प्रजापति 93 " ११६४ त्रिवृत्स्तोम, और पञ्चदशस्तोम ११६५ एकविंशस्तोम, और त्रिणवस्तोम " " 29 , ' ११ ११६६ विराट् के दस अक्षर ११६७ श्रण्डस्वरूपनिष्पति ११६३ त्रयस्त्रिंशस्तोम " " १ ९ ६७ सप्तदश प्रजापति ५६१ १ ९ ६८ बाक का पट्कार 23 ११६८ परमेष्ठी का विराट्त्त्व 33 ११६६ षट्कार, और पटकार १२०० इन्द्र का व्याकरण ११६६ वाक् से विराट् की उत्पत्ति , १२०१ ऐन्द्रवायवग्रह ११७० विराट से गो की उत्पत्ति 38 ११७१ गो से इड़ा की उत्पत्ति १२०२ वौषट्, और वाग्गौ " ११७२ इड़ा से भोग की उत्पत्ति ११७३ वाङमय प्राणतत्त्व की गोरूपता " " ८६ १ - * -" " 27 " 23
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शतपथ - प्रथमख एड., ( २ ) - गोर्गौः - स्वरूप - दिग्दर्शनम् १२३२ कामधेनु गौ १२०३ आयं गौः - पृश्निरक्रमीत् १२०४ ज्योति:, गौः, श्रायुः १२०५ सप्त संस्थ ज्योतिष्टोम १२०६ गोष्टोम, आयुष्टोम १२०७ अङ्गिरसामयन, गवामयन १२०८ श्रादित्यानामयन का संस्मरण १२०६ गोतत्त्व का सहस्रधा वितान १२१० पृथिवी, और वसुदेवता १२११ अन्तरिक्ष, और रुद्रदेवत १२१२ द्युलोक, और आदित्यदेवता १२१३ गोसव नामक - पञ्चदशाहयज्ञ १२१४ गौ का पिता परमेष्ठी १२१५ अङ्गिरात्रयी का संस्मरण १२१६ गौ, और आदित्य का भगिनी - भातृत्त्व १२१७ ' कंस्विद् गर्भ ' दध आपः ' ५६३ " " 76 " , I " " १२३३ कामगवी, और कामधेनु २ ५६४ 11 ( ३ ) इड़ागौस्वरूप - दिग्दर्शनम् " १२३४ पार्थिवरस, और इड़ा " ५६४ " " १२३५ रससाहस्री, और इड़ागौ १२३६ इरारस, और इड़ागौ १२३७ भूपिएड का उपादान इरारप १२३८ रश्मि, और गौ १२३६ इरारसमय पार्थिव प्रज्ञानात्मा १२४० इरामयत्त्व का हिरण्मयत्त्व " ५६५ 37 १२४१ हिरण्मय सौर दिव्य तेज 27 १२४२ हिरण्मय विज्ञानात्मा " १२४३ हिरण्मय के सम्बन्ध में महर्षि ऐतरेय " " 29 29 11 १२४४ इरारस, और इला १२१८ वायुमय गौतत्त्व, और रुद्र १२४५ इलारूपधरा पृथिवी " १२४६ मनुपुत्री इड़ा १२१६ रुद्रप्रभव गोमय वायु १२२० रुद्रमाता गौ १२२१ अग्नि की आठ अवस्था, और वसुदेवता ' २२२ वासवी गौ, और इनका वसुकन्यात्त्व " १२४७ इड़ा, और इड़ाप्राशन ५६.४ १२४८ रहस्यपूर्ण एक पौराणिक आख्यान १२४६ सूर्य्य, और सविता " १२५० सविता, और सावित्री १२२३ पारमेष्ठथ सोम का अमृतत्त्व. १२५१ बृहस्पति का स्वरूप - परिचय " " " १२२४ अमृत की नाभि गोतत्त्व १२५२ ब्रह्मणस्पति, और बृहस्पति " 3 " १२५३ सर्वोपरि सविता- उपग्रह 29 १२२५ अदितिरूप गोतत्त्व " १२५४ सविसा - स्वरूप – दिग्दर्शन १२२६ गोतत्त्व, और गौपशु का अभेद १२५५ देवानां प्रसविता सविता 39 ५६६ १२२७ गोदुग्ध की रासायनिकता १२५६ सविता का प्रेरणाबल 29 93 १२२८ महर्षि के द्वारा । गौमाता का यशोगान १२५७ सविता की सावित्री " 21 १२५८ सविता, और सावित्री की व्याप्ति १२२६ पार्थिवी कृष्णा गौ 22 १२५६ महिमा, और रथन्तर " 1 १२३१ दिव्या हिरण्मयी गौ १२३० आन्तरिक्ष्या शुक्ला गौ " १२६० सावित्री का रूठना १२६१ यज्ञकर्म्म में विघ्न " 90 21 ८७
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१२६२ गायत्री का उत्पादन १२६३ गायत्री के द्वारा यज्ञानुष्ठान १२६४ ज्योतिर्म्मयी गायत्री १२६५ छायामयी –गायत्री १२६६ गायत्री, और पितरप्राण १२६७ ( क ) इड़ागौ का स्वरूप - समन्वय ३ विषयसूची ५६६ १२८६ ३६, और ३६००० 31 " 39 12 " १२८७ बार्हत - श्रायुःसूत्र, और विराड्गौ १२८८ विराट् - मूर्त्तिमनु का ऋषभ १२८६ मनु - मानवी ऋषभ स्वरूपोपराम ५ ५६८ आध्यात्मिक - मनुःस्वरूप - दिग्दर्शन १२६० हृदयस्थ अन्तर्यामी ( ४ ) -भोगगौः - स्वरूप दिग्दर्शनम् - १२६१ अन्तर्य्यामी मनु १२६७ ( ख ) देवताओं का अन्न १२६८ भोक्ता, और अन्नाद् १२६६ भोग्य, और अन्न ५६६ * २६२ हृदयस्थ मन, और मनु १२६.३ इन्द्रियों का अप्राप्यकारित्व १२६४ सर्वेन्दिय - प्रज्ञानमन 29 १२७० भोग्यान्न, और भोगगौ १२६५ विज्ञानात्मरूपिणी बुद्धि 99 १२७१ पशुतत्त्व, और ' भोग ' १२६६ महदक्षंररूप आत्मा 99 १२६७ आनन्दवन आत्मदेवता ५६८ " 21 19 " 19 १२७२ पशु की गोरूपता १२७३ भोगतत्त्व की गोरूपता १२७४ सोमप्रधान गोपशु ५६७ १२६८ आत्मानन्द से विज्ञानात्मा का आनन्दमयत्त्व १२६६ विज्ञानानन्द से प्रज्ञानात्मा का आनन्दमयत्त्व १३०० प्रज्ञानात्मा से इन्द्रियों का आनन्दमयत्त्व 19 १२७५ सर्वपशुप्रतीक- गोपशु १२७६ गोतत्त्व के सम्बन्ध में श्रतियाँ १२७७ गो की यज्ञरूपता १२७८ भोगगौ का संस्मरण ४ " १३०१ इन्द्रियों से विषयों का श्रानन्दमयत्त्व 23 १३०२ आत्मानन्द के मात्रानन्दभाव " " १३०३ आत्मानन्द की सर्वव्याप्ति १३०४ श्रानन्द की सहजेच्छा १ ९ १३०५ आनन्दकामना, और आत्मवादी " 31 51 १३०६ दुःख का आत्यन्तिक अभाव १३०७ मन की आनन्दकामना ( ५ ) -विराड्गौ - स्वरूप - दिग्दर्शनम् १३०८ आनन्दार्थ मन का विषयानुधावन १२७६. बिराट्त्तत्त्व का संस्मरण १२८० वायुः सरक्षक विराट्प्राण १२८१ छन्दों के महिमात्मक वितान ५६८ १३०६ अनुरूप आनन्द का अभाव १३१० मन की सहज अशान्ति " 33 १३११ विषयानुगता अल्पमात्रा १२८२ बृहतीछन्द, और उसके. ३६ अक्षर 12 १३१२ मन की अस्थिरता १२८३ नवाक्षरबृहती छन्द " " १३१३ विविध विषयानुधावन १२८४ बृहती, और सूर्य १३१४ मन की चञ्चलता का समन्वय १३१५ दुःख की प्रवृत्ति १२८५ बृहती, और आयु 33 " " 1 33 ५६६ 23 " " 19 ८८
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शतपथ - प्रथमखण्ड १३१६ दुःख - निवृत्युपाय १३१७ आत्मप्रतियोगिक - विषयानुयोगिक मन, और दुःखपरम्परा १३१८ विषयप्रतियोगिक, आत्मानुयोगिक मन, और श्रानन्दपरम्परा १३१६. महर्षि कठ की सम्मति ५६६. १३४८ त्रयीवेदभूर्ति मनु 19 १३४६ ' वेद्यत्रयी ' से अनुप्राणिता वेदत्रयी १३५० वेद्यात्मिका वेदत्रयी का स्वरूप- समन्वय १३५१ भगवान् याज्ञवल्क्य का संस्मरण 29 १३५२ सौराग्निप्रधान शुक्लयजुर्वेद १३५३ ' मनसा - धियः ' का तात्त्विक समन्वय ६०१ 27 27 १३२० वासना, और भावना " १३५४ ' जातवेदः पुनीहि माम् ' ६०२ १३२४ प्राणसूत्र की मनुरूपता १३२१ विज्ञान और प्रज्ञान का सम्परिष्वङ्ग १३२२ विज्ञानात्मा का उपास्य महानात्मा १३२३ आत्मानुबन्धी प्राणसूत्र १३२५ विज्ञान - प्रज्ञान - भोक्ता - त्रयी १३२६ सन्य - रुक्माभ - प्रशासिता मनु " " १३५५ ' पत्रमानः पुनातु माम् ' " " १३५६ सृष्टिसाक्षी हृदयावच्छिन्न मनु १३५७ श्वोवसीयस् - ब्रह्मात्मक मनु " १३५ - मनोब्रह्म, और मनुब्रह्म " १३५६. रोदसीसृष्टि के अधिष्ठाता मनु 22 " १३६० मनु के महिमात्मक मन्वन्तर 27 १३२७ परपुरुष - अग्नि- शाश्वतब्रह्म मनु 33 १३६१ प्राकृतिक - अग्निहोत्रयज्ञ 11 १३२८ मानसी श्रद्धा, और मनु " १३६२ आध्यात्मिक दशविध प्राण 22 १३२६ श्रद्धायुक्त मन का संकल्प 29 १३६३ प्राण समृद्धिरूप आध्यात्मिक - विराड्गौ १३३० श्रद्धात्मक संकल्प की सत्यता १३३१ स्वस्य च प्रियमात्मनः १३३२ सत्या परावाक् १३३३ श्रात्मगुहानुगता परोक्षध्वनि १३३४ मनु की भेषजता १३३५ उद्बोधक श्राध्यात्मिक मनु १३३६ मनु के ३३ यज्ञियदेवता १३३७ घी, और बुद्धि १३३८ मन. और मनु " १३६४ आध्यात्मिक मनु का आध्यात्मिक ऋषभ " 99 १३६५. ज्योतिर्म्मय दिव्य- विराट्प्राण १३६६ प्राणों की विभिन्न जातियाँ ६०० १३६७ त्रैतन, वृत्र, नमुचि - त्रयी 17 १३६८ किलात - श्राकुली - द्वयी 27 " १३६६. मनु के ऋषभ का किलाताकुली -असुरों से आलम्भन १३७० विद्युत्स्वरूपत्रयी 19 १३३६ मनसा, और धियः " १३७१ मन्त्रवाक्, और विद्युत् १३४० मनवः, और घिया १३४१ यजुःश्रु ति का समन्वय १३४२ अथर्वश्रुति का समन्वय १३४३ मनुपुत्री इड़ागौः १३४४ मानवी - इड़ा १३४५ इड़ा - इरा - इला - का समन्वय १३४६ वासरूप इरारस १३४७ मनु की महोक्थरूपता " १३७२ अश्मासोम, और इन्द्रबिद्युत् १३७३ आधिभौतिक मनु का संस्मरण १३७४ श्रासुरप्राण - प्रधान नरराक्षस, एवं मनु गोपशु का उत्पी ± न १३७५ किलाताकुली - असुर १३७६ ' भूयो हि मानुषी वाग्वदति ' ६०१ १३७७ मनुपत्नी का आलम्भन 22 दह १३७८ वस्तुस्थिति का समन्वय प्रयास 77 ६०३ 23 " के ६०४
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१३७६. परिभाषाविलुप्ति, और वेदार्थ - समन्वय की जटिलता १३८० मधुजिह्व कुक्कुट का संस्मरण १३८१ सविता, और मधुप्राण १३८२ मधुप्राण, और कुक्कुट १३८३ मधुजिह्न कुक्कुट ( मुर्गा ) १३८४ ब्राह्ममुहूर्त, और मधुमय सविता १३८५ मधुमय सविताप्राण का सूचक कुक्कुट १३८५ मभुमय, सावित्र ऊ - रस १३८७ हविद्रव्य का मुसल से कण्डन १३८८ शूर्पस्वरूप - व्यवस्था विषयसूची १३६८ तुष- निरसन ६०४ १३६६. वायु के द्वारा हवि का दोषमार्जन १४०० हविद्रव्य का विशोधन " 99 १४०१ हविः का अभिमन्त्रण 29 १४०२ अच्छिद्रपवित्र सवितादेवता " १४०३ सविता के हिरण्मय हाथ " १४०४ सुप्रतिगृहीत विद्रव्य ६०५ १४०५ हविद्रव्य का फलीकरण ६०६ 99 ६०७ 77 13 " 17 १३६२ अनुरूपता, और रूपसमृद्धि. " १४०६ यज्ञ की त्रिवृद्रूपता " १४०७ गार्हपत्य - आहवनीय - दक्षिणाग्नि 22 22 १४०८ ऋक् – साम - यजुः " 1 १३८६ शूर्प में हविः का निर्वाप 22 १४०६ त्रिवृत् - एकविंश- पञ्चदश " १३६० ' संज्ञा सम्बन्ध ' का समन्वय 99 १४१० गायत्री - जगती - त्रिष्टुप् १३६.१ ' रूपसमृद्धि ' का संस्मरण " १४११ प्रातःसवन - माध्यन्दिनसवन - सायंसवन 27 " १४१२ स्तोत्र - शस्त्र - ग्रह " ६०६ १४१३ लोक - वेद - वाक् " " 29 १४१४ इष्टि - पशु- सोम " " १४१५ ज्योति - गौः- आयुः ६०८ १४१६ ' त्रिवृद्धि यज्ञः ' " १८१७ फलीकरण - व्यापार का तूष्णींभाव १४१८ देवताओं के लिये हविद्रव्य का विशोधन " " १४१६. देवेभ्यः शुन्धध्वम १३६.३ असमानधर्म्मा पदार्थों की यज्ञियता १३६४ समानधर्म्मा - पदार्थों की यज्ञियता १३६५ रूपसमृद्धि का समन्वय १३६.६ जड़त्त्व का मूलोच्छेद, और व्यापक चिदात्मा १३६७ भौतक द्रव्यानुगत अहिंसा - भाव का समन्वय ' पुरोडाशसम्पादनाङ्गकर्म्म ' से अनुप्राणित विषयों की स्मारक - सूची-अत्र उपरत ह इति – प्रथमकाण्डे – प्रथमप्रपाठकके प्रथमाध्याये चतुर्थं ब्राह्मणम् प्रथमोऽध्यायश्चात्र - उपरतः उपरता चेयं प्रथमखण्डस्य - स्मारक - विषयसूची १ ६०
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श्रीः शतपथब्राह्मण - हिन्दी - विज्ञानभाष्य- प्रथमकाण्डानुगत ब्राह्मणचतुष्टयात्मक - " प्रथमखण्ड ” की स्मारक - विषयसूची- उपरत १
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श्रीः ' शतपथब्राह्मण - हिन्दी - विज्ञानभाष्य- प्रथमखण्ड ' क “ पारिभाषिक - सूचनाएँ ”
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श्रीः ( दर्शपूर्णमास - यज्ञानुवन्धी ) – ज्ञपात्र – स्वरूप - परिलेखाः-१ -- श्राज्यस्थाली २ -- चरुस्थाली ३ -- पुरोडाशपात्री ४ — प्रणीता ५ -- जुहूःस्रुक् ६ - उपभृत्स्रक् ७ - ध्रुवास्र क ८- पुष्करस्रुक् ६ - अग्निहोत्रहवणी १० - वैकङ्कतस्रवः iii ११ - उलूखल १२ - मुसल १३- शूर्पम् १४- शम्या १५- स्पयः ( क )